समझी

समझी के पति का तबादला आसाम के एक छोटे से क्षेत्र में हुआ था। वह अपनी पत्नी के साथ कुछ दिन अपने घर छुट्टी बिताने आया था। उनकी नई-नई शादी हुई थी। उसके पति ने अपनी पत्नी को समझाया कि तुम्हें यहां पर रहने के लिए कोई परेशानी नहीं होगी। तुम अकेली भी बड़े अच्छे ढंग से यहां पर रह सकती हो। तुम यहां आस-पास की औरतों के साथ भी दोस्ती कर लेना। यहां पर सारे लोग बहुत ही अच्छे हैं। मैं तुम्हें हर हफ्ते मिलने आ जाया करूंगा। उसके माता-पिता नहीं थे। वह अकेला ही रहता था।

उसका एक छोटा सा घर था। समझी बड़ी बड़ी आंखों वाली देखने में सुंदर लंबी थी। हर रोज सैर करना उसकी आदत में शुमार था। सुबह सुबह जल्दी उठकर सैर करने चली जाती थी। वह बन ठनकर जब हर रोज घर से निकलती मोहल्ले वाले लोग उसको देखने लाइन लगाकर खड़े हो जाते।वह अभी तक किसी से भी घुली-मिली नहीं थी। मोहल्ले वाले लोगों को उसका नाम भी मालूम नहीं था। गांव की औरतें दूर से ही देख कर उसे कहती तुम तो बड़ी खूबसूरत लग रही हो। अपनी प्रशंसा सुनकर वह फूली नहीं समाती थी। वह अभी तक किसी के भी घर नहीं गई थी। उसकी कोई भी सहेली वहां पर नहीं बनी थी। उसको गहने पहनने का बहुत शौक था।

मौहल्ले वाली औरतें उसकी ओर इशारा करके उससे कहती थी अरी बहन तुम हर रोज बंन संवर  कर जेवरात  पहन कर  कंहा निकलती हो? तुम्हें अकेला देखकर कोई ना कोई तुम्हारे गहनें तुमसे छीनने की कोशिश करेगा। तुम्हारे आभूषण चोरी कर ले जाएगा।

वह शाम को 5:30 से 6:30 बजे के बीच हर रोज घर से निकलती। गांव वाले मोहल्लों  वालों को कभी उसने नहीं बताया था कि वह कहां जाती है?  मोहल्ले वाली औरतों ने उसे  पूछ ही डाला। क्यातुम कहीं नौकरी करती हो? आज तो तुम्हें बताना ही पड़ेगा। वह बोली बहन में बहुत ही कम पढ़ी लिखी हूं मेरे माता पिता ने मुझे आठवीं तक ही पढ़ाया है। मुझे सजना- संवरना बहुत ही अच्छा लगता है। मैं अगर बाहर निकलती हूं तो इसका मतलब यह नहीं कि मैं किसी को रिझाने के लिए ऐसा करती हूं। मुझे गहने पहनने अच्छे लगते हैं। उसकी मोहल्ले  वाली औरतें बोली यह  बात तो ठीक है पर हम तुम्हें समझा रहे हैं। आभूषण पहनकर बाहर मत जाया करो। एक तो तुम्हारे पति भी यहां नहीं रहते। अगर किसी दिन तुम्हारे घर में चोरी हो गई तो क्या करोगी?  नकली जेवरात भी आजकल दुकान में मिलते हैं। वह पहन लिया करो। उसने कहा ठीक है मैं तुम्हारी बात को जरूर मानेंगी। उन्होंने कहा कि तुमने आज तक हमें अपना नाम भी नहीं बताया है।

वह बोली मेरा नाम समझी है। मेरे माता पिता बहुत ही पिछड़ी जाति के हैं। मेरे माता-पिता ने मेरी शादी कर तो दी। मेरे पति मुझे यहां पर लेकर आ गए। यहां पर इस घर में कोई भी शौचालय नहीं बनाया। बहन क्या करूं? शाम के समय भी जाना पड़ता है। सुबह के समय भी। तुम मुझे समझती होगी कि मैं नौकरी करती हूं। मौहल्ले कि औरतें  उसकी बात सुनकर हंसनें लगी। तू  अपनें  पति को कहकर शौचालय क्यों नहीं बनाती। कल को कहीं कुछ ऊंच-नीच हो गया तो  क्या करोगी?

वह बोली लगता है अब तो मुझे उन्हें समझाना ही पड़ेगा। एक दिन वह बन संवर कर सारे आभूषण पहनकर बाहर शौचालय के लिए गई थी। रास्ते में उसे चोर मिल गए। उस के आभूषण देखकर उन्होंने उस के आभूषण लूटने की योजना बनाई। वह बोले तुम कहां रहती हो? वह बोली मेरा घर पास ही में है। मैं वहां पर रहती हूं। वह बोले घर में कौन-कौन है? वह बोली मेरे पति हैं। वह ज्यादातर टूर पर ही रहते हैं। चोर आपस में बातें करने लगे आज तो इसके गहने लूट कर ही दम लेंगे। वह आगे आगे चल रहे थे समझी को समझ आ गया था हो सकता है वह चोर हो। वह बिल्कुल भी नहीं डरी। चोरों को देखकर उसने सोचा यह तो मुझे शायद  मुझ से मेरे गहनों न छीन ना ले। उनसे मित्रता बढ़ानी चाहिए।

बातों ही बातों में   समझी  ने उन से पूछ लिया तुम कहां रहते हो? वह बोले हम यहां पर काम के सिलसिले में आए हैं। हम क्या आप  के घर चाय पीने  आ जाएं। वह बोली बड़ी खुशी से आ जाओ। मेरे घर मेरा घर तो बहुत ही बड़ा है। मैं तुम्हें वहां पर खाना भी खिलाऊंगी। चाय भी पिलाऊंगी। वह बड़े ही खुश हुए।

उसने अपने घर का पता उन चोरों को दे दिया वह जल्दी-जल्दी अपने घर की ओर कदम बढ़ानें लगी। क्योंकि  उसने उनको बोलते हुए सुन लिया था अभी नहीं इसके घर जाकर इसके गहनों इससे छीन लेंगे। यहां तो हमें थोड़ी से गहने ही प्राप्त होंगे। यह कह रही है वह घर में अकेली रहती है। इसलिए  आज शाम को इसके घर ही चलते हैं। वह बोले  अच्छा आज शाम को हम तुम्हारे घर आते हैं। परंतु तुमने  हमें अपना नाम तो बताया ही नहीं। हम तुम्हें क्या कह कर पुकारें। चोरों ने उससे पूछा वह बोली मेरा नाम समझी है। तुम इस नाम को लेकर पुकारना। चोर बोले अच्छा। वह भाग भाग कर घर पहुंच गई। उसने पड़ोस की औरतों को बता दिया था कि चोर गुंडों से मैं पीछा छुड़ा कर आई हूं।

मैं रात को आपको फोन करूं तब तुम मेरा फोन उठा लेना।  उसके मौहल्ले वाली औरतो नें पुलिस को भी बुलवा लिया था। वह भी अन्दर थे। जब रात को चोर आए उन्होंने  समझी समझी कह कर  दरवाजा खटखटाया। उन्होंनें फिर आवाज लगाई। ओ समझी। ओ समझी समझी। वह अंदर से बोली मैं खूब समझी। मैं खूब समझी। मैं ना रात को ज्यादा खाऊं और ना आज के बाद बाहर शौच करने जाऊं। जल्दी से अपने घर में ही शौचालय बनाऊंगी। उसने पुलिस वालों को कहा कि इन चोरों को पकड़ लो। उस दिन के बाद समझी ने अपने पति को कहा कि मेरे गहनों को बेच कर घर में ही शौचालय बना दो। मैं आज खूब समझी। मैं आज कुछ समझी। खूब समझी। समझी। ना मैं  सुबह को ज्यादा खाऊं न रात को  ज्यादा खांऊं और ना आज के बाद बाहर शौच करने जाऊं। जल्दी से अपने घर में ही शौचालय बनाऊंगी। मैं खूब समझी। मैं खूब समझी।

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