प्यार की परिभाषा

मुन्नी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। बहुत ही चंचल बड़ी बड़ी आंखों वाली ,घुंघराले बाल ,तीखे नैन नक्श ।सलवार कुर्ते में बहुत ही खूबसूरत नजर आती थी ।कपड़े सलिके से पहनती थी। पैरों में फटे जूते होते थे मगर साफ चमचमाते।वह हमेशा उन को धोती थी। उसके पिता गरीब थे। दिल के अमीर थे।… Continue reading प्यार की परिभाषा

जीवन का सच्चा ध्येय

जीवन का सच्चा ध्येय यहीसोच विचार कर काम करें सभी।।थमना नहीं,रुकना नहीं,जीवन में तुम कभी थकना नहीं।।"आराम हराम है,काम ही महान है।काम ही महान है"।।जीवन में समय और अनुशासन पालन कर,जीवनका हर क्षण आनन्द ऊठाना।धैर्य,साहस और हिम्मत जुटा ,आगे ही आगे बढ़ते जाना।समस्या, चुनौतियों,और बुरा समय आनें पर भी कभी न तुम डगमगाना।।निराशा छोड़ आशा… Continue reading जीवन का सच्चा ध्येय

स्वप्न से सुन्दर भारत

स्वप्न से सुन्दर भारत एक नए भारत का निर्माण कर सपनों से भी सुंदर बनाना है।उसकी छवि को महका कर और भी कामयाब बनाना है ।।आज जरूरत है ऐसी सकारात्मक सोच कीजो हर व्यक्ति के मन को ऊर्जा से भर दे।नकारात्मकता को छोड़कर सकारात्मकता की ओर मोड़ दे ।।धैर्य साहस और विवेक को मन में… Continue reading स्वप्न से सुन्दर भारत

पावन हो उत्कर्ष हमारा प्रार्थना

हाथ जोड़ कर हम खड़े,प्रभु स्वीकार करो प्रार्थना।आए हैं हम तेरे द्वारे करनें सच्ची अराधना।। नेक राह पर चल कर सदा मुस्कुराएं हम।निंदा,बुराई,छल को त्याग कर सत्य की राह अपनाएं हम।। शांति और पवित्रता का ध्यान मन में जगाएं हम।कुविचारों को त्याग कर संन्मार्ग पर खुशी से चल पाएं हम।। हाथ जोड़ कर हम खड़े… Continue reading पावन हो उत्कर्ष हमारा प्रार्थना

राजा बेटा

अमन आते ही मां पर चिल्लाया मां खाना लाओ, खाना नहीं बना है मां अमन से बोली। तुम कोई काम में मेरी मदद क्यों नहीं करते हो? तुम तो बस बैठे बैठे खाना खाना ही जानते हो। हम जब तुम्हारी उम्र के थे तो सारा काम किया करते थे। अमन बोला मां रहने दो अपना… Continue reading राजा बेटा

गुरु तोताराम चिटकू और बरगद का पेड़

सुंदरवन में बहुत सारे जीव जंतु रहते थे। उस घने जंगल में एक नदी के पास बरगद का एक बहुत बड़ा वृक्ष था । वहां पर जंगल के जीव जंतुओं ने अपना सभा स्थल बनायाहुआ था। जंगल में सभा के आयोजन के समय जो भी निर्णय लेते थे वह सभी उस वृक्ष के नीचे ही… Continue reading गुरु तोताराम चिटकू और बरगद का पेड़

छम छम आई वर्षा रानी

छमाछम आई वर्षा रानी।रिम झीम पानी कि फ़ुहारें बरसा कर लाई पानी।।मेघों नें भी बारिश का स्वर सुन गरज गरज कर, साथी बादलों को बुला कर आनन्द का बिगुल बजाया।।वर्षा रानी को अपनें साथ नृत्य करनें के लिए बुलाया।।कोयल,मैना,कबूतर,गौरैया,चूं-चूं चिड़िया।सभी पक्षियों नें मधुर संगीत का साज सुनाया।।छमाछम आई वर्षा रानी,रिमझिम पानी कि फुहारें बरसा कर… Continue reading छम छम आई वर्षा रानी

कहा-सुनी

 कक्षा में आते ही मास्टर जी बोले  बच्चों अपना अपना पैन निकालो। अपनी अपनी डफ़ली अपना अपना राग अलाप, श्याम पट पर अनाप शनाप न लिख डालो।। तुम सबको प्रश्न लिखवा आज तुम्हारा  मूल्यांकन  करता हूं। प्रश्न जो हल कर पाएगा उसे पारितोषिक  दिलवा उसका मनोबल बढाता  हूं।। अध्यापक बोले बच्चों मैं   औफिस का… Continue reading कहा-सुनी

वास्तविकता का आभास

सलोनी और नैना दो सहेलियां थी। वह दोनों एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखती थी। माता पिता ने उन्हें सभी सुविधाएं दी थी जो कि एक बच्चे को मिलनी चाहिए। वह दोनों दसवीं कक्षा में आ गई थी। उनके माता-पिता ने उन्हें आगे पढ़ने के लिए दूसरे स्कूल में दाखिल करवा दिया। उनके माता पिता… Continue reading वास्तविकता का आभास

“बातचीत कि कला”

बातचीत कि कला हो जिस की निराली। जीवन में  छलके  जैसे मधु रस कि प्याली।।  कम से कम शब्दों में दूसरों के तथ्यों को समेटनें कि कला हो न्यारी। आवश्यक जानकारी   उपलब्ध  करवाने कि क्षमता हो जिसमें सारी।। मन के भावों को अभिव्यक्त करनें कि कला है सिखलाती। दुसरों के विचारों को ग्रहण करनें… Continue reading “बातचीत कि कला”