सुसभ्य संस्कृति कि नव चेतना का आधार जननी कर्मधात्री, पवित्रता स्वरुपिणी, वात्सलयमयी,ममता का आधार जननी।। सर्वस्व न्योछावर करने वाली, तन मन धन समर्पित करनें वाली।। अपनें हुनर से घर को साज संवारने में निपुणता लानें वाली। अपनी सूझबूझ के दम पर परिवार पर जान छिड़कनें वाली ।। त्याग,तप और सौम्यता कि मूर्ति बन अपनें परिवार… Continue reading “हे नारी!तुझे शत शत नमन”
Category: Poems
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मेरे देश की माटी
इस देश की माटी है चन्दन,हम नित्य इसको करतें हैं वन्दन।।ग्राम ग्राम तपोवन का है धाम ।सत्य,शाश्वत,परमात्मा का है स्थान।। हर बाला में है सीता।हर बालक में है राम।। अरूणोदय की वेला में सुरज सबसे पहले आए।मधुर स्वरों में पक्षी गूंजन कर चहचहाए।कृषकों कि आवाजाही से खेतों में,हरी भरी फसलें लहराए।। घर घर मन्दिर हैं,मन… Continue reading मेरे देश की माटी
आज़ादी का जय घोष
आओ आज़ादी दिवस का जयघोष मिल कर मनाएं । अपनी अपनी दुनिया में न खो कर ,सब एक रस हो जाएं। छोटे और बड़े का भेदभाव भूल कर खुशी से जगमगाएं।। तेरे मेरे कि सोच बाहर फैंक आपस में मैत्री पूर्ण भाव अपनाएं।। भाई बहन,साथी,दोस्त,युवा और वृद्ध जन। कोरोना जैसी बिमारी से छुटकारा पानें का… Continue reading आज़ादी का जय घोष
लक्ष्मी बाई की वीर गाथा
स्वतंत्रता कि बलिवेदी पर मिटनें वाली वह तो झांसी वाली रानी थी।मणिकर्णिका के नाम से विख्यात , बचपन कि पहचान पुरानी थी।।प्यार से बाबा मनु कह कर उसे बुलाते थे।बाजीराव उसे छबीली कह कर चिढ़ाते थे।।विठूर में मल्लविद्या, घूडसवारी, और शास्त्र विद्याओं को सीख अपनी एक पहचान बनाई।तीर,बर्छी,ढाल कृपाण , तलवार चला कर अपनें हुनर… Continue reading लक्ष्मी बाई की वीर गाथा
खेलखिलाड़ी खेल
खेल खिलाड़ी , खेलखिलाड़ी खेल खिलाड़ी खेल। मुस्कुराहट के भाव लाकर , बिना संकोच, सहयोग और तालमेल से , मित्रताऔर भाईचारे का समावेश बना, बिना हिचकिचाहट,बिना घबराहट के सावधानी और धैर्यपूर्वक खेलों में डट कर खेलो खेल।। एक दूसरे का हाथ थाम कर , मन में नई उमंग जगा कर सभी को साथ ले कर… Continue reading खेलखिलाड़ी खेल
मेरी प्यारी बुलबुल
आओ मेरे पास आओ मेरी प्यारी बुलबुल।रानी भैया से बोली हम खेल खेलेंगे मिलजुल।।बुलबुल रानी बुलबुल रानी,तुम तो लगती हो कोई महारानी।भूरे और काले रंग वाली, तुम्हारी उड़ान भी है अजब मस्तानी।। बुल बुल रानी बुलबुल रानी ,तुम हमें क्यो सताती हो?तेज आवाज कि ध्वनि से क्या तुम हमें डराती हो?हमें देख पीपल या… Continue reading मेरी प्यारी बुलबुल
आपसी मेलजोल कविता
रानी और रज्जु गुड़िया के पीछे थे झगड़ रहे।वे एक दूसरे को गुस्से से थे अकड़ रहे।।रानी बोली तुम अपने खिलौनों से खेलो खेल।मुस्वच्छंदता से मुस्कुरानें दो। बचपन के अद्भुत क्षणों का आनन्द उठानें दो। मां मुझे खेल खेलनें जानें दो। खेल खेलनें जानें दो।। रोक टोक छोड़ छाड़ कर , सपनों के हिंडोलों में… Continue reading आपसी मेलजोल कविता
तारो संग बच्चो का खेल
चमचम चमचम चमके तारे।चन्दा से भी प्यारे।।चमचम चमचम चमके तारे।आओ बच्चों पास हमारे।। चन्दा मामा कि तरह आओ सब पर रोब जमाएं।थोडा अकडू बन कर, थोडा झगडू बन कर सब पर हुक्म चलाएं।चन्दा मामा कि तरह चमक चमक कर ,सब के चेहरों पे खुशी कि रौनक लाएं। छुपन छिपाई का खेल खेल कर सब का… Continue reading तारो संग बच्चो का खेल
कछुआ,खरगोश और बन्दरों का झूंड
एक कछुआ घने जंगल में था आया ।शीतल छांव देख कर मन ही मन मुस्कुराया।।कुछ खरगोशों ने भी वहां सुस्तानें के लिए लगा रखा था डेरा।उन्होंने सामने आ कर उसे था घेरा।। खरगोश अपनें साथियों को बोलेभागों रे भागो ,यहां से भागो।जागो रे जागो,जागो रे जागो।। मोटी और भददी खाल वाला आया है यहां एक… Continue reading कछुआ,खरगोश और बन्दरों का झूंड
होली का त्योहार
होली का त्योहार है रूठों को मनाने का,बिछड़े दिलों को फिर से मिलानेका।।अपनें ही परिवेश में अनजान न बन,एक साथ मिल कर खुशियां मनाने का।।प्रेम के रंग में रंग जानें काहोली के रंग में धमाल मचाने का।।ऊंच नीच,जात पात के बंधन को छोड़ कर,हर एक पल को भूल कर बस जम कर रंग बरसानें का।।हो… Continue reading होली का त्योहार