मुन्नी और टुन्नी की तकरार

एक थी बिल्ली मुन्नी रानी।दूजी थी एक टुन्नी रानी।।दोनों ने की मिलकर चोरी।लाई कहीं से एक कचौरी।।मुन्नी कहती सारी लूंगी।टुन्नी कहती आधी दूंगी।। दोनों में फिर हुई लड़ाई।हाथापाई मार कुटाई।।देख रहा था दूर से बंदर।नटखट पूरा एक मछंदर। मौका पाकर दौड़ा आया।मुन्नी चुन्नी को धमकाया।।हाथा पाई में बन्दर नें लाभ उठाया।कचौरी को चटकारे लगा कर… Continue reading मुन्नी और टुन्नी की तकरार

जैसे को तैसा

भाई और बहना का एक दिन हुआ मनमुटाव।दोनों का आपस में था बहुत ही जुड़ाव।। बहना ने सोचा, भाई मुझे मनाने आएगा।कब तक वह मुझसे पीछा छुड़ाएगा? भाई ने रसोई से बर्फी और मिठाई का डिब्बा उठाया।खूब चटकारे लगा-लगा के मिठाई का किया सफाया।। बहना दौड़ी-दौड़ी आई और भाई पर चिल्लाई। बर्फी और मिठाई जो… Continue reading जैसे को तैसा

लड़का लड़की एक समान

लड़का लड़की एक समान।दोनों हैं घर की आन,बान और शान।।माता पिता उन पर छिड़कते हैं जान।।लड़की बिना जीवन अधूरा।लड़की के आनें से वह होता है पूरा।।लड़का भी होता है घर का दुलारा।बहन के आ जानें से वह बन जाता है और भी प्यारा।।नर के अभाव में नारी भी है अपूर्ण।नर के साथ नारी भी है… Continue reading लड़का लड़की एक समान

छतरी

दोस्त है मेरी वर्षा रानी।वह तो है बड़ी मनभावनी।आनें पर मुझे लुभाती है।मेरी ओर खिंची चली आती है।हम दोनों का एक दूजे बिना नहीं है गुजारा।उस का साथ मुझे भी लगता प्यारा। आती है जब वर्षा रानी।बरसाती है पानी।।मुझ को बाहर है बुलाती।पानी में है सैर करवाती।।टपटप बूंदें सभी पर बरसाती हैं।मुझे खोलनें पर मजबूर… Continue reading छतरी

भूल का परिणाम

खेतों की मेड़ पर और नदी के किनारे था हर रोज़ उसका आना-जाना।गाँव की गली-गली के कूचे ही थे उसका आशियाना।। आज सुबह-सुबह ही तो वह नदी के किनारे था आया।सुनहरी धूप और पानी की कल-कल का उसने भरपूर आनंद उठाया।। अपनी पूँछ को हिला-हिला कर खुशी से था भरमाया।पक्षियों के अंडों को खाने की… Continue reading भूल का परिणाम

अनमोल वचन

भज सके तो भज ले राम नाम प्यारा। पाछे फिर पछताएगा जब छुटेगा घर द्वारा।। दाता इतना दिजीए,जितना निर्वाह होई जाए। घर पे आया कोई पाहुना, भूखा न रहे जाए।। कुटिल वचन न बोलिए,जो काया को करे तार तार। मृदुल वचन जल रुप है ,बरसे अमृत धार।। राम राम भज ले बन्दे,राम नाम अनमोल। सियाराम… Continue reading अनमोल वचन

मौसम

मां बोली तुम्हें आज मौसम के बारे में बतलाती हूं। तुम्हारा ज्ञान बढ़ाकर मनोरंजन करवाती हूं ।। एक  वर्ष में मौसम है चार। आओ इन के बारे में चिन्तन मनन कर के करें विचार।। गर्मी सर्दी पतझड़ और बरसात। इनके सामने इन्सान कि क्या है बिसात।।  यह मौसम बारी-बारी से हैं आते।  फरवरी मार्च-अप्रैल और… Continue reading मौसम

थाली में खाना जूठा मत छोड़ो

थाली में खाना जूठा मत छोड़ो। आवश्यकता से अधिक खानें कि आदत से पीछा छोड़ो।। अन्न में होता है अन्न पूर्णा का निवास। जूठन बचाना होता है बर्बादी का वास। अन्न पूर्णा का मत करो अपमान। नहीं तो कोई भी तुम्हारा जग में कभी नहीं करेगा सम्मान।। अपनें छोटे भाई बहनों को भी यह बात… Continue reading थाली में खाना जूठा मत छोड़ो

नन्हीं चिड़िया की पुकार

नन्ही चिड़िया मां से बोली।मैं हूं तेरी प्यारी भोली।।जल्दी से दाना देखकर मेरी भूख मिटाओ न।कहानी सुनाकर मेरा दिल बहलाओ न।।मां बोली ना कर शैतानी।हर दम करती रहती मनमानी।।नन्ही चिड़िया बोली अभी खेलने जाना है।नन्ही चिड़ियों संग खेल खूब धमाल मचाना है।।मां चिड़िया बोली तेरी एक नहीं चलेगी।तू भी आज मेरे संग दाना चुगने चलेगी।।भोली… Continue reading नन्हीं चिड़िया की पुकार

चंदा मामा भाग-२

प्यारे प्यारे चंदा मामा।न्यारे न्यारे चंदा मामा।तुम हो सब के राजदुलारे मामा। मां कहती हैं तुम अपनी किरणों की प्रखरता से सारे जग को चमकाते हो। किरणों की चकाचौंध से सभी के मनों को लुभाते हो।।कभी गोल-मटोल बन कर दिखाते हो।कभी तिरछी कलाओं का जाल दिखाते हो।कभी आधी, कभी पुरी आकृति बनाते हो। आमावस की… Continue reading चंदा मामा भाग-२