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प्रौढ़ व्यक्तियों के जीवन को खुशहाल बनाएं

आओ साक्षारता अभियान को सफल कर प्रौढ़ व्यक्तियों के जीवन में एक नया उत्साह जगाएं।शिक्षा के प्रति रुचि जागृत कर, उन में प्रकाश का दीपक जलाएं।। आओ घर घर जाकर उन्हें पढानें का सन्देश ,हर कस्बे गली, मोहल्ले में फैलाएं।उन्हें साक्षर कर अपने मन में खुशी का एहसास लाएं।।‌झुग्गी झोंपड़ी वालों को भी आगे ला… Continue reading प्रौढ़ व्यक्तियों के जीवन को खुशहाल बनाएं

श्यामपट्ट

सारा चेहरा मेरा काला है। दिल मेरा मतवाला है। शिक्षकों को लुभाता हूं। जल्दी जल्दी अपने ऊपर चौक चलाता हूं।। काला रंग है मेरी शान।सब को देता हूं मैं विद्या का ज्ञान। शिक्षक मुझ से लेते हैं काम। चाक से लिख लिख कर बच्चों को देतें है शिक्षा का ज्ञान।। बच्चों को अपनें पास बुलाता… Continue reading श्यामपट्ट

आपसी मेलजोल कविता

रानी और रज्जु गुड़िया के पीछे थे झगड़ रहे।वे एक दूसरे को गुस्से से थे अकड़ रहे।।रानी बोली तुम अपने खिलौनों से खेलो खेल।मुझ से झगड़ कर न रखो कोई मेल।। मां ने आ कर रानी और रज्जु को धमकाया।एक दुसरे को प्यार से खेलनें के लिए मनवाया।।रानी बोली वह हर वक्त मुझे से है… Continue reading आपसी मेलजोल कविता

तारो संग बच्चो का खेल

चमचम चमचम चमके तारे।चन्दा से भी प्यारे।।चमचम चमचम चमके तारे।आओ बच्चों पास हमारे।। चन्दा मामा कि तरह आओ सब पर रोब जमाएं।थोडा अकडू बन कर, थोडा झगडू बन कर सब पर हुक्म चलाएं।चन्दा मामा कि तरह चमक चमक कर ,सब के चेहरों पे खुशी कि रौनक लाएं। छुपन छिपाई का खेल खेल कर सब का… Continue reading तारो संग बच्चो का खेल

कछुआ,खरगोश और बन्दरों का झूंड

एक कछुआ घने जंगल में था आया ।शीतल छांव देख कर मन ही मन मुस्कुराया।।कुछ खरगोशों ने भी वहां सुस्तानें के लिए लगा रखा था डेरा।उन्होंने सामने आ कर उसे था घेरा।। खरगोश अपनें साथियों को बोलेभागों रे भागो ,यहां से भागो।जागो रे जागो,जागो रे जागो।। मोटी और भददी खाल वाला आया है यहां एक… Continue reading कछुआ,खरगोश और बन्दरों का झूंड

मुन्नी का मधुर सपना

जब सब बच्चे स्कूल में आए तब मैडम ने बच्चों को कहा कि तुम्हें कल "मेरा स्कूल," पर निबंध लिखने को दिया जाएगा। जो बच्चा सबसे अच्छा निबंध लिखेगा उसे इनाम दिया जाएगा ।निबंध ऐसा होना चाहिए जैसा आज तक किसी ने भी ना लिखा हो। जिसका सबसे अलग निबंध होगा उसे ₹100 ईनाम में… Continue reading मुन्नी का मधुर सपना

होली का त्योहार

होली का त्योहार है रूठों को मनाने का,बिछड़े दिलों को फिर से मिलानेका।।अपनें ही परिवेश में अनजान न बन,एक साथ मिल कर खुशियां मनाने का।।प्रेम के रंग में रंग जानें काहोली के रंग में धमाल मचाने का।।ऊंच नीच,जात पात के बंधन को छोड़ कर,हर एक पल को भूल कर बस जम कर रंग बरसानें का।।हो… Continue reading होली का त्योहार

गुलाब

मैं फूलों का राजा गुलाब कहलाता हूं।मैं रंग और रूप से अपनी पहचान बनाता हूं।बसंत ऋतु में खिल कर उपवन की शोभा बढ़ाता हूं। मेरी सुगन्ध से मधुमक्खियां और तितलियां मेरे चारों ओर इठलाती हैं।चक्कर काट काट कर मुझे रिझाती हैं।झरनों कि मधुरता मुझे लुभाती है।वर्षा के बूंदों कि झंकार मुझे सुहाती है।।ओस की बूंदें… Continue reading गुलाब

वन के प्राणीयों की गुफ़तगू

वन के पक्षियों नें जंगल में सभी जीवों को आपातकालीन न्योता दे कर बुलवाया।जंगल में एक बड़ी बैठक का आयोजन करवाया।।वन के पक्षी आपस में वार्तालाप कर बोले।आजकल हमारा भी धीरज है डोले।। शहरों व कस्बों में मधुर कलरव कर इन्सानों को हैं जगाते।वे हम पर ज़ुल्म करनें से जरा भी नहीं हिचकिचाते।इन्सान हम से… Continue reading वन के प्राणीयों की गुफ़तगू

राजा और रंक

एक भिखारी को अपनें घर की दहलीज पर खड़े देख कर रानी बोली क्या सुबह-सुबह तुम्हें कोई काम नहीं है? जो तुम दरवाजा खटखटाने लगते हो ।भिखारी बोला माई दो दिन से खाना नहीं मिला खाना दे दो।खाना खा कर यहां से चला जाऊंगा। वह बोली नहीं तुम किसी और घर जाओ ।इतने में रानी… Continue reading राजा और रंक