तरुण आठवीं कक्षा का छात्र था। घर में सबका लाड़ला था इसलिए वह बिगड़ गया था। सुबह उठते हुए जब उसकी मां उसे कहती बेटा नाश्ता कर लो तो वह नाक भौं सिकोड़ कर कहता की क्या बना है ?उसे खाने में कुछ भी अच्छा नहीं लगता था।उसे बाजार की वस्तुएं खाने की आदत पड़… Continue reading नेकी का रास्ता
Author: Meena Sharma
आशियाना
एक वन में विशाल और ऊंचा बरगद का पेड़ था। कितने सालों से वह पेड़ था यूं ही था वहां खड़ा । पेड़ ने एक दिन यूं आने जाने वालों से पूछा मैं यहां क्यों हूं रहता। मैं यहां क्यों हूं रहता। पेड़ हर रोज यही प्रश्न पूछा करता था। हर रोज चिंता में घुटता… Continue reading आशियाना
शिक्षा और अक्षर ज्ञान
एक दिन मिन्नी मां से बोली मैं भी स्कूल पढ़ने जाऊंगी। नई नई किताबे पढनें का अवसर पाऊंगी।। मां बोली बेटा तू तो है अभी बहुत ही छोटी । खा पीकर पहले हो जा मोटी ।। तू तब स्कूल पढ़ने जाना । पढ़कर बड़ा बन कर दिखलाना।। मिन्नी बोली मां देख ,मैं कितनी बड़ी दिखती… Continue reading शिक्षा और अक्षर ज्ञान
बच्चोंआओ, बच्चोंआओ मेरे साथ मिलकर गाओ
बच्चों आओ बच्चों आओ, मेरे साथ मिलकर गाओ। समय का सदुपयोग कर सफलता की सीढ़ी चढ़ते जाओ। हृदय में उत्साह धारण करके,अपनें कार्य में मन लगाओ। बच्चों आओ बच्चों आओ मेरे साथ मिलकर गाओ।। जो समय का सम्मान है करते । समय पर ही सभी काम है करते। वह अपना जीवन खुशी से है जीया… Continue reading बच्चोंआओ, बच्चोंआओ मेरे साथ मिलकर गाओ
नन्हा मुन्ना बच्चा हूं
नन्ना मुन्ना बच्चा हूं। लेकिन कान का कच्चा हूं।। सीधा साधा भोला भाला , लेकिन किसी की बातों में ना आने वाला ।। बड़ों का सम्मान करता हूं। उनका अपमान कभी नहीं करता हूं।। समय का पालन करता हूं। संयम से ही सारे काम करता जाता हूं।। नहीं करता हूं कक्षा में किसी से शत्रुता।… Continue reading नन्हा मुन्ना बच्चा हूं
कोरोना
विधाता ने कैसा खेल रचाया? चीन से निकले इस वायरस नें चारों तरफ गज़ब ढाया। दफ्तर जानें वालों पर भी गजब का कहर ढाया।। छोटा बच्चा, बड़ा, बूढ़ा, सभी घरों में ही व्याकुल होकर रह गए। घर कि चार दिवारी में बन्द हो कर सिमट गए।। कोरोना महामारी ने अपना कैसा तांडव रचाया? सभी मानव… Continue reading कोरोना
बेचारी मुर्गी
कितनी सुन्दर कितनी न्यारी। यह मुर्गी है बहुत ही प्यारी।। इसके पंख हैं बहुत ही कोमल। हो जैसे पतों की हरी हरी कोंपल। नीतु बोली अरे बुद्धु, पंख तो हैं प्यारे। ये उड़ नहीं पातीं हैं सारे।। गीतू बोली भला ये क्यों नहीं उड़ पाती हैं ? दीवार पर या छज्जे तक ही पंहुच पाती… Continue reading बेचारी मुर्गी
मजदूर
हाय रे मजदूर! तेरी यह कैसी कहानी । मुंह से मूक, आंखों से झर झर बहता पानी।। भाग्य भी कैसे-कैसे खेल खिलाए। विधि के विधान को कौन मिटा पाए।। घर से दूर गली, मोहल्ले सड़कों और हर जगह काम करने को आतुर हो जाता। हाय ये मजदूर!तेरी यह कैसी कहानी। तेरी यह व्यथा किसी ने… Continue reading मजदूर
माया जाल
हाथ का मैल है यह पैसा। हो लोभ के फल जैसा।। सब कुछ यहीं रह जाना है। साथ किसी के कुछ नहीं जाना है।। यह जीवन तो है बहुमूल्य। पुण्य कमा कर इसे बनाया जा सकता है जीने तुल्य।। चोरी फसाद के सभी धंधों को छोड़ कर, ॑ दूसरों की थाली में झांकना छोड़ दे,।… Continue reading माया जाल
स्नेह का बंधन
जंगल में एक वृक्ष की शाखा पर कबूतर कबूतरी का जोड़ा था रहता साथ में मधुमक्खियों का झुंड भी था इकट्ठा रहता।। हर रोज कबूतर दाना चुगनें था जाता । थक हार कर घर वापस था आता। कबूतर था बेचारा भोला भाला वह तो था उसका सच्चा दिलवाला।। कुछ समय बाद कबूतर कबूतरी ने घौंसले… Continue reading स्नेह का बंधन