(मस्ती की पाठशाला) कविता

लुक्का छिपी लुकाछिपी खेल खेल कर साथ मिल कर खेलो खेल।

हम सब बच्चे मिलकर बनाएं अपनी रेल।। छुक छुक छुक छुक करती आई रेल।

सीटी बजाती आई रेल।।

एक दो तीन चार, पांच छः सात,

आठ नौ दस ग्यारह।

आज मौसम बहुत ही प्यारा।।

मेरे साथ मिलकर तुम गांओ यह गाना।

डम डम डिगा डिगा, डम डम डिगा डिगा,

वर्षा में मैं तो भीगा मैं तो भीगा।

ममी बोली हाय अल्ला। हाय अल्ला।।

सारे कपड़े गन्दे कर डाले।

तू तो पीटा तू तो पीटा हाय! अल्ला हाय अल्ला।।

गुनगुनाओ सभी मिलकर यह गाना।

रीना बीना ईना पिन्की,

चुन्नू मुन्नू बन्टू चिंकी।।

आंख पर पट्टी बांध कर खेलें आंख मिचौली।

लुका छिपी का खेल खेल कर आओ खेलेंंखेल हमजोली।।

पौं- पौं करती मोटर आई,

उस मोटर में बच्चों की अध्यापिका भी आई। अपनें साथ अनेक उपहार और ढेर सारी मिठाईयां भी लाई।।

सभी बच्चों नें अध्यापिका को अभिवादन कर अपनी खुशी झलकाई।

बच्चों नें आपस में बांटी मिठाई,

मस्ती की पाठशाला में खूब धूमाचौकडी मचाई।।

ताली बजाओ, ताली बजाओ,

गीत गाकर सबका मन बहलाओ।

एक पंक्ति बना बना तुम खेल सारे खेल डालो।

लुक्का छुपी लुक्का छिपी का खेल साथ मिल कर खेलो।।

मेरे साथ तुम दोहरोओ यह खेल।

एक दो तीन चार पांच छः सात आठ।

नौ दस ग्यारह बारह।

एक वर्ष में महीनें होतें हैं बारह।। ________________________

एक दर्जन फल भी होतें हैं बारह। 10+2=12

घड़ी में समय का पहिया भी दर्शाता है बारह।

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