पेड़ कटने से नहीं रहेगी खुशहाली

पेड़ कटने से नहीं रहेगी हरियाली। इनको काटने से कैसे आएगी खुशहाली? वक्त से पहले ही जिंदगी थम जाएगी। खिलने से पहले ही प्रकृति उजड़ जाएगी।। पेड़ों की काट छांट करता रहा तो इन्सान वहशी बन जायेगा। इंसान नहीं वह तो दरिंदा कहलाएगा।। पेड़ कट जाएंगे तो जीव जंतु भी हाहाकार मचाएंगे । कम हवा… Continue reading पेड़ कटने से नहीं रहेगी खुशहाली

कोरोना

विधाता ने कैसा खेल रचाया? चीन से निकले इस वायरस नें चारों तरफ गज़ब ढाया। कल जो जाते थे दफ्तर वो घर में रहने को विवश हो गए। छोटा बच्चा, बड़ा, बूढ़ा, सभी घरों में ही व्याकुल होकर रह गए। कोरोना महामारी ने अपना कैसा तांडव रचाया? सभी मानव मन में उथल-पुथल मचाया । बच्चे… Continue reading कोरोना

बेचारी मुर्गी

कितनी सुन्दर कितनी न्यारी। यह मुर्गी है बहुत ही प्यारी।। इसके पंख हैं बहुत ही कोमल। हो जैसे पतों की हरी हरी कोंपल। नीतु बोली अरे बुद्धु, पंख तो हैं प्यारे। ये उड़ नहीं पातीं हैं सारे।। गीतू बोली भला ये क्यों नहीं उड़ पाती हैं ? दीवार पर या छज्जे तक ही पंहुच पाती… Continue reading बेचारी मुर्गी

मजदूर

हाय रे मजदूर! तेरी यह कैसी कहानी । मुंह से मूक, आंखों से झर झर बहता पानी।। भाग्य भी कैसे-कैसे खेल खिलाए। विधि के विधान को कौन मिटा पाए।। घर से दूर गली, मोहल्ले सड़कों और हर जगह काम करने को आतुर हो जाता। हाय ये मजदूर!तेरी यह कैसी कहानी। तेरी यह व्यथा किसी ने… Continue reading मजदूर

माया जाल

हाथ का मैल है यह पैसा। हो लोभ के फल जैसा।। सब कुछ यहीं रह जाना है। साथ किसी के कुछ नहीं जाना है।। यह जीवन तो है बहुमूल्य। पुण्य कमा कर इसे बनाया जा सकता है जीने तुल्य।। चोरी फसाद के सभी धंधों को छोड़ कर, ॑ दूसरों की थाली में झांकना छोड़ दे,।… Continue reading माया जाल

स्नेह का बंधन

जंगल में एक वृक्ष की शाखा पर कबूतर कबूतरी का जोड़ा था रहता साथ में मधुमक्खियों का झुंड भी था इकट्ठा रहता।। हर रोज कबूतर दाना चुगनें था जाता । थक हार कर घर वापस था आता। कबूतर था बेचारा भोला भाला वह तो था उसका सच्चा दिलवाला।। कुछ समय बाद कबूतर कबूतरी ने घौंसले… Continue reading स्नेह का बंधन

‘कहानी की गुल्लक आई,

कहानी की गुल्लक आई ,कहानी की गुल्लक आई। नई नई कहानियां और मनमोहक कविताएं भी लाई।। गुल्लक में छिपा है ज्ञान का बड़ा ही खजाना। इस का उद्देश्य है सभी का मनोरंजन करवाना।। यह ज्ञान हमारा है बढ़ाती । हमारा मार्गदर्शन कर सकारात्मक सोच है जगाती।। जिसकी हर एक सीख है सुहावनी और कहानियां भी… Continue reading ‘कहानी की गुल्लक आई,

शिब्बु

शिब्बु एक भोला भाला और मासूम सा बालक था ।बचपन से ही उसके माता-पिता उसे इस संसार से अलविदा कह चुके थे। वह अपने चाचा चाची जी के यहां रहने लगा था ।चाची उसे अपने घर में नहीं रखना चाहती थी ।चाची ने यहां तक कह दिया था कि उसे अनाथ आश्रम छोड़ आते हैं… Continue reading शिब्बु

एकता का फल

नदी के एक और छोटी सी पहाड़ी पर बहुत सी चींटियों का झुंड रहता था। वे सभी चीटियां झुड में रहकर खाना ढूंढने जाती थी ।बहुत समय तक वर्षा नहीं हुई ।चिंटीयों को बाहर खाना प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी। एक छोटी सी जीव और उस पर तपती दुपहरी धूप, खाना जुटाना उन… Continue reading एकता का फल

तिरंगा

झंडा ऊंचा रहे हमारा। इसके आगे सर्वदा नतमस्तक हो हमारा।। विश्व विजयी तिरंगा प्यारा। हो जैसे भारत माता की आंख का तारा।। इस पर गर्व से मर मिटनें का संकल्प हो हमारा। इसकी आन बान शान के लिए समर्पित हो जीवन हमारा।। झंडा ऊंचा रहे हमारा। इसके आगे नतमस्तक हो हमारा।। स्वतंत्रता संघर्ष का इतिहास… Continue reading तिरंगा