जादुई दीपक

रमन की मां ने आवाज दी बेटा जल्दी आओ नाश्ता कर लो। रमन आंखें मलता मलता आया मां मैं सारा दिन स्कूल से आकर थक जाता हूं। थोड़ी देर सुस्ता लूं। रमन की मां बोली तुम बहुत ही आलसी हो गए हो। बच्चे एक घंटा हो गया तुम्हें उठाते उठाते। तुम्हें उठाना तो टेढ़ी खीर है।। स्कूल में कैसे काम करते होंगे। स्कूल में भी अपने गुरुजनों की नाक में दम करते होंगे। तुम सचमुच में ही  बहुत आलसी हो। उसके पिता ने  तभी रमन को आवाज दी। रमन ने सुनकर भी सुना अनसुना कर दिया। चौथी बार जब उन्होंने फिर से आवाज लगाई तभी जाकर रमन हाजिर हुआ। बोला, पिताजी क्या है? उसके पिता बोले बेटा रमन तुम आलसी बच्चे क्यों बन गए हो?आलसी बच्चे को कोई भी प्यार नहीं करता। क्या कारण है? गुड्डी तो ऐसी नहीं है। तुम  सुस्त क्यों हो?

 

उसकी मां ने उसे कहा आज तुम्हें मैं एक काम दे रही हूं बेटा।  पास ही में तुम्हारी सुचित्रा चाची का घर है। तुम उन के घर जाकर कर कहना  मां नें अपना थैला मंगवाया है।  बस इतनी सी बात है मैं  पहले आपका ही काम करके आता हूं। वह  थैला लाने के लिए  घर से निकल पड़ा। वहां पर पंहुच कर चाची से बोला मेरी मां ने अपना थैला मंगवाया है। उसे  तभी मुन्नी  दिखाई  दी। मुन्नी सुचित्रा चाची की बेटी थी। सुचित्रा चाची रमन की मां की सहेली थी। वह दोनों काफी अच्छी दोस्त थी। थोड़ी देर  रमन मुन्नी  के साथ खेलने में लग गया।

रमन की ममी थैला देखते देखते थक गई। हार कर वह बिना थैले के ही बाजार चली गई। रास्ते में उसे मुन्नी के साथ आता  रमन दिखाई दिया। वह बोली तुम्हें 3 घंटे हो गए देखते देखते। तुम घर नहीं आए। और ना ही थैला लाए। मैं तो भूल ही गया। उसकी मां बोली तुम्हारी भूलने की आदत किस दिन तुम्हें ले डूबेगी।

तुम  हो ही  आलसी। आलस पन की वजह से कोई भी काम ठीक ढंग से नहीं करते हो। जब भी  रमन की मां अपने बेटे को कोई काम कहती वह कभी भी उस काम को ठीक ढंग से नहीं करता था। उसके पापा भी उसकी इन हरकतों के कारण तंग आ गए थे। एक दिन उसके पिता ने रमन को कहा तुमने कोई भी काम ठीक ढंग से नहीं किया तो अब की बार तुम मुझसे भी पिटे जाओगे। वह बोला ठीक है पिताजी जैसा चाहे। आप भी पिटाई कर लेना। उसके पिता को अपनें बेटे से इस उत्तर की आशा नहीं थी। वह सोच रहे थे कि उनका बेटा कहेगा कि मैं काम को अच्छे ढंग से करने की कोशिश करुंगा। उसे कुछ लाने को कहते तो वह तोड़ फोड़ करता था।

एक दिन उसके पिता ने गुस्से में उसे खाना नहीं दिया। उसने कुछ नहीं कहा। कमरे में अंदर आकर सो गया। उसके पिता ने रमन की मां को कहा। तुम भी इसको खाना नहीं दोगी। उसके हिस्से का खाना छिपा दिया। सारी रात भर कोई भी उसे मनाने नहीं आया। वह किसी की भी बात नहीं मानता था। रात को चुपके से उठा उसने फ्रिज से मलाइ का  कटोरा निकाला और उस में चीनी मिला कर खा गया। और जब थोड़ा सा रह गया था उसनें कटोरा नीचे गिरा दिया। रसोई में जैसे ही कुछ गिरनें की आवाज आई उसकी मां रसोई में आ कर बोली तुम रसोई में क्या कर रहे हो? रमन अपनी मां से बोला  मां  मेरे पेट में चूहे कूद रहे हैं। आपने भी मुझे खाना नहीं दिया। गुड्डी की चहेती हो।

रमन गुस्से में उनको यह कह कर चलते बना। रसोई में जोर की आवाज आने की वजह से उसके पिताजी भी उठ गए थे। रमन की मां को आ कर बोले आया होगा रसोई में खाना ढूंढने। उसे खाना देनें की जरूरत नहीं।  पास ही में रमन को खड़े देख कर रमन से बोले कोई काम ठीक ढंग से तो नहीं करते हो। तुम ही इसको साफ करोगे। वह बोला मैं साफ नहीं करता। वह अपने कमरे में  आग बबूला हो कर चला गया।

उसने मलाई खाकर अपना पेट भर लिया था उसकी मां का दिल पसीज गया। वह खाना देने के लिए रमन के कमरे में आई रमन नें गुस्से के कारण दरवाजा नहीं खोला। आग बबूला होकर वहां से चली गई। मन में  पछतानें लगी। अपने छोटे से बच्चे को भूखा रखा।  

स्कूल में भी  रमन देर से पहुंचा। मैडम भी उसको  देर से आता देख कर बोली। देर से आना बहुत बुरी बात होती है। देर से काम करने वाले बच्चे जिन्दगी में कभी सफल नहीं   होते। बच्चे रमन को घेर कर बोले मैडम तुम से क्या कह रही थी। वह बोला मैडम का कहना तो होता ही है लेक्चर देना। यहां पर आकर भाषण झाड़ कर चली गई। तुम देर से क्यों आए। पढो पढो। पढाई करनें  का ही लेक्चर देते रहते हैं। घर में पापा  भी यही कहते हैं तुम कोई भी काम ठीक ढंग से नहीं करते हो। काश मुझे ऐसा कुछ मिल जाता जिससे मैं हर काम जल्दी-जल्दी करने लग जाता।

वह घर आकर अपनी मां को बोला मां मैं आज अपने दोस्त अमन के घर जा रहा हूं। उसकी मां कुछ नहीं बोली। उससे गुस्सा थी उसने सारे कटोरी की मलाई चट कर दी थी। वह बिना अनुमति के ही अमन की घर की ओर चला गया। थोड़ी देर उसके घर खेलकर वापस घर की ओर आने लगा।

अंधेरा भी होने वाला था रमन धीरे धीरे घर की ओर जा रहा था। रास्ते में उसके कई सहपाठी मिले। उसके घर की ओर एक पगडंडी थी। वहां से घर की ओर एक शॉर्टकट था। वहां से जल्दी जल्दी चलने लगा। उसने देखा उसके साथ साथ ही थोड़ी दूर पर दो खूंखार डाकू की शक्ल के लोग आपस में बातें करें थे। आज तो हमारे हाथ एक जादू का चिराग हाथ में लगा है इसे जो भी चीज हम मांगे वह हमें हमें आसानी से मिल जाएगी। उनमें से एक चोर था और दूसरा सुनार था। रमन छुपकर वृक्ष की ओट में छुप कर उनकी सारी बातें सुनने लगा। बहुत डर रहा था कि कहीं वह पकड़ने वाले हुए जो बच्चों को पकड़कर ले जाते हैं इसलिए उनके डर के मारे वृक्ष की ओट में छुप कर उनकी सारी बातें सुननें लगा।  सुनार चोर से बोला भाई तुम्हें यह चिराग कहां मिला?

चोर बोला यह  जादू का चिराग एक साधु महात्मा के पास था। उसने मुझे यह चिराग दिया। चोर बोला कि उसने मुझसे कहा कि है  यह जादू का चिराग है। विश्वास न हो तो आजमा कर देख सकते हो।   तुम सच्चाई के लिए इस को आजमा कर देख सकते हो। वह साधु महात्मा तीर्थ यात्रा करने जा रहे थे। उन्होंने मुझसे सौ रुपए मांगे। मैंने उस साधु महात्मा को कहा कि अगर यह जादू का चिराग है तो आप इसे मुझे क्यों दे रहे हो। साधु महात्मा बोले हमें चिराग से क्या लेना देना। साधु-संत तों रुखा सुखा जो कुछ भी मिले उस से  अपना पेट भर लेते हैं। हमें इन चीजों की आवश्यकता नहीं है। यह तुम रख लो। मैं इसको रगड़ कर देखने वाला ही था तो तुम दिखाई दिए। मैंने उसको चुपचाप अपनी जेब में  छुपा लिया। तुम नें मुझे जादुई चिराग छिपाते देख लिया। सुनार बोला भाई मेरे यह चिराग मुझे दे दो।

मैं एक सुनार हूं मेरे पास इतना सोना है। मैं इससे भी ज्यादा सोना कमाना चाहता हूं। मैं तुम्हें भी अपना दोस्त बना लेता हूं। सुनार बोला तुम क्या करते हो? बोला मैं पेशे से चोर  हूं। लोगों की जेबों से रुपए चुराना तो यह मेरा बाएं हाथ का खेल है। वह बोला कोई बात नहीं आज से हम दोनों दोस्त हुए। चोर बोला उस सा महात्मा ने कहा था कि तालाब में स्नान करने के पश्चात ही उस  दीपक से कुछ मांगना नहीं तो वह तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं करेंगे। रमन ने सारी बातें सुन ली थी। जिसके वृक्ष की ओट में वह छुपा था उसकी सीध में ही एक तालाब था। वे दोनों नहाने के लिए तालाब में उतर गए। उन्होंने वह जादू का दीपक एक पत्थर की शिला पर  रख दिया।

रमन ने चुपके से पेड़ की ओट से पत्थर पर से वह जादुई चिराग लिया और घर की ओर नौ दो ग्यारह हो गया। उसने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनको सुनार और चोर  ने दीपक ले जाते देख लिया था। चुपचाप घर में आकर उसने चैन की सांस ली। उसकी मां कमरे में आकर बोली इतना हांप क्यों रहे हो? क्या बात है? इतना दौड़ कर क्यों आ रहे हो? इतना कहकर उसकी मां रसोई में चले गई। रमन मन ही मन सोचने लगा अगर यह जादू का दीपक हुआ तो उसके तो वारे न्यारे हो गए। जादू के दीपक के  जिन्न से सारे काम करवाया करूंगा और सब पर रोब झाड़ा  करुंगा। मुझे हर कोई आलसी कहता रहता है।  मुझे न तो मां की डांट पड़ेगी और ना ही पिता मुझे   मार पिटाई करेंगें। स्कूल में अध्यापक  भी उसे कुछ नहीं कह पाएंगे। उसने दीपक को हाथ में कसकर पकड़ लिया। वह दीपक पाकर बहुत ही खुश हो रहा था।

यह दीपक जादू का हुआ तो उस के तो वारे न्यारे होगे। मैं सबको छठी का दूध  याद दिला दूंगा। सारे दोस्त भी नाक भों बनाकर मुझे चिढ़ाते रहते हैं। कहते हैं मिट्टी का माधो है इसको कोई काम ठीक ढंग से करना नहीं आता।वह जादू के चिराग को ले कर सो गया। उसे याद आया मैडम नें उस से पूछा कि स्कूल देर से क्यों आते हो। होमवर्क क्यों नही करते हो। वह मैडम से झूठबोल कर पीछा छुड़ा लेताथा। मैडम भी उस को कुछ नहीं कर पाएगी। सब का उल्लू सीधा करुंगा। इसी उधेड़ बहन में उसे नींद आ गई। जब जाग खुली तो उसनें दीपक को रगडा और कहा अपना करिश्मा दिखाओ।। कमरे  में इतनी भयंकर गर्जना हुई। सामनें एक जिन्न प्रकट हुआ। जिन्न बोला तुम मुझे ले कर आ तो गए हो लेकिन मेरी एक बात कान खोल कर सुन लो मैं उसी इन्सान की सहायता करता हूं जो मेहनत करता है और अपना हर काम स्वयं करता है। रमन बोला मैं कुछ समझा नहीं। जिन्न बोला धीरे धीरे सब समझ जाओगे। मैं इस चिराग का गुलाम हूं। जिसके पास यह जादुई चिराग होता है उसका काम करनें में मदद करता हूं। मैं उसका गुलाम हूं। रमन  जिन्न से बोला बाबा हाथ मिलाओ। रमन ने जिन्न से हाथ मिलाने के लिए  जैसे ही आगे हाथ बढ़ाया जिन्न नें उसके हाथ को इतनी जोर से दबाया कि उसकी आंखों से आंसू आ निकले।

वह जिन्न रमन से  बोला बोलो क्या हुक्म है? रमन बोला आज मेरा मैच है। मेरे दोस्त मुझे चिढ़ाते हैं। मेरा मजाक उड़ाते हैं। तुम उन को सबक सिखाना। वह बोला मैच आरंभ होने वाला है। रमन के दोस्त आकर बोले चलो खेलते हैं। सब के सब मैच खेलने गए। उसके दोस्त जब  जितने लगे तो रमन को बड़ा गुस्सा है। वह जिन्न  से बोला तुम कैसे मालिक हो? तुम मुझे तो जीता ही नहीं रहे हो। तुम तो इनका ही साथ दे रहे हो। जिन्न बोला मैं तो उसका साथ देता हूं जो मेहनती होता है। मैं हूं तो तुम्हारा मालिक मैं तो खेलने वाले के साथ दूंगा। रमन को गुस्सा आया उसने उठा कर जादू के दीपक को दूर फेंक दिया। रमन ने एक लंगड़ी टांग मार कर अपने दूसरे दोस्त को नीचे गिरा दिया ताकि वह हार जाए। जिन्न ने उसे ऐसा करते देख लिया। रमन के दोस्त को इस तरह छुआ कि उसके दोस्त को दर्द  का पता ही नहीं चला। उसे कहीं चोट नहीं आई थी। बाद में घुंसा मार कर जादू के दीपक ने रमन को नीचे गिरा दिया। उसके पांव में चोट लगी थी। उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मैच खत्म हो चुका था। वह लंगड़ा लंगड़ा कर चल रहा था। उसको लंगड़ा कर चलता देखकर जिन्न बोला अब समझ आया मैंने तुम्हें लात क्यों मारी? घूंसा क्यों मारा? रमन बोला  मैंने सोचा तुम तो मेरा काम कर दोगे। वह बोला मैं ऐसा जिन्न नहीं हूं। मैं कामचोर बच्चों का साथ नहीं देता। मैं तो  मेहनत करने वालों का साथ देता हूं। रमन बोला मैं तुम्हें फेंक दूंगा। तुम मुझे नहीं फैंक सकते। मैं तुम्हारे पास से कहीं नहीं जाऊंगा जब तक तुम काम ठीक ढंग से नहीं करोगे तब तक तुम्हारे पास ही रहूंगा। तुम घर में भी किसी को मेरे बारे में नहीं बताया पाओगे अगर तुमने किसी को कुछ बताया तो मैं तुम्हें एसा सबक सिखाऊंगा कि तुम कई दिन तक बिस्तर से उठ नहीं पाओगे। जल्दी जल्दी घर की ओर कदम बढ़ाओ। रमन अपने पैर का दर्द भूल गया था। वह जल्दी जल्दी घर की ओर अपने कदम बढ़ा रहा था। घर में आते ही जादू के जिन्न  नें कहा जाओ अपने पैर धो कर आओ। मुझे गंदे पैर वाले बच्चे बिल्कुल पसंद नहीं है। बिस्तर पर गंदे  पैरों से नहीं चढते। वह दौड़ कर गया मां को बोला मां पानी गर्म कर दो। उसकी मां बोली पानी गर्म नहीं है। रमन बोला तब तक मैं कमरे में जाता हूं। तुम  पानी गर्म करके ले आओ। वह अपनी मां पर गुस्सा होकर बोला जल्दी गर्म करके यहां पानी ले आओ। उसकी आवाज कमरे तक गूंज रही थी। जिन्न रसोई में आ गया था। वह रमन को बोला अपनी मां को गर्म पानी करनें को कह रहे हो। पानी तो तुम भी गर्म कर सकते थे। पानी का पतीला चढ़ा दो। रमन मां को बोला मैं पानी गर्म कर लूंगा। पानी का पतीला ला कर मुझे दे  दो। अपने आप ले लूंगा। रमन गुस्से में जिन्न को बोला तुम कौन होते हो मुझे समझाने वाले। काम करने के लिए  क्यों कहते हो। जिन्न बोला मेरी बात नहीं मानी तो तुम्हें याद है  ना उस दिन वाली  बात।  मां आप गैस पर पतीला चढ़ा दो । जब पानी गर्म हो जाएगा तो आपको आवाज लगा लूंगा। आप कोई और काम देख लो। रमन की मां अपने बच्चे के व्यवहार से बहुत ही खुश हुई। बोली आज कहीं मैं  सचमुच ही कोई सपना तो नहीं देख रही हूं। तुम काम ना करने वाले इतने समझदार कैसे हो गए? वह कुछ नहीं बोला। उसकी मां गैस पर पतीला चढ़ा कर चली गई। वह खड़ा खड़ा पानी को गर्म होते देखता रहा।

रमन के पिता भी ऑफिस से आ गए थे। उन्होंने रमन को आवाज लगाई बेटा एक गिलास पानी  तो पिला दो। वह बोला पापा  अभी मैं  पानी गर्म कर रहा हूं। मैं अपना काम समाप्त करके आता हूं तब आप को  आकर पानी पिला  दूंगा। जिन्न बोला जल्दी से अपने पापा के लिए पानी लेकर जाओ। हाथ धोकर पानी लेकर जाओ और अपने पिता को पानी देकर आओ। नहीं तो। रमन कांप गया।  वह बोला ठीक है अभी देता हूं। उसकी मां  आ कर बोली बेटा पानी गर्म हो गया होगा। तू पैर धो ले मैं तुम्हारे पापा को पानी दे कर आती हूं। रमन बोला नहीं मां मैं ही दे कर आ रहा हूं। पापा पानी मंगा रहे हैं। वह बोली आज मेरे बच्चे में मैं बहुत ही बड़ा परिवर्तन दिख रही हूं। तुम तो अपने पिता की बात कभी नहीं मानते थे। आज अचानक यह बदलाव कैसे? अपने पिता को पानी देने चला गया।

शाम को जिन्न ने कहा चलो मेरे लिए खाना लाओ। वह बोला रसोई से लाऊंगा तो मां को पता चल जाएगा। वह बोला अपनी मां को कहना मुझे ज्यादा भूख लगी है। चार चपाती ले कर आना। दो मुझे दे देना दो तू खा लेना।

सुबह हुई तो उसकी मां ने रमन को 5:00 बजे आवाज लगा दी। वह बोली तुम्हारी परीक्षा पास आ रही है। उठ जाओ। मैं नहीं उठता। वह बोल कर चली गई।।  तुम्हारी परीक्षा पास आ रही है। जैसे ही रमन की मां कमरे से गई जिन्न ने उसकी रजाई उठाकर नीचे फेंक दी। उस पर पानी फेंका। वह उठा गुस्सा होकर बोला मैं नहीं उठूंगा। जिन्न  ने उसे हाथ पर उठा लिया बोला। मैं जिन्न हूं। तुम नीचे जमीन पर पटक भी सकता हूं। रमन बोला नहीं नहीं नहीं मैं उठता हूं। वह जल्दी से उठा। पढ़ाई करने लगा। पढ़ाई करके अच्छे बच्चे की तरह स्कूल जाने लगा। उसके माता-पिता हैरान थे कि उस बच्चे में  कैसे बदलाव आ गया। वह तो हरदम  समझानें पर भी वह नहीं समझता था।

 

वह चुपचाप स्कूल चला गया। आज भी वह देर से स्कूल पहुंचा। मैडम ने उससे पूछा काम करके लाए हो। वह बोला मैडम मैं बीमार था। तभी जिन्न ने उसे उसे च्योंटी काटी। तुम अपनी मैडम को सच सच बताओ वर्ना अभी पंखे से लटका दूंगा। रमन मैडम से बोला मैडम मेरा काम करने को मन नहीं किया। मैं अब आपको कभी भी शिकायत का मौका नहीं दूंगा। वह मैडम की हर बात मानता था। घर भी समय पर पहुंचनें लगा। जिन्न ने उसे कहा कि जो बच्चा आलसी होता है उसका वह भी शत्रु है  जो बच्चा हर दम अपने मां बाप और बड़ों की बात मानता है उसका काम वह तुरन्त कर देता है। धीरे-धीरे रमन अच्छा बच्चा बन गया।

एक दिन रमन बोला मुझे आज  जलेबी खाने का मन हो रहा है। जिन्न बोला तुम अच्छे बच्चे बन गए हो। मैं तुम्हें जलेबी खिला दूंगा।

 

जिन्न  एक हलवाई की दुकान पर रमन को ले गया।  जिन्न नें एक सेठ की जेब से सौ का नोट निकाला और रमन को बुला कर कहा। ये लो नोट तुम जल्दी से जलेबी खा कर वापिस आओ। रमन को बड़ी ही खुशी हुई यह जिन्न तो सचमुच ही कमाल का है। मैं अब सारे काम स्वयं ही किया करुंगा। जिन्न नें उसे कहा लो ये नोट बाहर एक बेचारी बुढ़िया खड़ी है। उसे भी खाने को दो। इसनें भी  2 दिन से कुछ नहीं खाया है।  बाकी रुपए से इसे  बाजार चलकर चावल ला कर दे दो। रमन ने ऐसा ही किया।

धीरे-धीरे  जादू का जिन्न रमन  का दोस्त बन गया था। उसने रमन को अच्छा इंसान बना दिया था। वह बोला अब मैं चलता हूं। एक साल से ज्यादा मैं कहीं नहीं टिकता। तुम अब सुधर गए हो। रमन जिन्न से कहने लगा मेरे प्यारे दोस्त मुझे छोड़कर मत जाओ। जिन्न बोला मुझे अभी तुम जैसे कई बच्चों को सुधारना है जो अपना काम ठीक ढंग से नहीं करते। तुम एक अच्छा काम करो। तुम मुझे किसी ऐसे व्यक्ति को दे देना जो बहुत ही कंजूस हो। उसे सबक सिखा कर मैं इंसान बना लूंगा। रमन बोला ठीक है। मैं आपको किसी ऐसे इंसान को दूंगा जो सचमुच में ही किसी पर अत्याचार करता होगा। कंजूस होगा।

रमन ने एक दिन  जादुई  चिराग को कहीं छोड़ने जा रहा था तभी उसे सामने से वहीं सुनार और चोर आते दिखाई दिए। उन दोनों उसे पहचान लिया। वे उसे गर्दन से पकड़ कर बोले। तुम उस दिन तो भाग गए थे।। आज तुम कहीं हाथ आए हो। जल्दी से उस  चिराग को हमें दे दो नहीं तो हम तुम्हारी ऐसी खबर लेंगे कि पूछो ही मत। रमन बोला मैं आप लोगों को ही ढूंढ रहा था। आप मुझे इतने दिन तक कहीं भी दिखाई नहीं दिए। आज कहीं मिले हैं। मैं आप का  चिराग वापिस करने आया हूं। यह लो अपना   चिराग। सुनार और चोर उसकी ओर देखने लगे। उन्होंने रमन को धन्यवाद कहा और वहां से चल दिए।

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