चोर सिपाही

बिहार के एक छोटे से गांव में  जुम्मन एक रेडी चालक के रूप में काम करता था। वह मेहनत से जो कुछ भी कमा कर लाता उससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसने अपने बेटे लाखन को भी स्कूल में डाल दिया था। लाखन बहुत ही समझदार बच्चा था।

जब वह किसी भी  सिपाही को आते हुए देखता था तो उसका मन भी करता था कि उसके पास भी सिपाही की जैसी वेशभूसा होती।  वह भी सिपाही बनना चाहता था। अपने पापा को कहता था मैं बड़ा होकर सिपाही बनूंगा। उसके पापा भी खुश होकर उसे कहते थे ठीक है बेटा इसके लिए खूब मेहनत लगाकर पढ़ना चाहिए। उसकी मां उसे समझाती कि बेटा सिपाही बनने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ती है। उन जैसे अच्छे अच्छे काम करने पड़ते हैं, इसके लिए पढ़ना बहुत ही जरूरी होता है। वह अपनी पढ़ाई खूब मन लगाकर करता। उसके माता-पिता ने उसे घर के समीप ही एक गवर्नमेंट स्कूल में दाखिल करवा दिया था। वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में इसका एक दोस्त था। उसका नाम था कर्ण। उसको अपने मन की सारी बातें बता दिया करता था। वह दोनों दोस्त लम्बे चौड़े थे। उन दोस्तों नें एक दूसरे से वायदा किया कि हम  जरुरत पड़ने पर  एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे। हम दोनों आज एक दूसरे से वायदा करते हैं। हम अपनें परिवार वालों को अपनी दोस्ती के बीच आने नहीं देगें।

 

कर्ण के माता पिता भी कुछ दूरी पर ही रहते थे। वह एक मध्यम परिवार का बच्चा था। उसके पास सब कुछ सुविधाएं थी जो कुछ एक इंसान के लिए चाहिए। उसके पिता एक फैक्ट्री में काम करते थे और माता भी प्राइवेट ऑफिस में कर्मचारी थी। लाखन उससे हर रोज मिलने आता था परंतु वह उसके घर नहीं जाता था। वह बाहर ही उसे बुलाकर उसके साथ काफी दूर तक घूमने निकल जाता था।  वहां पर दोनों मिल जुलकर एक दूसरे से सारी बातें कहते थे। दोनों की दोस्ती बहुत ही मजबूत थी। कर्ण अपने दोस्त को कहता था कि मैं बड़ा होकर पुलिस इंस्पेक्टर बनना चाहता हूं। मेरे मां-बाप मुझे कहते हैं कि ठीक है जो तुम करना चाहते हो वह अवश्य करो। इसी तरह दिन खुशी खुशी गुजर रहे थे। कर्ण के माता पिता उसे कहते थे कि बेटा दोस्ती तो अपने जैसे इंसानों के साथ ही करनी चाहिए। कर्ण इस मामले में बिल्कुल अलग था। वह कहता मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता। आप की सोच मुझ से मेल नहीं खाती।

तुमनें एक गरीब रेडी चालक के बेटे को अपना दोस्त बनाया है। उस से किनारा कर लो।  कर्ण कहता कि नहीं वही तो मेरा सबसे सच्चा दोस्त है। आप अगर उसे अपने घर नहीं बुलाना चाहते तो ना सही मैं उससे बाहर ही मिल लिया करूंगा लेकिन मैं अपने दोस्त के साथ किया हुआ वादा कभी नहीं तोड़ूंगा।

पुलिस इंस्पेक्टर भी तो देश की सेवा करता है। उसका कर्तव्य होता है किसी गुनाह करने वाले व्यक्ति को सजा देना। मेरा दोस्त भी बहुत ही होशियार है। वह भी एक सिपाही बनना चाहता है। कर्ण के माता-पिता उसे समझाते मगर वह कभी भी नहीं मानता था। वह। कहता था कि मैं अपने दोस्त को मिलने जरूर जाऊंगा इसके लिए वह हर घड़ी तैयार रहता था। चाहे बारिश हो या गर्मी, चाहे आंधी हो या तूफान दोनों दोस्त एक दूसरे के साथ इकट्ठे मिलते और काफी देर तक गप्पे हांका करते।

लाखन घर में अकेला था। कभी कभी वह घर में बिना बताए चीजें उठा लेता था। उसकी मां को इस बात का आभास उस वक्त हुआ जब वह एक दिन अपनें दोस्त का पैन उठा कर ले आया। उसकी मां बोली हमें किसी की भी कोई वस्तु बगैर उसकी इजाजत के कभी नहीं उठानी चाहिए। तुम नें उस से पैन पूछ के लिया था वह बोला नहीं उसकी जेब से निकाल लिया। उसकी जेब में दो पैन थे। मुझे आज मैडम नें स्कूल में  पैन न लाने के लिए सारा दिन खड़ा रखा। शाम को घर आते वक्त मैं चुपके से उसकी जेब से वह उड़ा लिया। लाखन की  मां बोली बेटा एक तरफ तो तुम सिपाही बनने की बात करते हो। दूसरी तरफ चोरी करते हो। सिपाही का कर्तव्य भी देश की रक्षा करना होता है। आज से तुम यह बात गांठ में बांध लो  कभी किसी की चोरी मत करो। तभी तुम एक अच्छे सिपाही बन सकते हो।

 

वह बोला मां मेरा  स्कूल में एक दोस्त और भी है उस नें मुझे यह सब सिखाया। कई बार मैंनें पापा की जेब से भी दस दस के नोट कितनी बार निकाले हैं। उन्हें पता ही नहीं चला। उसकी मां बोली तुम को तो लोग सिपाही नहीं चोर पुकारा करेंगे। वह बोला मां मैं अब समझ गया हूं मैं अब कभी भी चोरी नहीं करुंगा।  उसकी मां बोली तुम उसका पैन लौटा कर उस से माफी मांग लेना।

स्कूल में आज बहुत चहल पहल थी। सारे बच्चे बालदिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। मैडम ने कहा जो बच्चा  कुछ भी बोलना चाहेगा आज वह कुछ भी बोल  सकता है मगर वह जो बोले यह विचार उसके अपनें  होनें चाहिए। जो बच्चा अच्छा बोलेगा उसे हम अपनी तरफ से कुछ न कुछ उपहार में अवश्य देंगें। लाखन के दिमाग में अपनी मां  के शब्द हथौड़े के समान गूंज रहे थे। वह एक सिपाही नहीं चोर बनेगा। वह कभी भी गलत काम नहीं करेगा। आज मैडम को भी बता देगा कि उसने राहुल की जेब से कल पैन ले कर अपनी पैन्ट की जेब में भर लिया था। उसके  दोस्त को तो मालूम भी नहीं होगा कि उसका पैन मैंनें चुराया था। आज वह अपने किए पर शर्मिन्दा है।

स्कूल में बाल सभा के लिए जब सब बच्चे एकत्रित हुए लाखन उठ कर खड़ा हो कर बोला आज वह कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता है आज से पहले उसने इस बात की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया था। सारे अध्यापक उसे ही देख रहे थे वह कभी भी बोलने के लिए कभी खड़ा नहीं हुआ था। वह बोला मेरे प्यारे सहपाठियों और मेरे गुरुजनों आप को मेरा हार्दिक अभिनन्दन। आप के सामने इस तरह आने के लिए क्षमा चाहता हूं। आज वह खुल कर अपनें विचार आप के सामने रखेगा।

लाखन बोला मेरे पिता रेडी चला चला कर हमारा पेट भरते हैं। मेरी मां मेरी एक सच्ची गुरु ही नहीं मेरी एक हमदर्द भी है। वह उसे हर कदम कदम पर अच्छी अच्छी सलाह दिया करती है। वह हर वक्त अपनी मां को कहता है कि मैं बड़ा हो कर एक सच्चा सिपाही बनना चाहता हूं। उसकी मां नें हमेशा सिखाया एक सच्चा सिपाही बनने के लिए एक कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति बनना जरुरी होता है। ईमानदारी से अपना काम करना दृढ संकल्प और प्रतिभाशाली जैसे गुण होने चाहिए तभी तुम अपनें मकसद में सफल हो जाओगे। वह तो आज पूरी तरह से असफल हो गया। वह तो चोरी करनें लगा था। कल उसने अपनें दोस्त की जेब से चुपके से पैन निकाल लिया। उसके दोस्त राहुल को पता ही नहीं चला। यह चोरी करनें की आदत उसे उसके स्कूल में पढने वाले सहपाठी से ही पड़ी। वह आज सबके सामने उस विद्यार्थी का नाम नहीं लेगा। वह भी जल्दी ही चोरी करनें की आदत को छोड़ देगा। उसकी गारन्टी वह खुद लेता है। कृपया उसकी एक भूल को आप माफ कर देना नही तो वह अपनें आप को कभी भी ऊंचा नहीं उठा सकता। उसने सभी अभिभावकों के सामने अपनी भूल का प्रायश्चित किया। राहुल को सारा किस्सा सुनाया कल जब उसके पास कक्षा में पैन नहीं था तो उसे बैन्च पर खड़ा होनें की सजा मिली थी। शाम को जाते वक्त राहुल की जेब से पैन निकाल कर अपनें बस्ते में डाल दिया। उस पैन को पेन्ट कर दिया ताकि वह अपनें पैन को पहचान न पाए।

घर पहुंच कर जब काफी देर तक उस पैन को ले कर पेन्ट कर रहा था। मेरी मां कमरे के अन्दर  आ कर बोली बहुत रात हो चुकी है। तुम इस वक्त क्या कर रहे हो? मां को देखते ही उसने वह पैन बिस्तर के नीचे छिपा दिया ताकि मां की नजर उस पर न पड़े। वह बोली बेटा दाल में तो कुछ काला जरुर है। सच्च सच्च बताओ। सिपाही बनने के लिए हर बात साफ साफ स्पष्ट होनी चाहिए। वह डर रहा था। मां को क्या बताए। वह। आईस्ता से बोला कुछ भी तो नहीं मुझे नींद ही नहीं आ रही थी। उसने जानबूझ कर अपनी रजाई नीचे  तक फैला दी थी जिससे उसकी मां को जरा भी शक न हो। वह बोली रजाई को तो ठीक कर लेते। जाते जाते उसकी मां नें रजाई ऊपर की ओर की उसकी मां की नजर ब्रश पर पड़ी। इस पेंन्ट से तुम क्या कर रहे थे? और इस पैन में यह पेन्ट क्यों किया? तुमने यह पेन्ट का डिब्बा अपनें पापा से लिया। वह बोला नहीं मां अपनें आप उठा कर लाया। उसकी मां बोली बेटा यह तो चोरी हुई। मैनें तुम्हे बताया था कि किसी की भी कोई वस्तु नहीं उठाते। अपनें पापा से पुछा कर ले लेते तो वे भी कभी तुम्हे मना नहीं करते। लाखन रो कर बोला मां उसने आज बहुत ही गलत काम किया है। उसने सारी बात अपनी मां को बता दी। उसकी मां बोली कल तुम उस बच्चे का पैन वापिस कर के आओगे तो मैं समझूंगा कि तुम एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। अभी कुछ भी नहीं बिगड़ा है। तुम सुधर सकते हो।अध्यापक उस बच्चे की बात से प्रभावित हुए। उन्होंने उसे माफ भी कर दिया और उसकी प्रशंसा भी की और कहा तुम अवश्य ही एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। इन्सान तो गलतियों का पुतला। है। जो गिर कर संभल जाए उसकी हमेंशा जीत होती है। राहुल नें भी उसे माफ कर दिया। अध्यापकों नें उसे पैन का डिब्बा ईनाम में दिया। उस दिन के बाद उसने कभी भी चोरी नहीं की।

होनी को कुछ और ही मंजूर था  एक बार उनके गांव में भयंकर बाढ़ आई और जिससे  आसपास के क्षेत्रों में बहुत ही भयानक तबाही हुई।  इतनी भयंकर बाढ़ आई थी  किसी का भी कुछ नहीं बचा। घोषणा कर दी गई कि सभी लोग  यहां से  दूसरे क्षेत्र में चले जाएं  जब तक हालात नहीं सुधरते। जैसे तैसे करके उनका परिवार तो बच गया  मगर अब उनके पास खाने के लिए अनाज का एक भी दाना नहीं  बचा था । उनका सब कुछ बाढ़ में नष्ट हो गया था।

लाखन के पिता के पास ले देकर एक  रेडी ही बची थी।   उन्होंने    फिर भी हौसला नहीं हारा एक दूसरे को तसल्ली दी। सारे परिवार को समझाया।  होनी को कौन टाल सकता है? हमें इस मुसीबत की घड़ी में एक दूसरे का साथ देना चाहिए। शुक्र है कि हमारा परिवार बच गया इससे ज्यादा हमें और कुछ नहीं चाहिए। हमारी  बुढापे की लाठी तो हमारे साथ है। खुशी मनाओ कि हमारे बेटे को कुछ नहीं हुआ  नहीं तो अनर्थ हो जाता। लाखन के पिता कहते कि मैं रेढी चला कर कुछ कमा कर ले ले आया करूंगा पहले हालात तो ठीक हो जाएं। इस बार  बाढ ने चारों ओर तबाही ही तबाही ला दी थी। बहुत से लोग बाढ़ की चपेट में आ गए थे। किसी का कुछ भी नहीं बचा था। जिस किसी के पास जो कुछ बचा था वह बहुत ही कम था। कुछ दिनों के लिए  उन्हें किसी पास के क्षेत्र में उन्हें भेज दिया गया था कर्ण का परिवार भी बच गया था लेकिन उसके मां-बाप बहुत ही दुःखी थे अब क्या करें?। वह रो-रोकर एक दूसरे को अपना हालात बयान कर रहे थे। लाखन नें अपने दोस्त कर्ण को गले से लगा लिया और कहा कि दोस्त हम तो जिंदा है हम अपने मां-बाप को संभालेंगे हम एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे हम अपने मां-बाप को दुख नहीं देंगे। थोड़े दिनों बाद स्थिति कुछ सुधरी।

 

लोंगो के  रहने के लिए तंबू गाड़ दिए गए थे। लोग उसमें रहने के लिए चले गए थे। लखन के माता पिता तो रेडी चला कर अपना पेट भर रहे थे मगर कर्ण के माता पिता बहुत ही दुखी नजर आ रहे थे। उन्होंने तो कभी भी मेहनत-मजदूरी नहीं की थी। लाखन अपने पिता से बोला कि पिताजी हम हमें इनकी मदद भी करनी चाहिए। उनका हौंसला बढ़ाना चाहिए। जो कुछ लाते उसमें से वह कर्ण के माता पिता को भी दे देते। कर्ण के माता पिता को भी महसूस हुआ कि हमने इस बच्चे के साथ बहुत ही अन्याय किया। हमने इस को अपने घर में नहीं आने दिया। हम अपने बड़ा होने पर मान किया करते थे। इस बच्चे ने सिखा दिया कि इस दुनिया में कोई भी छोटा और बड़ा नहीं है दुनिया में सभी एक जैसे हैं। वह धीरे-धीरे वह भी मेहनत करने लग गए थे।

 

एक दिन कर्ण और लाखन ने सोचा कि अब हम भी कमा कर लाया करेंगे जिससे हमारे घर का खर्चा भी निकल सकेगा। बाढ़ आ जाने के कारण चारों ओर चोरों का आतंक छाया हुआ है। चोर चुपके से आकर लोगों का  सामान तंबुओं में से निकाल कर ले जाते थे। जिससे आसपास के लोग बड़े दुःखी थे। कुछेक लोग तो ताकतवर थे परंतु कुछ एक लोग ऐसे थे जो कि उन चोरों का मुकाबला नहीं कर सकते थे। वह काफी लाचार थे जितना कमाते थे उतना ही चोर उनका सामान लूटकर ले जाते थे। फरियाद करें तो किसके पास।

एक दिन लाखन ने कर्ण को कहा कि हमें ही कुछ करना होगा वर्ना गांव के लोग यूं ही लड़ लड़ कर मर जाएंगे। उन दोनों ने एक योजना बनाई अबकी बार जब लुटेरे चोरी करने के लिए  जब तंम्बुओं में घुसेंगे तो  हम उन पर कड़ी नजर रखेंगे। उनको उन्हीं की ही भाषा में जवाब देना होगा। एक दिन जब लुटेरे उस तंबू में चोरी करने के लिए आए लाखन ने उन्हें आते हुए देख लिया। लाखन नें  सिपाही की वेशभूषा पहनी हुई थी। उसने लुटेरों को कहा कि तुम यहां पर क्या लेने आए हो? मैं एक सिपाही हूं अगर मैं तुम्हारी शिकायत  पुलिस वालों से कर दूं तो तुम तो पकड़े जाओगे। आज मैंने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लिया है। अभी जाकर मैं सब कुछ सच-सच पुलिस इंस्पेक्टर को बताता हूं। पुलिस इंस्पेक्टर मेरा दोस्त है। लुटेरे बोले तुम्हारे जैसे झूठ बोलने वाले हमने  बहुत देखें हैं। तुम झूठ भी बड़ी होशियारी से बोल लेते हो। पहले  तुम हमें अपने सिपाही पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाओ   तब हम जानेंगे कि तुम ठीक कह रहे हो या गलत। वह बोला तो ठीक है। कल तुम्हें मैं दूर से उन से मिलवा दूंगा और तुम्हें सजा भी दिलवा दूंगा।

लुटेरे डर गए बोले हम चोरी नहीं करेंगे। परंतु तुम हमें कल पहले पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाना। हम दूर से देखेंगे। यह कहकर लुटेरे वापस चले गए।

दूसरे दिन लाखन ने अपने दोस्त कर्ण को कहा कि तुम पुलिस इंस्पेक्टर बन कर आ जाना औरतुम्हें मैं इशारा करूंगा तुम समझ जाना कि मेरे आस-पास लुटेरे हैं। तुम उनके पास आकर कहना तुम कहां से आए हो? मैंने पहले तुम्हें यहां कभी नहीं देखा। मैं उन्हें बचाने की कोशिश करूंगा तब तुम मेरे कहने पर उन्हें छोड़ देना। हम बाद में उन गुंडों को अवश्य ही पकड़ लेंगे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे। दूसरे दिन लाखन उन लुटेरों के पास आकर बोला यह पुलिस इंस्पेक्टर तो बहुत ही सख्त है।  तुम  अगर उनके पल्ले पड़ गए  वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं। तुमने क्या-क्या मार चोरी किया है? तुम उसे मेरे घर में छुपा दो। हो सकता है वह तुम्हारे घर में तलाशी ले। वह लुटेरे बोले यह कभी नहीं हो सकता। तुम झूठ कहते हो। लाखन बोला आज यहां पर  पुलिस इंस्पेक्टर आने ही वाला है। आज खुद ही देखते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर जैसे ही आया लाखन ने उसे इशारा कर दिया था। लाखन उन उन गुंडों के साथ ही था।  लाखन नें पुलिस इन्सपैक्टर से हाथ मिलाया।

लाखन  ने उन लुटेरों को पुलिस इंस्पेक्टर के साथ  मिलाया।पुलिस इन्स्पैेक्टर बोला यह व्यक्ति कहां से आए हैं? यह तो नए लगते हैं। तुम कहां रहते हो? जल्दी से हमें बताओ यहां पर कुछ लुटेरों का बोलबाला हो गया है इसलिए हमें चारों तरफ तलाशी लेनी पड़ेगी। तुम जल्दी से अपने घर का पता बताओ। लुटेरे डर के मारे कांपनें लगे। वह बोले हमारा घर यहां से काफी दूर है। कल हम तुम्हें अपने घर ले जाएंगे। यह हमारे घर का पता है। उन्होंने एक कॉपी पर  अपने घर का पता नोट कर दिया।

पुलिस इन्सपैक्टर बोला आज तो तुम्हें  अपनें दोस्त के कहनें पर छोड़ दिया। लाखन बोला यह लुटेरे नहीं है। पुलिस इन्सपैक्टर  बोला  तुम्हारे कहने पर मैं इन्हें छोड़ रहा हूं। मगर कल मैं इनके घर अवश्य आऊंगा।

लाखन को तो सब पहले से ही मालूम था कि लुटेरों ने चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा हुआ था। लाखन इन लुटेरों से बोला मुझे पता है तुम ने इन लोगों का चोरी किया हुआ माल अपने पास रखा है। तुम उस सामान को मेरे घर पर रख दो। तुम्हारा माल भी सुरक्षित रहेगा और तुम भी पकड़े नहीं जाओगे। लुटेरों को उसकी बात पसंद आ गई। लुटेरों ने सारा का सारा लूटा हुआ माल लाखन के घर पर रख दिया।

वादे के मुताबिक पुलिस इंस्पेक्टर दूसरे दिन लुटेरों से मिलने गया। वहां पर कुछ भी उसे हासिल नहीं हुआ। लाखन ने उसे पहले ही बता दिया था कि  उसनें चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा है।

पुलिस इंस्पेक्टर लाखन  से बोला कहीं तुम भी तो इसके साथ   नहीं मिले हुए हो। तुम्हारे घर पर भी तलाशी लेनी पड़ेगी। चलो, चल कर देखते हैं। तुम मेरे दोस्त हो तो क्या हुआ? इंस्पेक्टर का फर्ज होता है कि चोरी करने वाले का पर्दाफाश करें।  पुलिस इंस्पेक्टर कर्ण लाखन के घर पर आते हैं। वहां पर छानबीन करते हैं। लुटेरे भी उसके साथ उसके घर पर आते हैं।

अचानक कर्ण की नजर उन गठरियों पर पड़ती है। पुलिस इंस्पेक्टर कहते हैं कि इन गठरियों में क्या है? खोलो खोल कर बताओ। उन गठरीओं में सभी लोगों का लूटा हुआ माल था पुलिस इंस्पेक्टर लाखन से बोले अब तुम्हें मेरे हाथ से कोई नहीं बचा सकता। तुमने चोरी की है।  पुलिस इन्सपैक्टर  लाखन के घर पर छापा डाल कर चोरी किया माल बरामद करतें हैं। । लाखन कहता है कि मैंने चोरी नहीं की। यह मेरे साथ लुटेरे हैं। यह माल इन्हीं का लूटा हुआ माल है। उन्होंने चोरी करके मेरे घर पर यह माल रख दिया। लुटेरे कहने लगे यह झूठ कहता है। यह हमारा माल नहीं है। यह तो इसी ने चोरी किया होगा। लुटेरे वहां से भाग गए। लुटेरे जैसे ही भाग रहे थे कर्ण और लखन ने दोनों ने असली पुलिस इंस्पेक्टर को फोन कर दिया था। हमारे क्षेत्र में कुछ लुटेरों ने आतंक मचाया हुआ था। हमने उन्हें पकड़ लिया है। पुलिस इंस्पेक्टर और सिपाही बनकर उन लुटेरों का सफाया किया और उन्हें पकड़ लिया है। आप जल्दी से आकर उन लुटेरों को पकड़ लीजिए। वह अभी ज्यादा दूर नहीं गए हैं। पुलिस इंस्पेक्टर ने उन्हें  बता दिया था कि यहां पर इन चोरों की गाड़ी खड़ी है। पुलिस स्पेक्टर ने समय पर पहुंचकर उन लुटेरों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। कर्ण और लाखन के इस प्रकार सेवाभाव को देखकर कहने लगे तुम अवश्य ही सिपाही और पुलिस इंस्पेक्टर बनने लायक हो। आज से तुम्हारी पढ़ाई का और सारा खर्चा हम करेंगे। तुम दोनों ही अपने मकसद में जरूर कामयाब होंगे। लोंगों को उनका चोरी किया गया माल वापस मिल गया था सब लोग उनकी प्रशंसा करना नही थकते थे। बिहार के एक छोटे से गांव में  जुम्मन एक रेडी चालक के रूप में काम करता था। वह मेहनत से जो कुछ भी कमा कर लाता उससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसने अपने बेटे लाखन को भी स्कूल में डाल दिया था। लाखन बहुत ही समझदार बच्चा था।

जब वह किसी भी  सिपाही को आते हुए देखता था तो उसका मन भी करता था कि उसके पास भी सिपाही की जैसी वेशभूसा होती।  वह भी सिपाही बनना चाहता था। अपने पापा को कहता था मैं बड़ा होकर सिपाही बनूंगा। उसके पापा भी खुश होकर उसे कहते थे ठीक है बेटा इसके लिए खूब मेहनत लगाकर पढ़ना चाहिए। उसकी मां उसे समझाती कि बेटा सिपाही बनने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ती है। उन जैसे अच्छे अच्छे काम करने पड़ते हैं, इसके लिए पढ़ना बहुत ही जरूरी होता है। वह अपनी पढ़ाई खूब मन लगाकर करता। उसके माता-पिता ने उसे घर के समीप ही एक गवर्नमेंट स्कूल में दाखिल करवा दिया था। वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में इसका एक दोस्त था। उसका नाम था कर्ण। उसको अपने मन की सारी बातें बता दिया करता था। वह दोनों दोस्त लम्बे चौड़े थे। उन दोस्तों नें एक दूसरे से वायदा किया कि हम  जरुरत पड़ने पर  एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे। हम दोनों आज एक दूसरे से वायदा करते हैं। हम अपनें परिवार वालों को अपनी दोस्ती के बीच आने नहीं देगें।

 

कर्ण के माता पिता भी कुछ दूरी पर ही रहते थे। वह एक मध्यम परिवार का बच्चा था। उसके पास सब कुछ सुविधाएं थी जो कुछ एक इंसान के लिए चाहिए। उसके पिता एक फैक्ट्री में काम करते थे और माता भी प्राइवेट ऑफिस में कर्मचारी थी। लाखन उससे हर रोज मिलने आता था परंतु वह उसके घर नहीं जाता था। वह बाहर ही उसे बुलाकर उसके साथ काफी दूर तक घूमने निकल जाता था।  वहां पर दोनों मिल जुलकर एक दूसरे से सारी बातें कहते थे। दोनों की दोस्ती बहुत ही मजबूत थी। कर्ण अपने दोस्त को कहता था कि मैं बड़ा होकर पुलिस इंस्पेक्टर बनना चाहता हूं। मेरे मां-बाप मुझे कहते हैं कि ठीक है जो तुम करना चाहते हो वह अवश्य करो। इसी तरह दिन खुशी खुशी गुजर रहे थे। कर्ण के माता पिता उसे कहते थे कि बेटा दोस्ती तो अपने जैसे इंसानों के साथ ही करनी चाहिए। कर्ण इस मामले में बिल्कुल अलग था। वह कहता मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता। आप की सोच मुझ से मेल नहीं खाती।

तुमनें एक गरीब रेडी चालक के बेटे को अपना दोस्त बनाया है। उस से किनारा कर लो।  कर्ण कहता कि नहीं वही तो मेरा सबसे सच्चा दोस्त है। आप अगर उसे अपने घर नहीं बुलाना चाहते तो ना सही मैं उससे बाहर ही मिल लिया करूंगा लेकिन मैं अपने दोस्त के साथ किया हुआ वादा कभी नहीं तोड़ूंगा।

पुलिस इंस्पेक्टर भी तो देश की सेवा करता है। उसका कर्तव्य होता है किसी गुनाह करने वाले व्यक्ति को सजा देना। मेरा दोस्त भी बहुत ही होशियार है। वह भी एक सिपाही बनना चाहता है। कर्ण के माता-पिता उसे समझाते मगर वह कभी भी नहीं मानता था। वह। कहता था कि मैं अपने दोस्त को मिलने जरूर जाऊंगा इसके लिए वह हर घड़ी तैयार रहता था। चाहे बारिश हो या गर्मी, चाहे आंधी हो या तूफान दोनों दोस्त एक दूसरे के साथ इकट्ठे मिलते और काफी देर तक गप्पे हांका करते।

लाखन घर में अकेला था। कभी कभी वह घर में बिना बताए चीजें उठा लेता था। उसकी मां को इस बात का आभास उस वक्त हुआ जब वह एक दिन अपनें दोस्त का पैन उठा कर ले आया। उसकी मां बोली हमें किसी की भी कोई वस्तु बगैर उसकी इजाजत के कभी नहीं उठानी चाहिए। तुम नें उस से पैन पूछ के लिया था वह बोला नहीं उसकी जेब से निकाल लिया। उसकी जेब में दो पैन थे। मुझे आज मैडम नें स्कूल में  पैन न लाने के लिए सारा दिन खड़ा रखा। शाम को घर आते वक्त मैं चुपके से उसकी जेब से वह उड़ा लिया। लाखन की  मां बोली बेटा एक तरफ तो तुम सिपाही बनने की बात करते हो। दूसरी तरफ चोरी करते हो। सिपाही का कर्तव्य भी देश की रक्षा करना होता है। आज से तुम यह बात गांठ में बांध लो  कभी किसी की चोरी मत करो। तभी तुम एक अच्छे सिपाही बन सकते हो।

 

वह बोला मां मेरा  स्कूल में एक दोस्त और भी है उस नें मुझे यह सब सिखाया। कई बार मैंनें पापा की जेब से भी दस दस के नोट कितनी बार निकाले हैं। उन्हें पता ही नहीं चला। उसकी मां बोली तुम को तो लोग सिपाही नहीं चोर पुकारा करेंगे। वह बोला मां मैं अब समझ गया हूं मैं अब कभी भी चोरी नहीं करुंगा।  उसकी मां बोली तुम उसका पैन लौटा कर उस से माफी मांग लेना।

स्कूल में आज बहुत चहल पहल थी। सारे बच्चे बालदिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। मैडम ने कहा जो बच्चा  कुछ भी बोलना चाहेगा आज वह कुछ भी बोल  सकता है मगर वह जो बोले यह विचार उसके अपनें  होनें चाहिए। जो बच्चा अच्छा बोलेगा उसे हम अपनी तरफ से कुछ न कुछ उपहार में अवश्य देंगें। लाखन के दिमाग में अपनी मां  के शब्द हथौड़े के समान गूंज रहे थे। वह एक सिपाही नहीं चोर बनेगा। वह कभी भी गलत काम नहीं करेगा। आज मैडम को भी बता देगा कि उसने राहुल की जेब से कल पैन ले कर अपनी पैन्ट की जेब में भर लिया था। उसके  दोस्त को तो मालूम भी नहीं होगा कि उसका पैन मैंनें चुराया था। आज वह अपने किए पर शर्मिन्दा है।

स्कूल में बाल सभा के लिए जब सब बच्चे एकत्रित हुए लाखन उठ कर खड़ा हो कर बोला आज वह कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता है आज से पहले उसने इस बात की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया था। सारे अध्यापक उसे ही देख रहे थे वह कभी भी बोलने के लिए कभी खड़ा नहीं हुआ था। वह बोला मेरे प्यारे सहपाठियों और मेरे गुरुजनों आप को मेरा हार्दिक अभिनन्दन। आप के सामने इस तरह आने के लिए क्षमा चाहता हूं। आज वह खुल कर अपनें विचार आप के सामने रखेगा।

लाखन बोला मेरे पिता रेडी चला चला कर हमारा पेट भरते हैं। मेरी मां मेरी एक सच्ची गुरु ही नहीं मेरी एक हमदर्द भी है। वह उसे हर कदम कदम पर अच्छी अच्छी सलाह दिया करती है। वह हर वक्त अपनी मां को कहता है कि मैं बड़ा हो कर एक सच्चा सिपाही बनना चाहता हूं। उसकी मां नें हमेशा सिखाया एक सच्चा सिपाही बनने के लिए एक कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति बनना जरुरी होता है। ईमानदारी से अपना काम करना दृढ संकल्प और प्रतिभाशाली जैसे गुण होने चाहिए तभी तुम अपनें मकसद में सफल हो जाओगे। वह तो आज पूरी तरह से असफल हो गया। वह तो चोरी करनें लगा था। कल उसने अपनें दोस्त की जेब से चुपके से पैन निकाल लिया। उसके दोस्त राहुल को पता ही नहीं चला। यह चोरी करनें की आदत उसे उसके स्कूल में पढने वाले सहपाठी से ही पड़ी। वह आज सबके सामने उस विद्यार्थी का नाम नहीं लेगा। वह भी जल्दी ही चोरी करनें की आदत को छोड़ देगा। उसकी गारन्टी वह खुद लेता है। कृपया उसकी एक भूल को आप माफ कर देना नही तो वह अपनें आप को कभी भी ऊंचा नहीं उठा सकता। उसने सभी अभिभावकों के सामने अपनी भूल का प्रायश्चित किया। राहुल को सारा किस्सा सुनाया कल जब उसके पास कक्षा में पैन नहीं था तो उसे बैन्च पर खड़ा होनें की सजा मिली थी। शाम को जाते वक्त राहुल की जेब से पैन निकाल कर अपनें बस्ते में डाल दिया। उस पैन को पेन्ट कर दिया ताकि वह अपनें पैन को पहचान न पाए।

घर पहुंच कर जब काफी देर तक उस पैन को ले कर पेन्ट कर रहा था। मेरी मां कमरे के अन्दर  आ कर बोली बहुत रात हो चुकी है। तुम इस वक्त क्या कर रहे हो? मां को देखते ही उसने वह पैन बिस्तर के नीचे छिपा दिया ताकि मां की नजर उस पर न पड़े। वह बोली बेटा दाल में तो कुछ काला जरुर है। सच्च सच्च बताओ। सिपाही बनने के लिए हर बात साफ साफ स्पष्ट होनी चाहिए। वह डर रहा था। मां को क्या बताए। वह। आईस्ता से बोला कुछ भी तो नहीं मुझे नींद ही नहीं आ रही थी। उसने जानबूझ कर अपनी रजाई नीचे  तक फैला दी थी जिससे उसकी मां को जरा भी शक न हो। वह बोली रजाई को तो ठीक कर लेते। जाते जाते उसकी मां नें रजाई ऊपर की ओर की उसकी मां की नजर ब्रश पर पड़ी। इस पेंन्ट से तुम क्या कर रहे थे? और इस पैन में यह पेन्ट क्यों किया? तुमने यह पेन्ट का डिब्बा अपनें पापा से लिया। वह बोला नहीं मां अपनें आप उठा कर लाया। उसकी मां बोली बेटा यह तो चोरी हुई। मैनें तुम्हे बताया था कि किसी की भी कोई वस्तु नहीं उठाते। अपनें पापा से पुछा कर ले लेते तो वे भी कभी तुम्हे मना नहीं करते। लाखन रो कर बोला मां उसने आज बहुत ही गलत काम किया है। उसने सारी बात अपनी मां को बता दी। उसकी मां बोली कल तुम उस बच्चे का पैन वापिस कर के आओगे तो मैं समझूंगा कि तुम एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। अभी कुछ भी नहीं बिगड़ा है। तुम सुधर सकते हो।अध्यापक उस बच्चे की बात से प्रभावित हुए। उन्होंने उसे माफ भी कर दिया और उसकी प्रशंसा भी की और कहा तुम अवश्य ही एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। इन्सान तो गलतियों का पुतला। है। जो गिर कर संभल जाए उसकी हमेंशा जीत होती है। राहुल नें भी उसे माफ कर दिया। अध्यापकों नें उसे पैन का डिब्बा ईनाम में दिया। उस दिन के बाद उसने कभी भी चोरी नहीं की।

होनी को कुछ और ही मंजूर था  एक बार उनके गांव में भयंकर बाढ़ आई और जिससे  आसपास के क्षेत्रों में बहुत ही भयानक तबाही हुई।  इतनी भयंकर बाढ़ आई थी  किसी का भी कुछ नहीं बचा। घोषणा कर दी गई कि सभी लोग  यहां से  दूसरे क्षेत्र में चले जाएं  जब तक हालात नहीं सुधरते। जैसे तैसे करके उनका परिवार तो बच गया  मगर अब उनके पास खाने के लिए अनाज का एक भी दाना नहीं  बचा था । उनका सब कुछ बाढ़ में नष्ट हो गया था।

लाखन के पिता के पास ले देकर एक  रेडी ही बची थी।   उन्होंने    फिर भी हौसला नहीं हारा एक दूसरे को तसल्ली दी। सारे परिवार को समझाया।  होनी को कौन टाल सकता है? हमें इस मुसीबत की घड़ी में एक दूसरे का साथ देना चाहिए। शुक्र है कि हमारा परिवार बच गया इससे ज्यादा हमें और कुछ नहीं चाहिए। हमारी  बुढापे की लाठी तो हमारे साथ है। खुशी मनाओ कि हमारे बेटे को कुछ नहीं हुआ  नहीं तो अनर्थ हो जाता। लाखन के पिता कहते कि मैं रेढी चला कर कुछ कमा कर ले ले आया करूंगा पहले हालात तो ठीक हो जाएं। इस बार  बाढ ने चारों ओर तबाही ही तबाही ला दी थी। बहुत से लोग बाढ़ की चपेट में आ गए थे। किसी का कुछ भी नहीं बचा था। जिस किसी के पास जो कुछ बचा था वह बहुत ही कम था। कुछ दिनों के लिए  उन्हें किसी पास के क्षेत्र में उन्हें भेज दिया गया था कर्ण का परिवार भी बच गया था लेकिन उसके मां-बाप बहुत ही दुःखी थे अब क्या करें?। वह रो-रोकर एक दूसरे को अपना हालात बयान कर रहे थे। लाखन नें अपने दोस्त कर्ण को गले से लगा लिया और कहा कि दोस्त हम तो जिंदा है हम अपने मां-बाप को संभालेंगे हम एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे हम अपने मां-बाप को दुख नहीं देंगे। थोड़े दिनों बाद स्थिति कुछ सुधरी।

 

लोंगो के  रहने के लिए तंबू गाड़ दिए गए थे। लोग उसमें रहने के लिए चले गए थे। लखन के माता पिता तो रेडी चला कर अपना पेट भर रहे थे मगर कर्ण के माता पिता बहुत ही दुखी नजर आ रहे थे। उन्होंने तो कभी भी मेहनत-मजदूरी नहीं की थी। लाखन अपने पिता से बोला कि पिताजी हम हमें इनकी मदद भी करनी चाहिए। उनका हौंसला बढ़ाना चाहिए। जो कुछ लाते उसमें से वह कर्ण के माता पिता को भी दे देते। कर्ण के माता पिता को भी महसूस हुआ कि हमने इस बच्चे के साथ बहुत ही अन्याय किया। हमने इस को अपने घर में नहीं आने दिया। हम अपने बड़ा होने पर मान किया करते थे। इस बच्चे ने सिखा दिया कि इस दुनिया में कोई भी छोटा और बड़ा नहीं है दुनिया में सभी एक जैसे हैं। वह धीरे-धीरे वह भी मेहनत करने लग गए थे।

 

एक दिन कर्ण और लाखन ने सोचा कि अब हम भी कमा कर लाया करेंगे जिससे हमारे घर का खर्चा भी निकल सकेगा। बाढ़ आ जाने के कारण चारों ओर चोरों का आतंक छाया हुआ है। चोर चुपके से आकर लोगों का  सामान तंबुओं में से निकाल कर ले जाते थे। जिससे आसपास के लोग बड़े दुःखी थे। कुछेक लोग तो ताकतवर थे परंतु कुछ एक लोग ऐसे थे जो कि उन चोरों का मुकाबला नहीं कर सकते थे। वह काफी लाचार थे जितना कमाते थे उतना ही चोर उनका सामान लूटकर ले जाते थे। फरियाद करें तो किसके पास।

एक दिन लाखन ने कर्ण को कहा कि हमें ही कुछ करना होगा वर्ना गांव के लोग यूं ही लड़ लड़ कर मर जाएंगे। उन दोनों ने एक योजना बनाई अबकी बार जब लुटेरे चोरी करने के लिए  जब तंम्बुओं में घुसेंगे तो  हम उन पर कड़ी नजर रखेंगे। उनको उन्हीं की ही भाषा में जवाब देना होगा। एक दिन जब लुटेरे उस तंबू में चोरी करने के लिए आए लाखन ने उन्हें आते हुए देख लिया। लाखन नें  सिपाही की वेशभूषा पहनी हुई थी। उसने लुटेरों को कहा कि तुम यहां पर क्या लेने आए हो? मैं एक सिपाही हूं अगर मैं तुम्हारी शिकायत  पुलिस वालों से कर दूं तो तुम तो पकड़े जाओगे। आज मैंने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लिया है। अभी जाकर मैं सब कुछ सच-सच पुलिस इंस्पेक्टर को बताता हूं। पुलिस इंस्पेक्टर मेरा दोस्त है। लुटेरे बोले तुम्हारे जैसे झूठ बोलने वाले हमने  बहुत देखें हैं। तुम झूठ भी बड़ी होशियारी से बोल लेते हो। पहले  तुम हमें अपने सिपाही पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाओ   तब हम जानेंगे कि तुम ठीक कह रहे हो या गलत। वह बोला तो ठीक है। कल तुम्हें मैं दूर से उन से मिलवा दूंगा और तुम्हें सजा भी दिलवा दूंगा।

लुटेरे डर गए बोले हम चोरी नहीं करेंगे। परंतु तुम हमें कल पहले पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाना। हम दूर से देखेंगे। यह कहकर लुटेरे वापस चले गए।

दूसरे दिन लाखन ने अपने दोस्त कर्ण को कहा कि तुम पुलिस इंस्पेक्टर बन कर आ जाना औरतुम्हें मैं इशारा करूंगा तुम समझ जाना कि मेरे आस-पास लुटेरे हैं। तुम उनके पास आकर कहना तुम कहां से आए हो? मैंने पहले तुम्हें यहां कभी नहीं देखा। मैं उन्हें बचाने की कोशिश करूंगा तब तुम मेरे कहने पर उन्हें छोड़ देना। हम बाद में उन गुंडों को अवश्य ही पकड़ लेंगे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे। दूसरे दिन लाखन उन लुटेरों के पास आकर बोला यह पुलिस इंस्पेक्टर तो बहुत ही सख्त है।  तुम  अगर उनके पल्ले पड़ गए  वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं। तुमने क्या-क्या मार चोरी किया है? तुम उसे मेरे घर में छुपा दो। हो सकता है वह तुम्हारे घर में तलाशी ले। वह लुटेरे बोले यह कभी नहीं हो सकता। तुम झूठ कहते हो। लाखन बोला आज यहां पर  पुलिस इंस्पेक्टर आने ही वाला है। आज खुद ही देखते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर जैसे ही आया लाखन ने उसे इशारा कर दिया था। लाखन उन उन गुंडों के साथ ही था।  लाखन नें पुलिस इन्सपैक्टर से हाथ मिलाया।

लाखन  ने उन लुटेरों को पुलिस इंस्पेक्टर के साथ  मिलाया।पुलिस इन्स्पैेक्टर बोला यह व्यक्ति कहां से आए हैं? यह तो नए लगते हैं। तुम कहां रहते हो? जल्दी से हमें बताओ यहां पर कुछ लुटेरों का बोलबाला हो गया है इसलिए हमें चारों तरफ तलाशी लेनी पड़ेगी। तुम जल्दी से अपने घर का पता बताओ। लुटेरे डर के मारे कांपनें लगे। वह बोले हमारा घर यहां से काफी दूर है। कल हम तुम्हें अपने घर ले जाएंगे। यह हमारे घर का पता है। उन्होंने एक कॉपी पर  अपने घर का पता नोट कर दिया।

पुलिस इन्सपैक्टर बोला आज तो तुम्हें  अपनें दोस्त के कहनें पर छोड़ दिया। लाखन बोला यह लुटेरे नहीं है। पुलिस इन्सपैक्टर  बोला  तुम्हारे कहने पर मैं इन्हें छोड़ रहा हूं। मगर कल मैं इनके घर अवश्य आऊंगा।

लाखन को तो सब पहले से ही मालूम था कि लुटेरों ने चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा हुआ था। लाखन इन लुटेरों से बोला मुझे पता है तुम ने इन लोगों का चोरी किया हुआ माल अपने पास रखा है। तुम उस सामान को मेरे घर पर रख दो। तुम्हारा माल भी सुरक्षित रहेगा और तुम भी पकड़े नहीं जाओगे। लुटेरों को उसकी बात पसंद आ गई। लुटेरों ने सारा का सारा लूटा हुआ माल लाखन के घर पर रख दिया।

वादे के मुताबिक पुलिस इंस्पेक्टर दूसरे दिन लुटेरों से मिलने गया। वहां पर कुछ भी उसे हासिल नहीं हुआ। लाखन ने उसे पहले ही बता दिया था कि  उसनें चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा है।

पुलिस इंस्पेक्टर लाखन  से बोला कहीं तुम भी तो इसके साथ   नहीं मिले हुए हो। तुम्हारे घर पर भी तलाशी लेनी पड़ेगी। चलो, चल कर देखते हैं। तुम मेरे दोस्त हो तो क्या हुआ? इंस्पेक्टर का फर्ज होता है कि चोरी करने वाले का पर्दाफाश करें।  पुलिस इंस्पेक्टर कर्ण लाखन के घर पर आते हैं। वहां पर छानबीन करते हैं। लुटेरे भी उसके साथ उसके घर पर आते हैं।

अचानक कर्ण की नजर उन गठरियों पर पड़ती है। पुलिस इंस्पेक्टर कहते हैं कि इन गठरियों में क्या है? खोलो खोल कर बताओ। उन गठरीओं में सभी लोगों का लूटा हुआ माल था पुलिस इंस्पेक्टर लाखन से बोले अब तुम्हें मेरे हाथ से कोई नहीं बचा सकता। तुमने चोरी की है।  पुलिस इन्सपैक्टर  लाखन के घर पर छापा डाल कर चोरी किया माल बरामद करतें हैं। । लाखन कहता है कि मैंने चोरी नहीं की। यह मेरे साथ लुटेरे हैं। यह माल इन्हीं का लूटा हुआ माल है। उन्होंने चोरी करके मेरे घर पर यह माल रख दिया। लुटेरे कहने लगे यह झूठ कहता है। यह हमारा माल नहीं है। यह तो इसी ने चोरी किया होगा। लुटेरे वहां से भाग गए। लुटेरे जैसे ही भाग रहे थे कर्ण और लखन ने दोनों ने असली पुलिस इंस्पेक्टर को फोन कर दिया था। हमारे क्षेत्र में कुछ लुटेरों ने आतंक मचाया हुआ था। हमने उन्हें पकड़ लिया है। पुलिस इंस्पेक्टर और सिपाही बनकर उन लुटेरों का सफाया किया और उन्हें पकड़ लिया है। आप जल्दी से आकर उन लुटेरों को पकड़ लीजिए। वह अभी ज्यादा दूर नहीं गए हैं। पुलिस इंस्पेक्टर ने उन्हें  बता दिया था कि यहां पर इन चोरों की गाड़ी खड़ी है। पुलिस स्पेक्टर ने समय पर पहुंचकर उन लुटेरों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। कर्ण और लाखन के इस प्रकार सेवाभाव को देखकर कहने लगे तुम अवश्य ही सिपाही और पुलिस इंस्पेक्टर बनने लायक हो। आज से तुम्हारी पढ़ाई का और सारा खर्चा हम करेंगे। तुम दोनों ही अपने मकसद में जरूर कामयाब होंगे। लोंगों को उनका चोरी किया गया माल वापस मिल गया था सब लोग उनकी प्रशंसा करना नही थकते थे।

एक दिन कर्ण बहुत ही बड़ा पुलिस इंस्पेक्टर बना और लाखन भी एक बहुत बड़ा सिपाही। उन दोनों ने अपने मां बाप का नाम रोशन किया। हालात ठीक हो चुके थे। सब के चेहरों पर खुशी की लहर थी।

एक दिन कर्ण बहुत ही बड़ा पुलिस इंस्पेक्टर बना और लाखन भी एक बहुत बड़ा सिपाही। उन दोनों ने अपने मां बाप का नाम रोशन किया। हालात ठीक हो चुके थे। सब के चेहरों पर खुशी की लहर थी।  

मैं कहानी का गुल्लक की लेखिका  मीना शर्मा ने अपना ब्लौग बना लिया है।  https//कहानी का गुल्लक. इन हिन्दी short stories and poems. अब मेरे ब्लौग में जा कर कहानियों का भरपूर आन्नद लिजीए। धन्यवाद।

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