चोर सिपाही

बिहार के एक छोटे से गांव में  जुम्मन एक रेडी चालक के रूप में काम करता था। वह मेहनत से जो कुछ भी कमा कर लाता उससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसने अपने बेटे लाखन को भी स्कूल में डाल दिया था। लाखन बहुत ही समझदार बच्चा था। जब वह… Continue reading चोर सिपाही

व्याध और हंसों का झुन्ड

पानी की तलाश में एक हंसो का झुन्ड   सरोवर मे  था आया।  सरोवर के पास व्याध को देख कर था घबराया।।  हंसिनी के   बच्चे का हाथ था छूट गया। इस आपाधापी में वह बच्चा अपनी मां से बिछुड़ गया।। अपनी मां से बिछुड़ने  पर वह पंहुचा एक घने जंगल में। वहीं पर एक व्याध भी… Continue reading व्याध और हंसों का झुन्ड

पायल

हर रोज की तरह पायल स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी ।पायल की मम्मी ने कहा बेटा नाश्ता तो कर ले ।परंतु पायल ने मम्मी की बात अनसुनी कर दी और कहा मुझ  नाश्ता नहीं करना है। पायल बहुत ही जिद्दी लड़की थी ।उसकी इस जिद के कारण मम्मी- पापा हमेशा उस से… Continue reading पायल

ईमानदारी का तोहफा

बहुत समय पहले की बात है बेलापुर गांव में एक बहुत ही मेहनती और ईमानदार महिला रहती थी ।वह इतनी मेहनत करती कि उसकी गांव गांव में दूर-दूर तक  चर्चा  की जाती थी वह सुबह जल्दी उठती सुबह के कामों से निवृत होकर सुबह-सुबह ही अपने खेतों में पानी देती। उसने अपने घर के पास… Continue reading ईमानदारी का तोहफा

(मन का दर्पण है सुन्दर कल्पनाएँ) कविता

मन का दर्पण है सुन्दर कल्पनाएँ। अतीत में झांकने का अवसर देती है कल्पनाएं।। व्यक्ति के चेहरे पर रंगत का दौर लाती हैं कल्पनाएँ। जीवन को नई उम्मीद का चेहरा दिखाती हैं सुन्दर कल्पनाएं।। हमारे अंदर छिपी हुई रचनात्मक  प्रवृति को  उभारती हैं कल्पनाएँ। नकारात्मकता और सकारात्मकता का अनुभव कराती हैं कल्पनाएं।। मधुर सपने दिखाती… Continue reading (मन का दर्पण है सुन्दर कल्पनाएँ) कविता

रमिया

रमिया अपनी जुडवां बेटियों के साथ रेल की पटरी पर बैठे बैठे गाड़ी के आने का इंतजार कर रही थी। वह अपने मन में विचार कर रही थी गाड़ी न जानें कब जैसे आएगी। वह अपनी बेटियों को साथ लेकर काम करनें के लिए जाती थी। उसे और उसकी बेटियों को भूख भी बड़े जोर… Continue reading रमिया

(मस्ती की पाठशाला) कविता

लुक्का छिपी लुकाछिपी खेल खेल कर साथ मिल कर खेलो खेल। हम सब बच्चे मिलकर बनाएं अपनी रेल।। छुक छुक छुक छुक करती आई रेल। सीटी बजाती आई रेल।। एक दो तीन चार, पांच छः सात, आठ नौ दस ग्यारह। आज मौसम बहुत ही प्यारा।। मेरे साथ मिलकर तुम गांओ यह गाना। डम डम डिगा… Continue reading (मस्ती की पाठशाला) कविता

अनमोल हीरा

गिरिजा के पिता  रवि बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे अौर मम्मी ऑफिस में काम करती थी। गिरजा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी ।उन्होंने उसे बहुत ही लाड़-प्यार से पाला था ।वह बहुत ही होनहार थी। उसका एक छोटा भाई भी था वह बहुत ही छोटा था गिरिजा बहुत ही होशियार थी… Continue reading अनमोल हीरा

नदी की कलकल धारा

नदी की बहती कलकल धारा। प्रकृति की छटा का अद्भूत नज़ारा वो तृषित धरा की प्यास बुझाती  नदियाँ। मन के  उथल पुथल भावों को निर्मल करती नदियाँ।। शान्त और तेज रफ्तार से बहती नदियाँ । दूर दूर से हर आने जानें राहगीरों की प्यास  और थकान को शान्त करती नदियाँ।। अलग अलग धारा में बहनें… Continue reading नदी की कलकल धारा

एहसास

स्कूल की घंटी जैसे ही बजी सभी बच्चे अपनी अपनी कक्षाओं में भागे। मैडम अंजली बच्चों को कक्षा में समय पर ना आने के लिए हमेशा डांट दिया करती थी। उन  अध्यापिका से सभी बच्चे डरते थे।  जब भी वह कक्षा में आती शांत सा वातावरण कक्षा में छा जाता। उन का खौफनाक चेहरा बच्चों… Continue reading एहसास