दहेज(कविता)

दहेज है एक घोर अभिशाप। कुरीतियों के विकसित होने से बन गया यह महापाप।। दहेज रूपी पर्दे नें समाज के मस्तक पर कलंक थोप डाला। बेटियों के जीवन को अंधकारमय बना कर, कितनी अबोध कलियों को खिलने से पहले ही रौंद डाला।। न जाने कितनी और मसली जाएंगी। इस कुरीति का शिकार हो फांसी लगा… Continue reading दहेज(कविता)

जिन्दगी

जिंदगी में तो शिकायतें सभी किया करते हैं। जिंदगी में खामियां तो सभी ढूंढा करते हैं।। जिंदगी में अपनी जगह बना कर तो देख। फिर क्या नए सिलसिले हुआ करते हैं।। जिंदगी में ना शिकायतें होंगी ना मलाल होंगे। होंगी बस खुशियां ही खुशियां चारों और तरक्की के रास्ते खुल जाएंगे।। उन खुशियों को जहां… Continue reading जिन्दगी

समय की किमत

समय की किमत को पहचानो। समय पर  ही सब काम करनें की ठानों।। समय पर जागो, समय पर खाओ समय पर पाठशाला जाओ। समय पर ही हर काम करने की प्रेरणा अपनें मन में जगाओ।। समय के महत्व को  पहचानो। समय सारणी के अनुसार काम  कर नें की योजना अपने मन में ठानों।।   जीवन… Continue reading समय की किमत

मैं और मेरी किताबें

किताबों की दुनिया निराली है दोस्तों।   इसी से महकती है जीवन की फुलवारी दोस्तों।।   मैं और मेरी किताबें हरदम साथ रहते हैं। खुशी और गम दोनों साथ सहते हैं।।   कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हौसलों को बुलंद करती है। हरदम मुझे आगे बढ़ना सिखाती है।।   मैं और मेरी किताबें हरदम… Continue reading मैं और मेरी किताबें

जग में ऊंचा नाम करो

काम ऐसे करो कि जग में ऊंचा नाम हो। हर एक शख्स के लव पर एक तुम्हारा ही नाम हो।। मायूसियों में भी आशा कि किरणों का दामन थाम लो। खुशी से गले लगा कर उसका माथा चूम लो।। आत्मविश्वास और उत्साह जगाकर नेक काम करनें का संकल्प ठान लो। देश के काम आ सको… Continue reading जग में ऊंचा नाम करो

जिन्दगी की परख (कविता

एक दूसरे की बातें बना कर इधर उधर समय गंवाते हम। शायद यह बात सभी को समझा पाते हम।। अपने आप की कमियों को नहीं तलाशते। दूसरे में बुराईयां खोजते फिरते हम। अपनी कमियों से सीख ले कर दूसरों को भी समझा पाते हम।। उपदेश तो सभी को देते फिरते। अपने आप अमल करनें से… Continue reading जिन्दगी की परख (कविता

दोस्ती की मिसाल (कविता ))30/9/2018

मेरे दोस्त मुन्नू तुम इधर तो आओ, इधर तो आओ।। कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनी सुनाओ। मेरी खुशी में चार चांद तो लगाओ। चारचांद तो लगाओ। कुछ अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो। तुम क्यों हो मुझ से खफा खफा हो कर गाल फैलाए बैठ हो।? चेहरे पे झूठ का नकाब क्यों लिए बैठे हो? तुम्हें… Continue reading दोस्ती की मिसाल (कविता ))30/9/2018

(इतनी शक्ति मुझको को देना दाता)

इतनी शक्ति मुझको देना दाता। जग में काम सब के आ सकूं मैं। चेहरे पर सब के खुशी का नूर ला सकूं मैं। मन में सभी के घर कर के खुशी की उमंग जगा सकूं मै। हर रोते बिलखते चेहरों से। उदासी की परत को हटा सकूं मैं। हंसी की मुस्कान बन कर। सभी के… Continue reading (इतनी शक्ति मुझको को देना दाता)

मेरी रानी बिल्ली

मेरी रानी बडी़ ही सयानी जैसे हो वह घर की महारानी। रंगइसका श्वेत और मखमल जैसा। बिल्कुल मक्खन की टिकिया जैसा। रानी सुनकर दौड़ लगाकर मेरे पास आती है। अपनी नीली और चमकदार आंखों से सब के मन को लुभाती है। दूध रोटी और बिस्किट चबा चबा कर खा जाती है। कभी कभी चूहों को… Continue reading मेरी रानी बिल्ली