मैं फूलों का राजा गुलाब कहलाता हूं।मैं रंग और रूप से अपनी पहचान बनाता हूं।बसंत ऋतु में खिल कर उपवन की शोभा बढ़ाता हूं। मेरी सुगन्ध से मधुमक्खियां और तितलियां मेरे चारों ओर इठलाती हैं।चक्कर काट काट कर मुझे रिझाती हैं।झरनों कि मधुरता मुझे लुभाती है।वर्षा के बूंदों कि झंकार मुझे सुहाती है।।ओस की बूंदें… Continue reading गुलाब
Category: Poems
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वन के प्राणीयों की गुफ़तगू
वन के पक्षियों नें जंगल में सभी जीवों को आपातकालीन न्योता दे कर बुलवाया।जंगल में एक बड़ी बैठक का आयोजन करवाया।।वन के पक्षी आपस में वार्तालाप कर बोले।आजकल हमारा भी धीरज है डोले।। शहरों व कस्बों में मधुर कलरव कर इन्सानों को हैं जगाते।वे हम पर ज़ुल्म करनें से जरा भी नहीं हिचकिचाते।इन्सान हम से… Continue reading वन के प्राणीयों की गुफ़तगू
एक डाल पर बैठी चिड़िया।
एक डाल पर बैठी चिड़िया।पंखों को हिलाती चिड़िया।।पेड़ों पर टक टक करती चिड़िया।मधुर स्वर में गाती चिड़िया।चीं चीं का राग सुनाती चिड़िया।टूकर टूकर कर सब का ध्यान लुभाती चिड़िया।एक डाल से दूजे डाल तक फुदक फुदक कर जाती चिड़िया।एक डाल पर बैठी चिड़िया।प्यारी और मनमोहक चिड़िया।।भीगे पंखों से पानी को छिटकाती चिड़िया।वर्षा का भरपूर आनन्द… Continue reading एक डाल पर बैठी चिड़िया।
व्यायाम करना सीखें
सारे बच्चों मिल कर बजाओ ताली।हमेशा तुम्हारे जीवन में आएगी खुशहाली।। खेल खेल में व्यायाम को अपनें जीवन का हिस्सा बनाओअपनें शरीर को सुडौल और सुन्दर बना के दिखाओ ।पढ़ाई में रहो सब से आगे आओहर काम समय पर कर के दिखाओ ।कुद कुद कर हाथों को जोर से हिलाओ।ऊपर, नीचे,नीचे ऊपर,दाएं बाए,बांएं दाएं, आगे… Continue reading व्यायाम करना सीखें
ऋतुराज बसंत
प्रकृति के सौंदर्य में चार चांद लगाता है ऋतुराज बसंत।मलय पवन की सुगन्ध से लता कूंज को महकाता है बसंत।। पीली सरसों से खेतों को सुसज्जित करता है बसंत।झूम झूम के पक्षियों के कलरव से वन को महकाता है बसंत।। प्रकृति के कोनें कोनें में अपनी छटा को बिखराता है बसंत।हर्ष आनन्द प्रेम प्रसन्नता और… Continue reading ऋतुराज बसंत
बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है राखी
सावन के महीने में राखी का त्योहार है आता।बहन का मन अपनें भाई से मिलने को आतुर हो जाता।।राखी के दिन बहन खुशी से फूली नहीं समाती,अपनें भाई को याद करके उसकी आंख नम हो जाती।। बचपन की यादों का अमूल्य उपहार है राखी।घर घर की खुशियों का अंबार है राखी।।बहना की मासूम सी अठखेलियों… Continue reading बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है राखी
हे पर्वत राज हिमालय
हे! पर्वत राज हिमालय भारत मां की देवभूमि,गौरव की खान ।विशालता,विस्तृतता,उच्चता की पहचान । उतर में कश्मीर से ले कर पश्चिम में असाम तक फैला हुआ गिरीराज ।साकार,दिव्य विश्वकी सबसे ऊंची चोटी एवरैस्ट चोटी का सरताज।हे पर्वतराज हिमालय तू गुणों की खान ।युगों-युगों से अचल रह कर , करता हर कोई तुम्हारा गाता गुणगान।हे पर्वतराज… Continue reading हे पर्वत राज हिमालय
हौंसलों की उड़ान कविता
कदम बढ़ाए जा कदम बढ़ाए जा विश्वास दिल में थामें तू यूं ही कदम बढ़ाए जा।अंधेरी राह में भी तू ना हौसला खोए जा।।धीरज दिल में थामें तू यूं ही कदम बढ़ाए जा।मुश्किलों में भी तू यूं ही उम्मीदों का दामन थामें जा।।डर कर तूं यूं न अपने कदम पीछे उठाए जा आस का दीपक… Continue reading हौंसलों की उड़ान कविता
आओ सब मिलकर एक हो जाएं हम
आओ हम सब मिलकर एक हो कर गाएं,हम सब मिलकर एक हो कर गाएं। अच्छे काम कर के सभी को दिखाएं।अच्छे काम करके सभी को दिखाएं।नेक काम करके जीवन सफल बनाएं ।। आओ हम सब मिलकर एक हो कर गाएं, ,आओ सब मिल कर गुनगुनाएं।सब मिल कर गाएं,आओ हमसब मिल कर गांए।। इज्जत से हम… Continue reading आओ सब मिलकर एक हो जाएं हम
हिन्दी भाषा
अपनी भाषा से न रहो अनजान तुम।हिन्दी को सीखे बिना न रहो बेजान तुम। हिन्दी हमारी राजभाषा जन जन को है सुहातीप्रेम का मार्ग प्रशस्त कर, राष्ट्र की उन्नति का मुल आधार है कहलाती।इससे अछूता नहीं है कोई यह तो सभी के मनों को है लुभातीअपनें भावों की अभिव्यक्ति को सरल और सुगम है बनाती।।विभिन्न… Continue reading हिन्दी भाषा