रैन बसेरा

11/12/2018

चिड़िया के छोटे से घौंसलें  में रहता था एक परिवार।

एक दूसरे से करते थे सभी प्यार।।

घोंसले में मिलजुल कर साथ रहते थे।

एक दूसरे की सहायता कर सदा सुखी  रहते थे।।

चिड़िया के तीन बच्चे थे बड़े हो रहे।

वे भी उधर उधर दाना चुग कर जीवनी  यापन कर रहे।।

घोंसले में एक साथ रहने से होती थी घुटन।

बच्चे भी सारा दिन उधम मचा कर करते  नाक में दम।।

एक दिन चिड़िया बोली तुम हो मेरे बच्चा बच्ची।

यह बात है कड़वी मगर सोलह आने सच्ची।। तुम सभी आत्मनिर्भर हो चुके हो।

जीवन का यथार्थ समझने लगे हो।।

तुम्हें हमसे अलग होकर रहना ही होगा।

अलग से काम धंधा कर अपना जीवन यापन करना  ही होगा।।

एक साथ इस घोसले में इकट्ठा नहीं रहा जा सकता।

घुटन भरे वातावरण में जिया नहीं जा सकता।। तुम्हारे बूढ़े दादा दादी की भी देखभाल करना जरूरी है।

यह बात तुम्हें समझाना जरूरी है।।

पक्षियों को तो अलग से रैन बसेरा बनाना ही पड़ता है।

अलग हो हो कर जीवन यापन करना ही पड़ता है।।

चिड़िया का एक बच्चा बोला मां तुम हमें छोड़ कर जाओ ना।

हमें अपने से जुदा करवाओ न।।

दूसरा बच्चा बोला एक दिन आप भी बूढ़े हो जाएंगे।

तब आप अपनी देखभाल कैसे कर पाएंगे।। तीसरा बच्चा बोला आपको भी किसी ना किसी की जरूरत पड़ेगी।

तब आप किस को मदद के लिए बुलाएंगे।। बच्चे बोले हम आपको छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

आसपास की शाखा पर ही अपना आशियाना बनाएंगे।।

हम स्वावलंबी हो सकते हैं स्वार्थी नहीं।

हम आपके हैं और आप हमारे क्या इतना काफी नहीं।।

आप से ही है घर संसार हमारा।

यहीं पर माता पिता के चरणों में है सुख सारा।।

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