मौनी बाबा और नन्हे जासुस

यह कहानी आदिवासी लोगों की है। जिन लोगों के पास घर नहीं थे वह झुग्गी-झोपड़ियों में रहते थे। इन्हीं झुग्गी-झोपड़ियों में एक बहुत ही प्यारा सा बच्चा था  चेतन। वह फटी हुई कमीज बाल बिखरे हुए दौड़ता दौड़ता हर रोज भागकर एक कुटिया के पास जाकर रुक जाता था। वहां पर एक बाबा जी को भजन गाते हुए सुनता था।

 

वह चुपके से देखता रहता था कि कब वह अपना भजन समाप्त करें और कब उसे फल मिठाई खाने को मिले। वह बच्चा चाहे वर्षा हो या तूफान हर रोज भागकर आता था।  उनका भजन सुनता और खाता भी था। उसकी दोस्ती उन साधु बाबा से हो गई। वह साधु बाबा उस बच्चे के दृढ़ निश्चय को देखकर हैरान रह जाते थे। वह  जानते थे कि वह खाने के लिए ही आता है परंतु हर रोज आता था।  वह  भी धीरे धीरे भजन भी गाने लग गया था। ओम नमो शिवाय। ओम नमो शिवाय।

 

एक दिन उस बाबा ने उस बच्चे को बुलाया और कहा बेटा तुम साफ-सुथरा रहा करो। गंदे कपडे मत पहनो। बच्चे तो भगवान का रुप होते हैं। तुम झुग्गी के सभी बच्चों को इकट्ठा करके उनको सफाई के लिए प्रेरित कर सकते हो। उन सभी को सिखाना कि हमें कूड़ा-कर्कट इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए। तुम्हारी झुग्गी झोपड़ियों में इधर-उधर कूड़ा बिखरा रहता है। तुम अपने दोस्तों का एक ग्रुप बनाना और अपने माता-पिता को भी समझाना कि हमें कूढा इधर उधर नहीं फेंकना चाहिए। तुम अगर ऐसा करोगे तो मैं तुम्हें और भी फल खाने को दूंगा।

 

चेतन ने घर आकर अपने माता पिता को कहा कि कूड़ा कर्कट आप इधर उधर मत फेंका करो। इसके लिए कूड़ादान बना दो। कुछ झुग्गी झोपड़ी वाले लोगों ने अपने बच्चों की बात मान ली। कुछ एक बोले तुम कौन होते हो हमें सिखाने वाले? चेतन ने साधु महात्मा को बताया कुछ बच्चे तो मेरे साथ मिल चुके हैं परंतु कुछ बच्चों के माता-पिता नहीं मानते हैं।

 

साधु महात्मा ने उसे ₹200 दिए और कहा कि तुम इससे कूड़ादान ले लेना और सभी झुग्गी वाली वासियों को को इस में कूड़ा कर्कट डालने को कहना। तुम अपने माता पिता को यह भी समझाना कि सिगरेट बीड़ी पीने के लिए तो आपके पास रुपए हैं मगर घर में एक कूड़ा दान लाने के लिए आप लोंगों के पास  रुपए नहीं है।  आपके   आसपास  अगर सफाई होगी तो तुम सब स्वस्थ रहोगे। बेटा तुम एक काम और कर सकते हो तुम्हारे ग्रुप में कितने बच्चे इकट्ठे हो गए हैं? वह बोला बाबा जी  पन्द्रह बच्चे।

 

साधु बाबा ने कहा बेटा अब तुम किसी अध्यापिका को देखना जो स्कूल जाती हो। तुम उसके पैर पकड़ कर कहना हमें भी पढ़ाया करो।  आप अगर एक घंटा हम झुग्गी झोपड़ी वालों को आकर पढ़ा दिया करेंगे तो आपका कल्याण होगा। चेतन  अपनी झुग्गी झोपड़ी के पास  से एक शिक्षिका को जाते हुए  देखा करता था। उसने उसके पैर पकड़ कर कहा अगर आप हम झुग्गी झोपड़ी वालों को पढ़ा दिया करोगी तो हम आपका उपकार कभी नहीं भूलेंगे।

 

पहले तो अमिता ने इन्कार किया परंतु बाद में उसने सोचा मेरे पढ़ाने से यदि इन झुग्गी वालों का भविष्य सुधर जाएगा तो मैं अपने आप को खुशनसीब समझूंगी। उसने  झुग्गी झोपड़ी  के बच्चों को पढ़ाना शुरु कर दिया। साधु बाबा उस बच्चे के साथ घुल मिल गए थे। वह कभी-कभी सारे बच्चों को मिलकर मिठाई भी खिलाया करते थे।

 

साधु बाबा ने उन बच्चों में से चार पांच बच्चों को चुनकर एक बच्चे को कहा तुम आसपास नजर रखना कोई बाहर लघुशंका तो नहीं कर रहा है।? दूसरे बच्चों को कहा कि तुम देखना कोई पानी के नल को व्यर्थ तो नहीं बहा रहा  है। तीसरे  ग्रुप के बच्चों को कहा कि तुम अपने आसपास और बस्ती में जो लोग रहते हैं। पेड़ों को जो काटते हैं यह सब सूचना तुम मुझे लाकर देना। उन सभी बच्चों ने कहा कि हम सब आज से ही आपके काम में लग जाते हैं।

 

उन सब बच्चों ने उन सभी लोगों के नाम लिखकर दे दिए जो इन सभी कामों में लापरवाही बरत रहे थे। और दुरुपयोग कर रहे थे।  उस साधु महात्मा ने एक बच्चे को कहा कि तुम पुलिस इंस्पेक्टर के पास इन सभी लोगों की सूचना देना ताकि वह अगली कार्यवाही कर सके। इसके लिए उस साधु महात्मा ने शिक्षिका को अपने पास बुलाया और कहा बेटा  ईश्वर तुम्हारा कल्याण करें।

 

तुमने इन सभी बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाया है। तुम्हें इन सभी बच्चों को स्कूल में शिक्षा दिलाना है।  कोई अगर इंकार करता है तो उसकी सूचना मुझ तक पहुंचाना। कुछ दिनों के पश्चात उस गांव में झुग्गी झोपड़ी वालों की काया ही पलट हो चुकी थी। जो लोग लापरवाही बरत रहे थे उन बच्चों ने पुलिस इंस्पेक्टर की मदद से उन सभी को सजा दिलवादी।

 

एक बच्चे को उन्होंने अपनी कुटिया के पास नियुक्त किया था। उन्होंने सब बच्चों को कहा था कि यहां के लोग मुझे मौनी बाबा समझते हैं परंतु मैं तुम बच्चों के सामने ही बोलता हूं। मैं चुपचाप मौन धारण करनें का नाटक करता हू। यह बात तुम गुप्त रखोगे। सभी बच्चे बोले। बाबा जी हम यह बात हमारे तक ही सीमित रहेगी। एक दिन चेतन का दोस्त शेखर कुटिया की देखभाल कर रहा था तभी वहां कुछ लोग एकत्रित हुए  आपस में बातचीत कर रहे थे यहां पर कुछ बच्चे आते हैं। वह  हमें मालूम नंहीं हो रहा है  कि इन बच्चों को कौन गुमराह करता है? यह सभी बच्चे  सी आई डी  इंस्पेक्टर की तरह घर घर में जाकर गुनाहगार को पकड़ते हैं। यहां पर यह बाबा जी तो मौनी हैं।  इन सब बच्चों को  यह काम करनें के लिए कौन कहता है। उन्होंने  बगीचे के सारे फूल तहस-नहस कर दिए। मोनी बाबा  समाधि में बैठे हुए  थे। उन लोगों की सारी बातें सुन रहे थे।  वे लोग जैसे ही छत पर चढ़ गए तभी  मौनी बाबा ने अपना कैमरा फिट कर दिया ताकि उन सब लोगों की फोटो ले ली जाए। जो बच्चों के खिलाफ कार्यवाही कर रहे थे।

 

उन साधु बाबा ने उन सभी बच्चों को सतर्क करवा दिया था कि तुम सब बच्चों को कुछ ग्रुप के लोग पकड़वा भी सकते हैं। या तुम से गालीगलौज कर सकते हैं। तुम्हें इसके लिए होशियार रहना होगा। साधु बाबा ने उन ग्रुप के बच्चों को एक-एक मोबाइल भी दिया था ताकि सारी सूचना  वे उन्हें देते रहें।  मौनी बाबा की कृपा से झुग्गी झोपड़ी वालों में सुधार किया गया और जो व्यक्ति साधनों का दुरूपयोग कर रहे थे उन सभी को सजा दी गई। और उनको जुर्माना भी किया गया। उन सभी व्यक्तियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया जो इन सभी बुरे कामों में लिप्त थे। वह साधु बाबा कोई साधु बाबा नहीं थे वह सी आई डी इंस्पेक्टर थे। जिन्होंने आदिवासी लोगों  को सुधारने का बीड़ा उठाया था। उन्होंनें पहल आदिवासियों से ही की थी। इंस्पेक्टर ने उन सभी बच्चों को जो काम में आगे आए थे उनके परिवार वालों के एक एक व्यक्ति को नौकरी पर लगा दिया था। वह बच्चे स्कूल में दाखिल करवाए जाएंगे उन्होंनें उसे विश्वास दिलवाया था। उन्होंने उस शिक्षिका को उसके  अच्छे काम के लिए  सरकारी नौकरी पर लगा दिया था।

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