सबसे बड़ा विद्यालय है परिवार हमारा।


परिवार के सदस्य शिक्षक बन कर संवारते हैं भविष्य हमारा। जिंदगी की पाठशाला में मां शिक्षक बन जाती है। 2 ।
जिम्मेदारी का एहसास करा कर , अनुशासन का पाठ सिखाती है।
प्यार, दुलार,डांटकर हर बात समझाती है।हर बात समझाती है।
गुरु और माता-पिता बन कर सभ्य इंसान बनाती है।
माता पिता की छत्रछाया में बच्चे नैतिकता को अपनाते हैं।
अच्छा इंसान बन कर भविष्य उज्जवल बनाते हैं।
कामयाब हो कर ईमानदारी की राह अपनाते हैं।
आपस में मिलजुल कर रहना ये भी मां सिखाती है।
मिल बांट कर खाना और अच्छे संस्कार दिलाती है। कर्तव्य बोध करा कर उन्हें स्वावलंबी बनाती है।
विपरित परिस्थितियों में भी सम रहना मां ही सिखलाती है।
सही और झूठ में अन्तर करना भी सिखलाती है।
महान पुरुषों के पद चिन्हों पर अग्रसर होना सिखलाती है।
माता पिता की सीख बच्चों की दुनिया बदल देती है।
कठिन संघर्षों मे भी अडिग रह कर, शानदार जीत दिलवाती है। शानदार जीत दिलवाती है।
उनके व्यक्तित्व को निखार कर ,उनका भविष्य उज्जवल बनाती है।
उनका भविष्य उज्जवल बनाती है।।

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