असली विजेता

स्कूल में पारितोषिक वितरण का आयोजन होने जा रहा था सभी बच्चों को भाषण तैयार करने के लिए कहा गया सभी बच्चे हफ्ते पहले से ही भाषण तैयार करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे मैडम ने कहा था कि उसे ही पुरस्कार मिलेगा जो सबसे अच्छा भाषण देगा भाषण के लिए भी 5 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगा सब बच्चे भाषण की तैयारी में लगे थे।

विशाखा और स्कूल के बच्चे   जी जान से मेहनत करने में लगे थे। मंजू हर हर बार की तरह सोच रही थी कि हर बार मैं अच्छा भाषण देती हूं मगर इनाम हर बार कोई और ही ले जाता है। इस बार उसने भाषण में अपना नाम नहीं लिखवाया। वह इस बार देखना चाहती थी कि पारितोषिक वितरण कैसे किया जाता है? इस बार वह भाषण देने वाले का चेहरा भी देखेगी और यह भी देखेगी कि किस तरह अंक दिए जाते हैं? भाषण प्रतियोगिता में रुही भाषण देने गई। उसने पर्यावरण पर 5 मिनट का भाषण दिया। उसके पश्चात सब बच्चों नें अपना भाषण दे दिया था इनाम का निर्णय थोड़ी देर बाद दिया जाना था सबसे अच्छा भाषण अंजलि ने दिया था। तीनों स्कूलों के बच्चे भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।

 

आधी छुट्टी का समय हो चुका था अध्यापक लोग एक जगह बैठ कर खाना खाने लगे। मंजू  चुपके से वहां पर जाकर किनारे से वह सब लोगों और अध्यापकों को दूर से देख रही थी। वहां पर जाकर चुपके से वह एक कोने में बैठ गई। अध्यापकों की बातें सुनने लगी।। एक अध्यापिका बोली इस बार अंजलि ने अच्छा भाषण दिया है।  उसे ही इनाम मिलना चाहिए सारे के सारे अध्यापक कहनें लगे इनाम सपना को मिलना चाहिए। वह एक बड़े परिवार की लड़की है। इसके पापा स्कूल के लिए हर बार काफी रुपए दान में देते हैं। हम सपना को ही इस बार सेलेक्ट करेंगे। दूसरी मैडम बोली पिछली बार भी हमारे स्कूल की अंजू ने इतना अच्छा भाषण दिया था उसे हमने सेलेक्ट नहीं किया। उस बेचारी ने भाषण प्रतियोगिता से इस बार अपना नाम ही कटवा लिया। एक दूसरे अध्यापक बोले इनाम से क्या होता है? अभी दिखावे के लिए तो हम अभी सपना को ही नियुक्त करते हैं।   हम अंजलि को  कभी और दिन ईनाम दे देंगे। सपना के पापा स्कूल में आए हुए हैं। शायद इस बार भी हमारे स्कूल को कुछ डोनेशन में दे दे। हम सब ने यह निर्णय लिया है कि इस बार हम सपना को ही चुनेंगे।

मंजू के सामने अध्यापकों का सारा खुलासा स्पष्ट हो गया। वह सोचने लगी कि मैंने अच्छा ही किया जो मैंने इस भाषण प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मेरे सामने अध्यापकों का असली चेहरा आ गया है। चंद रुपयों की खातिर बच्चों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता है। बच्चा पूरी मेहनत से अपनी पूरी ताकत लगा देता है। अपनी तरफ से अच्छा करने के लिए मगर उसकी योग्यता का असली आंकलन नहीं होता। वह चुपचाप निराश होकर अगली बार बोलने के लिए तैयार ही नहीं होता।

घंटी बज चुकी थी पारितोषिक वितरण का समय आ गया था। भाषण प्रतियोगिता में सपना को इनाम का हकदार घोषित किया गया अंजली का नाम  पुकारा गया तो वह जोर जोर से रोने लगी। उसके रोने की आवाज को कोई भी नहीं सुन पाया। दूर दूर से आए हुए अतिथिगण मिठाई बांटते हैं। सपना के पिता स्कूल के लिए पांच हजार की राशि दान में देते हैं। सभी अध्यापकों के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है।  मैडम ने कहा कि और कोई बच्चा कुछ बोलना चाहता है तो वह आगे आ जाए।

 

मंजू अचानक भीड़ को चीरती हुई उत्सव में खड़ा होकर कहती है मैं आज सबके सामने कहना चाहती हूं कि मुझे अंजलि का भाषण सबसे अच्छा लगा। उसने एक रजिस्टर सपना को देते हुए कहा कि मेरी तरफ से तुम्हारे लिए पारितोषिक वितरण का तोहफा है।

सभी अध्यापक उसकी तरफ देखकर अपनी नजरें झुका लेते हैं। आज फिर उन्होंने एक बार फिर असली विजेता को इनाम नहीं दिया था। उस छोटी सी बच्ची के उत्साह को देखकर सबकी नजरें झुका गई। उसने की आंखों से खुशी के आंसू छलक रहे थे

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