गुमराह

नूपुर और रिमझिम के माता पिता का तबादला एक छोटे से कस्बे में हुआ था। दोनों ही बहुत ही नटखट थीं। अपने माता पिता की नाक में दम कर रखती थी। इसका कारण था दादी का भरपूर स्नेह। दादी के भरपूर स्नेह देने के कारण नूपुर और रिमझिम घर में किसी को भी कुछ नहीं समझती थी। दोनों ही हर दिन कोई-न-कोई शरारत करती। जब तक उनकी दादी उन के पास रहती थी वह कभी भी किसी बात को गम्भीरता से नहीं  लेती थी। आज उनकी दादी गांव जा रहीं थी। दोनों दादी को जाते देखती रहती। दादी उनके साथ बच्चा बन कर खेलती। उन के साथ खुब मौज मस्ती करती। आज दादी के जाने का उन्हें बुरा लगता रहा था। अब कौन उन्हेंं मनाएगा? कौन उन के साथ खेलेगा? काफी दिनों तक तो वे शून्य में तलाश करती रही। नटखट बच्चीयों नें

एक दम चुप्पी साध ली। वे दोनों अपनें माता पिता से कटी कटी सी रहने लगी। वह अपनें ममी पापा से खुल कर बात भी नहीं करती थी।

एक दिन स्कूल में जब दोनों चुपचाप खडी थी तो उनकी दोस्ती एक लडके रवि से हुई। वह उन दोनों को उदास देख कर बोला। तुम दोनों उदास क्यों हो? वह बोली तुम जान कर क्या करोगे। वह दोनों बोली हम अपनी दादी को बहुत ही याद कर रहें हैं। वह जब हम दोनों को बहुत ही प्यार करती थीं। हमारे साथ खुब मस्ती करती थी। हम इतना खुल कर अपनी मां से भी कोई बात नहीं कहते थे जितना अपनी दादी से। उनके बिना घर काट खानें को दौड़ताहै। रवि बोला इसके लिए तो आजकल मोबाईल है न। तुम उन से हर कभी बात कर सकती हो। वह बोला। हम मोबाइल कहां से ले कर कर आएंगी। हमारे पास तो इतनें अधिक रुपये भी नहीं है। रवि बोला मेरे पास है मेरे मोबाईल से फोन करना। वह बोली मेरी दादी के पास कोई मोबाईल नहीं है। पहले हमें अच्छे ढंग से मोबाईल चलाना आना चाहिए तभी हम अपनी दादी को भी फोन दिलवा कर देंगे और उन से हर रोज बातें किया करेंगें। वह धीरे धीरे मोबाईल चलाना सिख रही थी। मोबाईल चलाते चलाते वह दोनों मोबाईल में इतना तल्लीन हो जाती उनकी ममी पापा समझते हमारी बेटी पढाई कर रही है। एक दिन तो मैडम को  पता चल ही गया जब दोनों के परीक्षा में कम नम्बर आए। मैडम  भी उन दोनों  पर नजर रखनें लगी। एक दिन तो मैडम ने नुपूर से मोबाईल फोन छूडा लिया इस शर्त पर वापिस किया कि वह घर से अपनें माता पिता को बुला  कर लाएगी। नुपूर और रिमझिम नें घर में किसी को कुछ नहीं बताया। वह घर में बता देती तो हंगामा खड़ा हो जाता।

स्कूल के अध्यापक भी  शिकायतें लेकर उनके माता पिता के पास पहुंचे। वह घर पर नहीं मिले  तब नूपुर और रिमझिम की कक्षा अध्यापिका ने घर फोन  लगाया। रिमझिम ने आवाज बदलकर कहा  घर की  मालकिन घर पर नहीं है। बे दोनों नहीं चाहती थी कि मैडम उन की शिकायत उनकी मां से करें, इसलिए दोनों ने एक उपाय सोचा। वे दोनों डर के मारे कांप  रही थी। मां को पता नहीं चलना चाहिए मैडम ने फिर से  कहा मालकिन से कहना कि इस बार  तो  उन को स्कूल में आना ही होगा। इनकी बेटियाँ सारा दिन कुछ भी पढाई नहीं करती हैं।

 

नुपूर नें जल्दी  से कहा मैं कह दूंगी।  उस वक्त तो उस ने कह दिया। उसनें अपनी बहन को कहा  सोच ले कि अब क्या होगा? मैडम ने उसे सारा दिन  बेंच पर खड़ा रखा था। उसने होमवर्क नहीं किया था। उसका मोबाइल भी उस से छीन लिया था। उन्हे लिख कर  हिदायत दी थी कि आगे से बच्चों को स्कूल में मोबाइल मत  दिया करें। नूपुर  को कुछ दिन तो अपने आपको  स्कूल में मोबाइल से दूर रखा।  घर में आकर चुपके चुपके से अपने सहेलियों के साथ रात रात भर बातें करना और यू ट्यूब पर कभी गाने डाउनलोड करना, कभी देर देर रात तक मूवी देखना। उसकी ममी सोचती कि, मेरी बेटियाँ इतनी अच्छी है जरा भी टेलिविजन नहीं देखती हैं। उन दोनों की मम्मी एक दिन अपनी सहेली   नीतू के घर पे  उस से मिलन गई। वहा पर नीतू  रो रही थी। उसको रोता देखकर गौरी से रहा नहीं गया  वह बोली इस तरह क्यों रो रही हो? तुम्हें क्या हो गया? उसको इस प्रकार रोते देखकर वह और भी जोर जोर से रोने लगी। गौरी सोचने  लगी कि शायद उस के किसी रिश्तेदार की मृत्यु हो गई होगी। उसके घर में दो तीन औरतें  इकट्ठा हो कर  उसे सांन्तवना दे रही थी। वे औरतें तो चली गई लेकिन नीतू से पूछने का साहस वह नहीं कर सकी। नीतू उस को घर के अंदर लेकर गई। घर में पहुंचने पर तो गौरी को ऐसा  कुछ नहीं लगा कि कि उस से पूछा जा सके कि क्या हुआ है? गोरी के पति अपनी दोस्तों के संग ताश खेल रहे थे। अपने मन में सोचने लगी अच्छा  ही हुआ मैंने उनसे कुछ नहीं पूछा फिर किसी दिन पूछ लूंगी। थोड़ी देर बाद  साहस बटोर कर पूछ ही डाला तुम इतनी उदास क्यों हो? वह बोली बहन क्या बताऊं? आजकल के बच्चों को हम समझ ही नहीं सकते। मैंने अपनी लड़की से  ना जाने क्या-क्या उम्मीदें लगाई थी। मुझे क्या पता था कि वह मेरी उम्मीदों का गला घोंट ही देगी। उसे  अभी सम्भाला नहीं गया तो आगे चलकर वह मुझ पर ना जाने क्या कहर बरसाएगी। मेरे सारे सपने बिखर जाएंगे। जो उम्मीदें मैंने अपनी बेटी से लगा रखी है  वह कभी भी पूरा नहीं कर पाएगी।

गौरी बोली तो तुम्हारी बेटी नें ऐसा क्या किया? वह तो अब समझदार हो चुकी है उसे अपना अच्छा बुरा सब मालूम है। नीतू बोली मेरी बेटी मुझसे हर रोज झूठ कहती है मैं पढ़ाई कर रही हूं। टेलीविजन की शक्ल भी नहीं देखती।  आज जब उसकी मैडम का फोन आया कि आपकी बेटी पढ़ाई में बहुत ही कमजोर है। अगर उसे कुछ कहो हो तो आगे से हम अध्यापिकायों को जबाब देती है। आप अपनी बेटी को क्यों  नहीं समझाते। मैंने चोरी छुपे जाकर उसकी तलाशी लेनी शुरू की। वह पढाई करती है या नहीं। सुबह 5:00 बजे उठ जाती है। वह पांच बजे उठ कर मोबाइल चलाने लग जाती है। सारा दिन मोबाइल चलाती है।  एक दिन मैंने चुपके से उसके कमरे में झांक कर देखा। मैं देख कर खुश हो रही थी कि मेरी बेटी  रात रात के  2:00 बजे तक  बेटी पढाई किया   करती है। पास ही उसकी एक सहेली रहती है। वह भी मेरी बेटी की पक्की दोस्त है। वह भी कभी-कभी हमारे घर उस से मिलने  चली आती है। मैं सोचती थी थी दोनों पढ़ रही हैं मगर पढ़ना तो छोड़ो वह तो मोबाइल में मूवी देखने का आनंद ले रहीं थी। मैंने उस समय  उस से कुछ नहीं कहा। दूसरे दिन फिर देखा।  उनकी तलाशी  करनी शुरु की। अपनी सखियों के साथ बैठकर मोबाइल में अपनी सहेलियों के संग ना जाने कहां कहां की बातें लेकर बैठ गई। तुमने कौन सा सूट पहना है। लंबे लंबे  झुमके पहन कर आना।  कल आना आजकल की मॉडर्न ड्रेस पहन कर आना।  जैसी उस पिक्चर में करीना ने पहनी थी। मैं उनकी बातें सुनकर वह भोचंका रह गई उस के पिता को तो  भी नहीं  मालूम कि उन की बेटी नें ना जाने इस उम्र में कौन-कौन से शौक पाल रखें हैं। घर में किसी की भी नहीं सुनती है बोलो तो  चौबीस घंटे  गुस्से में मुंह फूला कर   बैठ जाती है। बहन मैं क्या करूं? तुम्हारी भी तो बेटी है। क्या वह  भी मोबाईल चलाती रहती है? गौरी बोली नहीं बहन, मैंने तो अपनी बेटियों को मोबाइल लेकर भी नहीं दिया है। नीतू बोली बहन, आजकल के बच्चों से राम ही बचाए कहते कुछ हैं और करते कुछ और ही। तुम भी  उन पर नजर रखना। मुझे तो आज सबक मिल गया।

अपनी बच्ची के लिए मुझे  कुछ भी करना पड़ जाए वह कर  के ही रहेगी वर्ना उसको किसी और स्कूल में डालने  का भरपूर प्रयास करेंगी।

 

गौरी उसकी बातें सुने जा रही थी। गौरी घर से सामान लेने आई थी। वह सोचनें लगी मेरी बेटियाँ भी भी तो रात रात को देर से सोती हैं। कंहीं वह भी तो मोबाइल, टेलीविजन आदि के चक्कर में तो नहीं फस गई। विवेक, उसकी तरफ तो मैंने कभी ध्यान ही नहीं दिया। वह भी आजकल टेलिविज़न कम ही  देखता है। चलो अच्छा है, वह अभी छोटा है। पहले मैं नूपुर और रिमझिम को छिप कर देखूंगी। मुझे भी नीतू नें आशस्वत करवा दिया वर्ना मैं भी इन बातों से बेखबर रहती। मैं तो कभी भी उन दोनों पर चोरी छिपे नजर  ही नहीं रखती हूं। मुझे भी चोरी छिपे अपनी  बच्चियों पर चोरी नजर रखने ही पड़ेगी।

गौरी रास्ते से चली जा रही कि सामने ही नूपुर और रिमझिम का स्कूल था।

आज उन दोनों के मामाजी जी घर  पर आए  थे। वे दोनों  तो आज स्कूल ही नहीं आई है।उसनें भी आज दोनों को उनके साथ जानें से नहीं रोका।   मेरी बेटियाँ     बेचारी कही नहीं  जाती हैं। उसके मामा जी के साथ उन दोनों को सैर करनें भेज दिया। गौरी नें  स्कूल में पंहूंच कर दरवाजे पर दस्तक दी। चपरासी नें दरवाजा खोला। गौरी नें स्कूल में चारों तरफ नजर डाली। मेज पर फूलो की सुगंध सारे वातावरण को महका रही थी। कमर में एक ओर अगरबती जल रही थी। दिवार पर बड़े बड़े महापुरुषों के चित्र टंगे हुए औफिस की शोभा को चार चांद लगा रहे थे। कमरे में शान्ति भरा माहौल था। वहां पर पंहूंच कर उसे सकून मिला। अच्छा ही हुआ आज बेटियों के स्कूल पंहूंच कर उसनें अच्छा ही किया।

स्कूल की प्रधानाचार्य नें आ कर उस की चुप्पी को तोड़ दिया। आते ही बोली गुड मॉर्निंग। इससे पहले कि वह मैडम को अभिवादन करती मैडम बोली गौरी मैडम आप अपनी बच्चियों की तरफ इतनी लापरवाह क्यों हो गई। आप की दोनों बेटियाँ आजकल पढाई में इतनी कमजोर कैसे हो गई। आप को न जानें कितनी बार स्कूल बुलवाया मगर आज कहीं जा कर आप को स्कूल आने का मौका मिल ही गया। आप घर पर भी कभी नहीं मिलती थी। आपके पडोसी ही आप का फोन उठाते थे। आप की बेटियाँ हर दम मोबाईल में ही जुटी रहतीहैं। वह मोबाईल स्कूल ले कर आती हैं। आप कम से कम स्कूल में तो उन्हें मोबाईल मत दिया करें। स्कूल में सभी छिप छिप कर अपनें दोस्तों के साथ मोबाईल पर वार्तालाप करनें में व्यस्त रहती हैं। गौरी को तो ऐसा महसूस हो रहा था कि वह जल्दी ही घर पंहूंच कर अपनी बेटियों की धुनाई कर डाले। मैडम के हर शब्द नश्तर की तरह उस के सकून को छिन रहे थे। उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि थोड़ी देर वह वहा रुक जाती तो उसे चक्कर ही आ जाता। उसनें मैडम के आगे चुप रहना ही उचित समझा। उन दोनों का रक्तचाप भी चैक किया गया वह दोनों ठीक नहीं लग रही थी। इसलिए ही आप को स्कूल में बुलवाया था। गौरी सोचने लगी उसनें तो कभी भी अपनी बेटियों को मोबाईल ले कर नहीं दिया। किस से उन दोनों नें मोबाईल लिया होगा। उस नें मैडम को कुछ नहीं कहा यह कह कर चली गई कि वह अपनी बेटियों को समझाएगी। नुपूर और रिमझिम की कक्षा अध्यापिका बोली आप को उन दोनों के साथ नम्रता के साथ पेश आना होगा। प्यार से समझाना होगा। डांटडपट का बच्चों पर कोई असर नहीं पडता है। आपअगर प्यार से समझाएंगी तो वे दोनों आप की बात को कभी टालेंगी।

गौरी घरआकर बहुत ही परेशान थी। अपनी बेटियों पर नजर रखनें लगी। वह तो आज पता लगाकर ही रहोगी कि वे कंहा जाती है? क्या करती हैं? हम तो यहीं समझते थे कि हमारी बेटियां टेलीविजन भी नहीं देखती। उसनें  तो  कभी  भी उन्हें  मोबाईल ला कर नहीं दिया फिर यह मोबाइल कहां से  ले कर आई?

वह  आज सब पता करके ही रहेगी।नुपूर और रिमझिम जैसे ही घर पहुंची तो उनकी मां बोली बेटा खाना खा लो। वह दोनों  बोली मां हमें भूख नहीं है। आप खा लो। हम आराम कर रही हैं। थोड़ी देर हम सो जाती हैं। उसकी मां को गुस्सा तो आ रहा था मगर उन्होनें अपने गुस्से पर नियन्त्रित कर लिया। वह बोली ठीक है बेटा। उसकी मां ने चुपके से कमरे में टेप रिकॉर्डर का बटन ऑन कर दिया था। वे दोनों जो करेंगी वह सब की सब बातें  रिकॉर्डर में रिकॉर्ड हो जाएगी। दोनो अपने कमरे में आ कर खुश होकर बोली। चलो अच्छा हुआ मां को कहा कि हम सो जाते हैं। आज रवि ने उसे एक फिल्म की पेन ड्राइव  ला कर दी है। फिल्म देखेंगे। उन दोनों नें दरवाजा अंदर से बन्द कर लिया था।  रिमझिम नुपूर से बोली  रवि कभी  कभी  पैन ड्राइव देता रहता है।

उसने तो आज  हमें अपना लैपटॉप भी दे दिया है। वह मैनें आते ही  बिस्तर के नीचे छिपा दिया था   ताकि मां की नजर उस पर न पड़े। जल्दी से फिल्म देखते हैं। एक दूसरे की तरफ इशारा करके बोली आज मां को पता चल गया होता कि हम उनकी पीठ पीछे फिल्म देखते हैं तो रात्रि में अपनी सहेलियों के साथ सारी सारी रात भर मोबाईल पर वार्ता लाप करतें रहतें हैं। आज यह सब जान कर  तो मां तो आज बेहोश हो ही  जाती। मां को पता नहीं लगना चाहिए उन्होंने हम को लेकर ना जाने कितने अरमान लगा रखें हैं। नूपुर और रिमझिम एक दूसरे से बोली हम मां को पता ही नहीं लगने देंगे।

आज तो इंग्लिश में भी हम दोनो पॉइंट में पास हुई हैं। हम दोनों पढाई नहीं करेंगी तो पास कैसे  होंगी? रिमझिम बोली बडी़ आई लैक्चर झाड़नें वाली। फिल्म का मजा किरकिरा मत कर। मुझे भी कोई हीरो जैसा दिखने वाला लड़का मिल जाएगा तो मैं भी शादी कर लूंगी। अरे बुद्धू मैं तो मजाक कर रही हूं। दोनों की बातें रिकॉर्ड हो गई थी। उनकी मां  नें उन की रिकार्ड की गई बातें सुन ली थी। तीसरे चौथे दिन उसने नुपूर  और रिमझिम को बाजार जाते देखा। रिक्शा लेकर उसी दिशा में रिक्शा रुकवा  कर देखा। वह घुलमिलकर एक लड़के से बात कर रही थी। नुपूर रवि से बोली तुमने मुझे मोबाइल दिया। धन्यवाद। कल अच्छी सी फिल्म की पेनड्राइव ला कर देना।रवि बोला तुम दोनों मुझ से मिलने आकाश रैस्टोरैन्ट में मिलने आना। वे दोनों बोली  हम  ऐसा नहीं कर सकती। मोबाइल तक तो ठीक है। उसकी मां को थोड़ा स्कून मिला। चलो अच्छा  ही हुआ इस लड़के के घर का पता लगाकर इसके घर जाती हूं। उस लड़के का घर का जैसे-तैसे पता किया।। रवि अपनी माता-पिता का इकलौता लड़का था। वह अपनी माता पिता को कहता था कि मुझे आज एक नया लैपटॉप चाहिए या आज उसे जितनें भी रुपये चाहिए होते तो उनकी हर इच्छा को  उस के माता-पिता पूरी कर देते थे क्योंकि अगर वह उसकी इच्छा को पूरी नहीं करते  तो वह न जानें उन्हें कितनी धमकियां  दे  देता था। उस की इच्छा को पूरी नहीं करते थे तो वह कहता था कि मैं यहां से दूर चला जाऊंगा। तुम्हारे पास कभी भी लौट कर नहीं आऊंगा। उसके मां बाप उसकी धमकियों से डर जाते थे। इसी कारण उसे कुछ भी नहीं कहते थे। रवि  की एक छोटी सी बहन थी प्राची। वह भी बहुत ही होशियार लड़की थी। रवि अपनी बहन को बहुत ही प्यार करता था। उसकी आंखों में कभी भी आंसू नहीं आने देता था। वह भी छिप छिप कर अपने भाई को अपनी जमा पूंजी भी अपने भाई को दे देती थी। वह किसी की भी बात घर में नहीं मानता था सिवा अपनी बहन के।

घर आकर नीतू की मां ने सब पता कर लिया कि वह लड़का कौन है जो  उनको मोबाइल देता है। लैपटॉप देता है। एक दिन उसने अपनी दोनों बेटियों  नूपुर  और रिमझिम  दोनों को अपने पास बुलाया और कहां की बेटी तुम दोनों मेरी गुरूर हो। तुम कोई भी ऐसा काम मत करना जिससे हमारे दिल को ठेस लगे। उसकी मां बोली बेटा एक बात तो  तुम दोनों ने मुझसे छुपाई है। मैं तुम्हें डाटूंगी  नहीं प्यार से समझाऊंगी।  इस उम्र में बच्चे का मन बहुत ही चंचल होता है। वह तरह-तरह के सपने देखता है। सपनों की दुनिया में हिलोरें खानें लगता है। उसे बाहर की दुनिया में सब कुछ अच्छा ही अच्छा नजर आता है। उस अपने मां-बाप उसे दुश्मन नजर आते हैं।वह उन्हें हरदम डांटते रहते हैं। वह सारा गुस्सा  अपनें माता पिता पर निकालतें हैं। गौरी बोली बेटा आपको हम  कहीं जाने से नहीं रोकते। कहीं  भी जाओ हमें सब मालूम होना चाहिए कि तुम कहां जाती हो? क्या करती हो? अपनी मां को अपना दोस्त समझना चाहिए। उस से कोई भी बात छिपानी नहीं चाहिए।  तुम से अगर कभी कोई छोटी सी गलती भी हो जाए तो वह कभी भी नहीं छिपानी चाहिए। अपने मां बाप को खुलकर सारी बातें बतानी चाहिए। अपने पिता को तो  तुम  सारी बातें कह नहीं सकती मगर मां को  अपने दोस्त की तरह एक मित्र की तरह समझेगीं  तो वह खुलकर तुम सारी बात समझा पाएगी। हम भी तुम्हें हर बात बताएंगे। तुम भी हमारे से कोई बात नहीं छुपाओगी।

रिमझिम और नूपुर बोली मां  हम  दोनों शाम को आपसे बातें करेंगे। वह दोनों स्कूल जाने के लिए तैयार हो गई थी। अचानक उनकी नजर बिस्तर के नीचे लैपटॉप पर गई। वह  दोनों इधर-उधर खोजनें लगी। उन्हें लैपटॉप कहीं भी नजर नहीं आ रहा था। दोनों डर के मारे कांपनें लगी। उसकी मां आकर बोली बेटा तुम्हारी  चोरी पकड़ी गई। लैपटॉप  ही दिलाना  होता तो मैं तुम्हें  कभी का दिलवा देती। किसका लैपटॉप उठाकर लाई हो? वह दोनों एक दूसरे को देख रही थी। मां ने तो उनको डांटा भी नहीं।

मैं तुम दोनों को पेन ड्राइव  भी ला कर दे देती। तुम नें कह कर तो देखा होता। मैं इतनी भी निर्मम नहीं हूं जो तुम्हारी इच्छा को पूरी नहीं कर पाऊंगी।  उसकी मां बोली बेटा तुमने कोई नई फिल्म देखनी हो तो मुझे कहती। मैं तुम्हारे साथ चलती। । वह दोनों मौन साधे अपनी मां की बात सुनती रही। वे दोनों आपस में एक दूसरे को चौक  कर देख रही थी। उन्होंने रवि को लैपटॉप  लौटा दिया था। आज तो  मां शाम को मां पापा के पास शिकायत कर के ही रहेगी। हैं कि ना जाने आज दोनों को क्या सजा मिलेगी। वे दोनों शाम को जब घर भाई एकदम कमरे में जाने लगी तो उसके पापा बोले बेटा तुम दोनों इधर आओ। उन दोनों को प्यार करते हुए बोले बेटा आज मैं तुम दोनों को एक उपहार लाया हूं। मैं तुम दोनों को एक एक मोबाइल भी लाया हूं। मैं सोचता था कि आजकल के जमाने में सब बच्चे मोबाइल  चलातें हैं।  मेरी बेटियों ने मुझसे कभी भी मोबाइल की फरमाइश नहीं की। मैं तुम दोनों की अपने दोस्तों  के सामनें  तारीफ करते नहीं थकता हूं। कि मेरी बेटियां तो मेरी ताकत है उन्होंने आज तक मुझसे कभी कोई फरमाइशें नहीं कि।तुम दोनों मेरी जांच की कसौटी पर सदा खरा उतरी हो। तुम दोनों पर मुझे नाज है। मोबाईल पर कर तुम दोनों बहुत ही खुश होंगी।  उन के पापा ने दोनों को मोबाइल थमाया तो दोनों की आंखों में आंसू के खुशी के आंसू थे। वे दोनों अपने पापा की आंखों में प्यार भरा विश्वास देख रही थीं। वह दोनों कितनी मूर्ख हैं जो अपने माता पिता की आंखों में धूल झोंक रही थी। उनकी मां को तो पता ही चल चुका था। वे दोनों को चॉकलेट दे कर बोले  चलो फिल्म सारे मिल कर फिल्म देखते हैं।

पापा जब अपने कमरे में चले गए तो  वे दोनोंअपनी मां के पास आकर  बोली मां हमें माफ कर दो। हमने आपसे सारी बात छुपाई हैं। हमने आपसे हमेशा छुपाया। हमारे पास मोबाइल कहां से आए? हम सब आपको बताते हैं। हमें स्कूल के दोस्त ने  मोबाईल ला कर दिया था। वह बहुत ही अमीर परिवार का लड़का है। उसने ही हमे लैपटॉप दिया था। हम केवल फिल्म देखना चाहते थे। हमने सोचा अगर हमने आपसे मोबाइल दिलवानें के लिए कहा तो आप हमें डाटेंगी। स्कूल में लड़कियां मोबाइल चलाती थी तो  हमारा भी मन करता था कि हम भी मोबाइल चला कर देखें और अपनी दादी से  ढेर सारी बातें करें परंतु हम सोचते थे कि आप हमें डाटेंगी। हमने आप से सारी बातें छुपाई। हमनें मोबाइल पाकर पढ़ाई भी ठीक ढंग से नहीं थी। यह हमारी गल्ती थी। रवि ने उन्हें चाय पर रेस्टोरेंट में बुलाया है। गौरी बोली बेटा देखो अभी तुम दोनों नादान हो। तुम्हें इन लड़कों की आंखों में प्यार ही प्यार नजर आता है। मां बाप  तुम्हें दुश्मन नजर आतें हैं। पर तुम्हारा  कसूर नहीं है। हर नौजवान लड़की के मन में  ऐसा ही सपना उभरता है। मां बाप जब उनकी इच्छा को पूरी नहीं करते वह बाहर जाकर अपनी उस इच्छा को पूरी करने की तलाश करतें हैं।  तुम ने भी मुझ से कभी मोबाइल के लिए नहीं कहा। एकदम अपनी दोस्त पर विश्वास कर उस से मोबाइल ले लिया। उसने तुम्हें मोबाइल तो दे दिया। सभी लड़के एक जैसे नहीं होते। अभी तो तुमको उसने मोबाइल  ही दिया है कल को कुछ और भी दे सकता है। हम तुम्हारा भला बुरा समझते हैं। अभी  तुम में अपना भला बुरा समझने की समझ नही है। अभी तुम उस के बहकावे में जाओगी। आज उसने तुम्हे चाय पर बुलाया है। कल वह तुम्हे ना जाने कहां ले जाए। तुम दोनो कसम खाओगी तुम कहीं भी जाओ  मुझे इसके बारे में पता होना चाहिए। तुम कहां जाती हो? क्या करती हो? बेटा सब लड़के अच्छे नहीं होते। कुछ लड़के लड़कियों को बहकातें हैं और मतलब निकल जाने पर उन्हें अपनी दुनिया से बाहर निकाल कर फैंक देते हैं। इसलिए हर कदम को सोच-समझकर उठाना चाहिए। मैंने ही तुम्हारे पापा को कहा कि तुम्हारी बेटियों के पास मोबाइल नहीं है। तुम दोनों को मोबाइल को मोबाइल चलाना रानी बुरा नहीं है लेकिन उसका प्रयोग एक सीमित दायरे में रहकर करना चाहिए। बेटा जिस लड़के कि तुम बात कर रही हो वह   अपनें माता पिता का बिगड़ा हुआ बेटा है अकेला बेटा होने के कान उसकी सारी फरमाइशें उसके माता-पिता पूरी कर देते हैं। हो सकता है कि वह लाड प्यार में बिगड़ गया हो। उससे भी  प्यार और स्नेह से समझाया जाएगा तो वह भी समझ जाएगा। मैंनें उस लड़के के माता पिता के पास जाकर उन्हें  समझाया। वह बोले कि हमनें अपने बच्चे को कभी भी गम्भीरता से नही लिया। उसे कभी भी समय नहीं दिया। उस की गतिविधियों पर कभी भी नजर नहीं रखी। कहां जाता है? क्या करता है? हम उसे प्यार से समझाएंगे तो शायद वह भी मान जाएगा।

आज मैं तुम्हें एक नाटक में भाग लेने के लिए कह रही हूं। किसी को  सीख देने के लिए यह नाटक करना बहुत ही जरूरी है। रिमझिम बोली मां कैसा नाटक। उसकी मां बोली मैं दोनों को बताती हूं कि क्या करना है?। तुम उस लडके की बहन को अपनी दोस्त बनाओ। फिर बताऊंगी कि क्या करना है? नुपूर और रिमझिम की मां नें मिल कर अपनी सहेली के बेटे को एक नाटक के लिए तैयार किया। उसे हिदायत दे दी कि तुम्हे अपनी बहनें नुपुर और रिमझिम की सहेली को हर रोज मैसेज करनें होंगे। उस से केवल मित्रता करनी होगी क्योंकि रवि मेरी मासूम बेटियों के साथ इश्क का चक्कर चलाना चाहता है। जब उसकी बहन को हर रोज मैसेज दे कर उसे परेशान करेगा तो वह तुम से मिल कर तुम्हे सबक सिखानें की सोचेगा। पुनीत नें रवि की बहन को नया मोबाईल ला कर दिया। उस से दोस्ती बढाई। वह पुनीत के बगैर अपने आप को अकेला समझनें लगी। एक दिन पुनीत नें उसे कहा कि मैं केवल तुम्हारा सच्चा दोस्त हूं। तुम कुछ और समझनें की भूल मत करना। प्राची उस से प्यार करने लगी थी। रवि को जब पता चला कि कोई नवयुवक उस की बहन को मोबाईल दिला कर मेरी बहन को गुमराह कर रहा है तो रवि नें पुनीत की कमीज का कलर पकड़ कर कहा पहले  तुम बताओ कि तुम नें मेरी बहन को मोबाईल किस से पूछ के दिया। पुनीत बोला जैसे तुम नें मेरी बहनों को दिया वैसे मैंने भी दे दिया। मैं तो नाटक का एक  हिस्सा  बन कर तुम्हारी बहन को मोबाईल दिला कर मैसेज करता था। आंटी ने  मुझ से कहा कि ऐसे समझाना तुम्हे बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। रवि को सारी सच्चाई पता चल चुकी थी। वह भी तो नुपूर और रिमझिम को गुमराह कर रहा था। उसे जब सच्चाई सेअवगत करवाया तो वह समझ गया। उसने नुपूर और रिमझिम से अपनी करनी केलिए क्षमा मागी। अपनी बहन को सारी सच्चाई बताई कि उसनें भी किसी की बहनों को गुमराह करनें की कोशिश की थी।  प्राची भी समझ गई थी। उस नें भी अपनी भूल सुधार कर पुनीत से माफी मांगी। सब के चेहरों से झूठ कि काली परत हट चुकी थी।

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