पोते का प्यार

पारो और माधव के परिवार में उनका बेटा अनीश। माधव एक ऑफिस में काम करता था पार्वती स्कूल में शिक्षिका थी। पारो सारा समय सजने-संवरने में रहती थी। बड़ी बड़ी आंखों वाली लंबे लंबे बालों वाली। अपनी आंखों को मटकाती रहती।  सजने संवरनें के इलावा उसे घर का काम करने में मजा नहीं आता था।… Continue reading पोते का प्यार

मां की सीख

मुन्नी को स्कूल के वितरण समारोह में ईनाम मिला था। एक छोटी सी गुल्लक  पाकर मुन्नी खुशी से फूले नहीं समा रही थी। वह दौड़ कर अपने दादाजी के पास आई बोली दादाजी। मुझे आज गुल्लक ईनाम में मिली है। दादा जी बोले बेटा बैठ मेरे पास। आज मैं तुम्हें एक बहुत ही अच्छी बात… Continue reading मां की सीख

सत्य बुद्धि की सूझबूझ

बहुत समय पहले की बात है कि गिरसेन नामक राजा के राज्य में लोग सुखी थे। लोग अपने राजा की बात का अनुसरण करते थे। वह भी हर एक न्याय बड़ी सूझबूझ से करता था। राजा जो भी बात अपनी प्रजा जनों को कहता था वह बात प्रजा के लोगों को माननी ही पड़ती थी।… Continue reading सत्य बुद्धि की सूझबूझ

पवित्र रिश्ता

 बहुत समय बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में  रघु नाम का एक किसान रहता था। वह हर दिन बहुत मेहनत करता और अपनी पत्नी और बच्चे का पेट भरता था। उसकी एक बेटी थी वह उसे हमेशा बहुत ही खुश रखता था। मेहनत करके वह अपने घर की आजीविका बसर कर रहा… Continue reading पवित्र रिश्ता

दादा जी की सीख

, किसी गांव में एक वृद्ध दंपति रहते थे। उनके साथ उनके दो बच्चे रहते थे। उन बच्चों के माता पिता मर चुके थे। वे दोनों बच्चे अपने दादा दादी के पास रहते थे। चिंटू और बन्टू दोनों भाई चिंटू बड़ा था और बन्टू छोटा। चिंटू 10 साल का हो चुका था और बन्टू केवल… Continue reading दादा जी की सीख

पुरानी हवेली का किस्सा

तीन दोस्त थे। अभिजीत अभिषेक और अभिनव। तीनों एक साथ कॉलेज में पढ़ते थे अभिषेक के पिता एक बड़े व्यापारी थे। अभिजीत और अभिषेक के पिता मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। तीनो बहुत ही पक्के दोस्त हुए कॉलेज इकट्ठे जाते इकट्ठे वापिस आते।  1 दिन तीनों आपस में बातें कर रहे थे अभिषेक… Continue reading पुरानी हवेली का किस्सा

दर्जी और उसका दोस्त पुरु

एक दर्जी था। वह  रोज लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आजीविका चला रहा था। लोगों को उस दर्जी से कपड़े सिलवाना अच्छा लगता था क्योंकि वह लोगों के कपड़े बहुत ही अच्छे ढंग से उनके नाप के अनुकूल सिलाई करता था। उसका एक बेटा था वह कॉलेज में पढ़ता था। वह अपने पापा को कहता… Continue reading दर्जी और उसका दोस्त पुरु

साहसी भोलू

एक लड़का था भोलू हमेशा शरारतें किया करता था। वह अपने दोस्तों के साथ जंगल में गौवों को चराने ले कर जाता था। काफी देर तक पशुओं को  चरा कर जंगल से वापस आता था। उसके दोस्त हमेशा उस से शर्त लगाते थे कि जो कोई जंगल की गुफा में जाकर वापस आएगा वही इंसान… Continue reading साहसी भोलू

उपहार

माधोपुर के एक छोटे से कस्बे में सविता अपने बेटे के आने की राह देख रही थी। सविता के पति सेना में शहीद हुए थे। उसके बेटे ने भी कसम खाई थी कि वह भी अपने पिता की भांति एक वीर सैनिक बनेगा। अपने बेटे की हट के कारण उसकी एक न चली सविता के… Continue reading उपहार