मुन्नी का मधुर सपना

जब सब बच्चे स्कूल में आए तब मैडम ने बच्चों को कहा कि तुम्हें कल “मेरा स्कूल,” पर निबंध लिखने को दिया जाएगा। जो बच्चा सबसे अच्छा निबंध लिखेगा उसे इनाम दिया जाएगा ।निबंध ऐसा होना चाहिए जैसा आज तक किसी ने भी ना लिखा हो। जिसका सबसे अलग निबंध होगा उसे ₹100 ईनाम में दिए जाएंगे।


भोली भाली मुन्नी सोचने लगी कि मैं सबसे अच्छा निबंध लिखकर दूंगी। इस बार निबंध का पुरस्कार तो मुझे ही मिलना चाहिए। आज वह घर में आकर चुपचाप अपनी पढ़ाई करने बैठ गई। मां उसकी आदत से बहुत ही खुश हुई आज अचानक ऐसा क्या हो गया जिससे इसका रवैया ही बदल गया। थोड़ी देर पढ़ाई करने के बाद उसने अपनी मां को कहा कि मां मेरा खाना यहीं पर दे जाना। रात को भी जब मुन्नी खाना खाने नहीं आई तो उसकी मां ने उसकी प्लेट उसकी बिस्तर के पास ही रख दी ।उसने वहीं पर खाना खाया और पढ़ाई करने के पश्चात उसे नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला कि सपने में ही वह स्कूल में पहुंच गई थी। कक्षा में जल्दी-जल्दी जा रही थी। मैडम ने सब बच्चों को मिठाई बांटी और कहा कि सब के सब बच्चे मेरे स्कूल पर निबंध लिखो। मिनी बड़ी खुश हो रही थी वह सोच रही थी कि मैं सबसे अच्छा लिखूंगी ।उसने लिखा मेरा स्कूल मेरे मुताबिक हो। हम बच्चों के मन मुताबिक हो। हम बच्चे ही क्रमानुसार बच्चों को पढ़ाएं । जो बच्चे काम करके नहीं लाए तो उसे सजा नहीं मिले। उसे प्यार प्यार से समझाएं। हम में से हर रोज एक बच्चा अध्यापक या अध्यापिका बनें। कक्षा में शोर होने पर उन्हें सब बच्चों से सलाह मशवरा करके उनकी सजा तय करें। सुबह-सुबह स्कूल आने का मन नहीं करता। 10:00 बजे जब सुबह पापा ऑफिस चले जाएं और बसों का का शोर शराबा कम हो जाए तब हम स्कूल लगवाएंगे। यानी 10:00 बजे तो यह सम्भव नहीं हो सकता। स्कूल में सुबह जल्दी उठ कर स्कूल दौड़ना पड़ता है। न जल्दी उठा जाता है ,ना ढंग से खाया जाता है ,बिना नहाए ही स्कूल जाना पड़ता है ।स्कूल में भी नींद ही लग रही होती है मां भी जोर जोर से हिला कर उठाती है। बिस्तर पर सोए सोए ही खाना खाना पड़ता है ।डांट पड़ने का ख्याल आते ही स्कूल को जैसे तैसे उबासियां लेकर ही भागना पड़ता है।
मेरे स्कूल में मैडम का कोई काम नहीं होना चाहिए। हम बच्चे ही आपस में मैडम बने और बच्चों को पढ़ाएं। हम 12वीं कक्षा की होशियार सी छात्रा को पढ़वाई करवानें के लिए चुन देंगें। मैडम तो सारे दिन स्कूल में सारे दिन लिखवाती रहती हैं ।हमारा मन भी नहीं करता तो भी मजबुरी से लिखना पड़ता है।कई बच्चे जिन को समझ नहीं आता है वह एक ही लाइन को बार बार लिखते रहें हैं ताकि मैडम समझे कि हम काम कर रहें हैं। हम तो एक दिन पढाई किया करेंगे और एक दिन लिखनें का काम किया करेंगे। एक दिन खेल खेल के माध्यम से एकटिवीटी करके काम करेंगें।
हम सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया करेंगे। हमें सकूल का बहुत ही भारी बैग उठाना पड़ता है।की बार कौपियां भी भूल जातें हैं हमें स्कूल में अपमान सहना पड़ता है।हम बस्ते का बोझ भी कम करेंगे।हम अपनी पुरानी किताबों का एक एक सैट स्कूल में रख देंगे। नया सैट घर पर ही रखेंगे। स्कूल में केवल कौपियां ही ले कर जायेंगें।और काश ऐसा हो जाता कि हफ्ते में एक दिन ही अध्यापिकाओं या अध्यापक जी को कक्षा में बुलवाएं ।मैडम को छूट दे देंगे और कहेंगे कि अपना अधूरा कार्य पूरा कर लो। काश ऐसा हो जाए तो हम सभी बच्चे खुश हो जाएंगे। पढ़ाई भी अपने मन मुताबिक होगी।
होमवर्क तो अपने मन मुताबिक ही करेंगे और वह भी स्कूल में ही किया करेंगे। घर में तो मम्मीयां काम खुद कर देती हैं या कान पकड़ कर या खुद कर देती हैं। ऐसा काम करने का क्या फायदा? स्कूल में हम सब से चाहे एक ही पैराग्राफ लिखें लेकिन अपने आप। स्कूल में हर रोज छुट्टी के बाद एक घंटा खेल खेलेंगे। बच्चे अपने मनपसंद खेल खेलेंगे। ग्रुप में बच्चे जो खेल जिसको पसंद है उसमें हिस्सा लेंगे ।श्रुतलेख कंपटीशन में भी जिन बच्चों को सिलेक्ट किया जाएगा उन्हीं को हम ईनाम बाटेंगे अगली बार जो बच्चे प्रथम आएंगे उनका अलग-अलग सा ग्रुप बनाएंगे। सेकंड आनें वालों का अलग ग्रुप। और थर्ड आनें वालों का ग्रुप बनाएंगे फिर पांच ग्रुप में से कंपटीशन करवाएंगे। हर एक बच्चे को इनाम जीतने का मौका मिलेगा। हर बार एक ही बच्चा इनाम ले जाता है।इससे वे बच्चे मायूस हो जातें हैं जिन बच्चों नें थोड़ी बहुत मेहनत की होती है। इसमें हर एक बच्चे को ईनाम लेने का मौका मिलेगा। जिन बच्चों को इनाम नहीं मिलता है वह बच्चे बहुत ही मायूस हो जाते हैं ।हम सभी को इईनाम दिलवानें का यत्न करेंगे जो बच्चा अपने ग्रुप में सबसे अच्छा होगा वह अपनें ग्रुप को पढ़ाई में आगे लानें में मदद करेगा। जो बच्चा अपने सबसे कमजोर बच्चे को पढ़ाने में सक्षम होगा सबसे बढ़िया उसे इनाम दिया जाएगा। हम बच्चे 3 महीने में एक बार पिकनिक का भी आयोजन किया करेंगे। स्कूल में सफाई कूड़ा कर्कट फैलानें वालों के प्रति सख्ती से पेश आएंगें। जो बाहर थूकेगा उसे जुर्माना भी देना पड़ेगा। कड़े निर्देशों का पालन करना होगा। कितना मजा आएगा? जब हम सारे कार्य अपने मनपसंद योजना के अनुसार करेंगे।
मैडम चुपके से कक्षा में आ गई थी। उसने मुन्नी की सब बातें सुन ली थी।वह अपनें निबंध में से बच्चों को पढ़ कर सुना रही थी। जो बच्चा सभी ग्रुप में से सबसे ज्यादा अंक लाएगा हम उसे अपना मुख्याध्यापक या मुखिया चुन लेंगे ।उसकी आज्ञा मानना हमारा अधिकार हो जाएगा ।

हम अपने स्कूल में चुनाव भी करवाएंगे मिड डे मिल्स हमारे मुताबिक ना बना और जरा सी भी भूल चूक हुई तो हम खाना बनानें वाले अंकल या आंटी को बताएंगे चावल कि मात्रा,पानी की मात्रा, पैमानें से तोल कर और साफ सफाई का ध्यान रखते हुए ,कितना खान बनेगा? उसकी मात्रा के लिए हम एक लड़की को चयनित कर के खाना बनाने वालों की मदद करेंगे। हमें हमारे मन मुताबिक खाने को मिलेगा अगर कोई बच्चा बहुत गरीब है या बीमार है तो हम सब यह बच्चे मिलकर उसकी सहायता करेंगे ।हम स्कूल में एक गुल्लक भी बनाएंगे। हर महीने उसमें 10- 10रुपये डालेंगे और अपने अध्यापक वर्ग और अध्यापकों से भी 100रुपये ले कर गुल्क में डालेंगे। किसी बच्चे के बीमार होने पर उन से उसकी मदद करेंगे। हम सभी बच्चे घर में जो कोई भी फल या और कोई खानें की वस्तु हमें घर से खानें को मिलेगा खाने के लिए लाएंगे। वह 15 मिनट के ब्रेक के बाद ही बच्चों में आपस में मिल बैठकर खाएंगे। जब किसी बच्चे का जन्मदिन आएगा तो हम उस से कहेंगे कि टॉफी चॉकलेट के स्थान पर स्कूल में ही खीर बनवा लिया करेंगें।


हम अपने स्कूल में शांति का माहौल बनाएंगे। प्रार्थना में भी हर एक बच्चे को प्रतिज्ञा और प्रार्थना बोलने के लिए हर ग्रुप की बारी लगवाएंगे। जो बच्चा राष्ट्रगान गलत गाता है उसे हर रोज अभ्यास करना कर याद करवाना हर ग्रुप की बारी होगी। जो बच्चा याद नहीं करेगा उस ग्रुप के 5 अंक काट लिया करेंगे ।

मैडम उन बच्चों की बातें सुनकर मुस्कुरा रही थी ।वह चुपचाप वहां से ऑफिस में चली आई ।उसने बच्चों से कुछ नहीं कहा क्योंकि बच्चे सब अपने ही धुन में मग्न थे। मैडम के आने का उन्हें जरा भी आभास नहीं था ।मैडम ने सभी अध्यापकों से मिलकर योजना बनाई और बच्चों को कहा कि बेटा आज से एक महीने के लिए हम सब तुम्हारे मन मुताबिक काम तुम्हें सौंपेंगे न।
एक महीने के लिए तुम स्कूल का कार्य भार अपने ऊपर ले लो। हमें स्कूल के रजिस्टर पूरे करने हैं, देखते हैं तुम स्कूल में पढ़ाई का कैसा माहौल बनाते हो? बच्चों का एक महीना पूरा हो जाने पर निरीक्षण किया तो पाया कि बच्चों ने तो बेहतर परिणाम दिया था। जिन बच्चों को मैडम पढ़ाते पढ़ाते थक जाती थी वह बच्चे बड़े आनंद से अपने कार्य में दिलचस्पी दिखा रहे थे। अध्यापकों ने जब महीने के आखिरी दिन में टैस्ट लिया तो वह देख करदंग रह गए कि सभी बच्चों ने पहले से ज्यादा अंक लिए थे। उन्होंने तालियां बजाकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया और कहा कि बच्चों हमें पता ही नहीं था कि तुम स्कूल का उत्तरदायित्व भी बखूबी निभा सकते हो। हमें अपने काम करने का तुम को मौका दिया हम सब अध्यापक वर्ग तुमसे खुश हैं ।


मुन्नी तुम्हें इनाम के तौर पर ₹100 दिए जाते हैं। तुमने सबसे अच्छा निबंध लिखकर सभी बच्चों को सुनाया, लेकिन पीछे खड़े होकर मैं भी सुन रही थी। हम सभी अध्यापक वर्ग तुम्हें भोज देकर खुशियां बाटेंगे। बच्चों को भोज देकर उनकी खुशी अध्यापिका ने और भी बढ़ा दी। अचानक मैडम ने ₹100 का नोट मुन्नी को थमाया और कहा कि बेटा यह लो तुम्हारा ईनाम तुम नें सब से अच्छा निबंध लिखा है।तुम ने लिखनें के बावजुद उसे बच्चों को पढ़ कर ही सुना दिया। अचानक उसे जोर का झटका लगा वह तो सपना देख रही थी। उसकी मां मुन्नी को हिलाकर जोर से बोली क्या तुम्हें आज स्कूल नहीं जाना? देर हो जाएगी। आंखें मलते चलते हाय!यह तो सपना था।इतना अच्छा सपना , काश यह सपना सच हो जाता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *