प्रौढ़ व्यक्तियों के जीवन को खुशहाल बनाएं

आओ साक्षारता अभियान को सफल कर प्रौढ़ व्यक्तियों के जीवन में एक नया उत्साह जगाएं।शिक्षा के प्रति रुचि जागृत कर, उन में प्रकाश का दीपक जलाएं।। आओ घर घर जाकर उन्हें पढानें का सन्देश ,हर कस्बे गली, मोहल्ले में फैलाएं।उन्हें साक्षर कर अपने मन में खुशी का एहसास लाएं।।‌झुग्गी झोंपड़ी वालों को भी आगे ला… Continue reading प्रौढ़ व्यक्तियों के जीवन को खुशहाल बनाएं

श्यामपट्ट

सारा चेहरा मेरा काला है। दिल मेरा मतवाला है। शिक्षकों को लुभाता हूं। जल्दी जल्दी अपने ऊपर चौक चलाता हूं।। काला रंग है मेरी शान।सब को देता हूं मैं विद्या का ज्ञान। शिक्षक मुझ से लेते हैं काम। चाक से लिख लिख कर बच्चों को देतें है शिक्षा का ज्ञान।। बच्चों को अपनें पास बुलाता… Continue reading श्यामपट्ट

राजा और रंक

एक भिखारी को अपनें घर की दहलीज पर खड़े देख कर रानी बोली क्या सुबह-सुबह तुम्हें कोई काम नहीं है? जो तुम दरवाजा खटखटाने लगते हो ।भिखारी बोला माई दो दिन से खाना नहीं मिला खाना दे दो।खाना खा कर यहां से चला जाऊंगा। वह बोली नहीं तुम किसी और घर जाओ ।इतने में रानी… Continue reading राजा और रंक

नई भोर

राधा चौथी कक्षा की छात्रा थी। वह एक छोटे से गांव में एक सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। वह बहुत ही होनहार थी। वह पढ़ाई में तो अच्छी थी ही साथ ही साथ वह अपनी मां का घर के कामों मैं भी हाथ बंटाती थी। एक दिन विद्यालय में अध्यापिका शहर के जीवन की जानकारी… Continue reading नई भोर

आज्ञाकारी बालक श्रवण

त्रेता युग में एक वीर बालक ने था जन्म लिया । माता पिता ने श्रवण कुमार नाम रखकर उसका लालन पालन किया। वह बालक अपने माता पिता पर  स्नेह सुधा बरसाता था।। श्रद्धा भाव अर्पित कर उन पर जान न्योछावर करता था। ‌ श्रवण कुमार ने अपने माता पिता की सेवा को अपना परम सुख… Continue reading आज्ञाकारी बालक श्रवण

फूलों संग खेल

रंग बिरंगे फूलों संग आओ खेलें खेल हम। उनकी सुहानी खुशबू में खोकर खुशी से झूमें हम। रंग बिरंगे फूलों संग खेल खेल कर, खुब मौज मनाएं हम। मिलजुल कर सारे गाएं .. ओ फूल राजा,ओ फूल राजा यह तो बताओ कहां छुपे हो तुम? कहां छुपे हो तुम बाग के कोनो कोनो में झांक… Continue reading फूलों संग खेल

नशे की प्रवृत्ति है घातक

मिल कर कदम बढाना होगा। नशे की प्रवृति से अपनें बच्चों को छुटकारा दिलवाना होगा।। नशे की प्रवृति है घातक। यह घर घर कि बर्बादी का है द्योतक।। मादक पदार्थों से मूल्यवान है हमारी युवा पीढ़ी । बच्चों में दृढ़ निश्चय और विवेक से अच्छे संस्कार जगा कर सुधारना कामयाबी की है सीढ़ी।। बीड़ी सिगरेट… Continue reading नशे की प्रवृत्ति है घातक

अध्यापिका के प्रश्न

रज्जू हमेशा की तरह स्कूल जाने की तैयारी कर रहा था तभी उसकी मां नें रज्जू को आवाज लगाई बेटा जल्दी नाश्ता कर लो ।स्कूल के लिए देरी हो जाएगी ।वह बोला मां मुझे स्कूल नहीं जाना है ।मुझे वहां बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता।पारो बोली, बेटा तू पढ़ाई के बिना कुछ भी हासिल नहीं… Continue reading अध्यापिका के प्रश्न

नेकी का रास्ता

तरुण आठवीं कक्षा का छात्र था। घर में सबका लाड़ला था इसलिए वह बिगड़ गया था। सुबह उठते हुए जब उसकी मां उसे कहती बेटा नाश्ता कर लो तो वह नाक भौं सिकोड़ कर कहता की क्या बना है ?उसे खाने में कुछ भी अच्छा नहीं लगता था।उसे बाजार की वस्तुएं खाने की आदत पड़… Continue reading नेकी का रास्ता

शिब्बु

शिब्बु एक भोला भाला और मासूम सा बालक था ।बचपन से ही उसके माता-पिता उसे इस संसार से अलविदा कह चुके थे। वह अपने चाचा चाची जी के यहां रहने लगा था ।चाची उसे अपने घर में नहीं रखना चाहती थी ।चाची ने यहां तक कह दिया था कि उसे अनाथ आश्रम छोड़ आते हैं… Continue reading शिब्बु