विधाता ने कैसा खेल रचाया? चीन से निकले इस वायरस नें चारों तरफ गज़ब ढाया। दफ्तर जानें वालों पर भी गजब का कहर ढाया।। छोटा बच्चा, बड़ा, बूढ़ा, सभी घरों में ही व्याकुल होकर रह गए। घर कि चार दिवारी में बन्द हो कर सिमट गए।। कोरोना महामारी ने अपना कैसा तांडव रचाया? सभी मानव… Continue reading कोरोना
Category: Poems
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बेचारी मुर्गी
कितनी सुन्दर कितनी न्यारी। यह मुर्गी है बहुत ही प्यारी।। इसके पंख हैं बहुत ही कोमल। हो जैसे पतों की हरी हरी कोंपल। नीतु बोली अरे बुद्धु, पंख तो हैं प्यारे। ये उड़ नहीं पातीं हैं सारे।। गीतू बोली भला ये क्यों नहीं उड़ पाती हैं ? दीवार पर या छज्जे तक ही पंहुच पाती… Continue reading बेचारी मुर्गी
मजदूर
हाय रे मजदूर! तेरी यह कैसी कहानी । मुंह से मूक, आंखों से झर झर बहता पानी।। भाग्य भी कैसे-कैसे खेल खिलाए। विधि के विधान को कौन मिटा पाए।। घर से दूर गली, मोहल्ले सड़कों और हर जगह काम करने को आतुर हो जाता। हाय ये मजदूर!तेरी यह कैसी कहानी। तेरी यह व्यथा किसी ने… Continue reading मजदूर
माया जाल
हाथ का मैल है यह पैसा। हो लोभ के फल जैसा।। सब कुछ यहीं रह जाना है। साथ किसी के कुछ नहीं जाना है।। यह जीवन तो है बहुमूल्य। पुण्य कमा कर इसे बनाया जा सकता है जीने तुल्य।। चोरी फसाद के सभी धंधों को छोड़ कर, ॑ दूसरों की थाली में झांकना छोड़ दे,।… Continue reading माया जाल
स्नेह का बंधन
जंगल में एक वृक्ष की शाखा पर कबूतर कबूतरी का जोड़ा था रहता साथ में मधुमक्खियों का झुंड भी था इकट्ठा रहता।। हर रोज कबूतर दाना चुगनें था जाता । थक हार कर घर वापस था आता। कबूतर था बेचारा भोला भाला वह तो था उसका सच्चा दिलवाला।। कुछ समय बाद कबूतर कबूतरी ने घौंसले… Continue reading स्नेह का बंधन
‘कहानी की गुल्लक आई,
कहानी की गुल्लक आई ,कहानी की गुल्लक आई। नई नई कहानियां और मनमोहक कविताएं भी लाई।। गुल्लक में छिपा है ज्ञान का बड़ा ही खजाना। इस का उद्देश्य है सभी का मनोरंजन करवाना।। यह ज्ञान हमारा है बढ़ाती । हमारा मार्गदर्शन कर सकारात्मक सोच है जगाती।। जिसकी हर एक सीख है सुहावनी और कहानियां भी… Continue reading ‘कहानी की गुल्लक आई,
तिरंगा
झंडा ऊंचा रहे हमारा। इसके आगे सर्वदा नतमस्तक हो हमारा।। विश्व विजयी तिरंगा प्यारा। हो जैसे भारत माता की आंख का तारा।। इस पर गर्व से मर मिटनें का संकल्प हो हमारा। इसकी आन बान शान के लिए समर्पित हो जीवन हमारा।। झंडा ऊंचा रहे हमारा। इसके आगे नतमस्तक हो हमारा।। स्वतंत्रता संघर्ष का इतिहास… Continue reading तिरंगा
बरसो बादल
घुमड़ घुमड़ कर बरसो बादल ।गरज गरज कर गरजो बादल।।रिमझिम रिमझिम वर्षा कर।झमझम झमझम बरसो बादल।। कड़क कड़क कर कड़को बादल।घुमड़ घुमड़ कर बरसो बादल।।हमारे सुखचैन और उल्लास के लिए जमकर बरसो बादल।बिजली की घोर गर्जना कर ।शंख रुपी नाद के समान बिगुल बजा कर बरसो बादल।।नए नए पौधों के अंकुर तुम्हें हम पुकार रहे।अपनी… Continue reading बरसो बादल
नारी
मातृ शक्ति का रूप हूं । घर की लक्ष्मी का स्वरूप हूं ।। अपने परिवार की खुशियों का ताज हूं। घर के आंगन की लाज हूं ।। बच्चों के लाड़ प्यार स्नेह और दुलार का जीता जागता स्मारक हूं । उनके अपनत्व के स्पर्श की एक इबारत हूं।। घर में और कार्यालय में दोनों जगह… Continue reading नारी
जीवन में नेक काम करना सीखो
नदियों के पानी का सम्मान करना सीखो। अपने जीवन में नेक काम करना सीखो।। धरती मां वसुंधरा का सम्मान करना सीखो। प्रकृति से जुड़कर नेक काम करना सीखो।। अपने आसपास प्रदूषित वातावरण मत पनपाओ। अपने अराध्य को प्रसन्न करने वालों, नदी में कूड़ा करकट जहरीला पैदार्थ मत फैलाओ।। धरती मां की छाती को भेद कर,… Continue reading जीवन में नेक काम करना सीखो