(सच्चा सुख) कविता

एक जंगल में काला हिरण और हिरणी थे  रहते। दोनों पति-पत्नी खुशी से थे रहते। काला हिरण अपनी हिरणी से था बहुत प्यार करता। उसकी छोटी-छोटी इच्छा हरदम पूरी था किया करता। एक दिन हिरण बोला हिरणी से   तुम क्यों इतना लगाव मुझसे हो  किया करती। तुम मेरे बिना भी क्यों नहीं रह सकती। हिरण… Continue reading (सच्चा सुख) कविता

पढ़ना लिखना है जरुरी

11/12/2018 एक दिन मुन्नू अपनी मां से बोला मां मुझे पाठ याद करवाओ न। मुझे पाठ के साथ साथ इसका अर्थ भी समझाओ न।। मां बोली बेटा मैं हूं अनपढ़। मैं तुझे ना पढ़ा पाऊंगी। लेकिन मैं तुम्हें अच्छी शिक्षा दे पाऊंगी।। मां बाप नें जल्दी से शादी कर डाली। शादी करके अपनी जिम्मेदारी पूरी… Continue reading पढ़ना लिखना है जरुरी

काली और भूरी कोवी

एक घना जंगल था वहां पर एक पीपल का पेड़ था। उस पेड़ की शाखाएं दूर दूर तक फैली हुई थी। उस पेड़ की शाखा पर कौवे और कौवी का परिवार रहता था। काली कौवी भी भोजन की तलाश में दूर-दूर तक निकल जाती थी। उस पेड़ की दूसरी तरफ साथ में एक दूसरे पेड़… Continue reading काली और भूरी कोवी

(मानव शरीर के अंग)

हड्डियों और मांस पेशियों से मिलकर बना है यह शरीर। मानव को आकृति प्रदान करने में सहायक  होता है  यह शरीर।। मांसपेशियां शरीर के हिलने ढुलनें में सहायता है करती। इसके बिना मानव की कोई नहीं हस्ती। मस्तिष्क शरीर के सभी अंगो को नियंत्रित है करता। यह तंत्रियों के माध्यम से है काम करता। हृदय… Continue reading (मानव शरीर के अंग)

(शिमला में बिन मौसम बरसात)

बिन मौसम की की बारिश में ऐ मानव क्या तू दौड़ पाएगा? पल में ठंडक पल में गर्मी क्या तू सह आएगा।। गर्मी के मौसम में आसमान ने बजाई रणभेरी। वर्षा ने आते हुए भी नहीं लगाई देरी।। छम छम वर्षा ने बरस कर पानी बरसाया। बादलों ने भी गरज गरज कर अपना बिगुल बजाया।।… Continue reading (शिमला में बिन मौसम बरसात)

ईमानदार बंजारा

बंजारों की एक छोटी सी बस्ती थी। उन बंजारों का मुखिया था रामप्रसाद। रामप्रसाद को उन्होंने मुखिया पद से हटा दिया था। वह अपने बेटे के साथ अलग से रहता था। राम प्रसाद की पत्नी मर चुकी थी। उसनें अपनें बेटे का  नाम  विवेक रखा था। प्यार से वह अपने बेटे को  विकु बुलाया करता… Continue reading ईमानदार बंजारा

(झपटू)

एक राजा था उसके एक बेटा था वह अपने बेटे को प्यार से झपटू बुलाता था जब वह छोटा था वह हर एक वस्तु को झपट कर प्राप्त कर लेता था। उसकी आदत बड़े होकर भी वही बनी रही। वह बहुत ही दयालु था।। एक बार राजा ने झपटू को अपने पास बुलाया और कहा… Continue reading (झपटू)

वनस्पति वैज्ञानिक हितेश

एक बच्चा था उसका नाम था। हितेश। वह बहुत ही शरारती था ।  वह प्रकृति की गोद में अर्थात् जंगल में पैदा हुआ था । हितेश की नानी ने उसके पापा को कहा था कि सविता मेरे ही घर पर बच्चे को जन्म दे गी। तुम इसको वहां पर छोड़ देना अभी हितेश के पैदा… Continue reading वनस्पति वैज्ञानिक हितेश

हाय! रे मानव”(कविता)

10/3/2019 वह दिन भी थे कितनें प्यारे। गांव में थे हरे भरे खेत हमारे।। खेतों में अब चारों ओर बन गए मकान। खेत हो गए बिल्कुल उजाड़ समान।। बच्चे जहां खलियान में सुबह से शाम तक धमा चौकड़ी मचाते थे। सारा दिन खेल खेल कर नहीं उकताते थे।। खलिहानों में भी  अब तो बन गए… Continue reading हाय! रे मानव”(कविता)