किसान और उसका समझदार बेटा

एक किसान था उसके एक बेटा था। एक बार उसकी पत्नी बहुत बीमार हो गई ।किसान की पत्नी ने अपने पति से कहा कि मेरा बचना बहुत मुश्किल है ।तुम दूसरी शादी मत करना। कुछ दिन बाद उसकी पत्नी मर गई। किसान ने कुछ दिन तो अपने बेटे को लेकर समय बिताया परंतु एक दिन वह अपने बेटे के लिए दूसरी मां ले आया। वह उसकी असली मां नहीं बन सकती थी ।

उसकी सौतेली मां के भी एक बेटा हो चुका था। वह रामू को फूटी आंख नहीं सुहाती थी वह इसी उधेड़बुन में रहती थी कि वह कब इस बच्चे से छुटकारा पाए इसके लिए वह तरह तरह की योजना बनाती रहती थी।एक दिन उसने अपने पति से कहा कि तुम अपने बच्चे को कहीं पर छोड़ आओ। जहां सेे वह कभी यहां वापस ना आ सके। किसान ने कहा कि मैं अपने बच्चे के बारे में ऐसा कभी सपने में भी नहीं सोच सकता हूं। उसकी पत्नी ने कहा कि तुमने अगर उसे नहीं छोड़ा तो मैं उसे किसी ना किसी तरीके से मरवा दूंगी ।तुम उसे किसी दूर स्थान पर छोड़ आओ। जिससे कभी भी वह वापस ना आ सके। किसान अपने बेटे को मरता नहीं देख सकता था। उसकी पत्नी ने उससे कहा कि तुम अपने बेटे को कहना कि दूर के रिश्ते में तुम्हारे चाचा के बेटे की शादी है उसे भी साथ ले जाना और रास्ते में कहीं पर छोड़ आना। सुबह बेटा जब जागा तो उसने अपने पापा को तैयार होते देखा तो बोला पिता जी आप कहां जा रहे हो? उसका पिता बोला मैं तुम्हारे चाचा के बेटे की शादी में जा रहा हूं।

तुम भी मेरे साथ चलो बेटा मान गया। वह भी अपने पिता के साथ चलने के लिए मान गया जब वह काफी दूर निकल आए। उनको चलते चलते शाम होने को थी उसके पिता ने एक सराय के पास उसको बैठने का इशारा किया और कहा बेटा जरा में लघुशंका से निवृत होकर आता हूं तब तक तुम मेरा यही पर इंतजार करना। उसने अपना बैग अपने बेटे के पास थमा दिया और चुपचाप वहां से खिसक गया ।जब काफी देर तक उसके पिता नहीं आए तो बेटे को चिंता सताने लगी। सोचनें लगा उन्हें इतनी देर तो नहीं लगनी चाहिए थी। वह अपने पिता को ढूंढते-ढूंढते पुकारने लगा। दूर-दूर तक भयानक जंगल में उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। अंधेरा भी होने वाला था वह चुपचाप आहिस्ता आहिस्ता चलने लगा

अचानक उसे एक घर दिखाई दिया ।वहां से रोशनी आ रही थी ।वह एकदम अंदर जाने ही वाला था वहां पर एक जिन्न जैसी भयानक शक्ल वाला आदमी खड़ा था। वह भयानक राक्षसथा। राक्षस ने उससे कहा बेटा डरो मत मैं तुम्हें कुछ नहीं करुंगा। मेरा भी तुम्हारे जैसा ही एक बेटा ह। मेरी शकल सूरत पर मत जाओ देखने में तो मैं तुम्हें डरावना प्रतीत होता हूं परंतु तुम्हें मुझ से डरने की कोई आवश्यकता नहीं आओ थकान दूर करो। मैं तुम्हें खाना देता हूं। किसान के बेटे का डर के मारे बुरा हाल हो गया था उसका भूख के मारे बहुत बुरा हाल था। उसने आव देखा न ताव फटाफट खाना खाने लगा। खाना खाकर उसने एक पलंग की ओर इशारा किया और उस पलंग पर सो सोने के लिए कहा। किसान का बेटा अंदर आराम करने के लिए चला गया। राक्षस ने कहा बेटा आज तो मैं भी थक गया हूं मैं भी विश्राम करना चाहता हूं सुबह तुम से बात करूंगा। किसान का बेटा अंदर चला गया और चुपचाप जैसे ही चारपाई पर बैठा उसकी आंखों से नींद तो कोसों दूर थी। वह सोचने लगा कि हो ना हो यह राक्षस उसे जरूर खाएगा शक्ल से वह राक्षस बुढा नजर आ रहा था उसे दिखाई भी नहीं कम देता था। किसान का बेटा सोचने लगा कि मैं इस राक्षस से अपने आप को कैसे बचाएं। उसके दिमाग में एक योजना आई। पास में ही उस राक्षस का बेटा सोया हुआ था ।वह इतनी गहरी नींद में सोया था कि वह बिल्कुल भी हिल डुल नहीं रहा था। शायद उस राक्षस ने उसे भी कोई नशे की गोली खिलाकर सुला दिया था।

राक्षस जब सोने जा रहा था तो उसने राक्षस को अपने घर के पास एक मोटा सा पत्थर रखते हुए देख लिया था। रामू को लगा कि राक्षस उसे खाने की योजना बना रहा है और उसने पत्थर इसलिए रखा है ताकि वह यहां से भाग ना सके। रामू ने अपनी चारपाई को खिसका कर वहां लगा दिया जहां राक्षस का बेटा सोया था और अपने आप राक्षस के बेटे की चारपाई को वहां लगा दिया जहां राक्षस उसे चारपाई दिखा गया था। वह चुपचाप सोने का नाटक करने लगा ।रात के 3:00 बजे थे उसको राक्षस अपने कमरे की ओर आता दिखाई ।उसने राक्षस के बेटे को भी पूरी तरह चादर ढका दी थी और पूरी तरह से अपने आप को भी चादर से ढक लिया था राक्षस आया उसने उस चारपाई पर से सोए सोए ही उस बेटे को उठाया और बाहर एक ही वार के प्रहार से उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए ।वह किसान का बेटा यह सब देख रहा था। उस राक्षस नें आधी रात को अंधेरे में अपने ही बेटे को खा लिया था। उसने वहां पत्थर भी वहां से हटा दिया ।वह राक्षस सोचनें लगा कि मैंने तो अब उस बच्चे को खा ही लिया है। उस पत्थर को वंहा पर् रखने से क्या लाभ उसने पत्थर को वहां से हटा दिया ।डर के मारे रामू बुरी तरह से काम्प रहा था। उसने राक्षस को दोबारा अपने कमरे की ओर जाते देखा ।राक्षस सोने चला गया था। किसान का बेटा जल्दी जल्दी उठा और वहां से भाग निकला भागते-भागते वह सोचने लगा कि मैं कहां जाऊं क्या करुं? मैं अपने घर घर जाऊंगा तो शायद कहीं मेरी सौतेली मां मुझे फिर से कहीं घर से निकाल ना दे ।उसने मेरे पिता को भी अपने साथ मिला लिया है अब मैं कहां जाऊं। सुबह होने को थी वहां से वह भाग गया सुबह जब राक्षस जगा तो अपने बेटे को जगाने के लिए उठा तो देखा वहां उसका बेटा ना था। अब तो उसे समझ समझते देर नहीं लगी कि उसने जिस बच्चे को खा लिया था ।वह तो उसका अपना ही बेटा था राक्षस सिर पटक पटक कर मर गया। बच्चा भागते-भागते बहुत दूर आ गया था। काफी दूर चल कर उसे एक घर दिखाई दिया। वहां पर अंदर चला गया वह एक साहूकार का घर था।साहूकार के पास गया और बोला बाबा मैं बहुत ही थक गया हूं। मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है एक बाबा है पर वह भी पता नहीं कंहा है? मुझ से बिछुड गए हैं। अब तो मैं अकेला हूं। मैं आपके घर का काम कर दिया करुंगा ।कृपया मुझे खाना खिला देना। साहूकार ने कहा कि मेरा बेटा भी तुम्हारे जैसा था ना जाने वह कहां चला गया है? उसको आज गए हुए तीन साल हो चुके हैं मगर वह आज तक वापस नहीं आया है ।तुम मेरे बेटे जैसे हो। साहूकार ने उसे बड़े प्यार से खाना खिलाया और कहा बेटा जब तक तुम यहां रहना चाहते हो तब तक तुम यहां रह सकते हो इतना प्यार देखकर किसान के बेटे की आंखों से आंसू आ गए। साहूकार ने यह घोषणा की थी कि अगर कोई उसके बेटे को सुरक्षित यहां लेकर आएगा उसे वह अपनी आधी संपत्ति का वारिस बना देगा। किसान का बेटा सोचने लगा कि काश अगर मुझे साहूकार का बेटा मिल जाए तो मैं उसे साहूकार के बेटे को उस से मिलवा दूंगा तब मुझे भी संपत्ति मिल जाएगी और मेरे घर रहने का ठिकाना भी हो जाएगा रात को वह सोने जा ही रहा था तो उसे अपनी मां दिखाई दी। उसने अपनी मां को बताया कि उसकी सौतेली मां ने उसे घर से निकाल दिया था। उसकी मां ने कहा बेटा निराश मत हो। मैंने तुम्हें चारों कोनों में अपनी अस्थिया दबाने के लिए कहा था। जब तुम्हें किसी वस्तु की बहुत ही जरुरत होगी तब तुम वहां से एक-एक करके निकाल लेना सुबह जब उठा तो उसे स्वपन की बात याद आई वह अपने घर की ओर चलने की योजना बनाने लगा ।उसने अपना वेश बदला और वहां पर चलने के लिए तैयार हो गया और अपने घर पहुंच गया। वहां पर उसने अपनी सौतेली मां को और पिता को देखा। उसने भेष बदला हुआ था इसलिए उसे उन दोनों ने नहीं पहचाना। उसने अपनी सौतेली मां को कहा कि वह बहुत दूर से आया है ।यहां के प्रधान जी से मिलना चाहता है ।प्रधान जी नहीं मिले वह कहीं गए हुए थे इसलिए वह यहां चला आया। उसकी सौतेली मां ने कहा कि बेटा कोई बात नहीं आज रात तुम यह कर सकते हो? किसान ने कहा बेटा बड़ी खुशी से तुम यहां रह सकते हो । उसने रात को क्यारी में से कुछ कंकड़ निकालें और उनको एक कपड़े में बांध लिया और उसको उस गड्ढे से ढक दिया। रात को उसकी मां ने उसे स्वपन में कहा बेटा जल्दी से यहां से चले जाओ। उसने अपनी मां को बताया कि साहुकार का बेटा न जाने कहां खो गया है? साहूकार ने घोषणा की है कि जो मेरे बेटे को ढूंढ कर लाएगा उसे मैं अपनी आधी संपत्ति का वारिस बना दूंगा अगर मैं उसके बेटे को ढूंढ कर ला देता हूं ।वह साहूकार
मुझे आधी संपत्ति का वारिस बना देगा। उसकी मां ने उसे स्वप्न में कहा बेटा तुमने जो क्यारी से कंकर निकाले हैं तुम उन कंकड़ को रास्ते में फेंकते जाना जहां पर यह यहां कंकर समाप्त हो जाएंगे जहां पर कोई कंकड़ नहीं बचेगा वहां समझ लेना कि वही पर उस साहूकार का बेटा है। जो राख तुमने गड्ढे में से निकाली है तुम इस राख को अगर किसी पर फेंकोगे तो वह इंसान तुम्हारे साथ चलने लग जाएगा। तुम्हे इन कंकर और इस राख का ठीक ढंग से सदुपयोग करना है।

साहूकार का बेटा तुम्हें मिल जाएगा सुबह उसने किसान को कहा अच्छा बाबा मैं चलता हूं। प्रधान जी को मिलने मैं फिर कभी आ जाऊंगा। वह साहूकार के पास आकर बोला बाबा मैं आपको विश्वास दिलाता हूंआपने मुझ पर विश्वास करके अपने घर में पनाह दी मुझे भूख लगने पर खाना खिलाया। बाबा मैं कसम खाता हूं कि अब मैं आपके पास तभी आऊंगा जब तक मैं आपके बेटे को ढूंढ कर न ले आऊं। उसके इतना कहने पर साहू कार नें उसे अपने गले से लगा लिया वह बोला बेटा बड़ी मुश्किल से तुम मुझे मिले थे मैंने समझा था कि इतने दिनों बाद मुझे एक बेटा छीन लेने के बाद मुझे दूसरा बेटा मिल गया है मगर तुम भी हमें छोड़कर जा रहे हो। बेटा अगर तुम मेरे बेटे को ढूंढ कर ले आओगे तो मैं अपने वादे के अनुसार तुम्हें अपनी आधी संपत्ति का वारिस बना दूंगा। तुम मेरे बेटे को नहीं भी ला सके तो भी मैं तुम्हें अपनी बेटे की तरह तुम्हें अपने घर में रखूंगा। किसान के बेटे ने साहूकार के और उसकी पत्नी के पैर छुए और कहा मुझे आशीर्वाद दो मैं सफल हो कर लौट आऊं।

साहूकार ने उसे बहुत धन दौलत देखकर उसे विदा किया। किसान का बेटा चलते चलते रास्ते में कंकर फेंकता जा रहा था और उसे चलते चलते दो दिन हो चुके थे। उसने देखा उसके पास एक कंकर शेष था। वह कंकर भी समाप्त हो चुका था। जहां वह कंकर समाप्त हुआ वहां उसने देखा एक बहुत ही बड़ा खंडर था। उस घर में घुस गया उस खडंहर में एक बड़े से टोप वाले एक आदमी को अंदर जाते देखा। वहां पर एक ढाबा था। उस ढाबे में दूर दूर से आने वाले यात्रियों को खाना मिलता था। वहां साथ में ही उसनें एक सराय में रात को एक कमरा किराए पर लेने की सोची। उस ढाबे को देख कर उसे भूख सताने लगी सोचने लगा पहले यहां कुछ खा पी लेता हूं। उसके बाद एक कमरा रात बिताने के लिए किराए पर ले लेता हूं।

वह ढाबे के अंदर चला गया वहां पर एक औरत और उसकी बेटी थी। उसने उनसे खाना बनाने के लिए कहा। खाना खाकर वह बहुत थक चुका था। उसने ढाबे की मालकिन से पूछा क्या यहां एक कमरा किराए पर मिल सकता है? ढाबे की मालकिन ने कहा उस सराय में तो सारे कमरे किराए पर चढ़ चुके हैं। मेरे पास एक कमरा है। एक कमरा कभी न कभी किराए पर चढ़ ही जाता है। अगर तुम्हें ठीक लगे तो ठीक है उसने वह कमरा उसे दिखा दिया। वह कमरा किसी खंडर से कम नहीं दिखाई देता था। उसने ढाबे की मालकिन को कहा आज रात मैं यही बताना चाहता हूं। उसने ढाबे की मालकिन से कमरे की चाबी ले ली थी। रात को वह सोने की जा रहा था तभी उसे रात को रोने की आवाज सुनाई दी। यह आवाज कहां से आ रही है?, उसने देखा वह ढाबे की ऊपर वाली मंजिल में गया वहां से वह रोने की आवाज़ आ रही थी। उसने चुपके से झरोखे में से झांका वहां पर वही टोपवाला आदमी खड़ा था। वह दूसरे आदमी से कह रहा था कि तुमने उसकी बात नहीं मानी तो वह तुम्हें यहां सदा के लिए मरने के लिए छोड़ देगा। तुम यहां पर तड़प तड़प कर मर जाओगे। तुम्हें यहां ढूंढने वाला कोई नहीं आएगा।

तुम जैसे पहले हमारे लिए काम करते थे वैसे ही तुम्हें मेरा यह काम भी करना होगा नहीं तो मैं तुम्हें यही मारकर तुम्हारा काम तमाम कर देता हूं। दूसरा आदमी रोते हुए टोप वाले आदमी के पैरों पर पड़ गया बोला? कृपया मुझे एक बार अपने घर जाने दो। तीन साल हो गए मुझे अपने परिवार वालों से बिना मिले वह मुझे याद करते करते मेरे गम में मर जाएंगे।

किसान का बेटा हैरान रह गया। चुपचाप वह सीढ़ियों से नीचे आया जब तक वह टोपवाला आदमी अपने कमरे में सोने नंही चला गया। किसान का बेटा अंदर कमरे में घुसने का प्रयत्न करने लगा। उसने अपने कमरे की चाबी लगा दी। उससे ऊपर के कमरे का दरवाजा खोल दिया। अपने सामने एक अजनबी आदमी को देखकर साहूकार का बेटा कांपते हुए बोला तुम मुझसे क्या चाहते हो? तुम यंहा क्या करनेआए हो? मैं हर रोज की इस थकन भरी जिंदगी से थक चुका हूं। तुम सब मेरी जान लेना चाहते हो तो ले लो। किसान के बेटे ने उसके मुंह पर उंगली रख दी। उसने उस नवयुवक से पूछा तुम कौन हो।? और यहां तुम्हें क्यों बंदी बनाया हुआ है।? किसान के बेटे ने कहा तुम्हारे कमरे से रोने की आवाज आ रही थी। मैं यहां पर किसी की तलाश में आया हूं इसलिए आज रात को इस ढाबे में कमरा किराए पर लिया है। सुबह यहां से मैं चला जाऊंगा। भाई मेरे तुम डरो मत अगर तुम्हें यहां किसी ने कुछ कह दिया है तो मुझे सब कुछ सच सच बताओ। मैं तुम्हें यहां से निकालने का प्रयत्न करुंगा। उसी बंदी नवयुवक ने कहा कि मेरे पिता एक साहूकार है। मैं अपने सामान को बेचने के लिए यहां पर आया था। समान को बेचकर जब यहां से बहुत सारा पैसा कमा कर जा रहा था तब इन आदमी ने मुझे देख लिया। मुझ से सारे रुपए छीन कर मुझे यहां कैद कर लिया।

उन आदमियों ने किसी निर्दोष व्यक्ति को मार दिया है। उसके घर में डाका डालकर उसको जान से मार दिया और मुझसे कह रहे हैं कि तुम अदालत में यह बयान देना कि तुम ने उस व्यक्ति को मारा है अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो हम तुम्हें जान से मार देंगे। क्योंकि जिस व्यक्ति ने उस निर्दोष व्यक्ति को मारा था उस व्यक्ति की शक्ल मुझ से काफी मिलती है। इसलिए जब तक कार्यवाही नहीं हो जाती मुझे उन्होंने यहां कैद कर रखा है।

किसान के बेटे को समझते ही नहीं लगी कि वह जिस व्यक्ति को ढूंढने निकला था वह तो वही साहूकार का बेटा था। उसने साहूकार के बेटे को कहा कि तुम्हें मुझ से डरने की कोई जरुरत नहीं। मैं तुम्हें ही ढूंढते ढूंढते यहां आया हूं। जैसा मैं कहूं तुम वैसे ही करना। किसान के बेटे ने ताला लगा दिया और नीचे उतर आया। सुबह-सुबह ढाबे की मालकिन को उसने चाय बनाने के लिए कहा। साहूकार के बेटे ने कहा कि यह लोग मुझे हर रोज नशे वाली गोलियां देते हैं जिनसे मुझे नींद आ जाती है। आज तो यह गोलियां मैंने नहीं खाई है। किसान के बेटे ने कहा कि तुम इन गोलियों को आज मुझे दे दो। आज तो तुम मेरा कमाल देखो। उसने कमरे का ताला लगा दिया और चुपचाप वहां पर ढाबे पर आकर मालकिन को जगा दिया और कहा कि मुझे चाय पीनी है।

ढाबे की मालकिन ने कहा अभी तो 3:00 ही बजे हैं। किसान के बेटे ने कहा मुझे सुबह सुबह चाय पीने की आदत है।टोप वाला आदमी भी पास बैठा हुआ था। वह बोला मुझे भी चाय बना देना। किसान का बेटा बोला आंटी चलो आज मैं आपको बहुत ही स्वादिष्ट चाय बनाकर पिलाता हूं। उसमें ढाबे वाली मालकिन को कहा कि आप मेरे सामने बैठ जाओ। टोप वाले आदमी ने कहा कि उसे चाय बनाने दो। किसान का बेटा चाय बनाने लगा उसने चाय मे वह नशे की गोलियां डाल दी और सबको चाय देने लगा। अपने लिए उसने अलग से चाय निकाली। उन सब ने जब चाय पी तो वह सब बेहोशी की अवस्था में एक और लुढ़क गए। वह जल्दी-जल्दी ऊपर गया उसने कमरे का दरवाजा खोला और उसने साहूकार के बेटे को वहां से निकाला और पुलिस में जाकर पुलिस को सूचना दी कि इस व्यक्ति को इन गुंडों ने तीन साल से कैद कर रखा है।

पुलिस वालों ने साहूकार के बेटे से कहा मुझे तीन साल हो गए हैं। इन गुंडों ने मुझसे सारे रुपए छिपकर मुझे किसी व्यक्ति के खून में फंसा दिया है। शायद उस खुन करनें वाले व्यक्ति की शक्ल मुझसे मिलती है। पुलिस वालों ने किसान के बेटे से कहा कि अच्छा तुम जाओ अगर तुम्हारी जरूरत पड़ी तो जब हम तुम्हें बुलाएंगे तब तुम आ जाना। पुलिस ने उसे छोड़ दिया। साहूकार का बेटा किसान के बेटे के साथ खुशी खुशी घर पहुंच गया। अपने बेटे को सुरक्षित देखकर साहूकार और उसकी पत्नी बड़े खुश हुए। उन्होंने अपने वायदे के अनुसार किसान के बेटे को आधी संपत्ति का वारिस बना दिया। किसान का बेटा एक दिन सोचने लगा कि क्यों ना एक बार मैं अपने घर होकर आता हूं इस बार जब मैं घर में आया तो वंहा भेष बदलकर ही आया था। उसने अपनी सौतेली मां को उच्च स्वर में अपने पिता को डांटते हुए देखा। वह उन्हे कह रही थी कि कुछ काम वाम भी कर लिया करो नहीं तो यहां से निकल जाओ। यह घर अब तुम्हारा नहीं है यह घर तो अब मेरे नाम पर है। मैंने तुम्हारे बेटे को तो घर से निकाल भी दिया है। इस घर से जाने कि अब तुम्हारी बारी है। जल्दी से यहां से चले जाओ वरना तुम्हें भी मैं भगवान के पास भेज दूंगी। रामू ने अपनी सौतेली मां की सारी बातें सुन ली थी। उसे अपने पिता के ऊपर दया आ गई वह तो एक बार फिर अपने पिता को बचाना चाहता था। वह चुपचाप उस क्यारी में गया और वहां उसने दूसरे कोने में खुदाई की। वहां उसे एक डंडा और रस्सी मिली। उसने उसे अपने पास रख लिया। जैसे ही रात को सोने लगा तो उसकी मां ने उसे स्वप्न में बताया बेटा तुम इतने उदास क्यों हो? उसने सारी बात बताई कि सौतेली मां पहले मुझे घर से निकाला अब वह मेरे पिता को घर से निकालना चाहती है उसने सारा रुपया घर सब कुछ अपने नाम पर कर लिया है। उसकी मां ने कहा कि तुम अपने पिता के पास ये रस्सी और डंडा दे देना और कहना जब तुम कहोगे कि चल डंडा और बंध रस्सी तब गुनाह करने वाले व्यक्ति को रस्सी बांध लेगी और डंडा उसकी पिटाई करने लग जाएगा। बेटा सुबह अपने पिता के पास गया और बोला अब मैं चलता हूं पता नहीं आप लोगों से मेरा शायद कोई पुराना संबंधी हो इसलिए ही मैं यहां आता हूं।
अपने पिता को बाहर बुला कर उसने कहा मैं आपका बेटा हूं। मैं भेष बदलकर यहां आया हूं। आपने तो मुझे घर से निकाल ही दिया था मुझे सब समझ आ चुका है कि सौतेली मां के चक्कर में आपने मुझे घर से निकाला था। आपको वह जरा भी प्यार व्यार नहीं करती है। वह तो आपकी धन दौलत से ही प्यार करती है। वह आपका सब कुछ छीन लेना चाहती है। जबकि सब कुछ उसने अपने नाम पर कर लिया है। वह आप को बाहर का रास्ता दिखाना चाहती हैह अपने बेटे को सामने देखकर किसान फूट-फूट कर रोने लगा और बोला मैं तुम्हें अपने घर से निकाल कर आज तक पछता रहा हूं। मैंने अपने पांव पर स्वयं कुल्हाड़ी मारी है। मेरे प्यारे बेटे मुझे माफ कर दे। यहां से मुझे छोड़ कर कभी मत जाना। उसने अपने पिता को अकेले में बुला कर कहा पिताजी आज मैं आपको एक रस्सी और डंडा देता हूं जब आप कहेंगे कि बंध रस्सी और चल डंडे। डंडा दोषी व्यक्ति की तड़ाक तड़ाक पिटाई करने लगता है और रस्सी से वह दोषी व्यक्ति पूरी तरह जकड़ जाता है। किसान के बेटे ने कहा कि आज आपका बेटा एक अच्छी जिंदगी जी रहा है। उसके पास अपना घर है बहुत सारी धन दौलत का मालिक है। मुझे आप से कुछ नहीं चाहिए। मैं आपको सौतेली मां से छुड़ाने आया हूं। संपत्ति घर पैसा जो आप नें गंवा दिया है उसे आपका बेटा लौटा कर यहां से चला जाएगा। उसने रस्सी डंडा अपने पिता को दे दिया।

जब शाम को किसान की पत्नी उसे कहने लगी कि आज तुम्हें खाना नहीं मिलेगा किसान ने कहा ठीक है आज मैं भूखा ही सो जाऊंगा। किसान ने चुपके से उस डंडे और रस्सी से कहा अपना काम शुरू कर दो। दोषी व्यक्ति को सजा दो। किसान की पत्नी को तभी रस्सी ने बांधदिया। वह भूत भूत कहती चिल्लाई और अपने आप को छुड़वाने लगी। जितना वह अपने आप को छुड़वाने की कोशिश करती रही उसे और भी ज्यादा जोर से जकडनें लगती।

वह चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ। उसने अपने पति को कहा बचाओ-बचाओ। किसान ने अपनी पत्नी को कहा मुझे खाना देती हो कि नहीं। पत्नी ने कहा कि पहले मुझे उस रस्सी से छुटकारा दिलाओ। किसान के पति ने कहा मैं तुम्हें एक ही शर्त पर छुड़ा सकता हूं अगर तुम मुझे खाना दोगी। जब किसान की पत्नी ने अपने पति की बात नहीं मानी तो डंडे ने उसकी तड़ातड़ पिटाई शुरू करनी शुरू कर दी। किसान की पत्नी जोर-जोर से चिल्लाने लगी मुझे बचाओ मुझे बचाओ किसान ने कहा पहले मुझे खाना खिलाओ नहीं तो मैं तुम्हें उस रस्सी डंडे से नहीं बचा सकता। किसान ने डंडे से कहा कि रूक डंडे किसान की पत्नी ने अपने पति को खाना खिलाया वह तो मार खा खाकर अधमरी हो गई थी। दूसरे दिन जब उसने अपने पति से वही बात कही तो उसके पति ने कहा कि तुम अपने किए पर पछतावा नहीं करना चाहती तुम्हें डंडे की जरूरत है। उसने डंडे से कहा कि अपना काम शुरू कर दे तब डंडे ने फिर तड़ातड़ किसान की पत्नी की पिटाई करना शुरू कर दी। किसान ने कहा कि तुम तुम इस घर से चली जाओ। किसान का बेटा भी आ गया था। उसने अपनी सौतेली मां को कहा घर के कागजात हमारे हवाले कर दो।

किसान की दूसरी पत्नी ने यह सब नहीं किया। किसान के बेटे ने उस क्यारी में जाकर तीसरे कोने में खुदाई कर देखा तो उसे वहां राख के सिवा कुछ दिखाई नहीं दिया। उसने वह अपने कपड़े में बांधी और अपने साथ घर ले आया। सोचने लगा कि इस राख से क्या होगा।? रात को सोते वक्त किसान के बेटे को सपने में उसकी मां दिखाई दी। उसने उसे बताया कि तुम इस राख को अपनी सौतेली मां के मुंह पर फैंक दो। इस राखमें इतना जादू है कि जिस व्यक्ति से कोई काम करवाना हो उस व्यक्ति पर राख फेंकोगे तो वह व्यक्ति वही काम करने लगेगा जो हम कहेंगे। थोड़ी देर बार वह अपनी अवस्था में आ जाएगा। किसान के बेटे ने वह राख अपनी सौतेली मां के मुंह पर फेंक दी। और उसे कहा कि घर के कागजात ले आओ।

किसान की पत्नी ने घर के कागजात किसान के हवाले कर दिए। किसान के पिता ने कहा कि इस कागज पर हस्ताक्षर कर दो कि आज से यह घर में इन्हें वापिस कर रही हूं। धोखे से उसनें यह घर हथिया लिया था। किसान की दूसरी पत्नी नें कहा मैं अपनी गलती पर मैं शर्मिंदा हूं। उसने उन कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए। किसान अपने घर को दुबारा पाकर बहुत खुश था। उसने अपने बेटे की समझदारी पर बहुत प्रशंसा की जब किसान की पत्नी को थोड़ी देर बाद होश आया तो वह सोचने लगी कि मुझे चक्कर आ गया था। किसान ने उसे कहा कि इस घर से तुम सदा के लिए जा सकती हो। मुझे इतने दिनों बाद समझ आ चुकी है मैंने अपनी हीरे जैसे बेटे को खो दिया था। मैं दोबारा खोना नहीं चाहता। तुम यहां से खुशी-खुशी जा सकती हो। मेरे दिमाग में तुमने जहर भर दिया था तुमने तो मुझसे सारा कुछ छीन लिया था। मुझे फिर से सब कुछ वापिस मिल चुका है। अपने बेटे के सिवा अब कुछ नहीं चाहिए जाकर उसने अपनी पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया। जाते जाते उसने अपने पति को कहा कि तुमने मेरे साथ अच्छा नहीं किया। किसान के बेटे ने अब अपने बेटे की शादी कर दी थी। वह अपनी बहू और बेटे को पाकर बहुत खुश था।

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