कब क्यूं और कैसे

तीन दोस्त थे अंकित अरुण और आरभ। तीनों साथ-साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। वह तीनों 12वीं की परीक्षा के बाद पढ़ाई भी कर रहे थे। और नौकरी ढूंढने का प्रयास भी कर रहे थे। उनके माता पिता चाहते थे कि वे नौकरी करके हमारा भी सहारा बने। अंकित अरुण और आरभ तीनों मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। अंकित एक लंबा चौड़ा हट्टा-कट्टा देखने में खूबसूरत, चतुर और शांत स्वभाव का। ना जाने उसने कितने इंटरव्यू दे डाले मगर कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही थी। अंकित की मम्मी ने पुकारा “बेटा क्या बात है? तुम आजकल कहीं भी इंटरव्यू नहीं दे रहे हो। ऐसा कब तक चलेगा। घर में कोई ना कोई कमाने वाला होना चाहिए। तुम्हें जल्दी से जल्दी नौकरी ढूंढनी होगी मगर तुम तो शायद एक कान से सुनते हो और दूसरे कान से निकाल देते हो”। अंकित बोला “मां मैं क्या करूं? तुम सोचती हो मैं सारा दिन यही आवारागर्दी करता रहता हूं। मुझे आप सबकी कोई फिक्र नहीं है। कोशिश तो कर रहा हूं।”

अरुण के परिवार में अरुण सबसे छोटा था। उसके परिवार में एक बहन थी। पापा रिटायर हो गए थे। सभी की आस अरुण पर टिकी थी कि कब वह जल्दी से अपनी ज़िम्मेदारी समझे और कुछ कमा कर लाए। अरुण भी इन्टरव्यू दे दे कर थक चुका था। अरुण बहुत चतुर था, जो देख लेता उसे भूलता नही था।

आरभ के परिवार में भी उसके पिता और उसकी एक बहन थी। आरभ छोटे कद का घुघंराले बालों बाला देखने में सुन्दर। तीनों जब भी आपस में मिलते तो कहते नौकरी ढूंढते-ढूंढते थक गए। कुछ ना कुछ नया करते हैं। घर में बताए बगैर घर से निकल गए।

तीनों ने एक दो दिन पहले अपने माता पिता को बता दिया था कि हम तीनो को काम के सिलसिले से बाहर भी जाना पड़ सकता है। तीनों के माता-पिता अपनें बच्चों की इतनी चिंता नहीं करते थे। तीनों दोस्त मुंबई जाने वाली गाड़ी में बैठ कर आपस में बातें करनें लगे। टिकट चेकर आया तो हम क्या कहेंगे। हमारे पास तो मुंबई जाने का भी किराया नहीं है। अरुण के दिमाग में एक योजना आई। क्यूं न हम यूं ही कैसी भी योजना बना लें। यूं ही कोई मन गडन्त कहानी। आरभ मन ही मन में कहने लगा। सचमुच में ही उन्हें टिकट चेकर आता दिखाई दिया। वह वही आ रहा था। बोला तुम तीनों खड़े क्यों हो? अरुण बोला हम यूं ही खड़े हैं। अभी अभी ना जाने हमारा सूटकेस एक व्यक्ति लेकर भाग गया। हमने यहां पर रखा था। टिकट चेकर उन्हें भला बुरा कहने लगा। तुम झूठमुठ कह रहे हो। मैं अभी थानेदार साहब को बुलाता हूं। उसने सचमुच में ही थानेदार को बुला लिया था।गाडी धीमी रफ्तार से चल रही थी। टिकेटचैकर उन तीनों से बोला जब तक पुलिस इन्सपैक्टर आते हैं तब तक तुम बैठ सकते हो। तीनों चुपचाप एक दूसरे से कह रहे थे न जानें अब क्या होनें वाला है। कुछ न कुछ तो सोचना ही पड़ेगा। वे तीनों बैठ गए थे। उन के ही समीप एक लम्बा सा आदमी अपनें किसी रिश्तेदार को जोर जोर से कह रहा था मेरे घर जरूर आना। मैं तुम्हें नौकरी दिलवा दूंगा। अरुण उस व्यक्ति को बार बार देख रहा था। उसके कानों में छेद थे। उसने एक कान में बाली पहन रखी थी। मांग सीधी की हुई थी। वह स्टाइल उस को खुब जंच रहाथा। हाथ में सोनें का कंगन पहन रखा था। देखें में किसी नवाब से कम नहीं लग रहा था। अरुण अपनें दोस्त को बार बार इशारा कर रहा था मगर उसका दोस्त तो भीगी बिल्ली बना अपनें मन में आने वाली मुसीबत से बचनें का उपाय सोच रहा था। जब अरुण नें उसे झंझोडा तब उस की तन्द्रा टूट गई वह अपने दोस्त की तरफ देख कर बोला क्या है? अरुण नें उस व्यक्ति को दूसरे डिब्बे में जाते देख लिया था। जब वह जाने लगा तो अचानक उसे धक्का लगा। उस के पैर से खून निकल रहा था। उस के साथ एक शख्स था जो हाथ में शायद सूटकेस लिए था। उसनेपना सूटकेस किसी को थमा दिया।
वह बोला बाबू साहब आप को कहां लगी? उसका हाथ पकड़ कर बोला बाबू साहब आप के हाथ से भी खून बह रहा है। मै आप को पट्टी बांध देता हूं। वह उसके हाथ में पट्टी बांधने लगा। अचानक अरुण की नजर फिर से उस व्यक्ति पर गई। उस के हाथ पर टैटू खुदा हुआ था। अचानक थोड़ी देर बाद वह शख्स न जानें कंहा गायब हो गया।
वहां पर पंहूंच कर थानेदार को टिकट चेकर ने सारी घटना सुना दी किस तरह कुछ नकाबपोशों ने इन नवयुवकों का सूटकेस छिन कर अपनें पास रख लिया है। टिकट चेकर बोला तुम्हारा सूटकेस किस रंग का था। अंकित बोला नीले रंग का था। बीच में काली धारी लगी थी। हमारा सब कुछ उस सूटकेस में था। हमारे पास टिकेट लेने के लिए भी रुपये नंही है। तीनों इसी तरह एक दूसरे से कहने लगे चलो दोस्तों अभी भी समय है। क्या पता।? वह आदमी हमारा सूटकेस लेकर नीचे उतरा हो। आओ हम तीनों गाड़ी से नीचे उतर जाते हैं। हम कैसे मुंबई जाएंगे? अंकित आंखों में झूठमूठ के आंसू भर कर बोला मेरे दोस्त की बहन की शादी है। उसने मुझे शादी में बुलाया था। वहीं पर पहुंच कर रुपयों का जुगाड़ करते हैं। हमारी एक दोस्त भी सूरत में रहती है। उस से रुपये ले कर हम आप को दे देंगे। मैने उस को फोन कर दिया है।

रेलवे सेक्योरिटी पलिस पास ही गाड़ी के डिब्बे में घूम रहा था एक बड़े से नकाबपोश वाला आदमी उसके पीछे खड़ा था। गाड़ी में आया और वह अपने आदमियों को कहनेंलगा इस सूट केस में बहुत ही जरुरी कागजात हैं। उसने वह सूटकेस उसने अपनें पीछे छिपा लिया। टिकट चैकर कि नजर भी उस व्यक्ति पर नजर पड़ी। उसके हाथ में से सूटकेस लेकर टिकट चेकर हैरान रह गया। वह थानेदार से बोला वह नवयुवक ठीक ही कह रहे थे। यह उन्हीं का सूटकेस है। नीले रंग का सूटकेस और काली धारी वाला। थानेंदार नकाबपोश आदमी से बोला तुम्हारा पर्दाफाश हो चुका है। तुम अपने आप को मेरे हवाले कर दो। वर्ना बेमौत मारे जाओगे। एक तो चोरी और ऊपर से सीनाजोरी। अरुणको थोड़ा सा सुनाई दिया। वह चौक कर टिकट चेकर को देखनें लगा। वह किस से बातें कर रहा है। अपने दोस्तों से बोला कि टिकट चेक कर कुछ बातें कर रहें हैं। जल्दी से उस नकाबपोश व्यक्ति ने चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। जब वह गाड़ी से कूदा अरुण बाहर की ओर खडा हर आनें जानें वाले को बड़ी होशियारी से देख रहा था। टिकट चेकर सूटकेस लेकर उन तीनों के पास आया। अरुण सोचने लगा शायद सूटकेस में रुपये होंगें। उसने नकाबपोश वाले व्यक्ति को सूटकेस को खोलते देख लिया था। वह सूटकेस किसी एक नम्बर को डायल करनें से खुलता था। उसने 845 डायल करते देख लिया था वह नकाबपोश गाड़ी से नीचे उतर चुका था। उस के अन्दर एक डायरी और कुछ रुपये थे।
टिकेट चैकर बोला सूटकेस मिल गया है। तुम ठीक कह रहे हो या गलत। तब तो इस सूटकेस की चाबी भी तुम्हारे पास होगी। अरुण नें कहा यह सूटकेस तो नम्बर डायल करनें से खुलता है। यह चाबी से नहीं खुलेगा। दोनों दोस्तों की सिटीपिटी गुम हो चुकी थी। अब तो अवश्य पकडे जाएंगे। अरुण सोचने लगा कंही उस ही नकाबपोश का सूटकेस तो नहीं है। यह उस व्यक्ति का सूटकेस होगा तो 845नम्बर से खुल जाएगा। अब सब कुछ राम भरोसे है। या गाड़ी आज आर या पार वाली स्थिति उत्पन्न हो गई थी। टिकट चेकर बोला इसमें क्या है वह बोला इसमें एक डायरी कपडे और रुपये हैं। अरुण नें नम्बर घुमाया ताला खुल गया। दोनों दोस्त उस की तरफ हैरत से देखनें लगे। टिकट चेकर नें वह सूटकेस उन्हें थमा दिया। टिकेट चैकर ने कहा चलो गाड़ी का टिकट लो। अब तो तुम्हें सूटकेस भी मिल गया है। आरभ बोला क्यों नहीं अभी हम आपको रुपये देते हैं। अरुण नें टिकेटचैकर को कहा इसमें हमारा पर्स था। वह नकाबपोश इसमें से पर्स ले कर भाग गया। टिकेटचैकर बोला मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता अगला स्टेशन सूरत आएगा वहीं तुम उतर जाना। यह कह कर टिकेटचैकर चला गया। आरभ ने चुपके से 50,000रुपये अपनी जेब में डाल लिए। उसमें एक मोबाइल भी था। उसने वह मोबाईल अपनी जेब में रख लिया। थोड़ी देर बाद उस नकाबपोश नें फोन किया जिसका सूटकेस था। उसने कहा मेरा सूटकेस तुम तीनों के पास है। यह मत समझना मैं तुम को छोड़ दूंगा। तुम नें अगर मेरा सूटकेस मुझे नहीं लौटाया तो तुम को ऐसी सजा दूंगा तुम जिन्दगी भर नहीं भूल पाओगे किस से पाला पड़ा था। अरुण ने उस नकाबपोश की सारी की सारी डायरी पढ ली थी। वह कंहा जानें वाला था। उसने अपनें दोस्तो को भी बताया मुझे तो यह आदमी ठीक नहीं लगता वह सचमुच ही कीसी गैन्ग से सम्बन्ध रखने वाला लगता है। अरुण नें उस डायरी में से उस नें जो कुछ डायरी में लिखा था उस की फोटोकॉपी कर ली। टिकेटचैकर चैकर उनके पास आ कर बोला उतरने के लिए तैयार हो जाओ।अरुण नें टिकेटचैकर को कहा तबतक आप हमारे सूटकेस संभालकर रखोजब तक सूरत स्टेशन नहीं आ जाता। हो सकता है वह फिर चोरी करनें आ जाए अभी तो हमारे रुपये ही खोए हैं फिर जरुरी कागजात भी गुम हो सकते हैं। अरुण नें वहसूटकेस पुलिस्इन्सपैक्टर को पकड़ा दिया।

तीनों बड़े खुश हुए। वाह! आज तो हमारी लॉटरी लग गई। अचानक गाड़ी रुक गई। वह उतरने के लिए तैयार ही थे कोई अजनबी नकाबपोश अचानक ट्रेन में आया और तीनों के ऊपर बंदूक तान कर बोला तुम तीनों अपने खैरियत चाहते हो तो सूटकेस मेरे हवाले कर दो वर्ना बेमौत मारे जाओगे। तुमने मेरा सूटकेस टिकट चेकर के हवाले कर दिया है। जल्दी से 15 दिन के अंदर-अंदर मेरा सूटकेस इस पते पर मुझे मिल जाना चाहिए वर्ना तुम तीनों में से कोई भी जिंदा नहीं बचेगा।
तीनों थर-थर कांपने लगे। हम तुम्हें तुम्हारा सूटकेस लौटा देंगे। आरभ नें वह सूटकेस सीट के नीचे रख लिया था। पुलिस वाले ने उसे देख कर कहा। तुम फिर आ धमके। पुलिस इन्सपैक्टर उसे पकडने ही वाला था वह फिर से उसे चकमा दे कर भाग गया।

वह अजनबी न जाने कहां गायब हो गया। सूरत स्टेशन आ गया था। अंजली उन्हें लेने स्टेशन पर आ गई थी। बोली तुम तीनों मेरे साथ चलो। यहां की शादी को देखने का लुफ्त उठाओ। गाड़ी 2 घंटे लेट थी। गाड़ी सूरत पंहुच गई थी। अंजलि के जोर देनें पर वे तीनों शादी में चले गए। शादी के समारोह में सब खुशियां मना रहे थे। उन्होंने देखा कि वह नकाब पोश जिसका वह सूटकेस था वह आदमी भी शादी में मौजूद था। उसने दुल्हन के पिता के साथ हाथ मिलाया। अंकित अंजलि से बोला यह व्यक्ति कौन है? जो तुम्हारी सहेली के पिता से हाथ मिला रहे हैं। यह तो मेरी सहेली के पिता के खान दोस्त हैं। अरुण और अंकित को पता चल गया शायद उनकी सहेली के पिता भी इस गैन्ग में संलिप्त होंगे। वह जब तक अपनी आंखों से देख कर पता नहीं करेगा तब तक वह किसी पर भी आरोप लगाना ठीक नहीं समझता। अंकित नें अंजलि के साथ मिलना-जुलना शुरू कर दिया। वह अंजलि के साथ दोस्ती बढ़ा कर पता लगाना चाहता था कि कौन कौन व्यक्ति इन गैन्ग के आदमियों के साथ संलिप्त है। अंजलि के कहनें पर वे सूरत में रुक गए थे अंजलि नें उन्हे कहा कि मैं तुम्हे अपनें पति अक्षय से मिलवाती हूं। शायद वह तुम्हे अच्छे ढंग से तुम्हें गाईड कर दे।
अंजलि ने एक दिन अंकित को अपने पति से मिलवाया। उसके पति एक बहुत ही बड़े व्यापारी थे। उनसे मिलकर अक्षय बड़ा खुश हुआ। अंजली बोली यह नौकरी की तलाश में यहां पर आए हैं। उसके पति बोले यह तो बड़ी अच्छी बात है अंजलि के पति उन दोनों को छोड़कर अंदर चले गए थे।वह थोड़े ही समय में अंजलि से घुलमिल गया था। वह सोचने लगा मुझे अंजली को सब कुछ बताना चाहिए। मैं उससे किसी भी किमत पर झूठ नहीं बोल सकता। तीनों दोस्त वही रुक गए थे।शादी के माहौल में सब लोग इधर उधर आ जा रहे थे। अरुणभी डान्स करनें के लिए तैयार हो गया। अचानक उस की नजर उस शख्स पर पड़ी जो अपना सूटकेस मांगने आया था।

अरुण नें जल्दी से अपने दोस्तों को इशारे से अलग कमरे में बुलाया। तीनों दोस्त इकट्ठे अलग कमरे में आ गए। अरुण बोला अभी अभी मैनें उस नकाबपोश आदमी को यंहा देखा है।हमें पता करना होगा यह वही आदमी है या नही हमें उसके हाथ पर बनें टैटू पर नजर रखनी होगी। हमें उस से सतर्क रहना होगा। उस नें आज तो कान में बाली नही डाली है। आरभ बोला तुम नें सारा शादी का मजा किरकिरा कर दिया बड़ी मुश्किल से शादी में आन्नद लेनें का मौका मिल रहा था। अंकित बोला मैंने भी देख लिया था। मैंने अपनी दोस्त अंजलि से उस इन्सान के बारे में पता कर लिया। यह अंजलि की सहेली के पिता के खान दोस्त है। उनके बेटे से अंजलि की सहेली की शादी हो रही है। हम इस गैन्ग का पर्दाफाश कर के ही रहेंगे। अच्छा हुआ हम पर किसी की नजर नहीं पड़ी नही तो वह हमें पहचान जाता। हम तीनों को वेश बदलना होगा। उस पर कड़ी नजर रखनी होगी। अरुण नें कहा मुझे दुल्हन का मेकअप करना अच्छे ढंग से आता है। मैने अंजली भाभी को अपनी सहेली से बातें करते सुन लिया था वह अंजलि को कह रही थी कि मैंने मेकअप करवानें के लिए बेस्ट डिजाइनर को बुला लिया है। वह आती ही होगी। उसका नाम श्वेता है। उसका फोन आया था मुझे लेनें आ जाओ। मै तो जा रहा हूं। मै मेकअप वाली बन कर आ जाऊंगा। उसका कुछ न कुछ बन्दोबस्त करना पड़ेगा इतना कह कर वह बाहर निकल गया
अरुण जल्दी से बस स्टॉप पर जा कर श्वेता की तरफ जा कर बोला। शायद आप किसी को ढूंढ रहीं हैं। वह बोली मैं पास ही अपनी सहेली अंजली की दोस्त की शादी में उसका मेकअप करनें जा रही हूं। अचानक अरुण बोला मुझे तुम्हारी सहेली अंजलि नें भेजा है। श्वेता उस के साथ चलने लगी। अरुण नें उसे नींद की गोलियां खिला दी और उसे कुछ सूंघा दिया और बेहोश कर दिया। उसनें उसे उस की गाड़ी में ही रहने दिया और मेकअप वाली बन कर आ गया।

आरभ नें और अंकित नें औरतों वाली ड्रेस पहन ली और डान्स करने के लिए तैयार हो गए। उनकी नजरें तो खान पर थी। वह कंहा जा रहें है? क्या कर रहें हैं?
दुल्हन की सहेलियाँ उसे मण्डप की ओर ले जा रही थी। जय माला हो चुकी थी। खान अंकल के बेटे कुणाल नें वधु को जयमाला पहना दी। किरण नें भी जयमाला कुणाल के गले में डाल दी। फेरे भी लगनें वाले थे। कुणाल नें अपनी पत्नी को हीरों का हार पहनाया। सब की नजरें श्वेता के गलें में पहने हीरो के हार पर पड़ी। वह पूरे 25करोड का हार था। सब लोंगो नें तालियाँ बजा कर वर वधू को आशिर्वाद दिया। वर के पिता नें उन दोनों को आशीर्वाद दिया। उन्होने रुपये देनें के लिए पन्डित को बुलाया। जब वर के पिता नें अपनी जेब से रुपये निकाले तो अरुण हक्काबका रह गया उस के हाथ में टैटू था। उसे मालूम हो चुका था वह तो वही नकाबपोश है जिस का सूटकेस हमारे पास था।
सब लोग शादी में व्यस्त हो गए।
अचानक अंजलि के पति को दौड़ कर जाते हुए अंकितनें देखा। अंजलि नेंअपनें पति को आवाज लगाई आप कंहा भागे जा रहे हो? वह भागता हुआ अपनें दोस्त खान को गले लगा कर बोला आप को बधाई हो। आज तो आप बहू वाले हो गए। अंकित और आरभ बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रहे थे। अंकित को मालूम हो गया था अंजलि के पति भी उन से मिले हुए थे। अचानक लाईट चली गई। अंकित नें देखा अंजलि के पति नें मास्क लगा लिया था। उन को अब कोई भी नहीं पहचान रहा था। वह खान के पास जा कर खड़े हो गए। खान उनके पास आ कर बोले आप को किस से मिलना है? उन्हें उन के दोस्त नें भी नहीं पहचाना। अचानक मास्क वाला आदमी मुस्कुराते हुए वह वहाँ से चलते हुए बोला मैं लाईट ठीक करनें वाला हूं। खान नें कहा जल्दी जाओ यहाँ पर क्या कर रहे हो? मास्क वाले आदमी ने लपक कर दुल्हन के गले से चेन छीन ली। अरुण नें उसे चोरी करते देख लिया था। चोरी करनें के बाद अंजलि के पति नें वह चेन एक गाड़ी की डिक्की में रख दी। अरुण नें गाड़ी का नम्बर देखनें का प्रयास किया। उसे अन्धकार में कुछ नहीं दिखाई दिया। उसनें अपना हैट उतार दिया। और सामान्य स्थिति में आ गया। अचानक लाईट आ चुकी थी।दुल्हन नें अपनें गले की तरफ देखा हार नहीं था। वह जोर जोर से रोनें लगी। हार गायब हो गया था। शादी वाले घर में इधर उधर भगदड़ मच गई थी। सब लोग हैरान थे हार कौन ले कर जा सकता है? दुल्हन के पिता नें पुलिस कर्मियों को फोन कर दिया था। एलान कर दिया था कोई न भागने पाए।
अंजली के पति नें बडी ही होशियारी से वह हार अपनी गाड़ी में छिपा दिया था। उसे और भी खुशी हुई जब उनके दोस्त खान साहब नें उन्हें इस वेश भूषा में नहीं पहचाना। उन्होनें अपनें मन में सोचा आज तो 25करोड की लाटरी लग गई मुझे कौन कहेगा कि मैंनें अपने दोस्त के पेट में छुरा घौपा है। मेरे पर तो किसी को भी शक नहीं होगा। वह चुपचाप हार रख कर शादी के उत्सव में भाग लेनें के लिए चला गया।अरुण के दिमाग में वह सब घटना घूम रही थी। मेरी दोस्त का पति भी खान साहब की तरह ही फरेबी है। कितनी आसानी से उस नें वह हार गाड़ी की डिक्की में डाल दिया। खान को तो कभी विश्वास नहीं होगा कि उनका दोस्त उसके साथ छल कपट भी कर सकता है
शादी वाले घर में कोहराम मच गया था। सब आपस में बातें कर रहे थे आखिर हार कौन ले जा सकता है? चलो दुल्हन को मेकअप करने के लिए ले जाओ। तब तक पुलिस आती ही होगी। अरुण नें सारी बात अंकित को बता दी कि अंजली के पति ने मास्क पहन कर हार अपनी गाड़ी में डाला है। मुझे रात के समय गाड़ी का नम्बर नहीं दिखा। अंकित बोला मैं बाहर जा कर गाड़ी का पता लगाता हूं। अंकित बाहर औरत के वेश में ही बाहर चला गया। वह गजरा बेचने वाली बन कर आई थी। अंकित खानसाहब और अंजलि के पति के पीछे वाली सीट पर बैठ गया। खान अंजलि के पति से बोले हार कौन ले कर जा सकता है। अंजलि के पति अक्षय बोले हार कंही नहीं जाएगा। आप नें पुलिस वालों को यूं ही बुलाया। यंहा से कोई भी भाग नहीं सकता।
अंजलि के पति नें अपनी गाड़ी अपनी दुकान के एक ओर खड़ी कर दी थी। उसने सोचा शादी वाले घर में तो सब तलाशी करेंगे। यंहा पर तो किसी को शक नहीं होगा। एक लोहे का सामान बेचनें वालों की दुकान समीप थी। जब वह गाड़ी से उतरा तो वह अरुण से टकराया था। अरुण अपने दिमाग पर जोर दे कर सोचने लगा जब अंजलि के पति ने हार चुराया वहश्वेता के साथ था। जिस शख्स को उस नें देखा उसके पैर में छः उंगलियां थी। अरुण नें सारी बातें अंकित को बता दी कि अंजलि के पति नें हार अपनी गाड़ी की डिक्की में छिपा कर रखा। जिस शख्स नें हार चोरी किया उस व्यक्ति के पैर में छः ऊंगलियों थी।
उसने उस नवयुवक को लोहे वाले की दुकान पर चाबियां खरीदते देख लिया था।जब वह अपनी गाड़ी के लिए टायर पूछने जा रहा था।

अंकित को जब अंजलि नें पुकारा तुम्हारे जीजा जी तुम्हे पुकार रहें है। वह बोला आया भाभी। अंकित उन के पास जा कर बैठ गया। अंजली बोली डान्स करो। खुब मौजमस्ती करो। अचानक अंकित की नजर अंजलि के पति के पैर पर गई। उसके पैर में मोजा था। अंजलि के पति बोले तुम देवर भाभी मिल कर शादी का लुत्फ उठाओ। अंजलि के पति जैसे ही उठ कर गए अंकित बोला इनमें के पैर में ये मोजा। वह बोली इनके पैर में छः उंगलियाँ है। इस कारण यह हर वक्त अपनें पैर में मोजा पहन कर रखते हैं।
अंकित को मालूम चल गया था कि उस व्यक्ति ने ही गाड़ी लोहे वाली दुकान के पास रखी थी। अंकित उस दुकान पर गया गाड़ी अभी भी वही थी। उसने गाड़ी की डिक्की को खोलना चाहा डिक्की नहीं खुली। वह लोहे वाले की दुकान पर जा कर बोला मैं पुलिस इन्सपैक्टर हूं। आप जल्दी से बताओ तीन चार घंटे पहले एक आदमी यंहा गाड़ी की चाबी बनवाने आया था। वह बोला साहब हां उसकी चाबी तो बन गई है मगर वह गाड़ी की असली चाबी यही पर भूल गया।

पुलिस वाला बन कर बोला अभी अभी एक खूंखार डाकू जेल से भागा हो। उसकी गाड़ी को चैक करना पडेगा। अंकित नें चाबी लेकर गाड़ी की डिक्की को खोल कर देखा उस में उसे वही हार मिल गया। उसने चुपके से हार निकाला और शादी वाले घर में आ गया। पुलिस छान बीन कर रही थी। अंकित चुपचाप गजरा बेचने वाली बन कर वह हार अरुण जो मेकअप वाली बना हुआ था उसके पास दे दिया। अरुण नें वह हार अपनी साड़ी के ब्लाउज में छिपा लिया।

शादी समाप्त हो गई थी। हार नहीं मिला था।पुलिस वालों ने सारा घर छान मारा मगर किसी के पास हार नहीं मिला। तीनों दोस्त खुशी से फुले नंही समा रहे थे। अंकित नें अपनी दोस्त को बुलाया और कहा अब हमें इजाजत दो। वह बोली आते जाते रहा करो। मैं अपने पति को कह कर तुम्हें काम पर लगवा दूंगी।
अंकित बोला मैनें आप को अपनी भाभी
व दोस्त समझा है मगर मुझे आपकी सहेली के पिता के दोस्त और आप के पति की हरकतें ठीक नहीं लगी। आप ये क्या कहना चाहते हो? आपकी हिम्मत भी कैसे हुई यह सब कुछ कहने की एक तो मैं तुम्हारी सिफारिश अपने पति से कर रही थी कि तुम्हें नौकरी पर रख लें मगर तुम तो हमारे ऊपर कीचड उछाल रहे हो। वह बोला तुम मुझे गल्ती मत समझना। मैं ऎसा ही हूं। वह बोली मैने तुम्हे बुला कर बहुत बडी़ गल्ती की है। जल्दी से हमारे घर से नौ-दो-ग्यारह हो जाओ।इससे पहले कि एक दोस्त का दूसरे दोस्त पर से विश्वास समाप्त हो जाए तुम यंहा से चले जाओ।

पुलिस इन्सपैक्टर के पास जा कर और टिकेटचैकर के पास जा कर उनको भी सारी घटना कह सुनाई कि हम नें आप से उस दिन झूठ कहा था कि हम शादी में जा रहें हैं। हम बेरोजगार थे। हमें नौकरी नहीं मिल रही थी। हम ने घर वालों को झूठमूठ बहाना कर के नौकरी की तलाश में निकल गए। हमारे पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी। हम चुपचाप अहमदाबाद जानेंवाली गाडी में बैठ गए। अचानक गाडी चलने लगी इतनें में आप दिखाई दिए। मेरा दोस्त कहने लगा हमारे पास तो किराया भी नहीं है। आज तो पिट गए इतने मेरे दोस्त को एक योजना सूझी। हम नें मासूम बन कर आप से झूठमूठ ही कहा था हमारा सूटकेस चोरी हो गया है। आप को हम पर दया आ गई आप नें हमें कहा कोई बात नहीं जब आप चले गए तो हम जोर जोर से हंसने लगे। डर भी लगता रहा था आगे क्या होगा अचानक आप बैग ले कर आते दिखाई। दिए। हम ने एक मास्
नकाबपोस आदमी को नीचे उतरते देख लिया था। आप ने आ कर कहा तुम्हारा सूटकेस मिल गया है। हमारे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब हम नें देखा कि आप नीली धारी वाला सूटकेस ले कर हमारे पास देते हुए बोले यह लो तुम्हारा सूटकेस। बदमाशों से बडी़ ही मुश्किल से हासिल किया। आप नें हम से पूछा इस सूटकेस में क्या है? मेरे दोस्त ने झूठमूठ ही कहा इसमें हमारा पर्स और जरुरी दस्तावेज थे। उससूटकेस में सचमुच ही नीली और काली पट्टी दी। आप ने कहा तब तो यह तुम्हारा है। हम सूटकेस पा कर बहुत ही खुश थे। वही वह नकाबपोश आदमी हमें धमकी दे कर गया कि तुम अगर इन्सपैक्टर से सूटकेस ले कर वापिस नहीं लौटाओगे तो तुम देखना तुम्हारी क्या हालत करेंगे। आपने हमें सुरत तक जानें की इजाजतदे दी जब हम नें कहा कि इस सूटकेस में से पर्स गायब हो गया है। आप नें कहा हम कुछ नहीं कर सकते तुम्हे उतरने ही पडेगा। हम नें आप से कहा हमारी दोस्त सूरत में रहती है हम उस से रुपयों का इन्तजाम कर लेंगें।आप नें कहा अगला स्टेशन सूरत आएगा तुम को वहीं उतरना पड़ेगा। आप अगले डिब्बे में चले गए। रास्ते में वही नकाबपोश हमें धमकी दे कर चले गते कि तुमनें हमारा सूटकेस वापिस नंहीं किया तो हम तुम्हारा क्या हाल करेंगें। इतनें में आप आते दिखाई दिए। वह चलती गाड़ी से नीचे कुद गए।
हमारी दोस्त हमें अपनी सहेली की शादी में ले गई। वहां पर भी हमारा सामना उन नकाबपोश वाले व्यक्ति यों से हुआ। हम नें अपनी वेशभूषा बदल ली। वह हमें पहचान नहीं सके। सारी की सारी कहानी सुना दी।पुलिस इन्सपैक्टर बोले हमें एक हीरे का हार चोरी करनें वाले की तलाश थी। एक व्यापारी के घर से नकाबपोशों नें वह हार चुरा लिया। उस हीरो के हार को पकडवानें वाले को उसके व्यापारी नें दस लाख रुपये देनें की घोषणा की है। अरुण बोला एक हीरे का हार उस नकाबपोशों व्यक्ति नें अपनी बहू को शादी में पहनाया था। उस हार को देख कर सब लोंगों की आंखें फटी की फटी रह गई शादी में वह हार एक अन्य व्यक्ति नें चुरा कर अपनी गाड़ी की डिक्की में रख लिया। मुझे तो वह दोनों व्यक्ति खूंखार लगतें हैं। अरुण ने शुरू से ले कर अन्त तक जो कुछ उन के साथ घटा था सारा किस्सा पुलिस्इन्सपैक्टर को सुना दिया। पुलिस इन्सपैक्टर को यह भी बताया उसने जो कुछ अपनी डायरी में लिखा था उसकी फोटोकॉपी कर ली थी।

जिस शादी में गए थे उन की लड़की के साथ रिश्ता कर के वह नकाबपोश आदमी और ही योजना को अंजाम दे रहे थे। उन्होंने जैसे ही 25करोड के हीरे का हार अपनी होने वाली बहू के गले में डाला सब के सब शादी में आए हुए व्यक्ति उन दुल्हा दुल्हन को ही देखते रहे। अचानक लाईट चली गईं और उस नकाबपोश के दोस्त नें मेरी दोस्त अंजलि के पति नें चुपके से वह हार चुरा कर अपनी डिक्की में रखकर अपनें दोस्त को भी मात दे दी। मैने सारी बात अंजली से कही मगर वह बोली तुम मेरे ही घर आ कर मेरे पति को चोर ठहरा रहे हो। निकल जाओ। मैने उस की गाडी की डिक्की से हार निकाला और ले आया। पुलिस इन्सपैक्टर उन की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए कहने लगे तुम ने अच्छा किया जो यंहा चले आए आगे मैं तुम्हे समझाता हूंक्या करना है? तुम उसका सूटकेस ले जा कर खान को कहो ये लो अपना सूटकेस। तुम कहना मै तुम्हारे हार चोरी करने वाले को जानता हू। आप को मेरे साथ चल कर देखना होगा। वह नकावपोश आदमी तुम्हारे साथ चल कर अपने दोस्त की गाडी में हार देखेगा तो वह अक्षय को बुराभला कहेगा। अंकित नें आकर खान को कहा ये लो अपना सूटकेस। उस नकाबपोश ने उसे 50,000रुपये दे दिए। उसे उसकी डायरी मिल गई थी। अंकित नें कहा कि वह तुम्हारी बहू के हार चोरी करनें वाले को जानता है। खान अंकित के साथ चलने के लिए तैयार हो गया।अंकित नें अरुण से हार ले कर रात को ही फिर से अक्षय की गाड़ी में रखवा दिया था।
सचमुच ही हार अक्षय की गाड़ी में था।
पुलिस ने मौके पर पंहूंच कर उस नकाबपोश और उस के साथ इस काम में संलिप्त व्यक्तियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया। अंजलि के पति नें कबूल किया कि उस नें विदेशों से माल चोरी कर हीरे भारत देश में भेजे जाते थे। हीरे माचिस की डिब्बियों में भर कर सप्लाई किए जाते थे। उन तीनो दोस्तो की मदद से इतने बडे गैन्ग के अड्डे का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस ने उन नकाबपोश व्यक्ति यों को पकड़ कर जेल में डाल दिया। पुलिस नें उस डायरी की मदद से सारी जगहों पर छापे डाले जिन जगहों का हवाला उसनें अपनी डायरी में लिखा था।
अंजली अंकित से बोली मैनें तुम्हें बुरा भला कहा मुझे माफ कर देना।
उन्होंने वह हार एक व्यापारी की दुकान से चोरी किया था। वह व्यापारी बहुत ही अमीर था। उसनें पुलिस वालों को सुचना दी थी कि जो कोई भी उस हार को ढूंढने कर लाएगा उसे दस लाख रुपये दिए जाएंगे। तीनों दोस्तों नें जब पुलिस इन्सपैक्टर को सारी कहानी सुनाई तो वे बहुत ही खुश हुए उन्होने कहा कि अगर तुम उन नकाबपोशों तक हमें पहुचाओगे और हार प्राप्त कर लाओगे तो तुम्हें दस लाख रुपये दिए जाएंगे। अपनें वायदे के मुताबिक उन तीनों दोस्तों को दस लाख दिलवा दिए और उन नकाबपोशों को सजा। दिलवाई। खुशी खुशी अपनें घर वापिस आ कर उन्होंनें अपना कारोबार संभाला।

Posted in Uncategorized

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *