स्वच्छता का संदेश

 (स्वच्छता का संदेश) भाग(2) “ आओ हम सब मधुर स्वर में एक साथ गुनगुनाएं। मिलकर हम सब अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं।। ,, 1()धातु, शीशा, गता कागज प्लास्टिक पॉलिथीन नायलॉन कूड़ा करकट  इधर-उधर नहीं फैलाएं। (2 )अनुपयोगी सामान को कबाड़ी को बेच कर आएं।। (3) हम कूड़े कचरे को जलाएं। (4)साग सब्जी और फलों के… Continue reading स्वच्छता का संदेश

आओ स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें

आओ स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें। खुद को तरक्की की राह पर हर दम आगे बढ़ाएं। स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें।। दूसरों से पहले खुद को प्यार करना सिखाएं। खुद की सराहना करके दुनिया में सबसे ऊपर निकल कर दिखाएं। अपनी खूबियों को पहचान कर अपने में आत्मविश्वास जगाए।। खुद को… Continue reading आओ स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें

रंजिश

पूजा और पारुल  दोनों पक्की सहेलियाँ थीं। वे दोनों कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रही थी। दोनों ही पढ़ने में तेज थी। पारुल के माता-पिता स्वच्छंद विचारों के थे, लेकिन पूजा के माता-पिता थोड़ा रूढ़िवादी विचारों के थे।  पूजा के पिता चाहते थे कि हमारी बेटी को हम स्नातक तक तो शिक्षा दिलवा ही देंगे।… Continue reading रंजिश

गढे खजानें का रहस्य

एक किसान और उसकी पत्नी एक छोटे से गांव में  रहते  थे। उनकी एक बेटी थी उसका नाम था मीनू। जैसा नाम था वैसे ही गुणों की खान थी। वह केवल 5. साल की थी। किसान उसे गांव के स्कूल में पढ़ने भेजा करता था।। वह तीन-चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थी। उनकी बेटी… Continue reading गढे खजानें का रहस्य

सहयोग का परिणाम

किसी गांव में एक किसान रहता था। वह मेहनत करके अपना जीवन गुजारा करता था। हल चलाकर खेतों में सारा दिन काम कर के शाम को थका मांदा जब  घर आता तो उसकी पत्नी उसे गर्म गर्म खाना परोसती।  खाना खाने के बाद उसे ऐसी  नींद आती के  उसके सामने कोई आवाज भी लगाता होता… Continue reading सहयोग का परिणाम

मुनीम दयाराम

किसी नगर में एक सेठ रहता था। वह बहुत ही कंजूस था। किसी को भी ₹1 तक भी दान में नहीं देता था। उसकी दुकान पर पर अगर कोई मांगने वाला भिखारी भी आता था तो वह सेठ फटकार मार-मार कर उसे भगा दिया करता था। उसने अपनी दुकान पर एक मुनीम रखा था जो… Continue reading मुनीम दयाराम

नन्हा फरिश्ता

किसी गांव में एक जुलाहा रहता था। वह सूत कात कात कर दिन रात मेहनत करता जो कुछ कमाता उसी से वह अपने परिवार का पालन पोषण करता था। उसके एक बेटा था वह हर वक्त उसके पास बैठा रहता था। वह उससे थोड़ा थोड़ा सूत कातना सीख गया था। वह सोचा करता था कि… Continue reading नन्हा फरिश्ता

उपहार

माधोपुर के एक छोटे से कस्बे में सविता अपने बेटे के आने की राह देख रही थी। सविता के पति सेना में शहीद हुए थे। उसके बेटे ने भी कसम खाई थी कि वह भी अपने पिता की भांति एक वीर सैनिक बनेगा। अपने बेटे की हट के कारण उसकी एक न चली सविता के… Continue reading उपहार

माँ

मां का भोला भाला चेहरा याद आता है। उनका ममता भरा स्पर्श याद आता है। दुलार की ठंडी छांव का झोंका याद आता है। उनकी हर बात का हर शब्द याद आता है।। मां की छवि को भुलाया नहीं जा सकता। उनकी यादों को कभी मिटाया नहीं जा सकता। चाहे कितनी भी उंचाइयां छू लीं… Continue reading माँ

(आओ हम कुछ देना सीखें) कविता

   आओ हम  कुछ  देना सीखें।  जन जन की खातिर प्यार अपना लुटाना सीखें।। आओ हम कुछ देना सीखें। तरु की झुकी झुकी डालियों की तरह हम भी शीश झुकाना सीखें।। अपने अहंकार को त्याग कर सभी को गले लगाना सीखें।। आओ हम कुछ देना सीखें। माला के मनकों की तरह एक पंक्ति में गुंथ कर… Continue reading (आओ हम कुछ देना सीखें) कविता