रंग

छोटू घर आकर अपने पापा से बोला पापा पापा हम कब गांव जाएंगे। वहां मैं अपने चाचा जी के बेटे से मिलूंगा। छोटू के पापा बोले हम जल्दी ही गांव चलेंगे। छोटू खुशी के मारे चिल्ला रहा था। आज हम गांव जा रहे हैं घर के बाहर अपने छोटे-छोटे दोस्तों को कह रहा था मैं… Continue reading रंग

पिन्कु और जादू की परियां

एक बच्चा था उसका नाम था पिंकू। वह बहुत ही होनहार लड़का था वह हर काम को बहुत होशियारी से किया करता था। एक दिन जब वह स्कूल से आ रहा था तो उसे एक जूता दिखाई दिया। वह इतना चमचम कर रहा था वैसे वह उस जूते को देखकर मोहित हो गया। उसने वह… Continue reading पिन्कु और जादू की परियां

देर आए दुरुस्त आए

पियूष जल्दी से घर पहुंचना चाहता था क्योंकि आज वह काफी थक चुका था। ऑफिस में बॉस से कहा सुनी हो गई घर में पत्नी से नोकझोंक इस आदत से वह बहुत ही तंग आ चुका था । कुछ दिनों से उसे बहुत ही गुस्सा आ रहा था क्योंकि घर पर उसकी पत्नी उससे हर… Continue reading देर आए दुरुस्त आए

सोनू और उसका नन्हा दोस्त जौनी।

छवि और सौरभ के एक बेटा था अपनी नानी के पास से वापस अपने गांव लौट रहा था। सोनू केवल पांच वर्ष का था। गाड़ी से आते हुए अपनी मम्मी से बोला मां मैं लघुशंका जाना चाहता हूं। उसके मम्मी पापा ने कार एक ओर खड़ी कर दी। उसे कहा बेटा यहां उतर कर लो।… Continue reading सोनू और उसका नन्हा दोस्त जौनी।

परिवर्तन

यह कहानी एक छोटे से परिवार की है यह कहानी दो भाइयों की है। दोनों परिवार साथ-साथ रहते थे। रमाकांत और रविकांत। रमाकांत की शादी भी होने जा रही थी रविकांत उसके चाचा जी का बेटा था। दोनों परिवार साथ साथ ही रहते थे इसलिए घर में शादी की खूब चहल पहल थी रमाकांत ने… Continue reading परिवर्तन

धरती की मूल्यवान धरोहर(2)

नंदलाल अपना परीक्षा परिणाम जानने के लिए स्कूल गया था। उसका बारहवीं कक्षा का परिणाम आने वाला था। वह मन ही मन सोच रहा था कि हे भगवान इस बार तो मुझे पास कर ही दो। यह पढ़ाई वढ़ाई मेरे बस की बात नहीं। बस इंटरव्यू देकर कहीं नौकरी कर लूंगा। उसको पढ़ने का शौक… Continue reading धरती की मूल्यवान धरोहर(2)

बुराई का फल

किसी गांव में एक बुढ़िया अपने बेटे के साथ एक छोटे से गांव में रहती थी। वह बहुत ही अच्छी थी। सोचती कि जब उसे बिना मेहनत किए सब कुछ हासिल हो जाता है तो मैं क्यों मेहनत करूं? क्योंकि इसका बेटा कमा कर ले आता था। उसी से उसके दिन व्यतीत हो रहे थे।… Continue reading बुराई का फल

नटखट तोषी

शिवप्रसाद जैसे ही अपने ऑफिस जाने की तैयारी करते उनकी छत पर हर रोज एक बंदर आकर मंडराने लगता। शिव प्रसाद को कभी उस बंदर पर क्रोध आता कभी सोचते इस बंदर ने मेरा क्या बिगाड़ा है बेचारा भूखा है तभी तो मेरे घर की छत पर रोटी ढूंढने लगता है। जब वह उसे हासिल… Continue reading नटखट तोषी

जादुई अंडा

एक शिकारी था। उसके पास बहुत सारी मुर्गियां थीं। मुर्गियों के अंडों को बाजार में बेच देता था। एक दिन शिकारी उन मुर्गियों के अंडों को बेचने गया तो उसने सब अंडों को बाजार में बेच दिया। एक आखरी अंडे को देख कर हैरान हो गया वह अंडा बहुत ही बड़ा था। वह उसे बेचना… Continue reading जादुई अंडा

पवित्र बंधन

, अमन कार्तिक और साहिल तीन दोस्त थे। तीनों इतने पक्के दोस्त थे। वह बाजार में पिकनिक पर और जब कहीं भी बाहर घूमने का प्रोग्राम होता तीनों एक साथ इकट्ठे जाते थे। तीनों भी पढ़ाई में ठीक थे। अमन इंजीनियर बनना चाहता था। कहीं ना कहीं अमन के माता-पिता उसे कहते थे कि तुम्हें… Continue reading पवित्र बंधन