जिन्दगी की परख (कविता

एक दूसरे की बातें बना कर इधर उधर समय गंवाते हम।
शायद यह बात सभी को समझा पाते हम।।

अपने आप की कमियों को नहीं तलाशते। दूसरे में बुराईयां खोजते फिरते हम।
अपनी कमियों से सीख ले कर दूसरों को भी समझा पाते हम।।
उपदेश तो सभी को देते फिरते।
अपने आप अमल करनें से कतराते हम।
अपनें से बडों को सम्मान देनें से घबराते हम।। फरेब का चश्मा हर वक्त ओढे रहते।
इस फरेब भरी दुनिया से बाहर निकल कर वास्तविकता की दुनिया में कदम रख पाते हम।।

इस कड़वी सच्चाई को अपनाने से घबराते हम।
इस सच्चाई से अवगत हो कर अच्छी मिसाल कायम कर पाते हम।।
छोटों और बडो मे भेद न करना, काश ये दुनिया वालों को समझा पातें हम।
इस राह पर सभी को चलना सिखा कर
खुद के लिए भी एक मिसाल बन जाते हम।।

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