नन्हें मुन्नों तुम भी जागो

सुबह हो गई तुम भी जागो। नन्हे-मुन्ने तुम भी जीवन की भागदौड  में आगे ही आग भागोे।। चिड़िया भी चहचहा  रही है । अपनी चहचाहट से मधुर संगीत सुना रही है। धूप भी चमक कर अपनी छटा को लुभा रही है।। चांद और तारे भी छुप गए हैं। धरती माता की आगोश में समा गए… Continue reading नन्हें मुन्नों तुम भी जागो

स्वामी विवेकानंद

12 जनवरी 1863ई‌, पौष कृष्णा सप्तमी  मकर सक्रांति के दिन सुबह 6 बज कर 33 मिन्ट 33 सेकंड पर नरेंद्र नाथ जी का जन्म हुआ । वे विश्वनाथ दत्त  और  भुवनेश्वरी देवी  की छटी सन्तान थे।उनकी माता को विश्वास था कि काशी के वीरेश्वर शिव की कृपा से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई ,इसलिए उन्होंने… Continue reading स्वामी विवेकानंद

ज़िन्दगी की परख

एक दूसरे की बातें बना कर इधर उधर समय गंवाते हम। शायद यह बात सभी को समझा पाते हम।। अपने आप की कमियों को नहीं तलाशते। दूसरे में बुराईयां खोजते फिरते हम। अपनी कमियों से सीख ले कर दूसरों को भी समझा पाते हम।। उपदेश तो सभी को देते फिरते। अपने आप अमल करनें से… Continue reading ज़िन्दगी की परख

रानी को क्रिसमस का उपहार

क्रिसमस का त्योहार आया। बच्चों में खुशी की रौनक लाया ।। सभी बच्चों के चेहरे खिल खिला उठे बच्चे सांता क्लॉज़ से मिलने को तिल मिला उठे ।। इस  साल भी सांता क्लॉज आएंगें। क्रिसमस पर बच्चा बनकर बच्चों के संग मुस्कुराएंगे ।। बच्चों में खिलौने और मिठाइयां देकर एक दूसरे को देंगे बधाई ।… Continue reading रानी को क्रिसमस का उपहार

नादान दोस्त

किसी गांव में एक बुढ़िया रहती थी । उसका एक ही बेटा था। वह बहुत ही आलसी था और भोला था। इसलिए उसकी मां उसे भोलू नाम से ही बुलाया करती थी। वह अपनी मां का कहना कभी नहीं टालता था। उसकी मां अपने बेटे की इस आदत से परेशान थी कि मेरे मरने के… Continue reading नादान दोस्त

सलाह

सुधीर को आज भी कोई भी काम नहीं मिला। वह  बहुत थक हार कर वापिस अपने घर की ओर मुड़ गया । रास्ते में चलते चलते सोच रहा था कि अगर आज वह अपनी पत्नी को नहीं बचा पाया तो क्या होगा? उसका घर बार बच्चा माता-पिता सब कुछ  उस से छूट चुके थे ।अपने… Continue reading सलाह

नन्हें सिपाही कविता

हम बच्चे हैं प्यारे, दुशमन से ना हारे। आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।। हम इस उपवन के हैं नन्हे नन्हे वीर। इस धरा की है आने वाली तकदीर।। अपने हाथों की लकीरें खुद लिख कर लाए हैं। हम इस भारत के भाग्य विधाता बन कर आए हैं।। हम बच्चे हैं प्यारे,  दुशमन… Continue reading नन्हें सिपाही कविता

बहु कविता

बहु को बेटी की नजर से देखो अरे दुनिया वालो। बहु में अपनी बेटी को तलाशों दुनिया वालों।। बेटी और बहु में फर्क मत करना। जग में अपनी जग हंसाई मत करना।। जितना प्यार अपनी बेटी को करते हो। उससे भी वही प्यार करना दोस्तों।। उसको भी वही दुलार देने की कोशिश करना । वंहीं… Continue reading बहु कविता

कृषक कविता

त्याग तपस्या और श्रम की साक्षात मूर्ति है किसान। नगरवासियों  के अन्न्दाता सृष्टि पालक हैं किसान।। धूप गर्मी सर्दी वर्षा सब सहन करता  रहता। भगवान विष्णु के समान जग का पालन करता रहता। घास फूस की झोंपड़ीयों में रह कर दिन रात कोल्हू के बैल की तरह पिस्ता रहता हर दम  किसान। सेवा और परिश्रम… Continue reading कृषक कविता