शिक्षा का महत्व (2)

ज्ञान हमारे अंदर प्रकाश की ज्योति है जगाता। सभी का वर्तमान और भावी जीवन योग्य है  बनता।। ज्ञान से  सुप्त इंद्रिया जागृत होती है। उसकी कार्यक्षमता में दिन रात तरक्की होती जाती है।। शिक्षा का क्षेत्र है विस्तृत। जीवन से लेकर मृत्यु  पर्यन्त तक  चलने वाला शिक्षा का एक स्रोत।। प्राचीन काल में शिक्षा गुरुकुल… Continue reading शिक्षा का महत्व (2)

जादुई जूते

बहुत समय पहले की बात है कि एक छोटे से गांव में राजू अपने माता पिता के साथ रहा करता था। वह छठी कक्षा का छात्र था। उसके माता-पिता मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। वह बहुत ही भोला भला छात्र था। हर रोज स्कूल जाता था। अपने माता-पिता का हमेशा कहना मानता था।… Continue reading जादुई जूते

अभिमान का परिणाम

11/12/2018 किसी जंगल में एक शेर रहता था। जंगल में सभी जानवर शेर के आतंक से डर कर रहते थे।वह कभी ना कभी उनको मार कर खा जाया करता था। एक दिन सभी जानवरों ने राजा को कहा कि आपका कर्तव्य है हमारी रक्षा करना। आप ही हमें नुकसान पहुंच जाओगे तो हम कभी भी… Continue reading अभिमान का परिणाम

अच्छी आदतें भाग(2) | मुहावरों का प्रयोग

रामू घर आकर बोला मां मेरे पेट में चूहे हैं कूद रहे। मां धमा चौकड़ी मचा कर परेशान है कर रहे।। मां आकर बोली तू है मेरी आंख का तारा। प्यारा प्यारा राज दुलारा।। पढ़ाई में हमेशा ध्यान लगाना। कक्षा में इस बार भी अव्वल आ कर दिखाना।। रामू बोला बहना से :-तू क्यों मुझ… Continue reading अच्छी आदतें भाग(2) | मुहावरों का प्रयोग

अच्छी आदतें

मां द्वारा सिखाई आदतें जिंदगी में है काम आती। खाना खाने से पहले हाथों को धोना, हर रोज ब्रश करना, रोज नहाने की आदत भी अपना चमत्कार है दिखलाती।। इन आदतों से बच्चे का पढ़ाई में मन भी  है लगता। हर दम चेहरा खिला खिला है रहता ।। बिस्तर पर जूतों संग कभी ना चढ़े।… Continue reading अच्छी आदतें

(रिश्ते तो अनमोल होतें हैं) कविता

रिश्ते तो अनमोल होते हैं। ये तो भगवान की दी हुई शानदार नियामत होतें हैं।। । भाई बहन पति पत्नी सास ससुर और अनेको रिश्वते हैं दिए हुए। उन रिश्तों में अपनी अपनत्व की मिठास घोल दिजीए। उन रिश्तों का दामन खूबसूरती से पकड़े रखिए।। उन की खुशी के लिए अपनी तरफ से कभी पिछे… Continue reading (रिश्ते तो अनमोल होतें हैं) कविता

ईश्वर

एक दिन गोलू अपनी मां की गोद में झूमते हुए बोला मां चलो खेलते हैं ।उसकी मां अपने बच्चे को को प्यार देना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरा गोलू अपने पापा के प्यार से वंचित रह जाता है ।वह अपने पापा की गोद में बैठना चाहता है । उस बच्चे के पापा… Continue reading ईश्वर

कौवा लोमड़ी ओर रोटी(कविता)

एक लोमड़ी भूखी प्यासी आई पेड़ के नीचे। लगी देखने उस पेड़ को आंखें मींचे मींचे।। पेड़ पर था एक कौवा बैठा। नटखट चुलबुल  काला कौवा।। अपनी चोंच में रोटी का टुकड़ा भींचे भींचे। लगा देखनें लोमड़ी  को कर के नजरे नीचे।। लोमड़ी सोच रही थी मन में, क्यों न इसे बहलाती हूं। इस बेसूरे… Continue reading कौवा लोमड़ी ओर रोटी(कविता)

पश्चाताप (कविता)

किसी गांव में एक  बुढिया थी रहती। अपनें दुःख दर्द गांव वालों से  बयां किया  करती।। वह अकेले रह कर जीवन यापन किया करती। अपने बेटे बहु की रात दिन राह तका करती।। बुढापे में  सबसे ज्यादा  प्यार की थी जरुरत। अपनो से मिलने की आस के सहारे की थी हसरत।। एक दिन उसके बेटे… Continue reading पश्चाताप (कविता)

मासूम भाग(2)

समृति को डॉक्टर ने बताया कि वह  बेहोशी में भी   बघिरा बघिरा पुकार रहा था। लगता है बघिरा का इन से कोई खास लगाव  है।  स्मृति के मानस पटल पर सारी घटना चलचित्र की भांति खीची चली बघिरा के कारण ही यह सब कुछ हुआ। बघिरा को  दोषी ठहराते हुए  उसको भला बुरा कहने लगी।… Continue reading मासूम भाग(2)