अभिमान का परिणाम

किसी जंगल में एक शेर रहता था। जंगल में सभी जानवर शेर के आतंक से डर कर रहते थे।वह कभी ना कभी उनको मार कर खा जाया करता था। एक दिन सभी जानवरों ने राजा को कहा कि आपका कर्तव्य है हमारी रक्षा करना। आप ही हमें नुकसान पहुंच जाओगे तो हम कभी भी  हम आपका साथ नहीं देंगे।

हम किसी दूसरे जंगल में रहने के लिए चले जाएंगे। राजा बहुत ही घमंडी था।

राजा सभी जानवरों को लेकर अपने दूसरे दोस्त शेर के पास दावत पर जा रहा था

उसने जंगल के सभी जानवरों को दावत के लिए बुलाया था। राजा मन ही मन खुश हो रहा था कि मेरा जंगल में सभी जानवरों पर कितना राज है। राजा सभी जानवरों को बोला जल्दी जल्दी अपने कदम बढ़ाओ। जानवर चलते चलते थक गए थे। उन्हें प्यास भी लग रही थी। एक बाग में पहुंचे। रंग-बिरंगे फूलों से महकते बगीचे पर उनकी नजर पड़ी। राजा से बोले कुछ देर  यहां विश्राम कीजिए फिर चलते हैं। राजा बोला यहां कोई नहीं रुकेगा। राजा की आज्ञा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। सभी क्या कहते। गिलहरी राजा के पास जा कर बोली आप इतने निष्ठुर क्यों हो रहे हैं? यह सारे के सारे थक गए हैं। विश्राम करना चाहते हैं। आप भी विश्राम करें हमें भी करने दीजिए। राजा बोला इतनी सी पिददी जैसी हो। बातें बड़ी-बड़ी बनाती हो। मेरे सामने बोलने का हक तुम्हें किसने दिया।

वह बोली शेर राजा मैं चुप नहीं रहूंगी आप चाहे जो मर्जी कर लीजिए मी मुझे मेरी मां ने सिखाया है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने चाहिए। राजा बोला चल हट दूर हो जा शेर बोला। गिलहरी को गुस्सा तो आ रहा था पर वह चुपचाप चलनें लगी। सभी जानवर थक गए थे। गिलहरी भी आईस्ता आईस्ता कदम बढ़ाते हुए चलने लगी। उसे पास से आता हुआ मधुमक्खियों का झुंड दिखाई दिया। गिलहरी मेरी प्यारी बहना नमस्कार आप कहां जा रही हो? वह बोली हम भी अपनी सहेली की बेटी की शादी में जा रही हैं। गिलहरी बहन तुम तो बहुत ही होशियार हो कभी कोई काम हो तो बताना। तुम हमारे बच्चों को पढ़ाती हो। अच्छी शिक्षा देती हो तुम्हारी बातों में दम होता है। अच्छा चलती हूं। गिलहरी साथ ही साथ चलने लगी। गिलहरी सोचने लगी कि यही अच्छा वक्त है राजा को सबक सिखाने का। वह जल्दी से फूँक कर  राजा के पास आ कर बोली। राजा साहब बस बहुत हो गया। आपका घमंड ज्यादा घमंड करना जीवो को को शोभा नहीं देता।

किसी दिन आप का घमंड चूर चूर हो जाएगा राजा बोला दुष्ट गिलहरी तुझे अभी मजा चखाता हूं।वह बोली आप क्या कर लोगे। अगर सारे जानवरों को मैं आप आपके खिलाफ कर दूं तो आप अकेले ही रह जाओगे। क्या अकेले रह पाओगे। अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ पाता। एक और एक मिलकर ही ग्यारह बनते हैं। मैं सभी जानवरों को अपनी तरफ कर लूंगी राजा बोला शेखी बघारनें  वाली राजा की आज्ञा तो तुम्हें माननी ही पड़ेगी जो राजा की आज्ञा नहीं मानेगा वह मुंह के बल गिरेगा। अच्छा गिलहरी बोली अच्छा और करके बता दिया तो राजा बोला दूर हट चल यहां से गिलहरी। छोटा सी है और बातें बड़ी बड़ी। गिलहरी बोली छोटा समझ कर इंसान को दुत्कारना नहीं चाहिए। कभी छोटा इंसान भी काम में आ सकता है। राजा बोला यह मुंह और मसूर की दाल। तू मेरे क्या काम आएगी?

गिलहरी मुस्कुराते हुए जंगल के सभी जानवर के पास आकर बोली। तुम सब राजा को बोलो आप की गीदड़ भक्तों से हम डरने वाले नहीं हैं। खाना ही है तो सभी को खा कर बता? हम सब एक हैं हम सब इकट्ठे होकर आप का मुकाबला करेंगे। गिलहरी बोली अगर आप सभी अपने आप को कमजोर समझते रहे तो इसी तरह तुम्हें अपने राजा के अत्याचारों का हर रोज सामना करना पड़ेगा। हर रोज अत्याचार सहने से तो अच्छा है मर जाना। गिलहरी की बात सुनकर सभी जानवर आपस में  बोले बात तो ठीक ही कहती हो। गिलहरी राजा को बोली राजा जी अब हम थक गए हैं। हम और आगे नहीं चल सकते। राजा उन पर जोर से दहाड़ा। तुम्हें अपने राजा के सामने बोलने का अवसर किसने दिया? सभी जानवर बोले हम आपकी बड़ी इज्जत करते हैं परंतु अब बस बहुत हो गया। हम आपको छोड़कर किसी दूसरे जंगल में जाकर रहेंगे। सभी के सभी जानवर राजा को छोड़कर चलने लगे। केवल गिलहरी ही वहां रह गई। वह बोली राजा जी मैं आपको छोड़कर नहीं जाऊंगी। राजा बोला दूर हो जा तू क्या मेरी सहायता कर पाएगी। गिलहरी बोली  ठीक है ज्यादा घमंडी को एक न एक दिन सजा मिलकर ही रहती है। गिलहरी पीछे पीछे चलनें लगी। गिलहरी ने कहा कि तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। राजा को सबक सिखाना जरूरी है। मधुमक्खियों को गिलहरी नें कहा तुम्हे मेरा एक काम करना होगा। आप दो तीन मधुमक्खियां राजा को काट खाओ। सारी की सारी मधुमक्खियां राजा की पीठ पर बैठ कर उन्हें काटनें लगी। राजा उन मधुमक्खियों के काटनें से बहुत परेशान हो गया। वह बोला मुझे बचाओ। उसकी दर्द भरी आवाज सुनने के लिए कोई भी नहीं था। उस के सारे के सारे जंगल के जीव उसको छोड़ कर आगे बढ़ चुके थे। उसके पास हथियार  डालने के सिवा कोई चारा नहीं था।

गिलहरी  बोली क्या हुआ है?राजा बोला मुझे मधुमक्खियां काट रही है। गिलहरी राजा से बोली तुम तो बहुत शक्तिशाली हो। इतनी छोटी सी मधुमक्खियों से डर गए। अब कहां गया तुम्हारा घमंड।? यह कहकर गिलहरी जोर जोर से हंसने लगी। राजा बोला तुम हंसना बंद करो

तुम हंसना बंद करो और मुझे  बचाओ। गिलहरी बोली एक शर्त पर आप बच जाओगे आप आज कसम खाइए जंगल के जानवरों पर अत्याचार नहीं करेंगे। राजा बोला ठीक है। गिलहरी ने सभी मधुमक्खियों को कहा कि राजा जी को छोड़ दो। मधुमक्खियों ने राजा को काटना छोड़ दिया। राजा गिलहरी को बोला तुम बहुत ही बहादुर हो। तुमने आज एहसास करवा दिया कि हमें किसी भी जीव को छोटा नहीं समझना चाहिए। मुझे माफ कर दो। आज से मैं तुम्हें अपना सलाहकार नियुक्त करता हूं। तुमने मुझे शिक्षा देकर अच्छा काम किया है। गिलहरी बोली की जंगल के सभी जानवर को वापस बुला कर लाओ और अपनी गलती मानकर उनसे क्षमा मांगो। राजा ने सभी जानवरों को वापस लाने का आदेश दिया। सभी जानवर अभी आगे नहीं गए थे। गिलहरी नें सभी  जानवरों को वापिस बुलाया। सभी जंगल के जीव आकर राजा से बोले अगर आपको अपनी गलती का एहसास हो गया तो हम आपसे क्षमा मांगते है। क्योंकि क्षमा मांगने से कोई भी छोटा नहीं हो सकता। हम आपको अपना राजा अभी भी मानते हैं और आगे भी मानेंगे लेकिन आप अपना वादा भूल गए थे। इसलिए आप को सबक सिखाना जरूरी था। हमें गिलहरी बहन ने सब कुछ साफ-साफ बता दिया है। अब हम दावत का मजा अच्छे ढंग से लेंगे। सभी जीव खुशी खुशी दावत का मजा लेनें चल पड़े।

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