नन्हें सिपाही कविता

हम बच्चे हैं प्यारे, दुशमन से ना हारे।

आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।।

हम इस उपवन के हैं नन्हे नन्हे वीर।

इस धरा की है आने वाली तकदीर।।

अपने हाथों की लकीरें खुद लिख कर लाए हैं। हम इस भारत के भाग्य विधाता बन कर आए हैं।।

हम बच्चे हैं प्यारे,  दुशमन से ना हारे।

आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।। तूफानों से भी नहीं है डरने वाले।

आंधियों से भी है टकराने वाले।।

शत्रु को मिलकर सबक सिखाएंगे।

उनको छठी का  दूध याद दिलाएंगे।।

उनके सामने घुटने नहीं टेकेंगे।

उनको युद्ध में भी कौशल दिखाकर नानी याद दिलाएंगे।।

हम बच्चे हैं प्यारे, दुश्मन से न हारे।

आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।।

हम तो हैं इस भारत की तकदीर।

आने वाले कल की सुंदर तस्वीर।।

हम बच्चे हैं प्यारे  दुशमन से ना हारे।

आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे। हम इस नवयुग के है सुंदर सुंदर फूल।

नहीं करेंगे हम कभी भी जीवन में कोई भूल।।

कलयुग में भी कमाल कर दिखाएंगे।

अपनी मेहनत के दम पर आसमान को छू कर दिखाएंगे।।

मार्ग में आनें वाली बाधाओं का डट कर सामना करेंगे।

दुश्मनों के छक्के छुडाएंगे।।

उनको अपनें देश से मार भगाएंगे।

उनके लिए खुद ही  सबक बन जाएंगे।।

हम बच्चे हैं प्यारे, दुशमन से ना हारे।

आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।।

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