तीन परियां

एक बुढ़िया थी उसके एक ही बेटा था। उसने अपने बेटे को बताया था कि उसके पिता एक साहूकार थे। उन्होंने ना जाने किसी लड़की के चक्कर में पड़कर दूसरे शहर में जा कर उस लड़की के साथ शादी कर ली थी। उसके पिता शहर के मशहूर साहूकारों में से एक थे पर वे अपना सब कुछ बेच कर अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरे शहर में चले गए थे। उसकी मां बहुत ही बूढी हो चुकी थी। गांव के लोगों ने उसकी सारी  जमीन उसे अकेला जानकर हथिया ली थी। उसके एक छोटा सा बेटा था। वह बुढ़िया थोड़ा बहुत ही कमा पाती थी।

 

वह अपने तथा अपने बेटे का पालन-पोषण बड़ी मुश्किल से कर रही थी।  एक दिन बुढ़िया ने अपने बेटे से कहा कि अब तुम कुछ कमा कर लाओ मैं भी अब बड़ी हो चुकी हूं। आलसी बनकर बैठे रहने से कुछ भी हासिल नहीं होगा।बुढ़िया का बेटा बहुत ही आलसी था। वह सोचता था मेरी मां तो कमा कर जो कुछ लाती है वह हम दोनों के लिए बहुत है। जरा भी मेहनत नहीं करता था। एक दिन बुढ़िया ने तंग आकर उससे कहा कि आज तो तुम कुछ कमा कर  लाओ। वर्ना तुम्हें खाना नहीं मिलेगा। उसके बेटे ने अपनी मां से कहा मां मुझे तीन रोटियां बना कर दे दो। रास्ते में जब मुझे भूख लगेगी तब मैं खा लूंगा। मैं काम की तलाश में जा रहा हूं।  बुढ़िया ने उसे  तीन रोटियां बना कर दे दी।बुढ़िया का बेटा पैदल चलते चलते काफी थक चुका था। एक नदी के किनारे पेड़ की छाया में बैठकर सुस्ताने का फैसला कर लिया। पहले हाथ मुंह धोया उसने खाना निकालते हुए जोर-जोर से कहा एक खांऊं कि दो खाऊं या तीनों खा  लूं। दूसरी बार फिर उसने वही दौहराया। एक खाऊं दो खाऊं या तीनों खा लूं। उस पेड़ पर तीन परियां रहती थी एक परी पेड़ से नीचे आकर उससे कहने लगी तू मुझे मत खा। बदले में तू जो कुछ चाहता है वह तुम्हें अवश्य दूंगी। बुढ़िया का बेटा उस परी की बात सुनकर हैरान रह गया। वह अपने मन में सोचने लगा यह परी समझती है कि  मैं शायद कोई बड़ा आदमी हूं जो कि उसे खा जाएगा। यह सुनकर बुढ़िया का बेटा बोला जो वस्तु मैं चाहता हूं क्या तुम मुझे दोगी।? परी ने कहा कि अगर वह उसे छोड़ देगा तो वह वस्तु तुम्हें अवश्य देगी। उसको अपनी बूढ़ी मां का ख्याल आया कैसे उसकी मां मेहनत मजदूरी करके थोड़ा बहुत ही कमा पाती है। कई बार तो भूखे ही सोना पड़ता है। क्यों ना मैं इससे जादू की थाली मांग लेता हूं? जिससे तरह तरह के पकवान जिस चीज की भी इच्छा करूंगा वह मुझे मिल जाएगी। उस ने परी से कहा कि देना ही चाहती हो तो मुझे एक  जादू की थाली  दे दो जिस किसी पकवान को मैं खाना चाहूं वह चंद मिनटों में ही मेरे पास आ जाए। परी ने कहा यह लो जादू की थाली। जादू की थाली पाकर बुढ़िया के बेटे को देते हुए बोली जब तुम इस थाली से भोजन मांगोगे और तरह तरह के पकवान मांगोगे तो तुम्हें  यहमंत्र बोलना पड़ेगा झम झम झम झमा झम झमाझम। तीन बार इस मंत्र को बोलोगे तो जो पकवान तुम खाना चाहते हो वह तुम्हारे सामने तुरंत ही आ जाएगा। बुढियाका बेटा बोला पहले मुझे मंगाकर दिखाओ। परी ने तीन बार मंत्र दोहराया। झम झम झम झमा झम झम तुरंत वहां पर पकवानों का ढेर लग गया। जादू की थाली पाकर बुढ़िया का बेटा बहुत ही खुश हुआ।

 

थाली लेकर वह जल्दी जल्दी घर की ओर जा रहा था। चलते चलते वह काफी थक गया था अचानक कुछ दूरी पर उसे एक घर दिखाई दिया। उस घर में चला गया। आज रात को मैं यहीं पर रुक जाता हूं। उसने घर देखकर दरवाजे पर दस्तक दी। एक बुढ़िया ने दरवाजा खोला बेटा कौन है? उसने बुढ़िया से कहा कि मैं आज रात आपके यहां विश्राम करना चाहता हूं? बुढ़िया ने कहा कि तुम मेरे घर पर तो रह सकते हो मेरे पास खाने को कुछ नहीं है जो कुछ था वह मैंने खा लिया है। तुम्हें आज रात को भूखे ही सोना पड़ेगा। उसने बुढ़िया से कहा कि तुम खाने की फिक्र मत करो। मेरे पास खाने के लिए बहुत कुछ है। मैं तुम्हें भी खिला सकता हूं। जैसे ही आधी रात हुई उसने अपने जादू की थाली निकाली और परी द्वारा दिया गया मंत्र  दोहराया झम झम झम झमा झम झम जल्दी से मेरे पास तरह तरह के पकवान  खाने के लिए आ जाए। मंत्र गुनगुना रहा था तो बुढ़िया उसे देख रही थी उसे मालूम हो चुका था कि इस युवक के पास जो  थाली है वह जादू की थाली है।

 

बुढ़िया ने रात को उसकी जादू की थाली चुरा ली और उसकी जगह मामुली  सी थाली रख दी। बुढिया का बेटा घर पहुंचा तो उसने अपनी मां से कहा मां तुझे अब काम करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं तुम्हें बैठे-बैठे ही सब कुछ खिला सकता हूं। आप जो भी मिठाई पकवान जो कुछ खाना चाहती हो वह तुरंत ही आपके पास आ जाएगा। मेरे पास एक जादू की थाली है। जब उसने थाली को रखकर तीन बार  परियों द्वारा दिया गया मंत्र दोहराया  तो कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ।बुढिया का बेटा सोचने लगा कि उस परी

नें उसके साथ छल कपट किया है। उसने अपनी बुढ़िया मां को एक दिन फिर कहा मुझे तीन रोटियां बना कर दे दे। काम की तलाश में  मैं फिर से जा रहा हूं। मैं कुछ  कमा कर ही लौटूंगा नहीं तो तुम्हें मैं अपनी शक्ल कभी नहीं दिखाऊंगा।

 

बुढ़िया का बेटा फिर से उस नदी के किनारे पर विश्राम करने के पश्चात खाना खाने के लिए जैसे ही तैयार हुआ बोला एक खाऊं या  दो खाऊं यातीनों खा लूं। दूसरी परी पेड से नीचे उतरी और उसने बुढ़िया के बेटे को कहा कि मुझे मत खाना। मैं तुम्हारी इच्छा को अवश्य पूरी करूंगी। बुढिया का बेटा खुश होते हुए बोला और अपने मन में विचार करने लगा कि उस से क्या मांगू। बहुत सोच विचार करने के बाद बुढ़िया के बेटे ने उस से उड़ने वाला घोड़ा मांगा। उस  उड़ने वाला घोड़ा दे दिया। घोड़े पर उड़कर बहुत ही दूर एक विशाल नगरी में पहुंच गया। अद्भुत घोड़े को जब उस नगर के राजा ने देखा तो उसने सोचा कि वह नवयुवक तो किसी देश का राजकुमार होगा। राजा ने उससे कहा कि तुम मेरे घर पर चलो। बुढ़िया का बेटा राजा के साथ उसके महल में पहुंचा महल में पहुंचकर वहां के आलीशान भवन को देखकर वह मंत्रमुग्ध होकर सोचने लगा काश उसके पास भी इतनी धन दौलत होती तो वह भी आज कहीं का राजकुमार होता।  वह राजा की बेटी को देखकर उस पर मोहित हो गया। उसने राजा की बेटी को देखकर उससे विवाह करने का फैसला कर लिया सोचने लगा कि किस तरह इस राजकुमारी के साथ विवाह करके अपने घर को लौट जाऊंगा। वह कुछ कमा कर नहीं ले जा सका तो वह अपने घर वापस नहीं जाएगा। इस तरह हर रोज उस राजकुमारी से छुप छुप कर मिलने लगा। राजकुमारी भी मन-ही-मन उसे चाहने लगी थी उसने राजकुमारी से कहा कि मैं भी एक राजकुमार हूं। मैं घूमने के इरादे से यहां आया था परंतु अब तो तुम्हें छोड़कर जाने को मन नहीं करता। इस तरह वह राजकुमारी को अपने घोड़े पर दूर-दूर तक घुमाने ले जाता राजकुमारी भी मन-ही-मन उसे चाहने लगी थी। एक दिन उसने पिताजी से कहा कि मैं इस नवयुवक से शादी करना चाहती हूं। उसके पिता ने उस नवयुवक  के सामनें शर्त रखी कि अगर वह नवयुवक अपने माता-पिता से उन्हें मिलवा आएगा तो वह उनकी उसकी शादी उस नवयुवक से कर देंगे। उस बुढ़िया के बेटे पर तो प्यार का भूत सवार था। उसने राजकुमारी के पिता से कहा कि वह जल्दी ही उन्हें अपने माता-पिता से मिलवाएगा। आपके पास रहते हुए भी काफी दिन हो चुके हैं। वह अपने माता पिता को लेकर आएगा। आप मुझे घर जाने की इजाजत दे दीजिए।

 

जब उसने अपने घोड़े को दौड़ाया वह सोचनें लगा उसने झूठ तो बोल ही दिया जब उसका झूठ पकड़ा जाएगा तब क्या होगा? यह सोचते सोचते वह एक सराय में जाकर उसने खाने के लिए तीन रोटियां पैक करवाई। उसने सोचा कि आज फिर मैं उन परियों से मिलूंगा और उनसे अपने मन की बात कहूंगा। वह उसी नदी पर विश्राम करने चला गया और वहां जाकर कहने लगा एक खाऊं कि दोखाऊं या तीनों खा लूं। यह सुनकर पेड़ पर रहने वाली परियां घबरा गई। वह तीनों सोचने लगी कि वह नवयुवक बहुत ही बहादुर है। जो हम तीनों को खाने के लिए आ रहा है। तीसरी परी ने उसे कहा कि तुम उसे नहीं खाओ तुम हमें क्यों खाना चाहते हो। हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? जो कुछ तुमने पहले मांगा वह हमने तुम्हें दे दिया। अब क्या चाहिए तीनों परियों ने कहा कि हम तीनो बहने हैं हम तुम्हारी बहादुरी से प्रसन्न है उस नवयुवक ने कहा कि तुमने मुझे जादू की थाली नहीं दी थी वह तो मामूली सी थाली थी उससे तो मंत्र पढ़ने के बाद भी कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ।

 

परी ने कहा तुम्हारी जादू की थाली तो चोरी हो गई है जहां रात को तुम रुके थे। उस बुढ़िया रस्सी है यह तुम्हारे अतिरिक्त किसी को दिखाई नहीं देगी। जब तुम मंत्र पढ़ोगे टम टम टम टम टम टम झम झम झम झमा झम झम इस मंत्र को तीन बार दौर आओगे यह मंत्र पढ़कर कहोगे बंध रस्सी और चल  डंडे  तब डंडा चोरी करने वाले पर तड़ातड़ बरसने लगेगा और जो कहोगे कि खुल रस्सी और खुल डंडे जब तुम यह कहोगे कि तो चोरी करने वाला इंसान उस रस्सी से बंध जाएगा। रस्सी और डंडा पाकर वह बहुत खुश हुआ । उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर एक जगह पहुंच गया। वहां उसने देखा कि एक घर में चोरी करने चोर घुस गए थे घर एक बड़ी साहूकार का था  बुढिया के बेटे ने उन चोरों की बात सुन ली थी। वह कह रही थी कि यह  साहुकार किसी राजा से कम नहीं है। इसके पास इतनी धन दौलत है। इसके पास एक ही बेटी है। किसी तरह से इस के घर चोरी करने चाहिए। उसका धन-दौलत छीन कर उसे मार देंगे। बुढ़िया के बेटे ने उस घर का द्वार खटखटाया। साहूकार ने कहा मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं?

 

उसने साहूकार को बताया कि मैं एक ज्योतिष कार हूं मैं अपनी ज्योतिष विद्या से बता सकता हूं कि क्या होने वाला है।? साहूकार कहने लगा बड़े आए ज्योतिष कार निकलो यहां से। साहूकार की बेटी  यह सब देख रही थी उसने अपने पिता से कहा कि पिताजी शायद यह ज्योतिष कार ठीक ही कह रहे हैं।  बुढ़िया के बेटे ने साहूकार की बेटी को कहा  तुम मेरी बहन जैसी हो । तुम्हारे घर पर विपत्ति आने वाली है। आज रात तुम्हारे घर पर चोरी होने वाली है। तुम सतर्क रहना।

 

साहूकार की बेटी ने कहा कि अगर तुम्हारी बात सच निकली तो वह तुम्हें अपने पिता से बहुत धन-दौलत दिलवाएगी । साहुकार की बेटी  अपने पिता के पास जाकर बोली पिताजी आप एक बार ज्योतिषी की बात पर  एक बार विचार करके देखो। साहूकार ने  बुढ़िया के बेटे को कहा कि तुम मुझे अपना परिचय दो। तुम कहां के रहने वाले हो।?

वह बुढ़िया का  बेटा बोला  मैं सूरतगढ़ का रहने वाला हूं मेरे पिता भी एक साहूकार थे। उनका नाम था दीनानाथ  वह बहुत  ही बड़े साहूकार थे।  वह अपना सब कुछ बेच कर दूसरे शहर में रहने चले गए। मेरी मां का नाम देवकी है। साहूकार चौंका। वह वही साहूकार था जो उस बदनसीब नवयुवक का बाप था।

 

वह अपने परिवार को छोड़कर दूसरे शहर में बस चुका था। उसने वहां पर एक लड़की से शादी कर ली थी। उसकी पत्नी तो काफी पहले ही मर चुकी थी। उससे उसे एक बेटी थी। ने छल कपट करके दोबारा तुम्हारी जादू की थाली तुमसे ले ली और उसकी जगह नकली थाली रख दी। उस परी ने कहा मैं तुम्हें एक रस्सी और एक डंडा देती हूं। यह एक जादू कीबाद में अपने पत्नी को ढूंढने वह सूरतगढ़ गया था उसे मालूम हुआ था कि उसकी पत्नी अपने बेटे को लेकर कहीं दूसरी जगह जा चुकी थी। उसकी आंखों से झर झर आंसू बहने लगे  उसने अपने बेटे को गले लगाया और कहा कि तुम ही मेरे बेटे हो यह तुम्हारी बहन है। मैं ही तुम्हारा अभागा पिता हूं जो तुम्हें छोड़कर चला गया था। तुम्हारी मां कैसी है?

साहूकार ने अपनी बेटी को कहा कि जल्दी तुम पुलिस को सूचना दे दो  ताकि चोरों को पकड़ा कर उनका पर्दाफाश किया जा सके। चोर जैसे ही उनके घर पहुंचे पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। एक चोर चुप चुपके से एक गोदाम में घुस गया।  बाकी चोरों को तो पुलिस पकड़ कर ले गई। वह चोर जो गोदाम में छुपा हुआ था  उसके हाथ में तेज हथियार था। वह जैसे ही उस साहूकार को मारने आया  बुढ़िया के बेटे ने पति द्वारा दिया गया मंत्र दोहराया। टम टम टम  टमाटमटम टम टम।  झम झम झम  झमा झम झम झम झम।बंध रस्सीऔर चल डंडे।  देखते ही  देखते वह  चोर रस्सी से बंध गया।  डंडे ने तडातड  उस चोर की पिटाई करनी शुरू कर दी। उसके हाथ से चाकू नीचे गिर गया था। उस चोर को पुलिस के हवाले कर दिया गया। साहूकार ने  अपनी बेटी को बताया कि वही उसका भाई है। मेरी पहली पत्नी का बेटा  है। साहूकार के बेटे नें कहा कि बहन मैंने आप सब लोगों की जान बचाई है। आपको भी मेरा  एक काम करना होगा। क्योंकि जिस लड़की को मैं प्यार करता हूं उसके माता-पिता ने यह शर्त रखी है कि अगर वह अपने माता-पिता से उन्हें मिलवाएगा  तभी उसकी शादी वह अपनी बेटी से करेंगे। जिससे वह प्यार करती है। साहूकार की बेटी बोली तुम तो मेरे ही भाई निकले वह तुम्हारे ही पिता है। तुम्हारे पिता और मैं अवश्य ही तुम्हारे साथ उस राजा के घर जरूर चलेंगे। साहूकार को लेकर वह बुढ़िया का बेटा उस राजकुमारी के घर पहुंचा। उसने राजा से अपने पिता  और बहन को मिलवाया। उनसे कहा कि मेरी मां बीमार होने के कारण यहां नहीं आ सकी। अच्छा रिश्ता पाकर राजा उस बुढ़िया के बेटे को इन्कार नहीं कर सका। अपनी बेटी को उनके साथ विदा कर दिया। सबसे पहले वह साहूकार के घर गए।  साहूकार ने कहा बेटा अब तुम भी गांव को छोड़कर अपनी मां को भी यहां लेकर आओ। वह अपने पिता से बोला पिताजी आज तो मुझे किसी से अपना हिसाब किताब चुकाने जाना है।  वहां से वापस आकर सबको लेकर गांव चलूंगा। उसने अपनी पत्नी राजकुमारी से कहा कि मुझे जाने की इजाजत दे दो। मैं जल्दी से काम निपटा कर तुम्हें लेने आऊंगा। राजकुमारी ने उसे कहा जल्दी आना। उस जादुई उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर उस बुढ़िया के यहां पहुंचा।  जिसने उसकी जादू की थाली चुरा ली थी। उसने बुढिया को  कहा  मैं आज रात को  यहां रुक सकता हूं।

बुढ़िया ने कहा कि बेटा तुम यहां बड़ी खुशी से मेरे घर पर रुक सकते हो। बुढ़िया जैसे ही सोने जाने लगी उस बुढ़िया के बेटे ने कहा  परी द्वारा दिया गया मंत्र दोहराया  टम टम टम टमाटम  टम टम टम। झम झम झम झमा झम झम झमाझम। बुढ़िया के बेटे ने कहा बंध रस्सी और चल  डंडे।  बुढ़िया रस्सी से बंधी और तड़ातड़ बुढ़िया की पिटाई होने लगी।  बुढ़िया जोर-जोर से चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ बचाओ। बुढिया के बेटे ने कहा जब तक तुम  मेरी चोरी की गई जादू की थाली  नहीं दोगी तब तक तुम्हारी डंडे से पिटाई होती रहेगी। बुढ़िया ने उस नवयुवक से कहा कि इस डंडे को रुकने को बोलो नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

 

उस नवयुवक ने कहा तुम अगर जादू की थाली वापिस लाने का वादा करती हो  तो तुम्हें यह डंडा छोड़ देगा। वर्ना  तुम मार खा खाकर यूं ही मर जाओगी। बुढ़िया ने उससे माफी मांगी  बुढिया नें साहुकार के  बेटे की थाली वापस कर दी।  साहुकार के बेटे ने बुढ़िया को करवाता देखा उसने वही मंत्र दोहराया खुल रस्सी और रुक डंडे। उसने खुल रस्सी जैसे ही कहा बुढ़िया की रस्सी खुल गई और बुढ़िया मूर्छित होकर गिर पड़ी। थाली पाकर साहूकार का बेटा बहुत खुश हुआ। वह उड़ने वाले घोड़े पर पहले अपने पिता के घर आया और अपने पिता बहन और अपनी राजकुमारी को लेकर गांव वापस आया। उसकी बूढ़ी मां यह देख कर खुश हुई की उसका बेटा न केवल अपनी राजकुमारी को बल्कि उसके पिता को भी वापस लाया था। बहन को भी साथ लाया था। बुढ़िया अपने परिवार की वापसी  पर बहुत खुश थी। अपनी बेटी बेटे और बहू को लेकर साहूकार अपनी नगरी में लौट गया। साहुकार की पत्नी नें अपने पति को माफ कर दिया था। वे खुशहाल  और सुखी  हो गए।

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