अमूल्य खजाना

पेजल अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से गांव में रहती थी। उसके एक छोटा सा भाई भी था। वह अपने भाई को बेहद प्यार करती थी। एक दिन उसके मम्मी पापा अपने किसी पड़ोस के परिवार में  बिमार  व्यक्ति का हाल-चाल जानने के लिए गए थे। उन्होंने पेजल से कहा कि एक वह एक घंटे में घर वापस आ जाएंगे। तुम अपने भाई का भी ध्यान रखना।  उसके माता पिता पड़ोस की आंटी को देखने गए। वह अपने भाई के साथ खेलने लगी। वह जल्दी ही खेलने जाने के लिए तैयार हो गई।  अपने भाई की उंगली पकड़कर उसे भी पार्क में घुमाने ले कर जाने लगी। वह अपने भाई को पार्क में खेलता देख कर बहुत खुश हुई। और जल्दी ही अपने भाई को लेकर घर आ गई।

 

पहले की तरह कागज फाड़-फाड़कर किश्ती बनाने लगी। उसने ना जाने कितने कागज बर्बाद कर दिए थे। उसके माता-पिता घर आ चुके थे।। दूसरे दिन जब वह स्कूल गई तो उसकी अध्यापिका ने उसकी फटी कॉपी देख कर उसे डांटा। पेजल हद  ही हो गई। तुम कैसी लड़की हो? समझती ही नहीं हो। कागज फाड़ना बहुत ही बुरी बात है। उस के दिमाग में यह बात कभी नहीं आती थी कि कागज  फाड़ना बहुत ही बुरी बात है। उसकी अध्यापिका बोली पेड़ों से कागज बनाया जाता है। तुम पेडों पर इतने पत्थर मारते हो। डालिया तोड़ते हो। बच्चों तुम्हें पता है पेड़ हमारे बहुत काम आते हैं। हमें फल देते हैं। छाया देते हैं। और इनकी लकड़ी से फर्नीचर भी बनाया जाता है। दवाइयां  भी बनती है।  जब इंसान मर जाता है तो उसकी लकड़ी  इन्सान के जलाने के काम भी आती है। स्कूल में आधी छुट्टी हो चुकी थी। खेलते खेलते  पेजल को चोट लगी थी। जब किसी को चोट लगती थी पेजल उस व्यक्ति पर जोर जोर से हंसती थी। उसकी शिकायत बच्चे अध्यापिका को हमेशा करते थे। जब भी कोई बच्चा गिरता था तो पेजल रोने वाले को चुप कराने की बजाय उस पर जोर जोर से हंसती थी। पेजल और भी जोर जोर से रोने लगी तो सारे के सारे बच्चे उसके इर्द-गिर्द इकट्ठे होकर जोर-जोर से हंसने लगे। उसके रोने की आवाज सुनकर उसकी कक्षा की अध्यापिका  भी बाहर आ गई। अध्यापिका को देख कर  पेजल और भी जोर से रोने लगी।

 

उसकी अध्यापिका नें जब  उस को रोता देखा तो अध्यापिका भी  हंसने लगी। अध्यापिका को हंसते हुए देख कर  पेजल नें और भी जोर जोर से रोना शुरु कर दिया। जब पेजल रोते रोते चुप हो गई तब उसकी अध्यापिका ने उसे अपने पास बुलाया और कहा कि जिस प्रकार गिर जाने पर तुम्हें चोट  लगी और तुम्हें दर्द हुआ उसी प्रकार पेड़ों को बेवजह पत्थर मारने से उन्हें भी चोट लगती है। उन्हें भी दर्द होता है। परंतु उनका दर्द हमें दिखाई नहीं देता। पेड़ों से ही कागज बनाया जाता है। तुम तो हर रोज इतने कागज फारसी हो  कि पूछो ही मत। पेजल नेंं अपनी अध्यापिका जी को कहा कि वह आगे से कभी भी कागजों को नहीं  फाडेगी। मैं अच्छी बच्ची बनने का प्रयत्न करूंगी। पहले की तरह कागज  बर्बाद नहीं करूंगी। जब वह कागज फाड़ती तो उसे अंदर से महसूस होता कि वह गलत काम कर रही है।।

एक दिन उसने घर में अपने पलंग के नीचे से बहुत से फटे हुए कागज  इकट्ठे किए।  और चुपचाप इन कागजों को उठाकर एक जगह पर अलमारी में रख दिया। इस बात को बहुत दिन हो चुके थे। पेजल में परिवर्तन आ चुका था। पेजल ने सारे कागजों को इकट्ठा करके उसके लिफाफे बना दिए थे।

 

एक दिन जब उसकी अलमारी उसकी मम्मी ठीक कर रही थी तो उसकी मम्मी ने जब अलमारी खोली तो देखा कि उसकी अलमारी में कागज का एक भी  टुकड़ा इधर उधर बिखरा  हुआ नंहीं था। उसने उन सारे कागजों के लिफाफे बना दिए थे। उसने उन सब कागजों के टुकड़ों को व्यर्थ नहीं गंवाया। उसने उन सब कागजों के लिफाफे बाजार में बेच दिए। उस दिन के बाद उसने कभी भी कागज नहीं फाड़े। वह कभी भी किसी भी बच्चे को दुखी देखकर  उस पर हंसती  नहीं थी। उसकी सहायता करने के लिए दौड़ी चली जाती। उसने उन लिफाफों को  जब बाजार में बेचा तो उसे उसे ₹20 मिले थे। उसने कॉपी खरीदी और अपने पड़ोस में एक  गरीब लड़की को वह कॉपी दे दी। उसे कॉपी देकर कहा कि यह मेरी तरफ से तुम्हें इनाम है। उस दिन वह जब  सोई तो उसे ऐसा महसूस हुआ कि उसने आज कोई  अमूल्य खजाना प्राप्त कर लिया है।

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