लालची किसान

एक किसान था वह खूब मेहनत करता और अपनी फसलों को लहलाता देख कर खुशी से फूला नहीं समाता था ।वह रोज सुबह जल्दी उठता और शाम तक काम करता और अपनी हरी-भरी फसलों को देखकर खुश होता ।उसकी पत्नी घर का काम करती थी चाहे वर्षा हो गया आंधी तूफान आए अपने खेतों में हर रोज काम करता था। कोई भी दिन ऐसा नहीं होता था जिस दिन वह मेहनत ना करता हो। इस तरह उसके दिन व्यतीत हो रहे थे ।एक दिन की बात है कि जब वह हल चला रहा था तो उसने अपने खेत में एक तरफ उसका पैर किसी नुकीली चीज से जा टकराया ।उसको खोजने की कोशिश की मगर वह चीज इतनी कठोर थी कि वह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई ।अंधेरा हो चुका था उसने सोचा क्यों ना सुबह के समय में मै इसे देखूगा कि यह वस्तु क्या है?।सुबह जल्दी-जल्दी वह खेत में चला गया और देखने लगा कि यह क्या है ?यह देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई। उसका खेत सोने की मुहरों से भरा हुआ खड़ा था । वह घड़ा देखकर और सोने की मोहरें देखकर बहुत ही खुश हुआ ः। किसान सोचने लगा एक दिन मैं बहुत ही अमीर व्यक्ति बन जाऊंगा। मेरे पास गाड़ी होगी बंगला होगा नौकर-चाकर होंगे वह उस घड़े को देखकर सोचने लगा वह उस घड़े को घर नहीं ले जाएगा हो सकता है मेरी पत्नी मुहरों को देखकर अपनी सहेलियों से मोहरों वाली बात कह दे।नहीं नहीं औरतों के पेट में कुछ भी बात पचती नहीं है, नहीं यह बात मैं अपनी पत्नी को भी नहीं बताऊंगा ।यह सोचकर उस ने मोहरो से भरे घड़े को वैसे ही जमीन में गाड़ दिया ।सारी रात उसको नींद भी नहीं आ रही थी ।उस के घड़े को कोई चुरा कर ना ले जाए ।वह अब पहले जैसी मेहनत भी नहीं करता था ।वह सोचने लगा कि कोई बात नहीं अगर एक दिन मेहनत नहीं की तो क्या बिगड़ जाएगा ।पहले उसे खूब नींद आती थी। उसकी पत्नी सोचती आजकल मेरे पति काम पर भी बहुत कम जाते ह,हैं। बहुत आलसी हो गए हैं और रात को भी ठीक ढंग से खाना-नहीं खाते ।पता नहीं उनके मन में क्या बात है जो मुझसे भी वह नहीं कहते। वह अपने पति से पूछने का प्रयत्न करती मगर ,किसान उससे कुछ कहता नहीं था।तुम्हें क्या वह उसे यही कहता ,भाग्य-वान अब तो मैं भी तुम्हें सब कुछ लाकर दूंगा तुम्हें गहने भी बनवाउगा, बंगला भी दूंगा ।उसकी पत्नी सोचती कि मेरा पति पागल तो नहीं हो गया ।कभी सोचती कि मेरे पति को शायद कोई खजाना हाथ लग गया है ।वह अपने पति पर हमेशा नजर रखने लगी ।एक दिन उसने अपने पति को वहां पर कुछ खोदते हुए देखा। उससे रहा नहीं गया ।वह अपने पति से कुछ नहीं बोली मगर उसने यह सारी बात अपनी सहेलियों को बता दी।उसकी सहेलियां सोचने लगी हो ना हो दाल में कुछ काला अवश्य है। उसकी सहेली ने खेत में सुबह सुबह जाकर खुदाई कि तो उसे मोहरों से भरा घड़ा देखकर वह दंग रह गई। उसकी सहेली ने उस केे पति कीे मोहरे चुरा ली। जब किसान ने खेत में आकर देखा तो उसकी फसलें तहस-नहस हो चुकी थी ।उसने वहां पर खुदाई कर देखा तो उसे कुछ भी नहीं मिला। अब तो वह जोर जोर से रोने लगा। वह सोचने लगा कि जब वह मेहनत करके पेट भरता था तब वह चैन की नींद सोता था ।और मोहरो ने तो उसकी रातों की नींद भी छीन ली थी। मैं तो पैसा पाकर ,धन दौलत की चकाचौंध सेे अपने आप को मैं भूल ही गया था। ।धन-दौलत तो मैं हर कभी पा सकता हूं मगर मैं मेहनत करुंगा तो धन दौलत तो कभी भी कमा सकता हूं ।मगर रातों की नींद हराम करके और भी आलसी बन गया था ।अब मैं कभी भी लालच नहीं करूंगा ।इंसान को मेहनत से कमाए गए धन पर ही संतोष रखना चाहिए। पाप की कमाई से कमाई गई दौलत कभी भी हमें गवानी पड़ सकती है ।अब तो किसान सब कुछ समझ गया था अब फिर से वह पहले जैसे ही मेहनत करने लगा।

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