अनमोल तोहफा

अपने मम्मी और पापा के बीच मेंमुन्नी को सोने में आनंद आ रहा था। मुन्नी 8 वर्ष की हो चुकी थी। वह तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। रात को उसकी मम्मी उसके पापा से कह रहे थे कि हम दिन रात मेहनत करते हैं, परंतु मैं आज तक आपको एक कमीज तक भी नहीं दिला सकी। आप एक ही कमीज पहन पहन कर काम पर जाते हैं इस बार तो आपको कमीज लेकर ही दूंगी, पर क्या करूं, राशन का खर्च बिजली-पानी बच्चों की फीस, बचता ही नहीं क्या करूं? हर बार सोचती हूं कि आपका जन्मदिन आने वाला है। कोई बात नहीं अभी 6 महीने है। थोड़ा-थोड़ा करकेबचाऊंगी। आप इस बार तो कमीज ले ही लेना। वह बोला मेरी कमीज से बढ़कर तो तुम सब का जो प्यार मुझे मिला है। यही बहुत है। अगर भाग्य ने चाहा तो कमीज भी आ ही जाएगी। मिन्नी यह सब बातें सुन रही थी। उसने तो कभी ध्यान ही नहीं दिया। मम्मी मुझे और चुन्नू को ही सब कुछ दिलाती रहती है। मेरे प्यारे पापा वह तो कुछ भी नहीं कहते। इस बार मैं भी पापा को उनके जन्मदिन पर उपहार दूंगी।

मैडम कल बता रही थी कि हम बच्चे भी अपने मम्मी पापा को उनके जन्मदिन पर उपहार दे सकते हैं। मगर कैसे क्या करूं? इस बार मैं उन्हें चौंका दूंगी। मुझे यह बात किसी से भी नहीं करनी है। इस बात को छुपा कर ही रखूंगी। समय आने पर सबको चौंका दूंगी। वह हर रोज स्कूल जाती सोचती क्या करूं?

ंवह स्कूल से आते हुए एक कपड़े की दुकान के पास जाकर रुक गई। वह दुकान उस बच्ची के घर के पास ही थी। अंदर चली गई। अंकल आप मेरे पापा के नाप की कमीज दिखाइए। इतनी छोटी सी बच्ची को देखकर बोला बेटी क्या बात है? ठीक तो है। तुम तो इस तरह कमीज मांग रही हो जैसे कोई बड़ा ग्राहक सामान खरीदने आया हो। इतनी छोटी बच्ची।यहां तो बहुत लंबी, छोटी, बड़ी, कमीजें है। तुम्हें किस नाप की कमीज चाहिए। वह बोली अंकल मेरे पापा के नाप की। दुकानदार बोला बेटा कल अपनी मम्मी को साथ में ले कर आना। वह बोली प्लीज अंकल मुझे देखना है कि कमीज कितने रुपए की आती है? वह उस बच्ची की बात सुनकर हैरान था। इतनी छोटी सी बच्ची कमीज खरीदना चाहती है। वह कितने की है। वह बोला तुम अभी छोटी सी बच्ची हो। तुम को तो यूं ही कोई भी बेवकूफ बना देगा। तुम्हे रुपयों की जानकारी भी है या नहीं। वह बोली मुझे गणित बहुत ही अच्छा लगता है। मुझे पता है दुकानदार बोला। अच्छा पहले मैं तुम्हारी परीक्षा लेता हूं। तब तुम को कमीज का वास्तविक दाम बताऊंगा। पूछो अंकल जल्दी। जल्दी स्कूल से छुट्टी हो गई है।। मुझे घर पहुंचना है। देर से घर पहुंचूंगी तो मम्मी नाराज होगी। उसने अपने गल्ले में से ₹200 का 100 का 500 रुपये के नोट निकाले । बोला अच्छा यह बताओ यह सारे कितने रुपए हुए? अगर आप को मैंने बता दिया तो आप मुझे कमीज का दाम बता देंगे। हां मैं अवश्य बताऊंगा। उसने अपनी उंगली पर पहले 200 फिर 100, 500 सो रुपए यह तो बहुत ही आसान है। वह बोली आठ सौ रुपये होंगे।

दुकानदार उसकी भोली भाली बातें सुनकर मुस्कुरा कर बोला। बेटी तुम अपने टैस्ट में पास हो गई हो। कल से दुकान में काम पर आ जाना। मिन्नी बोली अंकल आप मेरे पापा को मत बताना। वह मुझे यहां नहीं भेजेंगे। वह बोला बेटी मैं कुछ नहीं बताऊंगा। दुकानदार बोला बेटा अभी तुम्हारे पापा के जन्मदिन के छः महीने है। मैं तुम्हें एक घंटे के ₹60 दूंगा। छः महीने के ₹360 हो जाएंगे। वह खुश हो कर बोली आप बहुत अच्छे हैं। मैं भी यह जिम्मेवारी अच्छे ढंग से निभाऊंगी। आपको मुझ पर विश्वास करना होगा। दुकानदार बोला बेटी मैंने तुम्हारी परीक्षा ले ली है। तुम अपनी परीक्षा में खरी उतरी हो। तुम निश्चिंत होकर यहां पर काम पर आ सकती हो। तुम जैसी बेटी सबको दे जो अपने मम्मी पापा के बारे में इतनी अच्छी सोच रखती है।

मेरी बेटी छोटी है। उसे भी तुम थोड़ा थोड़ा पढ़ा दिया करना। मुझे एक घंटा बाहर काम की देख रेख के लिए जाना पड़ता है। दुकान पर किसे बिठाऊं? मेरे भी एक ही बेटी है। वह तो बहुत ही छोटी है। मेरी पत्नी बीमार है। उसकी देखरेख के लिए मुझे अस्पताल जाना पड़ता है। और काम भी देखना पड़ता है। उस दिन से मै विक्रम के यहां पर काम करने लगी। घर से भागकर आती। कभी उसकी मां पूछती बेटा देर क्यों लगाई? वह कहती मां हमारे गणित के एक नए अध्यापक आए हैं। वह हमें गणित के सवाल छुट्टी के बाद करवाते हैं। उसकी मां उसकी बातों में आ जाती।।

काम करते-करते मुन्नी को चार महीने हो गए। वह दुकान में काम करते-करते विक्रम अंकल की बेटी नीतू को गिनती भी सिखाती। एक अध्यापिका की तरह और दुकान में 1 घंटे में जो कोई भी आता उसको भी सामान देती थी। विक्रम अंकल ने उसे सब वस्तु की कीमत की लिस्ट बनाकर दे दी थी। इस वस्तु की इतनी कीमत है। वह बड़ी ईमानदारी से सब लोगों को सामान देती थी। वहां पर उसे कोई नहीं पहचानता था। उसके मम्मी पापा को उस शहर में आए एक साल हो गया था। एक दिन बड़े बड़े लंबे दो अजनबी उस दुकान पर आए उन्होंने जल्दी से नीतू की तरफ बंदूक तानकर कहा हाथ ऊपर करो। मिन्नी बोलीअंकल इधर पूछो। इस बेचारी को क्या पता होगा? यह तो सामान लेने आई है। दुकानदार ने मिन्नीकी तरफ बंदूक तान कर पूछा। उसने नीतू को कहा जाओ तुम्हारे पापा तुम्हारा इंतजार कर रहें हैं। छोटी सी नीतू भाग गई।

उन दोनों ने मिनी की तरफ बंदूक तान कर कहा तुम विक्रम जी की बेटी हो। वह बोली तुम्हें कैसे पता? वह बोले जब तुम यहां दुकान पर हो तो तुम ही उनकी बेटी होगी। जल्दी से सारा माल हवाले हमारे हवाले कर दो वर्ना हम तुझ से जबरदस्ती चाबी छीन कर यहां से सारा माल लेकर भाग जाएंगे। हम एक महीने से देख रहे हैं तुम इस दुकान में काम करती हो। वह बोली अंकल चुप हो जाओ किसी ने सुन लिया तो मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी। एक बहुत बड़ा रहस्य है। आपको मेरी बातों पर विश्वास करना पड़ेगा। मैं मरने से नहीं डरती। आप मुझे गोली मार सकते हैं। इतनी छोटी सी बच्ची की बातें सुनकर हैरान हो गये। एक छोटी सी लड़की उन दोनों का सामना कर रही है। इस लड़की में कुछ बात तो अवश्य है हम तुझे एक मौका देते हैं। तुम्हारी बात कहने के लिए एक मौका देतें हैं। बोलो क्या कहना चाहती हो?

वह बोली अंकल आप में और मुझ में बहुत अंतर है । वह बोले हम समझे नहीं। मिन्नी बोली मैं तो यहां मेहनत के दम पर रुपए हासिल करना चाहती हूं और आप चोरी करके लूटकर के रुपए कमाना चाहते हैं। हम दोनों का मकसद तो एक ही है। अंकल मैं इनकी बेटी नहीं हूं। वह बोले तुम हमें धोखा देना चाहती हो। वह बोली अगर मैं आपको धोखा देना चाहती तो मैं उस लड़की को नहीं बचाती। वह लड़की इस विक्रम अंकल की बेटी थी। मैं उसे बचाना चाहती थी क्योंकि मैंने अंकल को वादा किया था कि एक घंटे में आपकी दुकान में काम किया करूंगी और एक घंटे में आपकी दुकान की हिफाजत करना मेरा धर्म है। इतनी छोटी सी बच्ची की बात में उन दोनों को सच्चाई नजर आई। वहदोनों बोले तुम पर हम किसी भी कीमत पर विश्वास नहीं कर सकते। हमें जल्दी से गले की चाबी दे दो।

मिन्नी बोली मेरी मां मेरा इंतजार कर रही होगी। मेरी बेटी स्कूल से आती ही होगी। वह बोले कितना झूठ बोलोगी? मिन्नी बोली अंकल एक बार तो मेरा विश्वास करो। परसों मेरे पापा का जन्मदिन है। मैं अपने पापा को जन्मदिन का उपहार देना चाहती हूं। आज आप मुझे छोड़ दो अगर आप मुझे मार देंगे तो मेरे पापा का उपहार तो व्यर्थ हो जाएगा। मैं अपने पापा को अपने हाथ से कमीज उपहार में देना चाहती हूं। मुझे काम करते-करते यहां पर छः महीने होने वाले हैं। यह ₹350 की है। केवल तीन दिन बाकी है। कृपा करके आज तो आप मुझे छोड़ दो। परसों मेरे घर में आप दोनों आ जाना। तब तुम्हें विश्वास आ जाएगा कि मैं झूठ नहीं बोल रही हूं।

मेरी मां न जाने मेरे पापा के लिए कब से रुपए इकट्ठा करने की सोच रही थी। जब मैं उन दोनों के बीच सोई हुई थी तब मैंने उन दोनों की बातें सुन ली थी। कृपया करके मुझे तीनदिन की मोहलत दे दो। जिस दिन मेरे पापा का जन्म दिन होगा उस दिन मैं आपको विक्रम अंकल की दुकान की चाबी भी दे दूंगी। आप मुझे अपने आप अपनी बंदूक से समाप्त कर देना।

अंकल मैं आपसे झूठा वादा नहीं करती। मैं सच कह रही हूं। उन दोनों अजनबी अंकल ने उसे छोड़ दिया। वह बोले अगर तुम्हारी बात सच होगी तब तो ठीक है वर्ना हम तुम्हें और तुम्हारे घर में सब को मार देंगे। वह बोली ठीक है। जब दोनों अजनबी अंकल चले गए तो उस ने राहत की सांस ली। नीचे जाकर देखा नीतू बेहोश पड़ी थी।

विक्रम अंकल पहुंच गए थे। उन्होंने नीतू को बेहोश देखकर मिन्नी से बोले कि क्या हुआ? बेटा सब कुछ ठीक तो है। वह बोली सब कुछ ठीक नहीं है। आज मैंने बड़ी मुश्किल से आपकी बेटी और अपने आप को बड़े बड़े गुंडों से बचाया। वह नीतू की तरफ बंदूक तान कर कहा जल्दी से गले की चाबी हमें दे दो। मैंने उन गुंडों को बेवकूफ बनाया। मैंने कहा वह उनकी बेटी नहीं है। वह सामान लेने आई है फिर उन्होंने मेरी और बंदूक तान कर कहा कि तुम उनकी बेटी हो। मैंने कहा नहीं मैं तो यहां पर काम करती हूं। वह मुझे माने ही वाले थे मैंने उन्हें कहा कि मुझे छोड़ दो। आप मुझे मत मारो क्योंकि मैं यहां पर अपने पापा के जन्मदिन के लिए उपहार खरीदना चाहती हूं। मेरे पापा के जन्मदिन की केवल तीन दिन शेष है। मैंने उन्हें उपहार अपने हाथों से देना चाहती हूं। उसके बाद तुम मुझे मार देना। यह सुनकर उस गुंडे की आंखों में भी आंसू आ गए। उसने मुझे छोड़ दिया। बोले हम परसों तुम्हारे घर आएंगे। मैंने उन्हें अपने घर का पता दे दिया। और कहा कि उस दिन वह तुम्हें गले की चाबी भी दे देगी।

विक्रम अंकल उस बच्चे को हैरानी से देख रहे थे। मुन्नी नें उसकी बेटी को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी। दुकान का सारा सामान सुरक्षित था। वह मिन्नी को प्यार करते हुए बोला भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे। वह बोली अंकल मेरे जन्मदिन में केवल 3 दिन शेष है। विक्रम अंकल को मिन्नी ने कहा अंकल आप उन दोनों को पुलिस में मत डालना। हो सकता है वह किसी मजबूरी के कारण चोरी करने आए हो। कोई भी चोरी नहीं किया करता। हमारी मैडम कहती है कि जब किसी इंसान की कोई इच्छा पूरी नहीं होती, उसे वह नहीं मिलती, या बहुत ही जरूरी कारण हो तब ही वह चोरी करता है। आप बिना कारण जाने उन्हें नहीं पकड़ेंगे। पुलिस के सामने मिन्नी ने विक्रम अंकल के साथ चलकर सारी कथा सुनाई। पुलिस वाले उस छोटी सी बच्ची की इतनी होशियारी वाली बातें सुनकर बोले तुम उम्र से ज्यादा बुद्धिमान हो। वह बोली पुलिस अंकल मैं अपने तरीके से उन दोनों अंकल को समझाऊंगी कि चोरी करना बुरी बात है। अगर वह मान जाए तो ठीक है वर्नाआप उन दोनों को गिरफ्तार कर लेना।

उसने पुलिस अंकल से वादा किया कि आप उन दोनों को नहीं मारोगे। पुलिस वाले बोले बेटा ठीक है। हम उन्हें नहीं मारेंगे। पुलिस वाले मान गए।

आज वह दिन भी आ गया था जिस दिन का वह बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी। उसने अपने घर के बाहर गुब्बारे फुला फुला कर अपने घर के आंगन के बाहर गुब्बारे लगा दिए। उसने पांच बजे दोनों अंकल को बुलाया था। जैसे ही पांच बजे वह दोनों अंकल आए उसनें उन दोनों अंकल को बुलाया। पुलिस स्पेक्टर भी सामान्य वेशभूषा में वहां पर आ गए थे। नीतू के पापा भी वहां पहुंच गए थे। जल्दी से जैसे ही मिनी के पापा आए मिनी ने पापा को कहा पापा जन्म दिन मुबारक। उसने अपने हाथों से अपने पापा को कमीज पहनाई और मिठाई खिलाई। उसके पापा बोले बेटा यह कमीज तू चोरी करके लाई है। वह बोली पापा मैंने चोरी नहीं की। उसने अपने मम्मी पापा को सारी बात बताई कि कैसे उसने विक्रम अंकल की दुकान पर काम करके कमीज आपके लिए खरीदी है। उसके पापा उसकी इस प्रकार मेहनत करता देखकर बहुत खुश हुए।

उसने अपने मम्मी पापा को कहा कि पापा मम्मी आज आप दोनों मुझे ढेर सारा प्यार करो। मैं आप दोनों को खुश देखना चाहती हूं। मेरे जाने के बाद आप दोनों कभी उदास मत होना। उसके पापा बोले बेटा तू कहां जाने वाली है। वह बोली पापा मैं सदा के लिए कहीं जाना चाहती हूं। उसकी मां बोली ऐसी बातें क्यों करती है? उन दोनों अजनबी अंकल ने उसे बुलाया बेटी तुम तो बहुत ही अच्छी हो। वह बोली अंकल आप क्या खाएंगे? आज आप यहां खाना खाकर ही जाएंगे।

वह दोनों बोले नहीं, जल्दी से हमें गल्ले की चाबी दे दो। वह बोली अगर मैं तुम्हें चाभी नहीं दूं तो तुम क्या करोगे।? वह बोले हम तुम्हें मार देंगे। वह बोली पहले आप दोनों को खाना खिलाकर ही मैं भेजूंगी तब मैं आप को गल्ले की चाबी दूंगी। अंकल क्या मैं आप दोनों के कान खींच सकती हूं? मूछों अंकल रोने लगा मेरी बेटी भी इस तरह मेरे कान पकड़ती थी। माधो अंकल आप दोनों को आज एक बात कहती हूं। आप दोनों बहुत अच्छे हो। आप दोनों चोरी क्यों करते हो? आप को क्याचोरी करना बुरा नहीं लगता? आपकी भी अगर कोई बेटी होती वह आप को चोरी करते देखती तो वह आप पर गुस्सा होती।माधव और मूछों अंकल बोले बेटी हमें बातों में मत बहलाओ। हम सचमुच में ही तुम को बंदूक से मार देंगे। उसने बंदूक मेज के पास रख दी। मुन्नी नेंे उन्हें बातों में लगा लिया।।
पुलिस इंस्पेक्टर ने गोलियों से भरी बंदूक उठा ली और उसकी जगह नकली बंदूक रख दी और उसमें पिचकारी वाले रंग भर दिए ताकि जब बंदूक चले तो खून की धारा बह निकले। मुन्नी बोली अंकल मैं आप को गल्ले की चाबी यां नहीं दूंगी। माधो अंकल बोले बेटी हमें जल्दी से गल्ले की चाबी दे दो। वह बोली मैं मर जाना पसंद करूंगी। आज मैंने अपने पापा को जन्मदिन का तोहफा दे दिया है। माधो और मूछों अंकल अब आप मुझे मार सकते हैं। माधो और मूछो नें बंदूक चला दी। खून का फव्वारा फूट पड़ा। मुन्नी बेहोश होकर नीचे गिर गई। सबके सब चिल्लाने लगे। मुन्नी के ममी पापा दौड़े दौड़े आए। हमारी बेटी को क्या हो गया? हमारी बेटी को क्या हो गया?

माधव और मूछों अंकल दोनों उस बच्ची को मार कर एक दूसरे को देख कर बोले यह हमने क्या कर डाला? बेटा उठो। बेटा उठो। जल्दी उठो। हमें माफ कर दो। हमें माफ कर दो। हमारे हाथ टूट क्यों नहीं गए? वह फूट फूट कर रोनें ल हमने इतनी प्यारी बच्ची को मार दिया। हम तुम्हें मारना नहीं चाहते थे। यह हमने क्या कर दिया? चोरी करने के चक्कर में इस प्यारी सी बच्ची को मार दिया। हमने उसको कितना समझाया? अगर हमारी मजबूरी नहीं होती हम उसे कभी नहीं मारते। उस बच्ची में हमें अपनी बच्ची नजर आती थी।

पुलिस इन्सपैक्टर यह देखकर दंग रह गया। वह दोनों गुन्डे बोले जल्दी चलो हम भी जी कर क्या करेंगे? लेकिन चुन्नू को कौन बचाएगा? उसे बचाने के लिए ₹50000 कहां से आएंगे? अगर आज हमें ₹50000 नहीं मिले तो हम अपने बच्चे को नहीं बचा पाएंगे।।

पुलिस ने उन दोनों की बातें सुन ली थी पुलिस इन्सपैक्टर सामने आकर बोले इस मुन्नी ने हमें सच ही कहा था कि तुम दोनों को जेल में मत भिजवाना। हमने तुम दोनों को बचा लिया है। मिन्नी को भी कुछ नहीं हुआ है। उसने हमें तुम्हारी सारी जानकारी हमें दे दी थी और उसने हमें कहा था कि इन दोनों अंकल को नहीं मारना। जब तुमने बंदूक चलाने के लिए मेज पर रखी थी तो हमने नकली बंदूक उस मेज पर रख दी थी। हम पुलिस वाले सामान्य वर्दी में यहां पहरा दे रहे थे। तुमने नकली बंदूक से गोली मिन्नी पर चलाई थी। वह मरी नहीं है। वह बेहोश हो गई है। उसे पता नहीं था कि इसमें नकली गोलियां हैं। वह सचमुच में ही एक बहादुर बेटी है। अपनी जान देकर तुम दोनों को बचाना चाहती थी। वह बेहोश हो गई है।

मिन्नी के मम्मी पापा ने मिनी पर पानी के छींटे मारे। वह उठ कर बैठ गई। अपने सामने दोनों अंकल को जिंदा देखकर खुश होकर बोली। अंकलआप चोरी करना छोड़ दो। मूछों अंकल और माधव अंकल उस मिनी को जिंदा देखकर बहुत खुश होकर बोले। बेटा हम कभी भी चोरी नहीं करेंगे। पुलिस वाले बोले मिनी ने विक्रम अंकल को कहकर आपके बेटे के ईलाज के लिए ₹50000 दिलवा दिए हैं। आप थोड़े-थोड़े करके इनके रुपए चुका देना।

वह दोनों रुपए पाकर बहुत खुश हुए। वह बोले इतनी छोटी बच्ची ने हमें सच्चाई की राह दिखाई है। हम अपने बेटे के इलाज के बाद उस दुकानदार की पाई-पाई चुका देंगे। ऐसी बेटी सबको दे।

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