ऐ राही चला चल(कविता)

ए राही अपने पथ पर आगे बढ़ता चल। मत डर। निर्भीक होकर अपना काम करता चल।। पर्वत की तरह स्थिर। वायु की तरह द्रुतगति। झरने की तरह निर्मल बन कर सबके दिलों में अपनी जगह बनाता चल। हर खुशी सब पर लुटाता चल।। दुर्गम पथ पर आगे बढ़ता चल मत डर। निर्भीक होकर अपना काम… Continue reading ऐ राही चला चल(कविता)

नटखट चम्पू

मम्मी ने चंपू को बुलाया और कहा बेटा आज मैं तुम्हें एक कहानी सुनाऊगी। कहानी सुनने के लिए तो चंपू खाना पीना भी छोड़ देता था। चंपू को उसकी मम्मी ने बताया बेटा एक बच्चा था वह बहुत ही स्वार्थी था। वह बिल्कुल तुम्हारी तरह आलसी भी था। वही कोई भी काम समय पर नहीं… Continue reading नटखट चम्पू

खुशियां

जिंदगी की खुशियां सब के संग बांटते चलो। सभी को दुनिया में अपना बनाते चलो।। जिंदगी के दोराहे पर इंसान चाहे कितना भी बड़ा बन जाए। बड़ा बनकर अपने भाग्य पर कभी ना इतराए।। ऊंचा उठने के लिए बड़ा होना जरूरी नहीं होता। जिंदगी में कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता।। हर इंसान… Continue reading खुशियां

रैन बसेरा

चिड़िया के छोटे से घौंसलें  में रहता था एक परिवार। एक दूसरे से करते थे सभी प्यार।। घोंसले में मिलजुल कर साथ रहते थे। एक दूसरे की सहायता कर सदा सुखी  रहते थे।। चिड़िया के तीन बच्चे थे बड़े हो रहे। वे भी उधर उधर दाना चुग कर जीवनी  यापन कर रहे।। घोंसले में एक… Continue reading रैन बसेरा

प्रार्थना हे! विश्व विधाता

ऐ मेरे दाता, जगत विश्वविधाता। सर्व जगत कल्याण कारण, दुःख- संहारक प्रख्याता।। अपनी अद्भुत छटा से ज्ञान का उज्जवल प्रकाश कर दे। मेरे मन से अंधकार की अंधेरी परत को हटा कर मुस्कुराहट भर दे।। हर सुबह शाम और चारों  पहर बस लूं तेरा ही नाम। होठों पर हंसते-हंसते आए बस एक तेरा ही नाम।।… Continue reading प्रार्थना हे! विश्व विधाता

बांकू बन्दर और कालू भेड़िया की दोस्ती

किसी नदी के किनारे एक मगरमच्छ अपनी पत्नी के साथ रहता था। मगरमच्छ अपनी पत्नी के साथ हंसी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहा था। नदी के किनारे सामने पेड़ पर एक बंदर रहता था। वह भी मगरमच्छ का दोस्त था। उसको मीठे मीठे फल खाने को दिया करता था। मीठे मीठे फलों को खा… Continue reading बांकू बन्दर और कालू भेड़िया की दोस्ती

दांतों की सफाई कविता

शाम, सवेरे जल्दी उठ मंजन कर जो हैं सोते।वे जीवन में अपनें दांतों को कभी नहीं है खोते।।वे दांतों को सुन्दर और मजबूत है बनाते।अपने चेहरे पर हर वक्त खुशी है झलकाते।।अपनें चेहरे कि खूबसूरती को और भी है बढाते।।आंख में अंजन,दांत में मंजन ,नित कर नित कर।नाक में उंगली,कान में तिनका मत कर मत… Continue reading दांतों की सफाई कविता

नई सोच

, यह कहानी हिंदू मुस्लिम सिख इसाई परिवार की है।   मुस्लिम परिवार की एक लड़की श्रेया अनपढ़ जिसे पढ़ना लिखना कुछ नहीं आता था। एकदम अनपढ़ गवार गांव में पली-बढ़ी किसी ना किसी तरह उसके मां-बाप ने उसकी शादी अपनी ही जाति के एक लड़के से कर दी। शादी के दिन उसके पति ने उस… Continue reading नई सोच