(आओ एक ऐसा घर बनाएं) कविता

आओ एक ऐसा घर बनाए।

जिसमें सब मिलजुलकर सपनों से भी सुंदर संसार बसाएं।।

ना हो किसी से लड़ाई झगड़ा।

हर कोई प्यार से निपटाए आपसी मसला।।

अपने घर में सभी परिवार जन मिलजुल कर सभी त्यौहार मिलकर मनाएं।

एक दूसरे की खुशी और हर दुःख में शामिल होकर एक हो जाए।।

अपनी सोच को एक जैसा बनाएं।

बड़ों की खुशी में ही अपनी खुशी जताएं।।

अपने माता पिता के कहे अनुसार चलकर दिखाएं।

उनके साथ कदम से कदम मिलाकर उनके अरमानों को पंख लगाएं।।

सपनों से भी सुंदर अपना घर संसार बनाएं।

आओ एक ऐसा  सुन्दर घर बनाएं।।

अपने घर में अगर हो किसी से कहासुनी।

तो प्यार से उसे मना कर,  करे ना  कोई भी अपनी मनमानी।।

अपने घर में किसी का भी सम्मान करने से ना कतराएं।

हर काम में सबका सहयोग देकर अपनी छोटों को भी यह बात समझाएं।।

हम एक दूसरे की ताकत बन जाएं।

सब मिल जुल कर  हर समस्या को सुलझाएं।।

 

हर मुश्किल को मिल बांटकर करने से हर समस्या हल हो जाएगी।

सभी घरवालों की बिगड़ी किस्मत भी संवर जाएगी।।

बाहर वाले भी आकर तुम्हारी बडाई ही करेंगे। तुम्हें खुश होकर आशीष देखकर तुम्हें खुशी से नवाजेंगे।।

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