स्कूल बस्ते का बोझ

रामू जैसे ही स्कूल जाने की तैयारी कर रहा था और मन में सोच रहा था  आज  वह  देरी से स्कूल पहुंचा तो स्कूल में उसकी पिटाई होगी। उसे स्कूल की प्रार्थना सभा में अलग से डैक्स पर खड़ा कर दिया जाएगा और सारा दिन तपती दोपहरी में एक-दो घंटे खड़ा रखा जाएगा। जल्दी से जल्दी स्कूल को  भागा जा रहा था। पीछे से रामू की मम्मी ने आवाज लगाई बेटा अपनी कॉपी तो तुम घर पर ही भूल गए। ओह! अंग्रेजी की कॉपी। वह मैडम तो और भी सख्त है। अंग्रेजी की कॉपी तो जल्दी में ले जाना ही भूल गया। दस मिनट उसे  घर वापिस आने में लगे।  वह भागता ही जा रहा था। रास्ते में सोच रहा था कि आज तो उसे सजा मिल कर ही रहेगी। काश इस भारी बैग से उसे छुटकारा मिल जाता। इस बैग को पिछले  सात साल से उठाता जा रहा हूं।मेरे कंधे  स्कूल बैग के भार से दुखने लगे। जिस दिन सारी कॉपियां नहीं ले जाते उसी दिन सारी कॉपियां  जांच की जाती है। सारा स्कूल बैग भरा होता है उस दिन मैडम कापियों की जांच ही नहीं करती। आज तो मैडम नें खड़ा ही कर दिया। रामु तुम्हारीअंग्रेजी  की किताब कहां है? वह होमवर्क करते-करते अपनीे अंग्रेजी की किताब  घर पर ही छोड़  आया था।

मैडम ने उसे डैस्क पर खड़ा कर दिया। मैडम सब बच्चों से  प्रश्न पूछ रही थी मगर किसी को भी  प्रश्नों के उतर नहीं आते  थे। तुम सारा दिन बैन्च पर खड़े रहोगे तभी तुम्हें किताब लाना याद रहेगा। रामु से मैडम ने कहा चलो रामू, तुम ही बताओ। रामू  बोला मैडम इन प्रश्नों के उत्तर  सही देने पर आप मुझे   बिठा देगी न। वर्ना रामू के मुंह से वर्ना निकल गया था।

मैडम गुस्से में तपाक से बोली मैडम के सामने जबान चलाते हो खड़े रहो।  वह मायूस  सा बेंच पर खड़ा रहा। कक्षा में बच्चों का शोर सुन कर विज्ञान के अध्यापक भी वहां पहुंच गए थे।

 

मैडम को  तभी फोन आया। मैडम ने वास्तव सर को कहा कि कृपया थोड़ी देर आप मेरे कक्षा देख लें। मुझे बहुत ही जरूरी बातें करनें प्रिंसिपल के  कार्यालय में जाना है। प्रिंसिपल  के  कार्यलय में पहुंचने पर मैडम ने प्रिंसिपल से कहा मुझे आपने क्यों बुलाया? प्रिंसिपल  बोली मैडम रामू के घर से  अभी अभी फोन आया  है। उसकी मम्मी कह रही थी कि रामु अपनी अंग्रेजी की किताब ले जाना ही भूल गया। वह सारी रात पाठ याद करता रहा। उसने मुझे जब तक पूरा पाठ  नहीं सुनाया तब तक वह अंग्रेजी की किताब लेकर बैठा रहा  उसे कल बुखार भी था। वह सारी रात काफी देर तक पढ़ाई करता रहा। उसकी मम्मी कह रही थी कि कृपया मेरे बेटे को बेंच पर मत खड़ा करना। वह बच्चा बहुत ही डर गया  है। वह अपनी मां को कहता है कि मेरा स्कूल जाने को भी मन नहीं करता। इतना भारी बैग उठाना पड़ता है। भारी बैग उठाकर मेरे कंधे भी छिल गए। जिस दिन किताबें न ले जाओ उसी दिन मैडम कॉपियां जांचती  हैं। कभी-कभी मैं उसका इतना भारी  बस्ता देखकर दंग रह जाती हूं। कभी-कभी तो मैं उससे बिना पूछे उसकी किताबें बस्ते  में से हटा देती हूं। कल रात तो वह रोने ही लगा। आप कृपा करके मेरे बेटे को सजा मत  देना।

 

मैडम ने जैसे ही सुना वह हैरान हो गई। उसने तो  उस बेचारे   रामु को  दो घंटे बैंन्च पर खड़ा ही रखा।   वह बेचारा अभी तक बेंच पर  ही खड़ा होगा।  मैंने अध्यापिका होकर उस बच्चे की मनोभावनाओं को नहीं समझा।  केवल वही एक बच्चा  ऐसा था जो कक्षा में पाठ याद कर के आया था। मैंने उसे बिना वजह से बेंच पर खड़ा कर दिया और न जाने गुस्से में क्या क्या कह दिया?

रीना मैडम जल्दी से प्रिंसिपल   के कमरे से निकल कर कक्षा में पहुंची तो देखा रामू अभी तक बेंच पर खड़ा था। वह कक्षा में आकर अपने आप को अपराधिन महसूस कर रही थी। उसने रामु को आते ही कहा बेटा तुम अभी तक खड़े हो। बैठ जाओ। रामु नीचे बैठ गया और  सिर नीचा करके जोरजोर से रोने लगा। उसे  रोता देखकर कक्षा के सारे बच्चे उसकी तरफ देखकर मैडम से कहने लगे। मैडम  रामु रो  रहा है।

मैडम  रामुके पास के पास जाकर खड़ी हो गई।  उस के कन्धे थपथपा कर कहा। तुम बच्चे इतने भारी स्कूल  बस्ता उठाकर स्कूल आते हो। मेरी गल्ती है। मैंने तुम्हें  बिना वजह जानें इतनी बड़ी सजा दे डाली। मैं अपने आप को बहुत ही छोटा महसूस कर रही हूं। मैंने तुम बच्चों की मनोभावनाओं को नहीं समझा बेटा।

 

आज तुमने मुझे एहसास करवा दिया कि हम लोग भी कभी-कभी गल्त हो सकते हैं। बिना कारण जाने हम तुम्हें सजा दे देते हैं। मेरे बच्चे भी स्कूल में जाते हैं। दोनों थके हारे जब घर आते हैं तो कहते हैं कि हम थक गए। लेकिन आज जब मैंने तुम्हें जल्दी से सजा दे दी तो मैंने इस वजह को नहीं समझा। तुम क्या चाहते थे?  मुझ से पाठ सुन लो और मुझे बिठा दो। मैंने तो तुम्हारी बात भी सुनी अनसुनी कर दी बेटा। आगे से ऐसा नहीं होगा।

 

मैं आज ही तुम्हारा समय सारणी सुनिश्चित करती हूं। इस समय सारणी के अनुसार ही तुम अपना बस्ता पैक कर के लाना। इससे तुम्हें बस्ते का बोझ भी नहीं उठाना पड़ेगा और तुम्हारे कंधों में दर्द भी नहीं होगा मेरा बेटा भी हर रोज मुझसे कहता है मां मेरी किताबे सारी स्कूल बैग में डालना  मत भूलना। आज मैंने जाना एक बच्चे का दर्द क्या होता है?  आगे  से ऐसा नहीं होगा। मैं स्कूल में सभी अध्यापकों को समय सारणी के अनुसार बस्ता मंगवाने का प्रयत्न करूंगी बच्चों तुम्हारी मैडम आज तुम्हारी गुनहगार है। बेटा आगे से ऐसा नहीं होगा रामु का सारा  दर्द गायब हो गया था। वह पहले की तरह अपना दर्द भूल कर मुस्कुराते मुस्कुराते बच्चों के साथ बातें करने में मग्न हो गया था।

 

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