सोच का दायरा – भाग – 2

सौरभ सुबह सुबह जल्दी सभी कार्यों से निवृत्त हो कर स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाया करते थे ।वह एक हाई स्कूल में मुख्याध्यापक थे । छोटा सा परिवार था। अपनी पत्नी को कह देते थे कि जल्दी से खाना बना दिया करो मुझे जल्दी स्कूल पहुंचना होता है। उनकी पत्नी रेखा सुबह उठकर… Continue reading सोच का दायरा – भाग – 2

बिल्ली मौसी

बिल्ली मौसी ,बिल्ली मौसी आई।रीनु की रसोई में दबे पांव घुस आई।। बौखला कर ‌लगी ढूंढनें दूध मलाई। कभी इधर, कभी उधर, चारों तरफ नजरें दौड़ाए।कोई रसोई में आ कर न धमक जाए।मुझे पर डंडा न बरसा जाए।।फुदक फुदक कर सैल्फ पर चढ़ लगी चक्कर लगानें।भूख के मारे निढाल बिल्ली लगी अपनी किस्मत आजमानें।।अचानक रीनू… Continue reading बिल्ली मौसी

आपसी सूझ-बूझ

एक छोटा सा गांव था।गांव के लोग ईमानदार थे।उस गांव में रामानन्द नया नया आया था।उसकी बिजली विभाग में नई नई नौकरी लगी थी।उसने अपनी पत्नी और बेटे को भी गांव में बुला लिया था।उसका बेटा छटी कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहा था।वह जब अपनें बेटे के साथ गांव पहुंचा टिंकू नें बहुत से… Continue reading आपसी सूझ-बूझ

गुरु तोताराम

एक बार की बात है एक घने जंगल में एक बहुत ही सुंदर पेड़ पर चिड़ियों का झुंड रहता था। चिक्की चिड़ियों के छोटे-छोटे बच्चे भी अपने मां के साथ दाना चुगने जाते थे। कभी-कभी चिड़िया अपने बच्चों को दाना चुगने में सहायता किया करती थी। एक दिन वह अपने बच्चों को दाना चुगने अपनें… Continue reading गुरु तोताराम

घर का भेदी लंका ढाए

हमारे घर का प्रत्येक सामान आज हम से कुछ कह रहा।अपनी दुर्गति पर है ठहाका लगा कर हंस रहा।।आजकल घर में मीठी मीठी सुगंध है छा रही।बच्चों कि चुलबुलाहट से है खिला-खिला रही।।सोफ़ा सैट भी यूं अपनी दास्तां सुना रहा।मुझ पर कुदाकुदी का दौर आजकल है छा रहा।। झाड़ू बोला तुम तो कठोर वस्तु के… Continue reading घर का भेदी लंका ढाए

प्रकृति से प्यार करना सीखो।

प्रकृति ने ही हमें कण कण में परोपकार करना सिखाया।उस की गोद में खेल खेल कर हम सब नें अपना बचपन बिताया।अपनें बचपन के क्षणों का अद्भुत आनन्द उठाया।।प्रकृति कि खुबसुरती को निहार मंत्र मुग्ध हो जाऊं।।पौधों को खिलता देख कर के मैं शुद्ध वातावरण में रम जाऊं।प्रकृति से जुड़ी हर चीज से जीवन में… Continue reading प्रकृति से प्यार करना सीखो।

हृदय परिवर्तन

राहुल का रिपोर्ट कार्ड देख कर आयुक्ता चौंक कर पीछे हट गई।उसका बेटा चार विषयों में फेल था।ऐसा नहीं था कि राहुल पढ़नें में होशियार नहीं था।उसे समझ तो सब कछ आता था मगर वह पढ़ा हुआ याद नहीं करता था।उसके घर का माहौल ठीक नहीं था।मां आयुक्ता को पार्टी और क्लबों से ही फुर्सत… Continue reading हृदय परिवर्तन

अनमोल खजाना

एक छोटा सा कस्बा था ,जहां की आबादी ज्यादा नहीं थी ।उस कस्बे में दो दोस्त रहते थे। रामू और श्यामू। रामू अपने दोस्त शाम को बहुत ही प्यार करता था ।उन दोनों के घर पास पास ही थे।रामू जब भी कुछ काम धंधा करता श्याम को बता दिया करता था। रामू की कपड़े की… Continue reading अनमोल खजाना

खोटा सिक्का

गट्टू एक गरीब लड़का था। उसकी मां एक झोपड़ी में रहती थी। गट्टू जब भी स्कूल से घर आता तो रास्ते में मस्ती करते करते घर पहुंचता था । उसके सारे दोस्त घर पहुंच जाते मगर वह तो मानोअपनी ही धुन में चलता हुआ इधर-उधर नजाराे़ को देखता हुआ रास्ते में कंचे खेलने लग जाता… Continue reading खोटा सिक्का

अम्बे मां

अम्बे मैया तुझे प्रणाम, तुझे प्रणाम,तुझे प्रणाम।स्नेह सुधा बरसाने वाली,सभी जनों के कष्ट मिटानी वाली।जीवन को समृद्ध बनाने वाली,तुझे प्रणाम,तुझे प्रणाम।। भक्ति भाव का आवेश जगानें वाली,अपनी दया-दृष्टि से सुख समृद्धि शांति बरसाने वाली।।काम क्रोध,लोभ, अहंकार को मिटानें वाली।।पूर्व पापों से छुटकारा दिलानें वाली।अम्बे मैया तुझे प्रणाम ,तुझे प्रणाम,तुझे प्रणाम।।अपनी ममता सभी जनों पर एक… Continue reading अम्बे मां