छतरी

दोस्त है मेरी वर्षा रानी।वह तो है बड़ी मनभावनी।आनें पर मुझे लुभाती है।मेरी ओर खिंची चली आती है।हम दोनों का एक दूजे बिना नहीं है गुजारा।उस का साथ मुझे भी लगता प्यारा। आती है जब वर्षा रानी।बरसाती है पानी।।मुझ को बाहर है बुलाती।पानी में है सैर करवाती।।टपटप बूंदें सभी पर बरसाती हैं।मुझे खोलनें पर मजबूर… Continue reading छतरी