(मौनी बाबा और नन्हे जासूस)

यह कहानी उन लोगों की है। जिन लोगों के पास घर नहीं थे वह झुग्गी-झोपड़ियों में रहते थे। इन्हीं झुग्गी-झोपड़ियों में एक बहुत ही प्यारा सा बच्चा था  चेतन। वह फटी हुई कमीज बाल बिखरे हुए दौड़ता दौड़ता हर रोज भागकर एक कुटिया के पास जाकर रुक जाता था। वहां पर एक बाबा जी को… Continue reading (मौनी बाबा और नन्हे जासूस)

पश्चाताप

चीनू बहुत ही शरारती लड़का था। वह एक दिन स्कूल से जब घर आया तो उसकी मां ने देखा कि तीन-चार दिनों से चीनु बहुत ही उदास था। वह कोई भी शरारत नहीं कर रहा था। एक दम शांत  गम्भीर अपने बेटे को बिल्कुल शांत और मौन देखकर चीनू की मम्मी से रहा नहीं गया… Continue reading पश्चाताप

एहसास भाग(1)

स्कूल की घंटी जैसे ही बजी सभी बच्चे अपनी अपनी कक्षाओं में भागे। मैडम अंजली बच्चों को कक्षा में समय पर ना आने के लिए हमेशा डांट दिया करती थी। उन  अध्यापिका से सभी बच्चे डरते थे।  जब भी वह कक्षा में आती शांत सा वातावरण कक्षा में छा जाता। उन का खौफनाक चेहरा बच्चों… Continue reading एहसास भाग(1)

जन्म दिन का उपहार

निक्कू आज बेहद खुश था। क्योंकि आज 23 मार्च को उसका जन्मदिन आने वाला था। वह अपने जन्मदिन के उपहार का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा था। आज उसके मम्मी पापा ने देखा उनका बेटा खुश नजर नहीं आ रहा था इससे पहले कि वह उनसे कुछ कहे  वही बोल पड़े बेटा क्या बात… Continue reading जन्म दिन का उपहार

(एहसास भाग(2)

बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में  एक ब्राहमण  और उसकी पत्नी रहते थे। उनके एक बेटा था चंदू। उसके पिता पेशे  से अध्यापक थे। वह अपने बेटे को अच्छे संस्कार देना चाहते थे। उसे अच्छा  इंसान बनाना चाहते थे। उनका अपना एक छोटा सा मकान था  जिसमें वह अपनी पत्नी निर्मला के… Continue reading (एहसास भाग(2)

बुद्धू राम का कारनामा

किसी गांव में एक भोला भाला आदमी रहता था। वह बुधवार को पैदा हुआ था इसलिए उसकी मां ने उसका नाम बुधराम रखा था।  बाद में सब लोग बुद्ध राम न कह कर उसे सब बुद्धू राम बुलाते थे। इतना भोला था कि वह किसी को भी तंग तो क्या करना किसी को भी कुछ… Continue reading बुद्धू राम का कारनामा

ऐ राही चला चल

ए राही अपने पथ पर आगे बढ़ता चल। मत डर। निर्भीक होकर अपना काम करता चल।। पर्वत की तरह स्थिर। वायु की तरह द्रुतगति। झरने की तरह निर्मल बन कर सबके दिलों में अपनी जगह बनाता चल। हर खुशी सब पर लुटाता चल।। दुर्गम पथ पर आगे बढ़ता चल मत डर। निर्भीक होकर अपना काम… Continue reading ऐ राही चला चल

(देवव्रत)

किसी गांव में  नीधी और विधि दो बहने थी। इन दोनों के पति किसी दुर्घटना में मर चुके थे उनके कोई भी बच्चा नहीं था वह चाहती थी कि अगर कोई बच्चा उन्हें गोद मिल जाता तो बहुत ही अच्छा था ।उन्हें गांव के लोगों ने बताया कि  तुम अनाथालय से अपनी इस इच्छा को… Continue reading (देवव्रत)

ईश्वर

एक दिन गोलू अपनी मां की गोद में झूमते हुए बोला मां चलो खेलते हैं उसकी मां अपने बच्चे को को प्यार देना थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरा गोलू अपने पापा के प्यार से वंचित रह जाता है ।वह अपने पापा की गोद में बैठना चाहता है । उस बच्चे के पापा के… Continue reading ईश्वर

मार्ग दर्शक

मैं उस समय छठी कक्षा में पढ़ता था। मैं बचपन की यादों में जब झांकता हूं तो मेरे मानस पटल पर बचपन की यादें तरोताजा हो आती हैं ।मैं उसमें इतना भोला नहीं था जितना शक्ल से दिखाई देता था ।मैं और मेरे दोस्त हमेशा कक्षा में पढ़ने के इलावा शरारतें करने में मशहूर थे।… Continue reading मार्ग दर्शक