पुरानी हवेली का किस्सा

तीन दोस्त थे। अभिजीत अभिषेक और अभिनव। तीनों एक साथ कॉलेज में पढ़ते थे अभिषेक के पिता एक बड़े व्यापारी थे। अभिजीत और अभिषेक के पिता मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। तीनो बहुत ही पक्के दोस्त हुए कॉलेज इकट्ठे जाते इकट्ठे वापिस आते।  1 दिन तीनों आपस में बातें कर रहे थे अभिषेक अपनें दोस्तों से बोला किसी दिन मैं देर से घर पहुंचा तो मेरे पीछे सारे के सारे मेरे घरवाले पागल हो जाते हैं अभी तक क्यों नहीं आया? कहां देर हो गई?अभिजीत और अभिषेक बोले ऐसे तो हमारे माता पिता भी हमें प्यार करते हैं मगर इतनी गंभीरता से हम दोनों को कोई भी नहीं लेता। हमें कोई अगर किडनैप करके भी ले जाए तो हमारे माता पिता हमें छुड़वाने नहीं आएंगे और ना ही हमारी माता पिता के पास इतने अधिक रुपए हैं। अभिषेक बोला मेरे पिता तो एकदम उन किडनैपर्स को रुपए दे देंगे। अभिजीत और अभिषेक बोले तो दोस्त हम किडनैपर बन जाते हैं। तुम भी शामिल हो जाना। हम कहेंगे कि हमने अभिषेक का किडनैप कर लिया अगर तुमने उसे छुड़ाने के 20, 00, 000 रुपए नहीं दिए तो हम तुम्हारे बेटे को मार देंगे। तुम्हें अपने बेटे की जान प्यारी है तो   पुरानी हवेली के अंदर वाले स्थान पर 20, 00, 000 रुपये ले कर आ जाना।  तुम ने पुलिस को फोन किया तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। तुम अपने बेटे को सदा के लिए खो देगे।  यह बातें तीनो दोस्त अभिषेक के घर पर कर रहे थे। तीनों दोस्तों ने एक योजना बनाई। उन तीनों को पता नहीं था कि अभिषेक का नौकर उन तीनों की बातों को ध्यान से सुन रहा था। उन तीनों को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि उनकी बातों को तीसरा शख्स सुन रहा था। नौकर ने सारी बातें सुन ली थी। उसने अपने भाई के बेटे को सारी बात बताई उन दोनों ने योजना बनाई कि जैसे ही अभिषेक के पिता  जब किडनैपर्स को रुपए देकर आएंगे हम पीछे से तीनों को मार देंगे और उनसे 20, 00, 000 रुपए छीन लेंगे। किसी को भी मालूम नहीं होगा कि किस-किस ने कत्ल किया है।  

 

अभिषेक के पिता ने कहा तुम कौन बोल रहे हो? अभिषेक बोला पापा मुझे बचाओ तीनों रूमाल रख कर हंस रहे थे वह बोले रुपए लेकर कहां आना है।? वह बोले पुरानी हवेली के खंडहर के पास लेकर आओ पुलिस को लेकर मत आना वर्ना आप अपने बेटे को नहीं देखोगे।  अभिषेक के पिता जैसे रुपए लेकर आए उन किडनैपरस नें कहा पुलिस को तो नहीं लाए हैं। अभिषेक के पिता ने कहा मेरा बेटा कहां है?  हम अभी तुम्हारे बेटे को छोड़ते हैं। आप बाहर इंतजार करो। अभिषेक के पिता बाहर खड़े हो गए। नौकर और उसका भाई वादे के मुताबिक खंडर वाले स्थान पर पहुंचे भेष बदलकर। जैसे ही अभिषेक के पापा ने 2000000 रुपए जिस स्थान पर उन्होंने बताए थे वहां पर रखे इतने में वे दोनों दोस्त अभिजीत और अभिनव एक कोने से निकलकर बाहर आ गए थे। अभिषेकं को उसके दोस्तों नें कहा तुम साथ में ही एक पुरानी हवेली है तुम वहां पर चले जाओ। तुम्हारे पापा कंही तुम्हें पहचान ना ले इसलिए हम दोनों ही बाहर जाते हैं। अभिषेक  को फोटो खींचने का शौक था। वह खिड़की से उनकी फोटो ले रहा था। बाद में वह अपने पिता को सारी सच्चाई बता देगा कि मेरे दोस्त देखना चाहते हैं कि तुम्हारे पिता तुमसे कितना प्यार करते हैं? इसलिए मैं वीडियो बना देता हूं। ताकि पापा को बता सकूं वह वीडियो बनाने लगा कमरे में अंधेरा था। वह बाहर कैसे निकल सकता था उन दोनों ने सबसे पहले उन दोस्तों को मार दिया और उनकी रुपयों से भरा बैग लेकर चंपत हो गए। उन्होंने अभिषेक के पिता को जोर से डंडा मार कर बेहोश कर दिया। वे दोनों 20, 00, 000 रुपए लेकर भाग गए बाहर अंधेरा था उन्हें पता ही नहीं लगा कि उन्होंने सोचा हमने तीनों को मार दिया है।

 

अभिषेक ने अपने दोस्त को वहां बुला लिया था उसकी दोस्त श्रुति वहां पर पहुंच चुकी थी। उसने अपनी दोस्त श्रुति को सारी बात बताई वह अभिषेक पर नाराज हुई। तुमने अपने पिता को भी कितनी बड़ी मुसीबत में डाल दिया। तुम्हें ऐसा कभी नहीं करना चाहिए था। वह बोला हम तो मजाक कर रहे थे मगर मैं अब वीडियो बना रहा हूं देखो। वह भी देख रही थी। वह बोला मैं अपने दोस्तों के पास जाता हूं।  

 

तुम साथ में ही फोटोग्राफर की दुकान है वहां पर उनकी कॉपी बनवाकर ले आओ। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा।  श्रुति फोटोग्राफ की दुकान में फोटो ले कर लाई। फोटो कीएक कॉपी वंहीं पर भूल गई। वह अभिषेक के पास पहुंच गई। इतने में गाडी के चलने की आवाज आई। वह अपनी दोस्त से बोला यह दोनों बीस लाख लेकर चले गए। मेरे दोस्तों ने मुझे बुद्धू बनाया। दोनों नीचे उतरे। तभी श्रुति का एक पत्थर से टकरा गया उसके पैर से खून निकल आया था।  किडनैपरस  उन दोनों दोस्तों के पीछे भागे।  उन दोनों ने श्रुति और अभिषेक को देख लिया। उन्होंने  श्रुतिऔर अभिषेक को पकड़ लिया। श्रुति और अभिषेक के पास कैमरा देखकर उन्होंने उसका कैमरा उस से छीन लिया। श्रुति ने अपना मोबाइल   अपने मोजे में छुपा लिया।  श्रुति और अभिषेक को बांधकर बेहोश कर दिया।

 

अभिषेक के पिता को होश आया तो वह जल्दी जल्दी घर आए। नीरज ने अभिषेक के पिता को कहा कि 20, 00, 000 रुपए लूटने का प्लान तो आपके बेटे का था। वह अपने दोस्तों के साथ बीस लाख रूपये ले जानें वाला था मगर हमने आपके बेटे की सारी बातें सुन ली जब आप 2000000 रुपए लेकर आए तो हमने आपके बेटे के साथ जो दोस्त थे वह जब रुपए लेने आए तो हमने उन्हें मौत के घाट उतार दिया। परंतु ना जाने आपका बेटा कैसे बच गया।?  आप अगर अपने बेटे को जिंदा देखना चाहते हो तो पुलिस को कहना कि मैंने इन दोनों बच्चों को मैंने मारा है नहीं तो तुम अपने बेटे को खो देगे। अभिषेक के पिता ने अपनी पत्नी को सारी बातें बताई। उन्होंने अपने पत्नी को कहा कि मैं अपने बेटे को बचाने के लिए यह गुनाह अपने सिर ले लूंगा

 

दूसरे दिन अखबार में आ गया व्यापारी धनीराम ने दो बच्चों का खून कर दिया। श्रुति जब घर नहीं आई तो उसके माता-पिता दोनों घबरा गए। श्रुति के पिता पुलिस इन्सपैक्टर थे। श्रुति नें  जहां उनको  बंद किया गया था तो उसने अपने मोबाइल से अपने पिता को फोन किया उन दोनों को होश आया तो उसने अपना मोबाइल ऑन किया और अपने पिता को कहा कि पापा मैंऔर अभिषेक बहुत बड़ी समस्या में है। हम को किसी किडनैपरस ने पकड़ा हुआ है।  आप हमारा पता लगाना चाहते हैं तो आप फोटोग्राफर राजीव सक्सेना की दुकान पर मैंने कैमरे की तस्वीरें धुलवानें के  लिए दी थी। जल्दी से एक कॉपी में वही छोड़ आई। आपको उसकी लोकेशन से पता चल जाएगा कहां की है। आप जल्दी से हमें छुड़वाओ।

 

फोन कट गया। श्रुति के पिता ने राजीव सक्सेना की दुकान पर जाकर फोटोग्राफ से वह फोटो ले ली। फोटो को देख कर पता चलता था कि दो लोग गोली चला रहे थे। नीचे दो लाशें खून से लथपथपड़ी थी। श्रुति के पिता देखकर घबरा गए कि उनकी बेटी बहुत ही बड़ी मुसीबत में है। दूसरे दिन अभिषेक के पिता ने अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया और उन्होंने यह कहा कि मैंने इन दोनों युवकों की जान ली है। वह मेरे बेटे के दोस्त थे। मैंने उन दोनों को मार डाला। अभिषेक के पिता को पुलिस वाले पकड़ कर ले जा रहे थे।।

 

कंही वे ही तो श्रुति के होंने वाले ससुर तो नही। आज हमारी बेटी भी मुश्किल में पड़ गई है। पुलिस वालों ने अभिषेक के पिता को फांसी की  सजा सुना दी। श्रुति डर गई कि अंकल को जेल हो जाएगी। श्रुति के पिता को उस कैमरे की वजह से पता चल चुका था कि अभिषेक के पिता गुनहगार नहीं है।। उन्होंने कसम खाई कि उन्हें छुड़ा कर ही रहूंगा।

 

श्रुति के पिता को उस  पुरानी हवेली के खंडहर का पता चल चुका था। वहां पर रात के समय गाडी ले गए। जहां पर उनको बाईक के निशान दिखाई दिए। वह बाइक तो उनकी बेटी की थी। और अपनी बेटी के जूतों के निशान थे। वह सीढ़ियां उतर कर नीचे गए वहां अंडर ग्राउंड था। उन्होंने देखा सबसे नीचे वाली मंजिल में एक कमरा था। वहां पर श्रुति और अभिषेक को गुंडों ने बेहोश किया हुआ था। श्रुति के पिता ने उन पर पानी के छींटे मार कर उन्हें होश में लाया। अभिषेक बोला अंकल हमें माफ कर दो मेरे पापा ने कोई  खूंन नंही किया। मैं आपको सारी कहानी सुनाता हूं। वह बोले पहले जल्दी से यहां से चलो वर्ना वे दोनों आ जाएंगे। पुलिस वालों ने वहां पर एक लेडी पुलिस और एक पुलिस हवलदार को अंदर बांध दिया था। ताकि उन गुंडों को पता लग जाए कि दोनों अंदर ही है। उन्होंने उन दोनों को अभिषेक और श्रुति के कपड़े पहना दिए।

 

जब उनके किडनैपरस नें खिड़की से झांका तो  देखा वे अभी तक बेहोश पड़े थे जैसे ही वो जाने लगे पुलिस हवलदार ने अपने मोबाइल से उनकी फोटो ले ली थी। पुलिस ने गाड़ी का नंबर भी नोट कर लिया था। उनकी आवाज रिकॉर्ड कर ली थी। दोनों कह रहे थे कि कल इन दोनों को भी मार देंगे और नदी में फेंक देंगे।

 

अभिषेक के पिता को फांसी हो जाएगी। बेचारा मरते मरते भी हमें 20, 00, 000 रुपए छोड़ गया। बेचारे दोनों बच्चे अगर हमने उस दिन उन दिनों की बात नहीं सुनी होती मेरे मालिक को कभी पता नहीं चलता कि यह फोन मैंने किया है। मगर गलती से उसका बेटा बच गया है।  उस लडकी नें हमारी सारी स्नैप ले ली।  लड़की  इससे पहले कि वह पुलिस वालों के पास पहुंचती  उसके पास हमारी भी स्नैप है। हमनें  कैसे  अभिषेक के दोस्तों को मारा। मैंने उस  स्नैप को जला दिया और कैमरे को तोड़ दिया। यह सारी बातें पुलिस  हौलदार नें रिकॉर्ड कर ली थी। उसने खिड़की में  टेपरिकॉर्ड छोड़ दिया था। दोनों गाड़ी में बैठकर चले गए थे। दोनों ने फोन पर पुलिस इंस्पेक्टर को सूचित किया कि हमने उन दोनों की सारी बातें सुन ली है। हम आ रहे हैं वर्ना सुबह आकर वे हमें भी  मार देंगे। पुलिस इंस्पेक्टर तिवारी ने अपनी पुलिस की गाड़ी वंहां भेज दी थी। दोनों सुरक्षित बच कर पूरी जानकारी लेकर  आयें।  अभिषेक ने सारी कहानी तिवारी अंकल को  सुनाई कि हम तीनों दोस्तों ने तो मजाक किया था मगर उस झूठमूठ के मजाक नें मेरे प्यारे दोस्तों की जान ले ली।।

 

जब मैं अपने दोस्तों को ढूंढने अंदर गया तो मैंने देखा अंधेरा था। दोनों गुंडे भाग चुके थे नीचे मेरे दोस्तों की लाशें थी। मैंने समझा मेरे पिता ने उन दोनों को मार दिया मगर जब मैं बाहर निकला तो उन दोनों गुंडों ने मुझे देख लिया और कहा कि चुपचाप हमारे साथ चलो वर्ना तुम्हें  हम मार देंगे। उन्होंने मुझसे कहा तुम्हारे साथ  क्या कोई  और साथी है?  उन्होंने सारे बंगले की छानबीन की। श्रुति को भी  उन गूंन्डों नें पकड़ लिया। मुझे वीडियो बनाने का शौक था। मैंने उस बंगले से सारी की सारी स्नेप ले ली थी। मगर मैं अपने दोस्तों के साथ होता तो मैं भी मर जाता मगर मैं बच गया मैंने अनजाने में उनकी स्नेप ले ली। पुलिस इंस्पेक्टर को  सारी सच्चाई समझ में आ गई थी। उनके कीआंखों से आंसू बहतेआंसू सारी कहानी कह रहे  थे। वे दोनों बहुत बड़ी मुसीबत से बाहर आ चुके थे। उन्हें अपने दोस्तों के लिए बेहद अफसोस था। अभिषेक ने कसम खाई कि वह कभी भी किसी से ऐसा भद्दा मजाक नहीं करेगा। अभिषेक के पिता को पुलिस ने छोड़ दिया। अभिषेक के पिता को पता चल गया कि वह लुटेरा और कोई नहीं उनके घर का नौकर और उनका चेहरा भाई था जिन्होंने उन तीनों दोस्तों की बात सुनकर इस योजना को अंजाम दिया था।  उन दोनों दोस्तों को मारने के अपराध में जीवन भर की सजा सुनाई गई। उसके परिवार वालों को अभिषेक के पिता ने 10, 00, 000रुपए दिए और कहा मेरी बेटे की वजह से तुम्हारे दोनों बेटों की जान गई है। मेरा बेटा तो बच गया अगर वह भी उनके साथ होता तो वह भी आज जिंदा नहीं बचता। मुझे उनके लिए सारी उम्र भर पछतावा रहेगा। आपको विश्वास दिलाता हूं मेरे बेटे को ही आप अपने बेटे में के रूप में देखोगे। वह आप दोनों के घर में किसी भी मुश्किल के समय वह हरदम आपके साथ खड़ा रहेगा।

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