होनहार मेताली

मेंताली एक सीधी-साधी और होनहार बालिका थी। दसवीं कक्षा में वह प्रथम आई। गणित में तो उसके 100 में से 98 अंक आए। उसके पिता एक मध्यमवर्गीय परिवार के थे। उनके पिता के पास अपनी बेटी को पढानें के लिए रुपए नहीं थे। उन्होंने कहा बेटा मैं तुम्हें आगे नहीं पढ़ा सकता क्योंकि घर में… Continue reading होनहार मेताली

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झूठा सौदा

बग्गा एक रिक्शाचालक था। एक छोटी सी खोली में रहता था। वह रात-दिन मेहनत मजदूरी करके अपने तथा अपने बच्चों का पेट भरता था ।उसका एक बेटा था वह सोचता था कि वह अपने बच्चों को खूब पढ़ाएगा। वह तो कुछ नहीं बन सका मगर किसी ना किसी भी किसी तरह वह अपने बच्चे को… Continue reading झूठा सौदा

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बोलते पत्थर

यह कहानी एक छोटे से बालक श्रेयान की है। श्रेयान की माता जब वह दो साल का था तब उसको सदा के लिए  छोड़ कर भगवान के पास जा चुकी थी। उसको संभालने वाला कोई नहीं था। उसके पिता एक दुकान में काम करते थे। श्रेयान के लिए उन्हें शादी के सूत्र में बंधना ही… Continue reading बोलते पत्थर

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रंग

छोटू घर आकर अपने पापा से बोला पापा पापा हम कब गांव जाएंगे। वहां मैं अपने चाचा जी के बेटे से मिलूंगा। छोटू के पापा बोले हम जल्दी ही गांव चलेंगे। छोटू खुशी के मारे चिल्ला रहा था। आज हम गांव जा रहे हैं घर के बाहर अपने छोटे-छोटे दोस्तों को कह रहा था मैं… Continue reading रंग

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पिन्कु और जादू की परियां

एक बच्चा था उसका नाम था पिंकू। वह बहुत ही होनहार लड़का था वह हर काम को बहुत होशियारी से किया करता था। एक दिन जब वह स्कूल से आ रहा था तो उसे एक जूता दिखाई दिया। वह इतना चमचम कर रहा था वैसे वह उस जूते को देखकर मोहित हो गया। उसने वह… Continue reading पिन्कु और जादू की परियां

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देर आए दुरुस्त आए

पियूष जल्दी से घर पहुंचना चाहता था क्योंकि आज वह काफी थक चुका था। ऑफिस में बॉस से कहा सुनी हो गई घर में पत्नी से नोकझोंक इस आदत से वह बहुत ही तंग आ चुका था । कुछ दिनों से उसे बहुत ही गुस्सा आ रहा था क्योंकि घर पर उसकी पत्नी उससे हर… Continue reading देर आए दुरुस्त आए

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सोनू और उसका नन्हा दोस्त जौनी।

छवि और सौरभ के एक बेटा था अपनी नानी के पास से वापस अपने गांव लौट रहा था। सोनू केवल पांच वर्ष का था। गाड़ी से आते हुए अपनी मम्मी से बोला मां मैं लघुशंका जाना चाहता हूं। उसके मम्मी पापा ने कार एक ओर खड़ी कर दी। उसे कहा बेटा यहां उतर कर लो।… Continue reading सोनू और उसका नन्हा दोस्त जौनी।

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दिव्यांग

लखू  बचपन से ही एक अपंग हीन बालक पैदा हुआ था। उसकी दोनों टांगे बचपन से ही टेढ़ी थी। उसे समझ भी और बच्चों की अपेक्षा कम ही आता था। माता-पिता ने उसका किसी न किसी तरह उसका ऑपरेशन करवा दिया था। वह चलने लग गया परंतु बुद्धि से वह बहुत ही नासमझ था। जब… Continue reading दिव्यांग

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परिवर्तन

यह कहानी एक छोटे से परिवार की है यह कहानी दो भाइयों की है। दोनों परिवार साथ-साथ रहते थे। रमाकांत और रविकांत। रमाकांत की शादी भी होने जा रही थी रविकांत उसके चाचा जी का बेटा था। दोनों परिवार साथ साथ ही रहते थे इसलिए घर में शादी की खूब चहल पहल थी रमाकांत ने… Continue reading परिवर्तन

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उजाले की किरण

गौरव और गरिमा के परिवार में उनका बेटा अतुल। वे एक छोटे से मकान में रहते थे। उन्होंने अपने मकान की निचली मंजिल किराए पर दी थी। उनके मकान में जिन्होंने मकान किराए पर लिया था वह भी गौरव के साथ ही ऑफिस में काम करता था। गौरव एक बैंक में मैनेजर के पद पर… Continue reading उजाले की किरण

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