समाज में सूचनाओं को संप्रेषित करता है इंटरनेट। ज्ञान के प्रसारण में अहम भूमिका निभाता है इंटरनेट।। जो इसका पालन है करता। वह दूर बैठे बैठे ही अपने परिजनों से है मिल पाता।। यह एक आधुनिक युग की है जान। नई पीढ़ी की टेक्नोलॉजी की शान।। इसके अत्यधिक इस्तेमाल से लोगों का आपसी संपर्क कम… Continue reading इन्टरनेट का उपयोग
Category: Poems
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मेराघर
मेरा घर जगमग करता। सुंदर आकर्षक और साफसुथरा दिखता। मेरे मन के हर दर्पण को मोहित करता।। घर में दस कमरे हैं और एक है हॉल। जिस में हमेशा पढ़ाई करने का सदा रहता है माहौल।। खुली खुली खिड़कियां और एक है बाल्कनी। सुबह सुबह बाहर की ताजी हवा है आती और मेरे मन की… Continue reading मेराघर
समय की किमत
बेटी बचाओ बेटी पढाओ
बेटियों को पढ़ाना है मकसद हमारा। यही तो जीवन का यथार्थ है हमारा।। कब तक अपने जीवन को दिलासा देते रहेंगे। एक बेटे की तमन्ना में सब कुछ खोते रहेंगे।। बेटियों को पढ़ाओगे तभी खुशहाल बन पाओगे। दूसरों की बातों में ना आकर उनका भविष्य संवार पाओगे।। बेटियाँ तो अपने घर की नींव को ऊंचाइयों… Continue reading बेटी बचाओ बेटी पढाओ
वन हैं धरती मां की शान(कविता)
वन है धरती मां की शान और धरती मां की जान। इस को काट कर तुम न करो धरती मां का अपमान।। वनों को बचा कर, अपने जीवन को सफल बनाओ। एक की जगह दस- दस पेड़ लगा कर अपनी डूबती नैया को पार लगाओ।। वनों की लकड़ियों से दवाईयां भी है बनती। इनमें से… Continue reading वन हैं धरती मां की शान(कविता)
आलस्य(कविता)
जीवन शैली का एक विकार है आलस्य । मनुष्य का निकटवर्ती शत्रु है आलस्य।। सुबह का अमूल्य समय जो सो कर हैं गंवाते। वह जीवन में कभी भी तरक्की की सीढी नहीं चढ़ पाते।। अपना समय निरर्थक बातों में जो हैं गंवाते। अस्त व्यस्त दिनचर्या के कारण किसी भी काम को फुर्ती के साथ नहीं… Continue reading आलस्य(कविता)
प्रातः कालीन भ्रमण(कविता)
प्रातकाल व्यायाम करने की आदत डालो। तीन चार चक्कर अपने घर की फुलवारी के लगा डालो। प्रातः भ्रमण आलस्य को है दूर भगाता। चुस्त्ती फुर्ती और ताजगी को है बढाता।। शौच आदि नित्य कर्मों से निवृत होकर सैर को जाओ। अपनी स्मरण शक्ति को बढ़ाकर कार्य क्षमता को बढाओ।। स्वच्छ हवा में टहलनें की… Continue reading प्रातः कालीन भ्रमण(कविता)
मेरी बगिया(कविता)
मेरी बगिया में खिले नन्हे नन्हे फूल। लाल पीले नीले और न्यारे न्यारे फूल।। मन के दर्पण को लुभाते फूल। कभी अधखिले तो कभी मुरझाए फूल।। फूलों से क्यारी की शोभा लगती है प्यारी प्यारी। इसकी खुश्बू से महकती है मेरे आंगन की फूलवारी।। चम्पा चमेली गेंदा और जूही के फूल। नन्ही नन्ही बेलों में… Continue reading मेरी बगिया(कविता)
फुर्सत के क्षण (कविता)
फुर्सत के क्षणों में आ बैठ मेरे पास। अपने मन के भावों को आ बांट मेरे साथ।। कल्पना की दुनिया से बाहर आ। यथार्थ की दुनिया में अपना भाग्य आजमा।। बीता समय लौटकर नहीं आता। वर्तमान से विमुख होकर जिया नहीं जाता।। भविष्य में अच्छे कार्य करके दिखा। अपनी मंजिल खुद तलाश करके दिखा।। जीवन… Continue reading फुर्सत के क्षण (कविता)
गांव का मेला (कविता)
गांव के मेले का पर्व आया, पर्व आया। हम सब नें अपने गांव में जाकर मेला देखने का भरपूर आनंद उठाया।। इधरउधर पांडाल सजे हैं। लोग सज धज कर मेले मेंआतुर हो कर जमघट लगाएं खड़े हैं।। बच्चे सजधज कर मेला देखनें चलें हैं। बूढ़े और युवा वर्ग सभी अपने साथियों संग मेला देखने चले… Continue reading गांव का मेला (कविता)