कौवी की सूझबूझ

एक नदी के किनारे पर बहुत दूर से एक संपेरा सांप पकड़ने आया हुआ था। उस संपेरे नें तालाब पर खाना खाया पानी पिया। उसे वहां पर तभी एक सांप आता दिखाई दिया। वह सांप को पकड़ने के लिए जैसे ही उछला पानी के दलदल में वह नीचे गिर गया। उस ने सांप को वृक्ष… Continue reading कौवी की सूझबूझ

दीपावली ( कविता)

“वैभव और सम्पन्नता का प्रतीक  है दीपावली। राष्ट्र और समाज के प्राण का प्रतीक है दीपावली।। उज्ज्वलता और स्वच्छता का आवरण पहने हुए, घरों में जगमगाते दीपों के प्रकाश का त्योहार है दीपावली।।,,   दीपावली कार्तिक मास की आमावस्या को है मनाई जाती। हर घर घर में खुशी भरी लहर है छाई रहती।। जीवन की… Continue reading दीपावली ( कविता)

शन्नो चाची

शन्नो चाची को  सुल्तान पूर  गांव में आए हुए छःसाल हो चुके थे। किसी को मालूम नहीं था कि शन्नों चाची कहां से आई? उन्होंने भी अपना परिचय किसी को नहीं दिया था कि वह कौन है? कहां से आई है।? उनको देखकर ऐसा लगता था मानो साक्षात् देवी हो। अपने मधुर व्यवहार से सबको… Continue reading शन्नो चाची

प्रातः कालीन भ्रमण(कविता)

प्रातकाल व्यायाम करने की आदत डालो। तीन चार चक्कर अपने घर की फुलवारी के लगा डालो।   प्रातः भ्रमण आलस्य को है दूर भगाता। चुस्त्ती फुर्ती और ताजगी  को है  बढाता।। शौच आदि नित्य कर्मों से निवृत होकर सैर को जाओ। अपनी स्मरण शक्ति को बढ़ाकर कार्य क्षमता को बढाओ।। स्वच्छ हवा में टहलनें की… Continue reading प्रातः कालीन भ्रमण(कविता)

हॉस्टल और कॉलिज की मधुर यादें

दसवीं की परीक्षा के बाद परिणाम निकलने की उत्सुकता हरदम बनी रहती थी। इस बार अच्छे अंक आए  तो ममी- पापा मुझे कॉलिज और हौस्टल में प्रवेश दिलाना चाहते थे। अपने मन    में   हौस्टल का सपना  संजोए जल्दी से परिणाम निकलनें का इन्तजार करनें लगी। मुझे पता ही था कि  मैं अच्छे अंक ले कर… Continue reading हॉस्टल और कॉलिज की मधुर यादें

मेरी बगिया(कविता)

मेरी बगिया में खिले नन्हे नन्हे फूल। लाल पीले नीले और न्यारे न्यारे फूल।। मन के दर्पण को लुभाते फूल। कभी अधखिले तो कभी मुरझाए फूल।। फूलों से क्यारी की शोभा लगती है प्यारी प्यारी। इसकी खुश्बू से महकती है मेरे आंगन की फूलवारी।। चम्पा चमेली गेंदा और जूही के फूल। नन्ही नन्ही बेलों में… Continue reading मेरी बगिया(कविता)

अभिलाषा

एक छोटे से गांव में देवी शरण और उसकी पत्नी माधवी अपने बेटे साहिल के साथ रहते थे। वह मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। उनका बेटा साहिल  उनके घर के समीप ही गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ता था।। माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर बहुत ही सतर्क थे। उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर… Continue reading अभिलाषा

भिखारी

मैं जब भी सुबह सुबह कार्यालय से निकलती तो रेलवे प्लेटफॉर्म पर और बस स्टैंड पर भिखारियों को देखा करती। पटरियों पर एक तरफ सिकुडते हुए छोटे बच्चों को फटे वस्त्रों और नंगे पैरों से इधर उधर भागते हुए देखकर मेरी रूह कांप जाती और सोचती यह बेचारे छोटे-छोटे बच्चे इनका बचपन इस तरह क्यों… Continue reading भिखारी

हिरन और बंदर की सूझबूझ

किसी जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल का राजा था ।वह जानवरों को मारकर खा जाया करता था। सभी जीव-जंतु अपने राजा के अत्याचारों से तंग आ चुके थे। एक बार शेर ने सभी जीव जंतुओं को बुलाकर सभा बुलाई और कहा कि अगर तुम मुझे हर रोज एक जानवर या प्राणी मुझे… Continue reading हिरन और बंदर की सूझबूझ

फुर्सत के क्षण (कविता)

फुर्सत के क्षणों में आ बैठ मेरे पास। अपने मन के भावों को आ बांट मेरे साथ।। कल्पना की दुनिया से बाहर आ। यथार्थ की दुनिया में अपना भाग्य आजमा।। बीता समय लौटकर नहीं आता। वर्तमान से विमुख होकर जिया नहीं जाता।। भविष्य में अच्छे कार्य करके दिखा। अपनी मंजिल खुद तलाश करके दिखा।। जीवन… Continue reading फुर्सत के क्षण (कविता)