नन्हें मुन्नों तुम भी जागो

सुबह हो गई तुम भी जागो। नन्हे-मुन्ने तुम भी जीवन की भागदौड  में आगे ही आग भागोे।। चिड़िया भी चहचहा  रही है । अपनी चहचाहट से मधुर संगीत सुना रही है। धूप भी चमक कर अपनी छटा को लुभा रही है।। चांद और तारे भी छुप गए हैं। धरती माता की आगोश में समा गए… Continue reading नन्हें मुन्नों तुम भी जागो

ज़िन्दगी की परख

एक दूसरे की बातें बना कर इधर उधर समय गंवाते हम। शायद यह बात सभी को समझा पाते हम।। अपने आप की कमियों को नहीं तलाशते। दूसरे में बुराईयां खोजते फिरते हम। अपनी कमियों से सीख ले कर दूसरों को भी समझा पाते हम।। उपदेश तो सभी को देते फिरते। अपने आप अमल करनें से… Continue reading ज़िन्दगी की परख

रानी को क्रिसमस का उपहार

क्रिसमस का त्योहार आया। बच्चों में खुशी की रौनक लाया ।। सभी बच्चों के चेहरे खिल खिला उठे बच्चे सांता क्लॉज़ से मिलने को तिल मिला उठे ।। इस  साल भी सांता क्लॉज आएंगें। क्रिसमस पर बच्चा बनकर बच्चों के संग मुस्कुराएंगे ।। बच्चों में खिलौने और मिठाइयां देकर एक दूसरे को देंगे बधाई ।… Continue reading रानी को क्रिसमस का उपहार

नन्हें सिपाही कविता

हम बच्चे हैं प्यारे, दुशमन से ना हारे। आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।। हम इस उपवन के हैं नन्हे नन्हे वीर। इस धरा की है आने वाली तकदीर।। अपने हाथों की लकीरें खुद लिख कर लाए हैं। हम इस भारत के भाग्य विधाता बन कर आए हैं।। हम बच्चे हैं प्यारे,  दुशमन… Continue reading नन्हें सिपाही कविता

बहू कविता

बहू को बेटी की नजर से देखो अरे दुनिया वालो। बहू में अपनी बेटी को तलाशों दुनिया वालों।। बेटी और बहू में फर्क मत करना। जग में अपनी जग हंसाई मत करना।। जितना प्यार अपनी बेटी को करते हो। उससे भी वही प्यार करना दोस्तों।। उसको भी वही दुलार देने की कोशिश करना । वंहीं… Continue reading बहू कविता

कृषक कविता

त्याग तपस्या और श्रम की साक्षात मूर्ति है किसान। नगरवासियों  के अन्न्दाता सृष्टि पालक हैं किसान।। धूप गर्मी सर्दी वर्षा सब सहन करता  रहता। भगवान विष्णु के समान जग का पालन करता रहता। घास फूस की झोंपड़ीयों में रह कर दिन रात कोल्हू के बैल की तरह पिस्ता रहता हर दम  किसान। सेवा और परिश्रम… Continue reading कृषक कविता

मधुर बचपन के पल

मधुर बचपन के वे क्षण याद आते हैं। धुंधली यादों के साए नजर आते हैं ।। बचपन की अठखेलियां के वे चंचल लम्हे याद आते हैं। दोस्तों संग मस्ती के  वे क्षण याद आते हैं।। कैसे भुलें  कैसे भुलें   मां पापा का प्यार। नाना नानी का लाड दुलार।। मधुर बचपन के वे  स्मृति चिन्ह मानस… Continue reading मधुर बचपन के पल

छुक छुक छुक करती आई रेल

छुक छुक छुक करती आई रेल। धूम धूम धूम करती आई रेल।। छक छक  छुक छुक करती आई रेल। खाती कोयला बिजली और तेल।। छक छक  छूक छूक करती आई रेल। भूक भूक  भक भक करती आई रेल।। यात्रियों को गंतव्य स्थान पर पहुंचाती  है। हर जगह अपना करिश्मा दिखाती है। पटरी पर चल कर… Continue reading छुक छुक छुक करती आई रेल

सच्ची राह कविता

वृद्धों का ना तुम करो अपमान। भविष्य की संचित निधि समझकर सदा करो उनका सम्मान।। इन कीमती निधि को यूं ना तुम ठूकराना।  अपने संस्कारों  से तुम यूं ना पीछे हट जाना।। उनके साथ रह कर ही आती है घर में खुशहाली। हीरे मोती से बढ कर है घर में उनकी शोभा निराली।। अपने मां… Continue reading सच्ची राह कविता

मां की सीख

मां बेटे से बोली। तेरे संग है बच्चों की टोली।। तुम हरदम उपद्रव क्यों मचाते हो? अपनी चीजें हर जगह क्यों फैलाते हो।। रिंकू बोला मैं तो हूं आपका राज दुलारा। आपका सदा ही रहूंगा आंख का तारा।। मां बोली  तू अगर मगर क्यों करता है? मुझे परेशान कर  अपना राग अलापता है।। चुन्नू बोला… Continue reading मां की सीख