सत्य बुद्धि की सूझबूझ

बहुत समय पहले की बात है कि गिरसेन नामक राजा के राज्य में लोग सुखी थे। लोग अपने राजा की बात का अनुसरण करते थे। वह भी हर एक न्याय बड़ी सूझबूझ से करता था। राजा जो भी बात अपनी प्रजा जनों को कहता था वह बात प्रजा के लोगों को माननी ही पड़ती थी।… Continue reading सत्य बुद्धि की सूझबूझ

पवित्र रिश्ता

 बहुत समय बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में  रघु नाम का एक किसान रहता था। वह हर दिन बहुत मेहनत करता और अपनी पत्नी और बच्चे का पेट भरता था। उसकी एक बेटी थी वह उसे हमेशा बहुत ही खुश रखता था। मेहनत करके वह अपने घर की आजीविका बसर कर रहा… Continue reading पवित्र रिश्ता

दादा जी की सीख

, किसी गांव में एक वृद्ध दंपति रहते थे। उनके साथ उनके दो बच्चे रहते थे। उन बच्चों के माता पिता मर चुके थे। वे दोनों बच्चे अपने दादा दादी के पास रहते थे। चिंटू और बन्टू दोनों भाई चिंटू बड़ा था और बन्टू छोटा। चिंटू 10 साल का हो चुका था और बन्टू केवल… Continue reading दादा जी की सीख

पुरानी हवेली का किस्सा

तीन दोस्त थे। अभिजीत अभिषेक और अभिनव। तीनों एक साथ कॉलेज में पढ़ते थे अभिषेक के पिता एक बड़े व्यापारी थे। अभिजीत और अभिषेक के पिता मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। तीनो बहुत ही पक्के दोस्त हुए कॉलेज इकट्ठे जाते इकट्ठे वापिस आते।  1 दिन तीनों आपस में बातें कर रहे थे अभिषेक… Continue reading पुरानी हवेली का किस्सा

दर्जी और उसका दोस्त पुरु

एक दर्जी था। वह  रोज लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आजीविका चला रहा था। लोगों को उस दर्जी से कपड़े सिलवाना अच्छा लगता था क्योंकि वह लोगों के कपड़े बहुत ही अच्छे ढंग से उनके नाप के अनुकूल सिलाई करता था। उसका एक बेटा था वह कॉलेज में पढ़ता था। वह अपने पापा को कहता… Continue reading दर्जी और उसका दोस्त पुरु

साहसी भोलू

एक लड़का था भोलू हमेशा शरारतें किया करता था। वह अपने दोस्तों के साथ जंगल में गौवों को चराने ले कर जाता था। काफी देर तक पशुओं को  चरा कर जंगल से वापस आता था। उसके दोस्त हमेशा उस से शर्त लगाते थे कि जो कोई जंगल की गुफा में जाकर वापस आएगा वही इंसान… Continue reading साहसी भोलू

उपहार

माधोपुर के एक छोटे से कस्बे में सविता अपने बेटे के आने की राह देख रही थी। सविता के पति सेना में शहीद हुए थे। उसके बेटे ने भी कसम खाई थी कि वह भी अपने पिता की भांति एक वीर सैनिक बनेगा। अपने बेटे की हट के कारण उसकी एक न चली सविता के… Continue reading उपहार

वारिस

शैलेश के परिवार में उनका बेटा सोनू था। वह अपने बेटे सोनू से बहुत प्यार करते थे। वह दसवीं कक्षा में आ चुका था। उसके पिता की दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। सोमू अपने दादाजी रामप्रसाद जी के पास रहने लगा। उनके  दादा जी अपने पोते को बहुत प्यार करते थे। वह सोचते थे… Continue reading वारिस

चुन्नू और उसके प्रश्न

चुन्नू बहुत ही होशियार बालक था। एकदिन उसके बाबा ने उसे अपने पास बुलाया बेटा अब तुम भी स्कूल जाना शुरु कर दोगे। तुम्हें हर विषय की जानकारी होनी चाहिए। चुन्नू दौड़ा दौड़ा दादाजी के पास आकर बोला दादा जी दादा जी मैं भी अब स्कूल पढ़ने जाऊंगा उसके दादा जी बोले ठीक है। अपने… Continue reading चुन्नू और उसके प्रश्न