जादुई शौल

चिंटू मिंटू और बिट्टू

तीनों पक्के दोस्त थे। तीनों बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों के साथ पहाड़ी स्थल पर यात्रा करने गए हुए थे। देहरादून पहुंचने पर वह दूसरे दिन रमणीय स्थल को देखने निकल पड़े तीनों बच्चे साथ-साथ चल रहे थे। उनके माता पिता ने उन्हें कहा बेटा साथ साथ ही रहना आगे मत जाना क्योंकि यहां पर तुम्हें कुछ पता नहीं चलेगा? यहां का रास्ता तुम्हारे लिए नया होगा तुम तीनो हमारे साथ साथ ही चलना। तीनों परिवार वाले आगे चल रहे थे। उन तीनों परिवारों के बच्चे उनसे थोड़ा आगे चल रहे थे उन्हें एक लंबी गुफा को पार करके जाना था। सारे के सारे लोग गुफा से बाहर निकल आए। उन्होंने सोचा हमारे बच्चे तो हमारे से आगे चल रहे थे। वह भी आगे निकल गए होंगे।

 

उन बच्चों ने अभी तक उस गुफा को पार नहीं किया था। वह बच्चे एक दुकान के पास कुछ खाने के लिए लेने के लिए अंदर चले गए। उन्होंने जल्दी-जल्दी खाने का सामान लिया और आगे बढ़े। वहां पर अंदर जाने के लिए गुफा थी। वहां पर एक जैसी दो गुफाएं देखकर चकित रह गए। उन्होंने वहां से आने से पहले पढ़ लिया था कि अंदर जाने के लिए गुफा से प्रवेश करके जाना पड़ता है। उन्होंने बाहर घूमते हुए लोगों से पूछा हमने अंदर की ओर प्रस्थान करना है हम यहां घूमने के लिए आए हैं यहां से अंदर जाने का रास्ता कौन सा है।? एक आदमी ने उन्हें रोक कर कहा इस गुफा के अंदर जाने का मार्ग है। उन्होंने आव देखा ना ताव जल्दी गुफा के अंदर घुस गये।

 

अंदर जाते ही उन्हें डर सा लगा उस गुफा में थोड़ा सा ही प्रकाश था। वह आगे बढ़ रहे थे उन्होंने देखा गुफा का द्वार बंद हो गया। वे चीखने चिल्लाने लगे रो-रो कर तीनों का बुरा हाल था। वह गुफा के अंदर बंद हो चुके थे। काफी देर तक जब बच्चे नहीं आए तो तीनों परिवार अपने बच्चों को ढूंढने लगे उन्हें अपने बच्चे नहीं दिखाई दिए गुफा में वापिस आए उन्होंने देखा एक उसी तरह की दूसरी गुफा वंहा थी। उस गुफा का दरवाजा बंद था। बच्चों के माता-पिता वही से वापिस  चले गए।  बच्चे वहां से एक दूसरे का हाथ पकड़े अंधेरे में चल रहे थे।। चिंटू का पैर एक बड़े से पत्थर से टकराया।  चिंटू के पास टॉर्च  थी। उसनें टार्च जलाई। उन्होनें देखा वंहा एक बहुत ही बड़ी चट्टान थी। वे तीनोे उस चट्टान के पीछे छुप गए ताकि  कोई उन्हें  नुकसान ना पंहुंचाए। उन्होंने देखा कि गुफा का द्वार खुल गया था। रोशनी बाहर से आ रही थी। वहां पर उन्हें  एक शौल दिखाई दी।शायद बाहर आंधी चल रही थी। वह शौल उड़ कर उस पत्थर के पास पास  फंस गई  थी। उन तीनों ने  उस शॉल को ढक लिया। बाहर से आने वाला  कोई खूंखार जानवर हुआ  तो उससे बचा जा सके। इसलिए उन्होंने वह शॉल ओढ़ ली। वे सांस रोक कर चुपचाप तीनों बैठे हुए थे। लोग अंदर आए उन्होंने ने देखा ये आठ लोग थे। आपस में बातें कर रहे थे। वह कह रहे थे कि आज का दिन काफी अच्छा रहा।

 

आज हम बाहर से 5000 सोने के बिस्किट लाए हैं। आज तो बड़ा उत्सव होना चाहिए। तीनों बच्चों को समझते देर नहीं लगी कि वह आदमी कोई बड़े गैंग से संबंध रखते होंगे। वह दोनों उनकी बातें सुनने लगे। उनमें से एक गूंगा व्यक्ति था। वह  उन से कुछ कह  रहा था। दूसरे आदमी ने उससे पूछा क्यों क्या हुआ? उसने एक  कागज पर लिख कर उसे दिया उस पर लिखा था मेरी जादुई शॉल गुम हो गई है।  बच्चे समझ गए यह शौल जादू की है। उन लोगों ने इस शौल को देख लिया तो वे हम से इस शौल को छीन लेंगे। उन्होंने उस शौल को कस के पकड़ लिया।

 

सातों लोगों ने  डांस किया और खाना खाने के लिए जैसे ही बाहर जाने लगे उन्होंने कहा  टक टक टक   टकाटक टकाटक टक। यह कहकर गुफा का दरवाजा खोलने के लिए कहा। बच्चे  अंदर से छिप कर सब कुछ देख रहे थे। वह शॉल जादू की थी। तीन बार उन सात व्यक्तियों ने के तीन लीडरों ने  वह मंत्र दोहराया। गुफा का दरवाजा खुल गया। वह चुपचाप उस गुफा को बंद करके चले गए।

आठों बाहर निकल गए तो सब बच्चों ने उस चादर को अपने ऊपर से हटाया। टोर्च जलाई और उस शौल से कहा हमें पता चल चुका है कि तुम जादू की शौल हो  शॉल के मुखिया हमारे संकट को दूर करो। हम तीनों आप को नमस्कार करते हैं। हम तीनों को बताओ हम क्या करें।?  उन्होंने देखा कि वहां पर प्रकाश हो गया। उसमें से  शॉल का देवता प्रकट हो कर बोला बोलो बच्चों हम को हुकम दो। क्या चाहते हो? वे तीनो बोले हम बाहर निकलना चाहते हैं। शौल का मुखिया बोला इस गुफा के बाहर तो मैं तुम तीनों की सहायता कर सकता हूं।  शौल जादू की है। जब कोई उस शौल को  ओढ लेता है  तो वह गायब हो जाता है। उसे कोई नहीं देख सकता। तुम तीनों सब को देख सकते हो। उन तीनों के ऊपर शौल उड़कर पहुंच गई। तुम तीनों  के ऊपर पड़ते ही यह शौल  तुम्हारी हो गई  है। हम उसके लिए काम करते हैं जिसके पास  यह शौल होती है। मैं तुम्हारी इस गुफा के बाहर ही सहायता कर सकता हूं। इस गुफा से बाहर जाने का रास्ता तो तुम्हें स्वंयं खोजना होगा। वह तीनों बोले ठीक है हम उस गुफा से बाहर जल्दी ही पहुंच जाएंगे। हमें भूख भी बड़े जोर की लग रही है। शौल का मुखिया बोला इस गुफा में तो मैं भी तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता। सुबह इस समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे। तुम तीनों इस शौल को   लपेट कर इस पत्थर के नीचे पड़े रहो।  इन आठ लोगों के  तीन मुखिया  थे। उन तीनों द्वारा कहे गए शब्द को याद कर लेना। वे गुफा को खोलने के लिए एक मंत्र गुनगुनाते हैं। तुम्हें तीन बार इस मंत्र को कहना है। इस मंत्र को याद करने की कोशिश करना जिससे उस गुफा का दरवाजा खुल जाएगा। उनमें से एक आदमी गूंगा है। उसके पास ही यह जादू की शौल थी।

 

जैसे ही शाम हुई वे आठों व्यक्ति उस गुफा में  दाखिल हुए बच्चों नें देखा गुफा का दरवाजा खुल गया। सुबह जब बाहर जाने के लिए तीनों मुखिया खड़े हो गए पहले ने कहा ठक ठक ठक दूसरे ने कहा ठक ठक ठक तीसरे ने कहा टकाटक टकाटक टकाटक तीनों दोस्तों को वह मंत्र याद हो गया जैसे ही वह आठों गैंग के आदमी बाहर गए तीनों  दोस्त बाहर निकले पहला बोला ठक ठक ठक दूसरा बोला ठक ठक ठक तीसरे ने कहा टक टका टक टक टका टक उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा दरवाजा खुल गया दरवाजा बंद करने का मंत्र उसे यात्रा तीनों दोस्तों ने मिलकर कहा ढम ढम ढम दरवाजा बंद नहीं हुआ फिर एक दोस्त ने कहा ढम ढम ढम ढमाढम दरवाजा बंद हो गया। तीनों दोस्त बाहर निकले जादू की शौल के जीन्न  से उन्होने  कहा क्या हुक्म है? शॉल के जिन्न नें कहा बोलो मेरे बच्चों क्या हुक्म है? वह तीनों बोले पहले हमें वहां ले चलो जहां वे  आठ लोग गए हैं। अचानक शाल उड़ती हुई उन तीनों को वहां ले गई। जहां वह आठों गैंग के लोग गए थे। उन्होंने शौल को ओढ लिया।

 

तीनों दोस्त दिखाई नहीं दे रहे थे। वे छिपकर उनकी बातें सुनने लगे। उनमें से उन आठ लोगों का मुखिया एक सीमेंट की फैक्ट्री में गया। वहां के मैनेजर के पास जाकर बोला हमें भी काम पर रख लो। हम खूब मेहनत करेंगे। सीमेंट की फैक्ट्री का मालिक बोला तुम्हें ईमानदारी से काम करना होगा। वह बोलाठीक है। कल से काम पर आ जाना। वे आठों एक मजदूर के रूप में सीमेंट की फैक्ट्री में काम पर लग गए। सीमेंट की बोरियों को बाहर भेजना और उनको ज्यादा दाम पर बेचना। एक बोरी की कीमत ₹400 की। आठों दोस्तों ने सीमेंट की बोरी को छुपा छुपा कर इकट्ठा कर लिया।। उसने आठ मजदूरों को नियुक्त किया और कहा तुम इन बोरियों में मिलावट कर दो। हर बोरी में आधा सीमेंट और आधा आधा बुरादा मिला दो। हम तुम्हें एक बोरी के ₹500 देंगे तुम यह बात किसी को मत बताना। उन्होंने ना जाने कितनी नकली सीमेंट की बोरी इकट्ठी कर ली और एक बोरी को ₹500में बेच दिया। इस तरह सीमेंट में मिलावट कर के बाहर भिजवाते रहे।

 

इस मिलावट का परिणाम यह हुआ कि पास ही फैक्टरी के नजदीक एक चीनी की फैक्ट्री की मिल का निर्माण हो रहा था। जहां पर लाखों की संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। तीनों दोस्तों ने देखा कि यह सब लोग सीमेंट में मिलावट करके सीमेंट की बोरी के ज्यादा दाम वसूल कर रहे हैं। उन तीनों ने शॉल के मुखिया से कहा कि तुम हमें तुम यहां के पुलिस अधीक्षक के घर ले चलो। हम 30 मिनट में नकली सीमेंट में संलिप्त गैंग का पर्दाफाश करना चाहतें हैं। वह शॉल उन्हें उड़ा कर  पुलिस इंस्पेक्टर के घर ले गई। उन्होंने अंदर झांका।

 

पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी अपने पति से कह रही थी आपसे कोई मिलने आया है। पुलिस इंस्पेक्टर ने देखा एक अधेड़ व्यक्ति उनसे मिलने आया था। देखने से वह कोई खूंखार व्यक्ति नजर आ रहा था। इंस्पेक्टर भोला भाई तुम मुझसे क्या चाहते हो? वह बोला देखो आप इस प्रांत में रहना चाहते हो तो आपके पास अगर सीमेंट की फैक्ट्री की कोई शिकायत लेकर आए तो आप कुछ नहीं कहेंगे। आप हमारे मित्र हैं। थोड़ा बहुत ऊपर नीचे करना तो सब को शोभा देता है। आप अपनी जुबान नहीं खोलेंगे। आप लिख कर देंगे की फैक्ट्री से बोरी ₹400 की बेची जाती है। उसमें कोई मिलावट नहीं है। आपने जरा भी अपनी जुबान खोली तो आपको अपने बच्चों को खोना पड़ेगा।

 

पुलिस स्पेक्टर डर गया। वह व्यक्ति जैसे ही गया शिवानी बोली आप थरथर क्यों कांप रहे हैं।? पुलिस इंस्पेक्टर बोला आज सिमेन्ट की फैक्ट्री के बारे में शिकायत लेकर एक अजनबी आया था। शिवानी बोली वह क्या कह रहा था।? पुलिस इस्पेक्टर तिवारी बोला यह खूंखार व्यक्ति लग रहा था। बोला सीमेंट की फैक्ट्री में बेची गई बोरी ₹400 की है। अगर कोई सीमेंट के बारे में शिकायत लेकर आता है तो आप कहेंगे कि इसमें कोई मिलावट नहीं है। अगर जरा भी आपने अपना बयान बदला तो आपके बच्चों से आपको हाथ धोना पड़ेगा। शिवानी बोली आप तो एक पुलिस इंस्पेक्टर है आप को डरना नहीं चाहिए। अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। आपको सच का साथ देना होगा।

 

यह सब बातें तीनों दोस्तों रहे थे। तीनों दोस्त बोले अगर हमारे पास मोबाइल होता तो हम इस शख्स की फोटो ले सकते थे। तभी जादू  की शौल  उड़ कर चलते हुए आदमी की जेब से मोबाइल निकाल कर ले आई और उसे चिंटू को पकड़ा दिया। चिंटू हैरान रह गया चिंटू ने जल्दी से उस शख्स का फोटो ले लिया और जल्दी उस मोबाइल में लिए गए फोटो को  एक फोटोग्राफर की दुकान पर ले जा कर उस की कॉपी निकलवा ली। फोटोग्राफर नें कहा हमें  रु100 दे दो। उन के पास रु100 नहीं थे। वे बोले ठीक है अभी देतें हैं। उन्होंने जादुई शौल से कहा हमें रु100 दे दो। शौल के जिन्न नें साथ चलती हुई महिला की जेब से  रु100 का नोट निकाला और फोटोग्राफर के हवाले कर दिया। यह देख कर फोटोग्राफर बोला आपने अपनी कमीज में रु100 का नोट क्यों फंसाया हुआ है।? तीनों दोस्त  यह देख कर हंसने लगे। उन्हें यह देख कर बड़ा मज़ा आ रहा था। तीनों को खूब भूख लग रही थी। वह एक हलवाई की दुकान पर बैठ गए। उन्होंने होटल वाले को कहा कि दो दो आलू के पराठे दही के साथ  दे दो। उन तीनों ने डटकर के पराठे खाए। उनके पास चुकाने के लिए रुपए नहीं थे। उन्होंने शौल के देवता से कहा अब तुम हमारे रुपए का इंतजाम करो। शौल के  जिन्न को कहा कि ₹200  का प्रबंध करो। यह सुन कर जल्दी से शौल का जिन्न हलवाई के गले से ₹200 निकाल कर लाया और उन तीनों दोस्तों को दे दिया। खुशी खुशी तीनों दोस्तों ने हलवाई को ₹200 दिए और चल पड़े।

 

वह  तीनों  उस पुलिस इंस्पेक्टर के पास पहुंच कर बोले अंकल आप को डरने की कोई जरूरत नहीं। आप उस शख्स को कड़ी से कड़ी सजा दो। आप के बच्चों को वह कुछ नहीं करेगा। हम आपके बच्चों को कुछ भी नहीं होने देंगे। हम उस शख्स को जानते हैं। वह आठ खूंखार गैंग के व्यक्ति हैं। हमें उनका पर्दाफाश करना है। आप इसमें हमारा साथ देंगे। हमारे पास एक जादू की शौल  है। जिसके द्वारा हम आपके बच्चों को कुछ नहीं होने देंगे।

 

हम उन आठों व्यक्तियों को का पीछा करेंगे। उन व्यक्तियों ने एक फैक्ट्री में जाकर वहां पर मजदूर बनकर सीमेंट की बोरियों को चोरी से खिसका कर  और मजदूरों को सिमेन्ट की बोरी रु 100ज्यादा दे कर सीमेंट देकर ₹400 की बोरी को ₹500 में देखकर सारी बोरियां खरीद ली। और उन बोरियों में मिलावट करके उसे महंगा बेचकर चीनी की फैक्ट्री में ताला लगा दिया है। वह नकली सीमेंट से खड़ी की गई दीवार जल्दी ही गिर जाएगी। और  ना जाने कितने लोग बेमौत मारे जाएंगे। इससे पहले कि  वह ईमारत गिर कर ढय जाए।उन नकली सीमेंट बेचने वालों का पर्दाफाश करना चाहिए। मैंने उस व्यक्ति की फोटो ले ली  जब वह आपके पास आया था। हम अपने माता पिता के साथ पर्वतीय स्थल की यात्रा पर आए थे। इस गुफा में ना जाने कैसे फंस गए?? बाहर निकलने का रास्ता हमें मिल ही नहीं रहा था तभी हमारे पास एक उड़ती हुई शौल आई जो एक विशाल पत्थर में फंसी हुई थी। हम तीनों गुफा में फंसे हुए थे। हम तीनों डरकर कांप रहे थे। मेरा पैर गुफा के अंदर एक बड़े पत्थर से टकराया। मैंने टॉर्च जलाई। वहां पर शौल हवा के द्वारा फसी हुई थी। गुफा का दरवाजा अचानक खुला। बड़ी जोर की आंधी चल रही थी। हमने आठ खूंखार व्यक्तियों को अंदर आते देखा। वह 5000 सोने के बिस्किट उस गुफा में छुपा कर कंही रख रहे थे। उस गुफा में कोई प्रवेश नहीं कर सकता था। हमने उनसे डर कर वह  शौल ओढ़ ली। मैंने एक गूंगे व्यक्ति को यह कहते हुए सुना उसने कागज पर कुछ लिखा और उसी एक व्यक्ति को थमाया।। उस गैंग के व्यक्ति   नें यह पढ़कर उसकी ओर देख कर कहा यह जादू की शौल। जोर-जोर से उसका मुखिया हंसा जादू  की शौल। और उस गूंगे व्यक्ति के हाथ से उड़कर कागज मेरे पास आ गिरा था। हम नें  शौल के नीचे  से उस कागज  को पढ़ लिया। यह जादू की शौल है। पढ़कर हैरान रह गये। उस शौल को हमने ओढ लिया। उस शौल से हम उन सब को देख सकते थे। परंतु वह हमें नहीं देख सकते थे। हम तीनों ने देखा वे सब खूब उत्सव मना रहे थे। वह खाना खाने बाहर गए। उन्होंने गुफा का दरवाजा खोलने के लिए मंत्र पढा। उस मंत्र को पढ़ कर ही गुफा का दरवाजा खुलता था। हमने उसके बाहर जाते ही वह मंत्र गुनगुनाया और उस जादू शौल के द्वारा उन खूंखार अपराधियों का पीछा करते करते वहां गए जहां वे मजदूर बनकर सीमेंट की फैक्ट्री में सीमेंट के मालिक के पास मजदूर मजदूरों को अपने साथ मिलाकर उन सिमेन्ट की बोरीयों  को सस्ते दामों में खरीदकर मिलावट करके ज्यादा दामों में बेचने का काम करते थे। हमें उन व्यक्तियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना है। वह बोला ठीक है बेटा मैं तुम  तीनों का साथ दूंगा।

 

अगले दिन पुलिस इंस्पेक्टर की फैक्ट्री के मालिक से मिला। उसे सारी बात बताई सीमेंट की फैक्ट्री का मालिक थरथरा कांपनें लगा। तीनों बच्चों ने आकर फैक्ट्री के मालिक को कहा जब आप जैसे लोग डर कर पीछे हो जाएंगे तब हम बच्चों का क्या होगा।? हम छोटे छोटे बच्चे होकर नहीं डर रहे हैं तो आप क्यों डर रहे हो? कुछ नहीं होगा फैक्ट्री का मालिक बच्चों के साहस को देखकर आश्चर्यचकित हो गया। उसने सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की उन बच्चों ने सीमेंट की फैक्ट्री के मालिक को दिखाया कैसे मजदूरों के साथ मिलकर उन खूंखार आतंकियों ने मजदूर बनकर सीमेंट में मिलावट करके बेचा? कैसे मजदूरों को अपने साथ मिलाकर सिंमेंन्ट में मिलावट कर उन्हें ज्यादा दाम में बेचा। पुलिस इंस्पेक्टर ने उन तीनों बच्चे की बहादुरी के लिए उन्हें इनाम दिलाया। बच्चों के माता-पिता को को भी अपने बच्चों की बहादुरी के बारे में पता चल चुका था। 26 जनवरी को उन तीनों बच्चों की बहादुरी के लिए उन्हें पुरस्कार दिया गया।  उन बच्चों के माता पिता की खूब प्रशंसा की और कहा हमें आपके बच्चों पर नाज है। ऐसे बच्चे भगवान सबको दे।  

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