अबोध बालक

सन्नी अपनी माता पिता का लाडला बेटा था। उसके माता-पिता उसे बहुत ही प्यार करते थे। जिस वस्तु की भी  वह फर्माइश  करता वह वस्तु उसके माता-पिता तत्काल ही उपलब्ध करवा देते थे। जरा सी खरोंच भीें उसके चेहरे पर नहीं आने देते थे। सन्नी के पिता का स्थांनातरण दूसरे शहर दूसरे गांव में हो गया था। उनका  बेटा बीच में  स्कूल से पढ़ाई छोड़ कर आया था। बीच में कक्षा में प्रवेश लेना बहुत मुश्किल था। अध्यापक कहते थे कि हमें उस बच्चे को शुरु  से पिछला काम करवाना पड़ जाएगा। किसी भी तरह से उसके पिता नें पूछताछ करवा कर के अपने किसी दोस्त की मदद से उसके पिता ने अपने बेटे सन्नी   का प्रवेश एक प्राइवेट पब्लिक स्कूल में करवा दिया। बच्चा  बड़ा ही शरारती था। बात बात पर नाराज हो जाना। अध्यापकों को जवाब देना। उसके इस बर्ताव के कारण अध्यापिकाएं भी उस से नाराज थीं। उसके स्कूल में एक अध्यापिका थी वह बच्चों को बहुत ही प्यार से पढ़ाती थी। जो बच्चा बहुत ही उदन्ड होता था उसको अपने तरीके से सबक सिखाती थी। वह उसको बेंच पर खड़ा का देखी थी मगर वह बच्चे पर कभी भी हाथ नहीं उठाती थी। जब एक दिन सन्नी काम करके नहीं लाया तो उसकी  कक्षा अध्यापिका से कहा सनी बेटा  आज तो मैं तुम्हें छोड़ रही हूं लेकिन इस शर्त पर कि आगे से तुम होमवर्क के लाया करोगे। हर रोज मुझे कहना अच्छा नहीं लगता है। सन्नी बोला मैं काम करके नहीं लाऊंगा। निर्भीक होकर सन्नी बोला आप क्या कर लेगी। मेरे मम्मी पापा आपको डाटेंगी। मैडम ने कहा तुम मेरी शिकायत अवश्य कर लो  मैं तुम्हारी मम्मी पापा से नहीं डरने वाली। तुम अपने मम्मी पापा का रौब दिखाते हो। बाकी स्कूल में सारे बच्चे भी तो तुम्हारे जैसे हैं। क्या यह कभी सभी काम करके नहीं लाते। तुम्हें अगर काम न करने में कोई परेशानी हो तो मुझे बताओ। मैं तुम्हें 10 बार समझानें के लिए तैयार हूं।

सन्नी की  अध्यापिका बोली नहीं तो मैं तुम्हें कक्षा की बेंच पर खड़े रखूंगी। वह रोज बैंच पर खड़ा हो कर थक जाता। घर में अपनी मम्मी पापा से नाराज होकर उन्हें जली कटी सुनाता। वह हर रोज कहता था कि मैं स्कूल नहीं जाऊंगा। काफी देर तक रोता रहता? उसके मम्मी पापा उसकी हरकतों   से काफी परेशान हो गए थे। फिर भी  डर के मारे अपने बच्चों को कुछ  नहीं कहते थे। उन्होंने कहा कि घर में तो हम तुम्हारी  सभी फर्माईशें पूरी कर सकते हैं लेकिन स्कूल के मामले में हम कुछ भी नहीं कर सकते।

सन्नी अपनी मैडम से डरा डरा सा रहनें लगा कभी स्कूल जाता कभी  नहीं।  स्कूल में  उसका एक दोस्त था बनी। वह भी स्कूल में कम ही आता था।वह  उसका दोस्त बन गया। उसका दोस्त बनी उसे कहनें लगा कि मैं तो कभी कभी स्कूल से बंक मार लेता हूं।  मैं अपनी मामा माता पिता को झूठ  कह देता हूं कि मैं बीमार हूं। तुम भी सिर दर्द और पेट दर्द का बहाना बनाकर स्कूल मत जाया करो। तुम अपने मम्मी पापा को कहना कि आज मेरे टांग में दर्द है। कभी सिरदर्द। एक दिन उसकी मैडम ने सनी को कहा कि आज तो तुम्हारा स्कूल से नाम काट दिया जाएगा अगर तुम काम नहीं करोगे। तुम्हें कहते कहते एक महीना हो चुका है मगर तुम्हारे कान में जू तक नहीं रेंगती। तुम इसी तरह काम नहीं करोगे तो फेल हो जाओगे। सनी बोला  कि फेल  हो जाऊंगा तो क्या मैं  कभी भी होमवर्क  नहीं करूंगा। अगले साल किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश ले लूंगा। मगर में होमवर्क  नहीं करुंगा। होमवर्क के नाम से उसे चिढ थी। सन्नी सारा दिन  उदास रहने लगा। हंसी खुशी चेहरे वाला बच्चा न जाने गुमसुम  सा हो गया। वह कभी भी मुस्कुराता नहीं था वह एक गंभीर बीमारी का शिकार हो गया। वह घर पर भी अपने माता पिता को कुछ नहीं कहता था। अपने माता पिता को भी परेशान नहीं करता था। अपने कमरे में गुमसुम बैठकर कुछ ना कुछ tv पर देखा करता था। उसको सब बच्चों के सामने जब डांट पड़ती तो  वह अंदर ही अंदर हीन भावना का शिकार होता चला गया।  

सन्नी जैसे ही स्कूल से घर आया तो उसे मैडम की बात याद आई कि  उसे सब के सामने उस का अपमान किया जाएगा। उस के माता तो कभी भी किसी के सामनें उसकी बेइज्जती नहीं करते थे। मैडम तो सभी के सामनें उसे घर का रास्ता दिखाएगी। अपने माता पिता से झूठ ही  कह दूंगा कि मेरे सिर में आज रात से दर्द  हो रहा है। जैसे ही स्कूल जाने की बारी आई तो सन्नी अपनी माता पिता को कहनें लगा कि मां आज तो मेरे सिर में भी दर्द हो रहा है। उसकी मम्मी बोली बेटा रहने दे अगर तेरे सिर में दर्द हो रहा है तो आज स्कूल मत जा। उसके पिता उसे  अपनें  घर के नजदीक ही एक अस्पताल था वहां पर दिखाने ले कर गए।

डाक्टर ने उसका  जायजा  लिया और डॉक्टर ने उसे सिर दर्द की दवाई लिखकर दे दी। वह दवाइयों को खाने  लग गया।  वह चोरी छिपे भी दवाईयां खाने लगा। उसनें अपनें दोस्तों को स्कूल में दवाइयाँ खाते देखा था। उन गोलियों को खाकर  उसे नशा हो जाता था। वह सारा दिन  घर में पड़ा पड़ा सोता रहता था। उसे दवाइयां खाने में मजा आने लगा। पेट में दर्द होता तो  डॉक्टर उसे गोली लिखकर दे देता। इस तरह ना जाने झूठ मूठ में ही वह बच्चा गोलियां खाने लगा। उसको माता पिता ने कभी महसूस नहीं किया कि उनका बच्चा डिप्रेशन का शिकार हो चुका है। उसे एक  मनोविज्ञान चिकित्सक की जरुरत थी।

दस दिन  के बाद जब सन्नी स्कूल  गया तो बहुत उदास था। वह बनी को बोला कि तुम्हारी युक्ति काम कर गई। मैंने झूठ मूठ में ही अपने माता पिता को कहा कि मेरे सिर में दर्द है।  मेरे माता-पिता मुझे डॉक्टर के पास ले कर के लेकर गए।   बन्नी के तो सचमुच में ही कभी कभी सिर दर्द  होती थी। बन्नी के माता-पिता उसे उसी हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले कर गए।  वहां से दवाइयां ले  कर आता। किंतु  उसे पता था कि वह दवाइयां तो स्कूल ना जाने के लिए खाता है। झूठ मूठ में सिर दर्द का बहाना करके अपने माता पिता को डराता है। उनके माता-पिता  उसे अपने घर के समीप बनें अस्पताल ले कर गए। उन्होंने उसे पांच महीने का   कोर्स लिख कर दे  दे दिया। वह जो भी दवाईयां अपने बेटे को देते   वह उन दवाइयों को खाता नहीं था, वह उन दवाईयों को खाने की बजाय किनारे फेंक देता  देता था। वह उन दवाइयों को अपने घर के पास बने हुए गड्ढे में दबा देता था।

एक दिन सन्नी की मम्मी बनी के घर आई बोली हमारा बेटा तो न जानें स्कूल जानें से कतराता है। मैं तो हार हार कर उसेस्कूल भेजने से थक गई। तुम तो मेरी अच्छी सहेली बन गई हो।  क्या तुम्हारा बेटा भी स्कूल न जानें के लिए जिद करता है।  बनी की ममी बोली जब मैं स्कूल जानें के लिए कहती हूं तो वह सिर पकड़ कर बैठ जाता है।  नजदीकी डॉक्टर ने उसे  जो दवाइयाँ बताई वह उसे ले कर दे देती थी। सनी की मम्मी का माथा ठनका कहीं वह डॉक्टर हमारे बेटे को गलत नहीं हो तो नहीं दे रहा है। वह सीधे उसे शहर के सबसे बड़े अस्पताल में लेकर गए। डॉक्टर ने उसे डरते हुए कहा कि आपने तो अपने बेटे को का गलत दवाईयां दे करके अपने बेटे का लीवर बिगाड़ दिया है। यह दवाइयां तो बहुत ही हानिकारक है। आपके बेटे का लीवर खराब हो चुका है। सन्नी काफी दिनों तक स्कूल नहीं आया। मैडम एक दिन उसके घर आई बोली बेटा मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगी। अगर तुम मेरे डर से स्कूल नहीं आते हो उसकी मां बोली मेरा बेटा तो बहुत ही बीमार हो चुका है।

बनी को जब पता चला कि  उसका दोस्त उन दवाईयों को खाने का अभ्यस्त हो गया है। उसने सारा हाल अपनी मां को कहा कि सन्नी को मैंने  ही कहा था कि झूठ मुठ का बहाना कर देना चाहिए कि मेरे सिर में दर्द है पेट में दर्द है। हम स्कूल जाना नहीं चाहते  थे। इसलिए वह दवाइयां लेने  लगे गया। वह उन दवाईयों का अभ्यस्त हो गया। सन्नी की ममी बनी की ममी के घर गई तो उसने अपनें बेटे की बिमारी के बारे में बताया और कहा बहन तुम भी सतर्क हो जाओ हमारे बच्चों को कोई बिमारी नहीं है। बनी की ममी बोली आज मेरे बेटे नें तुम्हारे बेटे के बारे में सुना कि तुम्हारा बेटा सचमुच ही उन दवाईयों को खाने का अभ्यस्त होचुका है तो वह बोला मां मेरा दोस्त मर जाएगा उसे बचा लो। वह तो स्कूल जानें से इसलिए कतराता था कि उसे होमवर्क करना अच्छा नहीं लगता था। उस की बेइज्जती सब बच्चों के सामने होती  थी तो वह मुझे बताता था कि मेरा स्कूल जानें को नहीं करता। उस के ममी पापा उसे दवाइयाँ लिखवा कर देते थे वह उन को हर रोज खानें लगा। हम दोनों को ही अपनें बच्चे को सम्भालना है। सन्नी की ममी बोली  मैं अपनें फैमिली डाक्टर के पास उसे ले गई तो डाक्टर नें कहा कि उसका लिवर खराब हो चुका है। उसने न जानें किन्ही घातक दवाईयों का सेवन किया है। डाक्टरों नें उसे बताया कि वह ठीक हो जाएगा मगर उसका ज्यादा ख्याल रखनें की जरूरत है। बनी की ममी बोली  तुम घर जाकर कर कहना कि तुम्हारा दोस्त मर गया है। शायद वह डर कर दवाईयाँ खाना छोड दे। सन्नी  को

दवाइयों खाने का नशा लग गया। उसके माता-पिता जब भी कहते पेट दर्द है तो उसे दवाई पकड़ा देते। अचानक एक दिन बनी को पता चला कि उसका दोस्त उसे सदा सदा के लिए छोड़ कर चला गया है।

कार्यवाही की गई तो पुलिस वालों ने बनी  से कुछ पूछा। बेटा तुम बताओ तो वह अपनी आंखों में आंसू भरकर बोला डाक्टर साहब हम दोनों स्कूल नहीं जाना चाहते थे। मेरा दोस्त बहुत ही भावुक था। उसके मम्मी पापा उसे कभी  डांटते नहीं  ले। अचानक  सब बच्चों के सामने अपनी  बेइज्जती को सहन नहीं कर सका। वह बोला मैं स्कूल नहीं जाऊंगा। स्कूल जाने का बहाना बनाकर  हर रोज  झूठ में अपने माता पिता को कहता कि मेरे सिर में दर्द है। उसके माता पिता उसे डॉक्टर के पास लेकर  गए उन्होंने उसे सिर दर्द की गोली दे दी। उसने स्कूल में अपने दोस्तों को दवाइयां खाते देखा था तो उसने सोचा कि यह दवाइयां भी क्यों ना खाकर देखूं।

धीरे-धीरे  वह सिर दर्द की गोली  खाने का अभ्यस्त हो गया। बनी बोला मां पिताजी मैंने उनको नहीं खाया है। मैं उन दवाईयों को गड्ढे में फेंक देता था। पुलिस वालों ने जब उस गडडे को खोद कर  देखा तो उसनें वह दवाईयां नहीं खाई थी। वह तो बच गया। उस के उसके माता पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे क्योंकि उसके बच्चे ने उन दवाईयों को हाथ भी नहीं लगाया था।  वह नकली दवाइयां थी। कुछ दवाइयाँ तो इतनी सख्त थी कि बच्चे को इतना  बडा भारी डोज नहीं दिया जा सकता था। उस  के मां-बाप की आंखों में आंसू  थे। अपनें माता पिता की आंखों में आंसू देख कर अपने मम्मी पापा को कहा मुझे माफ कर दो। मैंने आपसे झूठ का बहाना करके आपको कहा कि मेरे सिर में दर्द है पेट में दर्द है। मेरे दोस्त ने उन दवाईयों का सेवन किया। लेकिन  मैनें  उन दवाइयों का सेवन नहीं  किया। आज मैंने अपने दोस्त को खो दिया। वह  बालक डिप्रेशन का शिकार था।

सन्नी के माता पिता कहने लगे कि बेटा हमने बनी के माता पिता से मिलकर तुम्हें झूठ कहा था कि बनी मर चुका है परंतु वह इन नशीली गोलियों का आदि हो चुका था। इसलिए हमने उसको भी सुधारने का सबक लिया था क्योंकि वह धीरे धीरे उन उंगलियों को खाने का अभ्यस्त हो गया था। एक दिन  बनी की मम्मी मुझसे मिली और उसने मुझे सारी बात बताई कि तुम भी अपने बेटे की  हरकतों पर नजर  रखो। मैनें तुम्हे अपनें दोस्त को कहते सुन लिया था कि तुम्हारी युक्ति काम कर गई। तब सारा माजरा मुझे समझ आया जब सन्नी की ममी नें बताया कि हमारा बेटा गम्भीर बिमारी  का शिकार हो गया है। हम दोनों नें तुम्हें दवाईयां गड्डे में  फेंकते देख लिया था।  तुम ने वह दवाईयां नहीं खाई थी। हम नें उस डाक्टर के बारे में पता किया जबकि हम तुम्हे हम अपने फैमिली डाक्टर के पास ले कर गए। तुम्हारा दोस्त मरा नहीं है हमने तो तुम्हें सबक सिखाने के लिए यह योजना बनाई थी परंतु उस डॉक्टर ने गलत दवाइयां दे करके उसे तो मारने का फैसला कर लिया था। अच्छा हुआ तुमने उन दवाईयों को नहीं खाया वरना तुम भी आज किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो गए होते।

कई बार माता पिता अपने बच्चे की मनो भावनाओं को समझ नहीं सकते। उसे  गल्त दवाईयां उसे देते रहते हैं। बच्चे के व्यवहार को प्यार से पूछते तो उनका बेटा उन्हें सच सच बता सकता था।

हमने अपने बच्चों को कभी भी दवाइयां नहीं देनी चाहिए जब तक बहुत ज्यादा गंभीरता वाली बात नहीं हो। बच्चों को दवाइयों से बचाना चाहिए। देना ही चाहिए तो उसे बिल्कुल हल्की दवाइयां देनी चाहिए। कई बार डाक्टर बहुत ही सख्त दवाई लिख कर दे देते हैं।

 सन्नी की ममी उस  को शहर के  सबसे बड़े अस्पताल में लेकर गई। डॉक्टर नें  डांटते हुए कहा कि आपने तो अपने बेटे को का गलत  ईलाज करके अपने बेटे   का लिवर खराब कर दिया है। अभी भी वक्त है वह ठीक हो जाएगा। धीरे धीरे सन्नी की बिमारी में सुधार होनें लगा। इस कहानी को लिखें का मेरा तात्पर्य यह है कि हम अपनें बच्चों की मनोभावनाओं को समझ नहीं पाते। जब समझ आती है तो तब तक बहुत देर हो जाती है। बनी नें जब गडडे को खोद कर दिखाया तो पुलिस वालों नें उन दवाइयों का पता लगाया। बनी के द्वारा पता चला कि वह नजदीकी डाक्टर बच्चे की बिमारी को ठीक करनें के लिए उसे सख्त दवाईयां लिख कर देता था। वह तो चोरी छिपे हर रोज दवाईयाँ खाने लगा था। सन्नी को तोबचा लिया गया। पुलिस वालों नें उस डाक्टर को इतनी जहरीली दवाइयाँ देनें के जुर्म में डाक्टर को छः महीने की सजा सुनाई और उसका लाईसैन्स रद्द कर दिया। सन्नी की तरह न जानें कितने ऐसे बच्चें होगें वह अपनें माता पिता से ऐसे ही किसी न  किसी बिमारी का बहाना कर के स्कूल न जानें से बचना चाहतें होंगे। हमें बच्चे को प्यार से पूछ कर कर या  किसी मनोवैज्ञानिक चिकित्सक से अवश्य सलाह लेनी चाहिए। उसे दवाइयां खिलाने से बचना चाहिए नहीं तो न जानें कितने सन्नी जैसे मासूम अबोध बालक मौत की आगोश में सदा सदा के लिए दफन हो जाएंगें।

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