अभिलाषा

एक छोटे से गांव में देवी शरण और उसकी पत्नी माधवी अपने बेटे साहिल के साथ रहते थे। वह मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। उनका बेटा साहिल  उनके घर के समीप ही गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ता था।। माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर बहुत ही सतर्क थे। उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने का निर्णय लिया था।। वे दोनों उसे पढ़ा लिखा कर एक बड़ा डॉक्टर बनाना चाहते थे। उन्होंने उसके लिए घर में ट्यूशन के लिए पहले ही एक शिक्षक महोदय  नियुक्त किया हुआ था। वह उनके बच्चों को पढ़ाया करता था। वह दोनों चाहते थे कि हम अपने बच्चे के भविष्य के लिए कुछ भी करेंगे लेकिन उसे डॉक्टर बना कर ही छोड़ेंगे। साहिल के पिता बिजली विभाग में कार्यरत थे। माधवी भी एक शिक्षिका थी। ऑफिस  में जैसे ही पहुंचे बाहर चपरासी फाइलें      ले कर  साहब के मेज पर छोड़ आया था। दूसरे ऑफिस के कर्मचारी अपने-अपने गंतव्य स्थान पर जा रहे थे ऑफिस में आज खुशनुमा माहौल था। एक हॉल में पार्टी का आयोजन किया जा   रहा था। उन के दोस्त ने पार्टी का आयोजन करवाया   आदित्यनाथ का बेटा डाक्टरी  में सिलेक्ट हो गया था। उनके चेहरे की खुशी उनके मुख से जाहिर हो रही थी। ऑफिस के लोग इकट्ठा कर उसे बधाइयां दे रहे थे। देवी शरण भी उनके पास जाकर बोले मुबारक हो। शरण जी आपके बेटे ने तो कमाल ही कर दिया। उनका दोस्त आदित्यनाथ बोला  हम उसे डाक्टर ही बनाना चाहते थे। मेरा बेटा भी डाक्टर ही बनना चाहता था। आज मेरा सपना साकार  हो गया।देवीशरण अपनें मन में सोचने लगे  उसका  बेटा भी  11वीं कक्षा में है। केवल   एक साल की ही तो बात है। इस साल उसे कोई काम नहीं करने देंगे। उसकी पढ़ाई पर ही ध्यान देगें। हमारा बेटा भी अगले साल   डाक्टरी में सिलेक्ट हो जाएगा। थोड़े दिन की बात है एक साल का पता भी नहीं चलेगा कब समय पंख लगा कर उड़ जाएगा। पार्टी समाप्त हो गई थी। देवीशरण बोले मैं भी अपने बेटे को डाक्टर बनाना चाहता  हूं। आदित्य नाथ बोले यह तो बहुत ही बड़ी बात है। उसके लिए पहले से  ही कोचिंग  शुरू कर देनी चाहिए। घर आ कर देवीशरण अपने    बेटे से बोले बेटा खूब मन लगाकर मेहनत करो। तुम्हें जिस चीज की भी आवश्यकता हो मांग लेना। तुम्हें पढाई के अतिरिक्त कुछ करना नहीं है। देवी शरण ने अपने बेटे को  कहा बेटा सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई  किया करो। साहिल दस से बारह घंटे लगातार पढाई किया करता था। वह जब थक  हार  कर बैठ जाता था उसका दोस्त उससे मिलने  आता तो देवीशरण उसे कहते बेटा खेलना, दोस्तों से मिलना ये तो सारी उम्र भर चलते रहेंगे। तुम  अभी तो अपना कैरियर बनाओ।

हमारे पास तो सारे साधन उपलब्ध नहीं थे। हम कुछ अच्छा ज्यादा अच्छा नहीं बन पाए। तुम्हारे पास तो सब कुछ है। माधवी भी अपने बच्चे की स्कूल में सभी अध्यापिकायों के सामने प्रशंसा करती। मेरा बेटा खूब मन लगाकर पढ़ता है। माधवी की सहेली रिया बोली आप तो उसे डॉक्टर बनाना चाहते हो। क्या आपके बेटे ने अपने मुंह से कभी यह कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहता है?  माधवी बोली उससे पूछने की क्या बात है। हम तो उसे डॉक्टर ही बनाएंगे। रिया बोली बहन देखो हमें सबसे पहले बच्चे की मनो भावनाओं को समझना बहुत ही जरूरी होता है। इसलिए सबसे पहले   उस से पूछ लेना तभी उसके भविष्य का लक्ष्य निर्धारित करना वर्ना  तुम्हे सारी जिंदगी भर पछताना पड़ सकता है। माधवी बोली नहीं ऐसा नहीं है।  मेरा बेटा डॉक्टर ही बनना चाहता है।

  घर आ कर अपनें मन में  सोचनें लगी मेरी सहेली कह तो ठीक ही रही है। आज उस से पूछने  का यत्न करती हूं। शाम को     साहिल जब  घर आया तो थोड़ी देर आराम करने के लिए बिस्तर पर सो गया। उसे गहरी नींद आ गई। माधवी अपने बेटे के कमरे में आई अपने बेटे को उठाने ही लगी थी अपने बेटे को गहरी नींद में सोया देख कर वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई। बेटा पढ़ाई कर कर के थक गया होगा। वह जब उठेगा तब ही उससे पूछने का प्रयत्न करूंगी।

देवी शरण ऑफिस से आ गए थे। उन्होंने अपनी पत्नी माधवी को कहा कि एक कप चाय बाहर डाइनिंग टेबल पर ले आओ। उन्होंने साहिल को आवाज लगाई। माधवी नें कहा वह सो रहा है।  साहिल के पिता बोले उसे उठाओ। माधवी बोली सोने दो। नहीं, ये भी कोई सोने का वक्त है। उठ कर पढाई करने  के लिए कहो। उसके पिता जल्दी से साहिल के कमरे में गये। उसे पढ़ने के लिए जगा दिया। वह बोला बाबा  मुझे सोने दो।  उसके पापा उसे समझाते हुए बोले इस साल के बाद   तुम्हे सोना ही सोना है।। अभी तो तुम्हारे पढाई  और मेहनत करने का वक्त है। साहिल को गुस्सा आ गया बोला सोने भी नहीं देते। उसके पिता उस से नाराज होकर बोले। आजकल के बच्चों को देखो अपनी मनमानी करते हैं। पढ़ने को  कहो तो आगे से जवाब देते हैं। मुझे क्या है?वह गुस्सा होकर बोला मुझे नहीं बनना।  मैं डॉक्टर बनना ही नहीं चाहता। आप लोग मुझसे जबरदस्ती कर रहे हैं। पापा मुझे डाक्टर बनना अच्छा नहीं लगता। मुझे चीर फाड़ करना जरा भी अच्छा नहीं लगता। वह  बोले  बेटा चिरफाड करना अच्छा नहीं लगता तो क्या अच्छा लगता है।? वह बोला मैं इंजीनियर बनने का ख्वाब देखा करता था। आप तो मेरे सपनों को लात मार रहे हो। इंजीनियर बनकर क्या करोगे? तुझे तो हम  डाक्टर बनाकर ही छोड़ेंगे। डाक्टर की समाज में बहुत ही इज्जत होती है। भगवान के बाद डाक्टर ही तो पूजनीय है। माधवी अपने बच्चे के उत्तर को सुनकर हैरान रह  गई। उसे प्यार से बोली बेटा कोई बात नहीं अगर तुम  पीएम टी मेंनहीं निकलोगे तो भी कोई बात नहीं अगले साल फिर ट्राई कर लेना।

देवी शरण बोले तुम्हारी मां ठीक ही कहती है। तुमको भी  डाक्टरी की पढाईअच्छी लगने लग जाएगी। वह कुछ नहीं बोला उसका डॉक्टरी की पढ़ाई करने में जरा भी मन नहीं लगता था। उसके मां-बाप उसे डॉक्टर बनाना ही चाहते थे। वह तो इंजीनियर बनने का ख्वाब  देखता था। अपने पिता को कुछ कह नहीं सकता था उसका एक दोस्त था सौरभ। वह उस से अपने मन की बात बता दिया करता था। वह उसका घनिष्ठ मित्र था। वह उस से कोई भी बात नहीं छुपाता था। सौरभ माधवी की सहेली रिया का बेटा था। वह भी पायलट बनना चाहता था। स्कूल में वे दोनों इकट्ठे पढ़ते थे।  उसके मन की बात जान लिया करता था। एक दिन साहिल को उदास देख कर उसका दोस्त बोला। दोस्त तुम उदास क्यों हो? साहिल बोला मेरे माता-पिता को कौन समझाए? मेरे माता पिता  मुझे डाक्टर बनता देखना चाहते हैं। लेकिन  ऐसा नहीं हो सकता है मेरी डाक्टर बनने की जरा भी इच्छा नहीं है। अगर मैं किसी दिन डाक्टर बन भी गया तो मैं उस काम को छोड़ दूंगा।सौरभ बोला तुम समझदार हो। तुम्हे ही  अपने माता-पिता को समझाना होगा नहीं तो तुम ना तो घर के  रहोगे ना घाट के। साहिल बोला मैडम ने आज टेस्ट लिया था। मेरे बहुत ही कम अंक आए हैं। घर में जाकर अपनी जांच  पुस्तिका घर में दिखा दूंगा। जब  साहिल घर आया तो बहुत ही उदास था। घर में आकर साहिल अपनें पापा से बोला पापा मेरे टैस्ट में बहुत ही कम अंक आए हैं।  उसके पिता बोले तो क्या हुआ? कोई बात नहीं दोबारा कोशिश करके देखो। वह बोला पापा आप क्यों मुझे डॉक्टर बनने के लिए जोर डाल रहे हो? उसके पिता गुस्सा होते हुए बोले। जो डॉक्टर बनते हैं क्या किसी बड़े अफसरों के बच्चे होते हैं? पिछले साल एक रिक्शा चालक का बेटा डॉक्टर बना। अपनें दोस्त मिश्रा जी है उनका बेटा कोई ज्यादा होशियार नहीं है। वह भी तो डॉक्टर बन गया। सौरभ बोला मिश्रा जी के बेटे के पास तो ढेर सारा रुपया है। वह तो डोनेशन दे कर डॉक्टर बन गया।आप मेरे भविष्य की चिंता मत करो। मैं भी अपनी मेहनत के बल पर कुछ न कुछ बनकर दिखा दूंगा। आप मेरी चिंता करना छोड़ दे। देवी शरण बोले कोई बात नहीं। मैं भी कहीं से रुपयों का जुगाड़ कर लूंगा। कहीं से उधार ले लूंगा। तुमने डॉक्टर ही बनना है। बाकी तुम और कुछ  और नहीं बनोगे। चाहे तुम्हारे  तीन साल ज्यादा ही क्यों ना लग जाए? साहिल बोला पापा एक दिन अगर मैं डॉक्टर बन गया और मैंने किसी मरीज को मार दिया तो क्या करोगे? उसके पिता आग बबूला होकर बोले आजकल के बच्चों की जबान कैंची की तरह चलती है। हम तो कुछ नहीं बन सके हमें अगर समय मिलता हमारे पास सारी सुविधाएं होती तो मैं भी डॉक्टर बन सकता था। मैं तुम्हें डॉक्टर बनते हुए ही देखना चाहता हूं।

साहिल अपने पिता के हर रोज की डांट से परेशान आ चुका था। उसका मन जरा भी पढ़ाई में नहीं लगता था। एक दिन जब उसका डॉक्टरी का  परिणाम  निकला तो फेल हो गया था। उसे इस बात का पहले से ही पता था कि वह  उतीर्ण नहीं होगा। किस मुंह से  अपने घर जाए। उसके पिता तो उस से थोड़ा नाराज होंगे। लेकिन थोड़ी देर बाद कहेंगे कोई बात नहीं बेटा अगले साल फिर मेहनत करो। मैं इस तरह अपने पापा के मेहनत से कमाए रुपए  व्यर्थ में बर्बाद होते नहीं देख सकता। मैं क्या करूं? उसके दिमाग में हर रोज प्रश्न उभरने लगे। उसके कानों में सीटीयां बजने लगी। क्या करूं।? उसे फेल होना भी अच्छा नहीं लगता था। उसके सारे के सारे साथी  उस से आगे बढ़ चुके थे। वह अपनी जिंदगी से वह बहुत ही निराश हो गया था। उसने सोचा क्यों ना मैं अपनी जीवन लीला समाप्त कर लूं? अपने घर से जंगल की ओर निकल पड़ा। उसने घर में भी किसी को कुछ नहीं बताया। वह पहाड़ी पर से कूदने ही वाला था उसके दोस्तों ने उसे देख लिया। सौरभ ने उसे खींचकर नहीं निकाला होता तो वह नदी में डूबकर मर चुका होता।

 

सौरभ नें उसे समझाया  मरना यह तो इस समस्या का समाधान नहीं है। तुम अगर यहां से गिर गए तो या तो तुम्हारी टांगे टूट जाएंगी या तुम   अधमरे हो जाओगे। तुम्हें  यह क्या पता कि तुम ऊपर से गिर कर मर ही जाओगे। मरना इतना आसान नहीं होता। अगर बच जाते तो सारी उम्र भर बिस्तर पर अपाहिज की तरह सड़े पड़े रहते।  इतना पढ़े-लिखे होने के बावजूद यह कदम तुमने क्यों उठाया? मेरी समझ में नहीं आता। जल्दी घर चलो। वर्ना माता-पिता परेशान हो जाएंगे। यह तो शुक्र है मैं अपने दोस्त  गौरव के घर आया हुआ था। तुम अगर मेरे दोस्त गौरव को देखोगे तो तुम सब समझ जाओगे। कल तुम्हें मैं उसके घर ले चलूंगा।

जंगल के बीचों बीच पीपल के पेड़ के पास उसका घर है। तुम उसके घर चलोगे तो सब समझ जाओगे।  किसी न किसी तरह साहिल को मना कर उसे अपने दोस्त गौरव के घर  ले जाने आया। साहिल के घर आकर उसे ले जाने के लिए साहिल के पिता के पास आकर बोला मैं अपने दोस्त को अब अपने दूसरे दोस्त के घर ले जाना चाहता हूं। साहिल के पिता को बोला अंकल इसे आप डांटना मत। यह  आज बहुत ही मायूस है क्योंकि इसका पीएमटी का परिणाम अच्छा नहीं आया है। देवी शरण बोले तो कोई बात नहीं बेटा इसमें तुम्हारा क्या कसूर।  दूसरी बार पीएमटी का टेस्ट दे देना। डरने की कोई बात नहीं। हम तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे। तुम खुशी-खुशी अपने दोस्त के साथ घूम फिर कर आओ। सौरभ अंकल से बोला साहिल का मन डॉक्टर की पढ़ाई करने का नहीं है।

आप तो क्यों उस पर  डाक्टर ही बनने के लिए जोर डाल रहे हो। देवीशरण बोले बेटा तुम बच्चे अपनी मनमानी करते हो। इस बार नहीं निकला तो कोई बात नहीं। यह मन वन कुछ नहीं होता। मन को तो अंदर से तैयार करना पड़ता है। यही बात तो मैं आपको समझाना चाहता हूं।देवीशरण बोले बेटा तुम्हें हम बाप बेटे के बीच में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है। तुम उतना ही कहो जितना तुम्हें कहने की जरूरत है।

सौरभ आगे  कुछ  नहीं बोला। साहिल गम्भीर  रहने लग गया था। वह बात बात पर गुस्सा करने लगा। एक दिन सौरभ उसको अपने दोस्त  गौरव के घर ले गया। गौरव के घर जाकर उसे बहुत ही अच्छा लगा।  गौरव के माता-पिता  साहिल से बोले। उसे कहने लगे बेटा आओ तुम भी हमारे बेटे गौरव के दोस्त हो। तुम चुप चुप क्यों रहते हो? इस उम्र में तो बच्चे खूब मस्ती करतें हैं। तुम्हारे अभी तो खेलने कूदने के दिन है। गौरव के माता ने सौरभ को भी आवाज लगाई। बेटा चलो खाना खाने आओ। सब खाना खाने की मेज पर  बैठे थे। गौरव के पिता अपने बेटे से बोले बेटा चलो गर्मा-गर्म परौंठों का आनंद लो।  हम सब इकट्ठे बैठकर पिक्चर देखते हैं। गौरव बोला पापा मुझे पढ़ाई करनी  है। वह बोले बेटा सारे दिन पढ़ाई पढ़ाई नहीं किया करते।पढाई के साथ साथ आराम भी जिंदगी में बहुत ही जरूरी होता है। पापा मैं आईएएस अधिकारी बनना चाहता हूं। वह बोले बेटा ठीक है।  तुम जो बनना चाहते तुम वही बनना मैं तुम पर कभी भी दबाव नहीं डालूंगा। सारा दिन पढ़ने के बजाय  खेल कूद और मनोरंजन भी जरुरी होता है। इंसान को खुलकर अपनी हर बात अपने माता पिता के साथ करनी चाहिए। गौरव  बोला पापा मैं अगर आईएस  अधिकारी नहीं  नहीं बन पाया तो क्या होगा? वह बोले तो कोई बात नहीं कोशिश करो। नहीं बन पाओगे तो कुछ और बन जाना। इसके लिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

हम लोगों के पास तुम्हें डोनेशन वगैरह देने के लिए रूपया  नहीं है मगर तुम कामयाब हो गए तो ठीक है वर्ना और  भी बहुत सारे रास्ते हैं। तुम खुश हो कर अपनी पढ़ाई करते चलो। हम तुम्हें खुश देखना चाहते हैं। बेटा  तुमसे बढ़कर जिंदगी में हमारे लिए कुछ भी नहीं है।

साहिल को वहां पहुंचकर बहुत ही अच्छा लगा उसके माता पिता अपने बेटे की हर बात खुशी-खुशी सुन रहे थे। एक मेरे माता-पिता है जो मुझ पर अपनी इच्छाएं  थोप रहे हैं। वह अपने दिमाग से काम लेगा और डॉक्टरी की पढ़ाई नहीं करेगा। वह इंजीनियर ही बनेगा। यहां पर आकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मेरे मन में एक बोझ था वह भी हट गया। मैं उस दिन गलत कदम उठा देता तो मेरे माता पिता मर जाते। मां-पापा चाहे जितना भी मुझे डांटडपट करें मुझे उनकी बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। उनकी बातों को दिल से नहीं लगाना चाहिए।  सौरभ के पास आकर बोला भाई  मुझे नई जिंदगी देने के लिए तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद। मेरी आंखें खुल चुकी है। घर आया तो काफी खुश था। उसके माता-पिता अपने बच्चे को खुश देख कर खुश थे।

कॉलेज में उसने खूब मन लगाकर पढ़ना शुरू कर दिया। उसके माता-पिता उसे डांटते तो वह परवाह ही नहीं करता था। चुप और शांत होकर उनके प्रश्नों के उत्तर दिया करता था। साहिल के माता-पिता समझ गए थे कि उनके बेटे ने पीएमटी का टेस्ट दिया होगा लेकिन उसने इंजीनियर का टेस्ट दिया था। उसने जिले में टॉप किया। उसके पिता ने जब ऑफिस में अखबार देखा तो सारे के सारे ऑफिस के कार्यकर्ता साहिल के पिता को बधाइयां दे रहे थे। आपका बेटा तो सारे जिले में प्रथम आया है। वह बोले मैं ना कहता था मेरा बेटा एक दिन जरूर  डाक्टर ही बनेगा। मुझे हर रोज कहता था कि मैं डॉक्टर नहीं बनूंगा। उसके साथी कार्यकर्ता बोले आपको क्या यह भी पता नहीं था कि आपके बेटे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई में टॉप किया है? देवी शरण खामोश हो गए। वही हुआ जिसका उसको डर था। उसके बेटे ने पीएमटी की परीक्षा नहीं दी थी। वह चुपचाप अपने साथी कार्यकर्ताओं के प्रश्नों के उत्तर देते रहे। घर आने पर चुपचाप साहिल के पास आकर बोले। तू ने हमारी नाक डुबो दी। मैं तो तुम्हें डॉक्टर बनते देखना चाहता था। तुमने मेरी इच्छाओं का गला घोट दिया। माधवी भी शून्य में अपने पति को निहार रही थी। वह भी मायूस थी। उसका दोस्त गौरव बोला। अंकल आपका बेटा तो बहुत ही समझदार है।

आपको तो भी यह भी मालूम नहीं होगा वह आपकी बातों से परेशान होकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने चला था।  यह सुनते ही उसके माता-पापा की आंखों में आंसू छलक पड़े।  हमारा बच्चा इतनें दबाब में आ कर ऐसा गम्भीर कदम उठानें की सोच रहा था। हमें एहसास भी नही हुआ हमारा बेटा इतना बड़ा कदम भी उठा सकता है।  सौरभ बोला मैं  अगर समय पर नहीं पहुंचता तो आप अपने बेटे से हाथ धो बैठते। आपका बेटा इस दुनिया में ही नहीं होता। वह तो निराश होकर मरने चला था। वह पहाड़ी से कूदने ही वाला था तभी मैं अपने दोस्त गौरव के घर से निकला था। मैंने दौड़कर उसे बचा लिया। मैंने उसे बहुत समझाया मेरे समझाने पर और अपने दोस्त सौरभ के घर जाकर  उस से मिलवाया तो उसने यह कदम ना उठा कर एक सही फैसला लिया।

उसके माता-पिता अपने बच्चे के साथ मिलजुलकर आपसी समझ से एक दूसरे की मन की बात जान लेते हैं। वह एक दोस्त की तरह अपने बच्चे के साथ पेश आते हैं। वह अपनी इच्छा को उनके ऊपर लादते नहीं। आपका बेटा समझ गया। वह आज इंजीनियर मे टॉप आया है। आप उससे उदास हो कर मत मिलो।  उसकी खुशी में अपनी खुशी जाहिर करो। उस दिन अगर आपका बेटा मर जाता आप सारी उम्र भर रोते फिरते। कहां से अपने बेटे को ढूंढ कर लाते?

देवी शरण अपनी करनी पर बहुत ही पछताए वह बोले बेटा तुम तो उसके एक सच्चे दोस्त निकले। तुमने उसे एक सच्चे मित्र की तरह उसे भटकने से बचाया। मैं एक पिता होकर उसकी भावनाओं को समझ नहीं सका। मैं उस से भी आज माफी मांगना चाहता हूं।

हम बच्चों की मनोंभावनाओं को समझते नहीं उस पर  जोरजबरदस्ती  कर देते हैं। जो वह करना नहीं चाहता वही उससे करवाना चाहते हैं। जिससे सैकड़ों बच्चे अपनी जीवन लीला समाप्त कर देते हैं। बाद में माता-पिता सारी उम्र भर पछताते रहते हैं।

माधवी आकर बोली एक दिन मेरी सहेली रिया ने मुझे कहा था कि अपने बेटे से पूछ कर तो देखो वह क्या बनना चाहता है? मैं भी अनभिज्ञ थी। मैं भी  तो उसे डॉक्टर बनते देखना चाहती थी लेकिन मेरे मन से भी अब अधंकार की काली  परत हट चुकी है।  मैं भी अपने बच्चे के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहती। हमारा बेटा तो हमसे ज्यादा समझदार है। हमें कहां उसका साथ देना चाहिए था कहां हम उसे मौत के मुंह में ढकेल रहे थे।

साहिल अपने माता पिता की बातें सुन रहा था वह बोला मां पापा इसमें आपका कोई दोष नहीं है। आप भी अपनी जगह ठीक थे। आप तो मुझे डॉक्टर बनते देखना चाहते थे।  मैं अगर डॉक्टर बन भी जाता तो मेरे हाथ से कोई भी ऑपरेशन ठीक ढंग से नहीं होता। मैं इस व्यवसाय को छोड़ ही देता। साहिल के माता पिता बोले हमें सबक मिल चुका है। उन्होंने अपने बेटे साहिल को गले से लगाया और कहा कि बेटा खुश रहो। गौरव को कहा कि बेटा जुग जुग जियो। चलो आज बाहर चलकर पार्टी का आयोजन किया जाए। सबके चेहरों पर खुशी थी।

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