दीपावली ( कविता)

“वैभव और सम्पन्नता का प्रतीक  है दीपावली।

राष्ट्र और समाज के प्राण का प्रतीक है दीपावली।।

उज्ज्वलता और स्वच्छता का आवरण पहने हुए,

घरों में जगमगाते दीपों के प्रकाश का त्योहार है दीपावली।।,,

 

दीपावली कार्तिक मास की आमावस्या को है मनाई जाती।

हर घर घर में खुशी भरी लहर है छाई रहती।। जीवन की परेशानियों और अंधकार को मिटाकर, खुशहाली भरा पैगाम है लाती।

परिवारजनों  में चारों ओर रौशनी की किरणें हैं बिखराती।।

दीपावली में चार चांद लगानें का काम दीप करतें हैं।

हर जगह रौशनी फैला कर लोंगों में स्नेह और अपनत्व की भावना जगा देंतें हैं।।

दीपावली बच्चों में उमंग और उत्साह है जगाती।

हंसी भरे वातावरण में बच्चों के चेहरों पर खुशी की रौनक है लाती।।

बाजारों में पटाखों और फुलझड़ियों की दुकानें खूब सजती हैं।

जगह जगह  पर बच्चों की मुस्कान-भरी नजरें उधर ही टिकी  रहती  हैं।।

रंग बिरंगे कपड़े पहन कर बच्चे पटाखे खूब चलाते हैं।

आतिशबाजी और फुलझड़ियां  चला कर अपनी खुशी झलकाते हैं।।

इस दिन 14वर्ष का वनवास काट कर  भगवान श्री राम चन्द्र जी  सीता माता सहित अयोध्या लौटे थे।

उनके  स्वागत  की खुशी में लोग  दीपावली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनातें हैं।।

 

आमावस्या की रात्रि में लक्ष्मी धरती पर भ्रमण है करती।

लोगों को वैभव और सम्पन्नता का आशीष है देती।।

लोग माता लक्ष्मी को बेलपत्र और कमल का फूल हैं चढाते।

धन के देवता कुबेर को भी प्रसन्न करनें का यत्न भी है करते।।

गणेश जी को दूर्वा भी है अर्पित करते।

शंख और घंटी बजा कर उनका पूजन भी करते।।

सारे लोग मिल जुलकर इस उत्सव को  हर्ष से मनातें हैं।

वैर भाव छोड़ कर एक दूसरे से  प्रेम, सद्भावना और सहानुभूति  दर्शाते हैं।।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के दिखाए मार्ग का अनुसरण जब हम करेंगें,

तभी तो इस पर्व को खुशी खुशी मना पाएंगे।।

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