अनोखा उपहार या पानी का महत्व

निक्कू आज बेहद खुश था। क्योंकि आज 23 मार्च को उसका जन्मदिन आने वाला था। वह अपने जन्मदिन के उपहार का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा था। आज उसके मम्मी पापा ने देखा उनका बेटा खुश नजर नहीं आ रहा था इससे पहले कि वह उनसे कुछ कहे  वही बोल पड़े बेटा क्या बात है? तुम्हारा कल जन्मदिन आने वाला है। तुम खुश नजर नहीं दिखाई दे रहे हो। क्या कारण हैं? वह बोला मां पापा कुछ नहीं। आज शाम को बताना इस बार तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हें क्या उपहार चाहिए? वह कुछ नहीं बोला शाम को उसका बड़ा भाई और दीदी उन्होंने भी निक्कू से वही बात कही पापा-मम्मी  इस बार निक्कू खुश नजर नहीं आ रहा है। क्या कारण हो सकता है? उसकी मां बोली आज शाम जब हम सारा परिवार इकट्ठे बैठकर बातें करेंगे तब उसके उपहार के बारे में उससे पूछेंगे। जन्मदिन आने में एक दिन शेष था। शाम के समय सारा परिवार बैठा बातें कर रहा था उसकी मम्मी बोली शायद मुझसे नाराज है आज जब मैं नदी पर कपड़े धोने गई थी। वह पानी में पत्थर मार रहा था। पानी को गंदा कर रहा था। कभी मिट्टी डाल रहा था। कभी  मैले धोए हुए कपड़ों को पानी में डाल रहा था। मुझे गुस्सा आ गया मैंने उसे एक थप्पड़ लगा दिया। शायद इसलिए नाराज है। सभी ने प्यार से उसे अपने पास बुलाया कहा तुम घर में सबसे छोटे हो तुम्हें इस बार जन्मदिन का क्या उपहार चाहिए? वह बोला आज आपसे मांगना चाहता हूं पर मेरे लिए वह उपहार सबसे मूल्यवान होगा क्योंकि जो मैं कहना चाहता हूं ध्यान से सुनो मां मैं आपकी बातों को सारे परिवार की बातों को ध्यान से सुनता हूं। जब आपको मैं अपनी बात कहना चाहता हूं तब आप मेरी बात ध्यान से नंहींसुनती। इसलिए मैंने फैसला कर लिया है कि मैं आपको कुछ नहीं कहूंगा। और ना ही जन्मदिन का उपहार मांगूंगा। सभी ने छोटे से बच्चे को  पुचकारते करते हुए कहा हमारे बहादुर शेर मान भी जाओ। हम तुम्हारी बात को ध्यान से सुनेंगे वह बोला आप सुनो मैं आज आप सभी से एक अनोखा उपहार चाहता हूं। मेरे लिए वह मेरे जन्म दिन का बहुत ही मूल्यवान उपहार होगा। घर के सभी सदस्य कहने लगे हम परिवार के सभी सदस्य मिलकर शपथ लेते हैं तुम्हारी इच्छा को अवश्य पूरी करेंगे। वह बोला सब सोच विचार करके उत्तर देना घर के सदस्यों सेे बोला मां जब आप मुझे कह रहे थे कि पानी में कोई गंदी वस्तुएं नहीं डालनी चाहिए और ना ही कूड़ा कर्कट उसी समय मुझे आपको बताना चाहिए था। मेरी मैडम ने मुझे बताया कि पानी की एक एक बूंद हमारे लिए बहुत ही कीमती होती है। हर एक मनुष्य को इसका सदुपयोग भली भांति करना चाहिए। मां_पापा तो हर रोज नहाने के लिए जाते हैं तो एक घंटा तक गिजर को यूं_ही चला रहने देते हैं। नल्के को दीदी खुला ही रखती है जब तक वह आती है तब तक न जानें कितना पानी बह कर नीचे चला गया होता है। लैट्रिन में डालने के लिए कभी भी पानी नहीं होता। आज सब किसी को कुछ नहीं कहते।  मैं आपको बार-बार पत्थर डालकर एहसास कराना चाहता था कि पानी गंदा नहीं करना चाहिए। बचे हुए पानी को हमें घर में लगी फुलवारीयों में डाल देना चाहिए आपको तो गुस्सा मुझ पर आ गया पर यही बात आप ने पापा को दीदी को और भैया को भी कही होती। मेरी अध्यापिका ने कहा बेटा हमें पानी की एक एक बूंद के मूल्य को समझना है। इसका सदुपयोग सही तरीके से करना आना चाहिए। यह सीखना है अगर हमारे नागरिकों में से 70% भी यह बात समझ ले तो हमें पानी के लिए यूं दर दर नहीं भटकना पड़ेगा आप मेरे जन्मदिन पर सभी प्राण ले कि पानी को’ बिजली को इन सभी का उपयोग सही ढंग से करेंगे। आने वाली सभी पीढीयों को पहले से ही इसके बारें में अवगत करवाएंगे। एक बच्चा जब घर घर जा कर यह बात अपनें परिवार वालों को अपनें दोस्तों को जारी कर यह ंदेश देगा शायद आधे से अधिक लोग हमारे कही हुई सीख का अनुकरण करेंगें।

 

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