जादुई बावड़ी

एक बच्चा था दीनू। वह अपनी मां का लाडला था। उसकी मां खेतीबाड़ी करती पशुओं के देखरेख करती उन्हें चराने को लेकर जाती। दीनू अपनी मां से हर रोज नई नई कहानियां सुनता था। कभी राक्षस की, कभी राजा रानी की, कभी परियों की, जब तक उसकी मां उसे कहानी नहीं सुना लेती थी उसका मन ही नहीं लगता था। हर एक दिन उसे एक नई कहानी सुनने को मिलती थी।

एक दिन वह अपनी मां की गोद में बैठा बैठा कहानी सुन रहा था। उसकी मां उसे कहानी सुना रही थी। कहानी सुनने के लिए बड़ी ही देर से बैठा था। अचानक उसकी मां की सहेली आ गई।  उसकी मां कहानी को बीच में ही छोड़कर दीनूं से बोली। बेटा थोड़ी देर बाद तुझे कहानी सुना दूंगी। तू तब तक यही चरागाह में पशुओं को देख लेना। दीनू बोला ठीक है मां वह अपनी मां की बात को कभी नहीं टालता था। वह चरागाह मैं पशुओं को चराने ले गया उसे धूप भी लग रही थी। घर की चरागाह के सामने ही एक अमरुद का पेड़ था। वह अमरूद के पेड़ पर चढ़ गया।वह अपनें साथ  में अपनी किताब भी लेकर गया। वह पेड़ पर चढ़कर पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई करते करते उसे पशुओं का ध्यान नहीं रहा कब निद्रा देवी ने उसे अपनी आगोश में ले लिया। अमरूद के पेड़ के पास ही  उसे   एक सुरंग दिखाई दी। सुरंग से चलते चलते वह  काफी दूर निकल गया। वह किसी बहुत ही सुंदर देश में पहुंच गया। वहां पर अनजान लोगों के बीच अपने आप को बहुत ही अकेला महसूस कर रहा था।वह  सोचनें लगा कि मैं यहां कैसे आ गया? उसे कोई जरूर अपहरण करके यहां लाया होगा। शायद किसी ने उसे कुछ  सूंघा दिया है जिससे उसे कुछ पता ही नहीं चला।। उसकी मां उसे कितनी बार समझाती थी बेटा अकेले   कभी भी घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। तुम अभी बच्चे हो। आज उसने अपनी मां को भी धोखा दे दिया। मैं कैसे इन लोगों के हत्थे चढ़ गया।

दीनू  की मां उसे बहुत ही प्यार करती थी। वह कहीं भी उसे अकेले नहीं जाने देती थी। उसकी मां ने उसे एक लॉकेट बनवा कर दिया था। जिसमें उसने चांदी के लॉकेट में गुरु की फोटो रखी थी। उसकी मां अपने बेटे को हर बुरी नजर से बचाना चाहती थी। इसलिए उसने गुरु का लॉकेट  उसके गले में पहनाया हुआ था। उसने अपने बेटे को कहा था कि इस लोकेट का उपयोग  तुम तभी करना जब तुम बहुत ही बड़ी मुसीबत में हो। तुम्हें  जब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा हो तभी तो इस लोकेट को उपयोग में लाना। इस लॉकेट को हाथ में लेकर अपने गुरु का ध्यान कर कहना मुझे हर मुसीबत से बचाइए।  उसकी  मां इन सब बातों पर विश्वास किया करती थी। उनके गांव से बहुत  संख्या में बच्चे गायब हो चुके थे। उसकी मां  उसे आश्वासन दिया करती थी कि बेटा किसी अनजान व्यक्ति के हाथों से कुछ मत लेना और सीधे घर आना। इसीलिए वह कहीं नहीं जाता था। अचानक वह अपनी मां को भी बता कर नहीं आया।

वह मधुर मधुर स्वप्न देखने लगा। उसने सपने में देखा कि कहां पर एक लंबी सी सुरंग बनी हुई थी। उसमें से चलते चलते वह बहुत ही दूर निकल गया। वह किसी बहुत ही सुंदर देश में पहुंच गया। वहां पर अजनबी लोगों के बीच अपने आप को बहुत ही अकेला महसूस कर रहा था। वह चलते चलते एक ऐसे प्रदेश में पहुंच गया जहां पर बौने ही बौने रहते थे। वे लोग उसको देख कर बहुत ही खुश हुए। क्योंकि वही उनसे पहाड की तरह लंबा चौडा था। उसको देख कर वह उसकी पूजा करने लगे। वह उन्हें किसी भगवान से कम नजर नहीं आ रहा था। वह सोचनें लगे  कि भगवान खुद आकर आज हमें आशीर्वाद देने के लिए आए हैं। लोग उसको देख कर उसकी आरती उतारने लगे।भगवान समझ कर उसकी पूजा करने लगे। दीनू बौनों  के प्रदेश में जा करके अपने आप को बहुत ही अकेला महसूस कर रहा था। क्योंकि वहां पर हर चीज इतनी छोटी थी। बौनों के  सोनें लिए  छोटे-छोटे पलंग थे। हर चीज छोटी थी। वहां पर पहुंचकर वह बहुत ही अचंभित हो रहा था। किसी तरह उसने रात बिताई।

बौनें हर दिन उसकी पूजा करते। उसे भगवान मानकर उसकी पूजा करते। लोग उसको जब खाना देते तो उससे तो उसका एक ग्रास भी नहीं खा सकता था। उनका एक ग्रास तो दिखाई भी नहीं देता था। उसके आगे ना जाने कितना खाना रखते थे। उसको इस तरह खाता देख कर वो यही सोचते कि इतना सारा खाना  खाता है। पानी दो गिलास पीता था उसको पानी पीता देखकर हैरान होते थे कि इतना सारा पानी पीता है। वह उनकी बातों को भी नहीं समझता था। बौनें लोग अपनी बात को इशारों से उसे समझाते थे। लोगों के इशारों से ही वह कुछ कुछ समझ पाता था। वह इतने छोटे थे कि उनके हाथ की मुट्ठी के छेद से ज्यादा उनकी लंबाई नहीं थी।

वे तो उसे अपना भगवान मानकर उसकी पूजा कर रहे थे। उन्होंने उसे रहने के लिए घर भी दे दिया था। उसे वहां रहते हुए काफी दिन हो गए थे। उस घर को देख कर उसे अपने खेलने का कमरा याद आ गया जहां पर वह खेला करता था। वह कितना बड़ा था। उनका कमरा तो बिल्कुल छोटा सा कमरा था  उस में बडी़ ही मुश्किल से घुसता था।    खाने के लिए कितने कितने व्यंजन परोसते   थे। वह भी छोटे  बर्तनों में।  उन बर्तनों में एक एक उंगली के बराबर खाना होता था।  पूरा पेट भर कर खाना उसे नसीब ही नहीं होता था।  वह हर दम उसके आसपास खडे रहते थे। वह हर तरह से उसे खुश रखने का यत्न कर रहे थे। हर रोज उसे नए-नए वस्त्र पहनाकर उसकी पूजा और आरती उतारी जाती।  वह हर कभी वहां से निकलने का प्रयत्न करता।

उसे तो अपने लॉकेट का ध्यान भी नहीं था। वह सोचने लगा कि अब मैं कैसे यहां से छुटकारा पाऊं। वह धीरे धीरे उन के इशारों को समझनें लग गया था। वह अपनी बात भी इशारों के माध्यम से उन्हें सुनाया करता था।  बौनों का सरदार भी उसे आया देखकर पहले बहुत खुश था क्योंकि उसने भी दीनू को अपना भगवान मान लिया था। उसने भी इससे पहले कभी भी लंबा इंसान नहीं देखा था। धीरे-धीरे जब सब बौनों नें  मिल कर अपनें सरदार का तिरस्कार कर सब बौनें दीनू की सेवा और खातिरदारी में लगे रहे तो उन के सरदार को लगने लगा कि उसको एक मालिक के रूप में जो स्थान दिया जाता था वह धीरे-धीरे सब उस इंसान को दे दिया जो थोड़े ही दिन पहले आकर यहां आया है। उसे दीनूं से नफरत होने लगी। उसने  बौनों को भड़काया और कहा कि धीरे-धीरे सभी लोग पूरी तरह तुम सब लोग इस के गुणगान में लगे हैं। किसी दिन यह यहां से सब  रुपये   लेकर चलता बना तब क्या होगा? सब के सब बौनों को समझा कर सरदार अपनी तरफ करने में सफल हो गया। उन्होंने सोचा हो सकता है कि हमारा राजा जो कहता है ठीक है हम तो  थोड़े दिन पहले ही यहां आए हुए इंसान को भगवान मानने लग गए। हो सकता है यह हमारा सारा का सारा रुपए लेकर यहां से चंपत हो जाए तब हम क्या करेंगे।?

 

उन्होंने अपने  सरदार  को आश्वस्त किया  और कहा कि हमने ही  इसे राजा बनाया था  हम ही इसे यहां से चलता कर दूर कहीं ऐसी जगह फैंक देंगें जिससे वह कभी फिर यहां न आ सके। हम यहां से नीचे गड्डी में फैंक देंगें। जहां से गिर   वह मर जाएगा इसे हम बेहोशी की दवा खिलाकर इसे बेहोश करके  गड्ढे में फेंक देंगे।

एक दिन जब सब लोग खुशी से जश्न मना रहे थे तो उसे भी डांस के लिए तैयार किया गया। वह सोच ही रहा था कि क्या करुं जिससे वहां से जाया जा सके।    एक बौना  खींचकर उसे जहां  डांस का आयोजन किया गया था वहां पर ले गया और उसके खानें में  उसने कुछ नशीला पदार्थ मिला दिया था। दीनू ने जैसे ही वह नशीला खाना खाया वह बेहोश हो गया था। उन्होंने उसे  एक जादुई बावड़ी  में गिरा दिया। जैसे ही वह  धढ़ाम से उस जादुई बॉडी में गिरा उसे थोड़ी थोड़ी होश थी। वह अपने मन में सोच लगा उसे अचानक क्या हुआ? हो ना हो इनमें बौनों नें  उसके खाने में कुछ नशीला पदार्थ  मिला दिया है जिससे कि उसे चक्कर आ गया। ये सारे के सारे बौनें तो किसी भी किमत पर उसे यहां से निकलनें ही नहीं देंगे। उस नें अपनी रफ्तार तेज कर दी। उसे उस बावड़ी से प्रकाश नजर आ रहा था। वह उस ओर अपनें कदम बढानें लगा शायद वह यहां छिप सके। चक्कर आनें के कारण शायद बौनों को भी उसका ध्यान ही नही रहा होगा। अच्छा हुआ कहीं नीचे गिर गया। जल्दी यंहा से घर को भागना चाहिए। अचानक थोड़ी दूर पर एक सुरंग दिखाई दी। यंहा भी सुरंग है। उसने उस सुरंग की ओर दौड़ लगाई और जोर जोर से हंसने लगा। आज तो मैं इन लोगों से बड़ी मुश्किल से जान बचाकर आया। जल्दी से यहां से निकलने का उपाय सोचता हूं। तभी उसे अपने सामने एक जादुई बावड़ी दिखाई दी। उसका पैर  बावड़ी में बनें गड्ढे में फस गया और वह जोर से  चिल्लाया।

एक बार फिर से  एक अनोखी दुनिया में पहुंच गया था। अपने मन में सोच लगा उसे आज क्या होता जा रहा है। उन्होंने सचमुच में ही उसे कोई एक ऐसा विषैला पदार्थ सुंघा दिया जिससे कि वह होश में नहीं आ रहा है। उसने अपने सामने बहुत ही बड़े बड़े इंसान दिखाई दिए। इतने बड़े बड़े इंसान उसने अपने जन्म में पहले कभी भी नहीं देखे थे। इतने बड़े बड़े लोगों को देखकर वह डरकर कांपने लगा। उसके पास एक आदमी आकर बोला तुम्हें हमारा शहर कैसा लगा? हम लोग तुम्हें जबरदस्ती यहां पर लेकर आए हैं। तुमने अगर हमारा काम नहीं किया या तुमने हमारा कहना नहीं माना तो हमें तुम्हें नहीं छोड़ेंगे। तुम्हें हमारे कहे अनुसार ही कार्य करना होगा। एक आदमी ने तो झट से अपने हाथ पर उठा लिया। वहां के बच्चे भी बहुत बड़े-बड़े थे। बच्चों के लिए तो वह एक खिलौना बन कर रह गया। कभी उसको गोल गोल अपने हाथों पर घुमाते। कभी कंधे पर चढ़ा देते। उनके कंधे पर चढ़ चढ़ के घुटनों और कंधे दुःखने लगे लेकिन कुछ कह नहीं सकता था। अपने आप को भाग्य के सहारे छोड़ कर कुछ भी नहीं कर सकता था। उन के हाथों में बडे बडे भाले और तीर कमान थे। भागता तो एक   तीर से भेद कर वह उसे रख देते। उनके पास बहुत ही बड़े-बड़े नुकीले हथियार और बंदूकें थी। उनके पैरों में भी कील लगे जुते थे। वे लोग बड़े-बड़े घुंघराले वाले उनको देखकर डर लगता था। उनकी आंखें लाल-लाल थी। थोड़ी देर बाद सारे के सारे लोग शराब पीकर धमा चौकड़ी मचानें  लगे। दीनू को बहुत जोर की भूख लग रही थी लेकिन वहां पर उसके खाने के लिए कुछ भी नहीं था। दीपू ने चुपके से एक मोटू की जेब से चाबी निकाली और उनके रसोई की तरफ बढ़ गया। वहां पर खाना खाने के लिए जैसे ही उसने थाली उठाई उसे सामने मिठाइयां दिखाई दी। मिठाई देख कर उसके मुंह में पानी आ गया जैसे उसने उस मिठाई का एक टुकड़ा मुंह में लिया वह थू थू करने लगा। वह मीठी होने के बावजूद नमकीन थी। और उस में बहुत ही मिर्ची थी। वह जोर-जोर से सीसी करने लग गया पानी की तलाश में इधर-उधर भागने लगा पानी के मटके में जैसे ही उसने पानी निकाला उस में पानी की जगह  जहरीली शराब थी। उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। वह पानी भी नहीं पी सकता था। वह चुपचाप आकर एक कोने में सुस्त हो कर बैठ गया। न वहां का खाना खा सकता था और ना ही कुछ कर सकता था। उसे रोने के सिवा और कुछ भी नहीं सूझ रहा था। वह सोचने लगा वह कहां फंस गया? उसने सोचा पहले खाने-पीने का प्रबंध करता हूं क्योंकि बिना कुछ खाए पिए तो वह कहीं भी नहीं जा सकता अचानक उसे चाबी का ध्यान आया उसने मोटू की जेब से चाबी निकाली थी उसमें एक चाबी और लगी थी उसने देखा की रसोई के साथ एक कमरा और था जिसमें वह जाने ही वाला था कि उसे एक तरफ बच्चों का शोर सुनाई दिया बच्चे आपस में खेल रहे थे वह भी उन लंबे लंबे बच्चों में जाकर घुस गया। उसे वहां पर एक बॉल दिखाई दी। उसने वह बौल उन बच्चों की ओर फैंकी। सारे के सारे बच्चे उसे घूर घूर कर देख रहे थे। उन्होंने इससे पहले कभी भी बौल के साथ नहीं खेला था। उसको इस प्रकार खेलता देखकर वह भी उसके साथ खेलने लगे। काफी देर तक उनके साथ खूब खेलता रहा। कभी उनकी टांगों से घुस कर कभी उन की बाजुओं के किनारे से उन बच्चों को गेंद गोलगोल घुमा कर उन्हें खिला रहा था। उसे ध्यान ही नहीं रहा कि वह तो वहां से भागने लगा था। सब बच्चे उसके पीछे भाग रहे थे। वह उसे अपना कप्तान मानकर खेल रहे थे। उसे भी खेलने में बहुत ही मजा आ रहा था। अचानक उसके हाथ से गेंद गिर गई तभी उसे ध्यान आया कि वह तो खाने के लिए भाग रहा था। उसने अचानक बॉल उन बच्चों की ओर फेंक दी और अपने आप दूसरे कमरे की ओर चला गया। उसने चाबी से ताला खोला। वहां पर बहुत सारे फल थे। वह खाने ही वाला था कि उसे एक तरफ काफी मिठाइयां दिखाई दी। मिठाई का तो वह बहुत ही शौकीन था। उसने सोचा क्यों ना पहले मैं इसे भी चख कर ही देख लेता हूं जैसे ही उसने खाया उसे वह मिठाइयां बहुत ही स्वादिष्ट लगी। भरपेट  मिठाईयाँ खा गया  फिर उसने जल्दी से कमरे को बंद किया और बाहर की ओर आया। उस दुनिया के   लोगों को होश नहीं आया था। बच्चे उसे ढूंढने की कोशिश कर रहे थे। वह  उनके सामने छोटा सा  खिलौना नजर आता था। बहुत जल्दी जल्दी वहां से भागने लगा और अपने मन में भगवान को पुकारनें लगा हे भगवान! आज  उसे बचा ले अचानक उसका ध्यान अपने लॉकेट की तरफ गया उसे याद आया कि मेरी मां ने उसे लॉकेट दिया था कि जब भी कभी मुसीबत में होगा तो इस लॉकेट को हाथ में लेकर अपने गुरु को प्रणाम करना और कहना कि मुझे इस मुसीबत से छुटकारा दिलाओ। उसने उस लॉकेट को हाथ में लिया और अपने गुरु को प्रणाम करके कहा कि उसे इस मुसीबत से छुटकारा दिलाओ। तभी उसे एक जोर का झटका लगा वह एक गड्ढे में गिरा हुआ था। उसे जाग आ गई थी। उसकी मां उसे सुबह से शाम तक ढूंढ ढूंढ कर थक गई थी। उसे ध्यान आया कि वह तो एक गड्ढे में गिरा था। जहां पर एक सुरंग बनी हुई थी। उस पर लिखा था जादू की बावड़ी। पर यहां तो कहीं भी इस पर जादू की बावड़ी नहीं लिखा हुआ है।

वह जोर-जोर से रोने लगा क्योंकि उसकी आंख खुल गई थी। उसके पैर में भी चोट लग गई थी। वह खुश भी हो रहा था कि वह अपने घर लौट आया है। क्योंकि उसने उस गड्ढे को कितनी बार देखा था। वह गड्ढा उसके घर के पास ही था। जिसमें कि वह गिरा था।

उसने सहायता के लिए अपनी मां को पुकारा उसकी मां उसे आसपास ही खोज रही थी अचानक उसकी मां को उसे उसकी कमीज दिखलाई दी। वह भागकर सब को बुला कर लाई और उसको गड्डे से बाहर निकाला।  गिरने की वजह से  दीनू बेहद डर गया था। वह जोर से अपनी मां से लिपट कर बोला मां वह न जानें किस अनोखी दुनिया में पहुंच गया था। उसकी मां बोली तुम्हें स्वप्न में भी मस्ती सूझती रहती है। उसकी मां ने उसे कहां बेटा मैंने तुझे कितनी बार समझाया था कि अकेले मुझसे पूछे बिना कहीं मत जाया कर परंतु तुमने मेरी बात नहीं मानी और तुम इस बावड़ी में गिर गए। वह चौका मां क्या यह बावड़ी है? तुमने तो मुझे आज तक नहीं बताया। वह बोली बेटा यह बहुत ही पुरानी बावड़ी है। कोई भी इस बावडी की सफाई नहीं करता और ना ही पानी प्रयोग में लाता है। वह बोला मां मुझे अचानक नींद आ गई थी। मैं  अमरुद के पेड़ पर चढ़कर के अपनी पढ़ाई कर रहा था और पशुओं को भी देख रहा था। अचानक मेरी नींद लग गई और मैं ना जाने कौन सी दुनिया में पहुंच गया। उसने सारी की सारी कहानी अपनी मां को सुनाई उसने अपनी मां को कहा कि मां मैंने सपने में यहां देखा था कि यह एक जादुई बावड़ी है। जिसमें नीचे बहुत ही लंबी लंबी सुरंग हैं जहां से सैकड़ों लोग इधर से गुजरते हैं। उस की भोली बात पर सुनकर मां हंसने लगी बोली बेटा यहां कोई सुरंग  नहीं है यह तो सिर्फ एक बावड़ी है। वह बोला मां मैंने सपने में इस जादुई बॉडी का कमाल देखा है। यहां से नीचे चलने पर बहुत ही सुरंगे हैं। जहां से बहुत दूर दूर तक जाया जा सकता है। उसके पिता को उसकी बात पर विश्वास आने लगा। उसने यह बात पुलिस अधिकारी अफसर को बताई और कहा हो सकता है यहां पर नीचे  की ओर सुरंग  हो जिस से बाहर निकलने का रास्ता हो। आप पता लगाएं। खुफिया विभाग ने उस बावड़ी के अंदर जाकर पता लगाया तो सचमुच में ही वहां पर बाहर जाने का रास्ता था। जिस से सैकड़ों खुफिया रास्तों का पता लगाया गया। दीनूं  अपने घर वापस आकर बहुत ही खुश था। उसकी बावड़ी में सुरंग होनें की बात सच हुई। जिस से काफी कुछ पता लगाया गया। दीनूं की बुद्धिमता की काफी प्रशंसा हुई। उस की पढाई का सारा खर्चा सरकार नें उठा लिया। घर आ कर दीनूं बहुत ही खुश हुआ। प्रैस रिपोर्टर नें जब उस से पूछा कि तुम बढे हो कर क्या बनना चाहते हो तो वह बोला मैं जासूस बनना चाहता हूं। बड़ा हो कर उसनें अपना स्वप्न पूरा करने दिखाया। वह एक बहुत ही होनहार जासूस बना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *